लड़कियाँ रोती नहीं, बस चुप हो जाती हैं,
अपने दर्द को हँसी में छुपा ले जाती हैं।
जो टूटता है अंदर हर रोज़ थोड़ा-थोड़ा,
उसकी आवाज़ कभी किसी तक नहीं जाती है।
उसे सिखाया गया है हर हाल में समझना,
अपनी चाहतों को खामोशी में ही रखना।
दर्द जब हद से गुज़र जाए दिल के भीतर,
तब भी वो कहती है — “मुझे कुछ नहीं कहना।”
एक लड़की का दिल काँच सा होता है,
दिखता नहीं पर हर चोट गहरी होती है।
सबका ख्याल रखते-रखते थक जाती है वो,
और उसकी थकान सबसे अनकही होती
Kajal jha
- kajal jha