शाम के पांच बज चुके थे।सी.आई.डी. कार्यालय में इंस्पेक्टर ममता अपनी सीट पर बैठी चाय की चुस्कियां ले रही थी। उसके ठीक सामने एक कुर्सी पर बैठा था ओमप्रकाशलम्बे कद व सांवले रंग का रिटायरमेंट के करीब पहुंच चुका एक ए.एस.आई. । उसके हाथ में भी चाय का कप था।“हो तो ओमप्रकाश ।” ममता ने चाय की एक लंबी घूंट लेकर पूछा- "तुम क्या कह रहे थे?""मैं ये कहूं था मैडम जी।” ओमप्रकाश हरियाणवी बोली में बोला- “उस वकीलां की दुकान का ख्याल छोड़ दयो । किमें कुछ नी धरया।""यानी शहर में कानून की सरेआम बेइज्जती होती रहे? उसे इस