वकील का शोरूम - भाग 15

“मैं जानती हूं।”“क...क... क्या मतलब?"“ये मत समझना कि मैं तुम्हारे इस पैकेट से डर गई हूं। मैं न ऐसे पैकेटों से डरती हूँ और न ही मौत से ।"तो फिर चीखी क्यों थी?""चीखती तो मैं रोज हूं। जहां तक आज की बात है ,मै इसलिए चीखी थी ताकि तुम यहां चले आओ। डरने का नाटक इसलिए किया था, ताकि तुम इस बात को कबूल कर लो कि तुमने मुझे भला चंगा साबित करने के लिए यह सब किया था। बाद में यह कबूल इसलिए कर लिया कि मैं भली चंगी हूं, ताकि तुम मेरी हकीकत जानने के बाद आइंदा ऐसी कोई