मेरा पहला प्यार
वो मेरे पड़ोस में रहने आया था। हाल ही में उसका ट्रांसफर हमारे शहर में हुआ था। वह अपने परिवार के साथ मेरे घर के बगल वाले मकान में रहने लगा। वह Manipur का था। उसे हिंदी नहीं आती थी और मुझे अंग्रेज़ी नहीं आती थी। शायद यही वजह थी कि हम कभी बात नहीं कर पाए।
फिर भी, न जाने क्यों उसके आसपास होने से मेरा दिल तेज धड़कने लगता था। जब भी वह मेरे पास से गुजरता, मेरी साँसें जैसे कुछ पल के लिए रुक जातीं। मैंने कभी उसे नमस्ते तक नहीं कहा, और न ही उसने कभी मुझसे बात की। लेकिन हमारी खामोशी में भी जैसे एक अनकहा रिश्ता था।
शाम होते ही मैं छत पर चली जाती, सिर्फ उसे देखने के लिए। कई बार वह सामने वाली बालकनी में खड़ा आसमान देख रहा होता। हमारी नजरें मिलतीं और फिर दोनों चुपचाप मुस्कुरा देते। उन छोटे-छोटे पलों में मुझे एक अजीब-सी खुशी मिलती थी। मुझे तो उसका नाम भी नहीं पता था ।पर क्या किसी को चाहने के लिए नाम की जरूरत होती है।
मुझे पता था कि शायद यह रिश्ता कभी पूरा नहीं होगा। न उसने अपने दिल की बात कही, न मैंने। फिर भी उसके लिए मेरे दिल में जो एहसास था, वह बहुत सच्चा था। और एक दिन वो चला गया।
आज वह मेरे पास नहीं है। शायद उसे कभी पता भी नहीं चला कि कोई उसे चुपचाप इतना पसंद करता था। लेकिन वह मेरा पहला प्यार था — एक तरफा, अधूरा, मगर बेहद
रेणु चौरसिया
- Renu Chaurasiya