कठिन डगर है जीवन की, पर तू न अब घबराना,
अधर्म के इस शोर में, तू धर्म का शंख बजाना।
छल करेंगे अपने ही, जैसे शकुनि का पासा हो,
पर डगमगाना मत कभी, चाहे चारों ओर निराशा हो।
तू सारथी बना ले कृष्ण को, अपनी बुद्धि के रथ पर,
फिर देख कैसे खिलते हैं, फूल कांटों वाले पथ पर।
अभिमन्यु की वो वीरता, अब तुझमें जागृत होनी है,
लिखनी तुझे खुद हाथों से, अपनी जीत की अनहोनी है।
मौन खड़ा जो देख रहा, वो सब खेल समझता है,
जो लड़ता है अंत तक, वही इतिहास में सजता है।
हृदय में रख तू "नमो नमः", अधरों पर सत्य का गान हो,
श्री कृष्ण सदा सहायते, तेरा यही अटूट सम्मान हो।
- Kaushik Dave