अपना कहोगे क्या???
एक सवाल करू तुमसे
तुम जवाब दोगे क्या?
तुमसे बात करके खिलखिला उठा हुं
एक बार ही सही वजह बता दोगे क्या?
मत करना तुम प्यारी बाते
तेरी बेरुखी सेही काम चला लेंगे
साल में एक बार ही सही
फटकार सुनने का हक दोगे क्या?
आज भी वही है सब कुछ
तुमसे बात करके ही दिल बहलता है
बढ गया है जो दोनो में अंतर
तुम थोडासा चलकर दुरी मिटा दोगे क्या?
खामोश तुम मैं बातो में माहीर
चूप रेहकर भी बाते होगी क्या
मैं नासमझ हुं जानम जरा
मुझे इश्क का मतलब समझाओगे क्या?
थक चुका हुं चलते चलते
कुछ पल के लिये पनाह दोगे क्या
आखे भर गई है मेरी तेरी जुदाई से
एक पल के लियेही सही बाहो में लोगे क्या?
तुम शीतल चांदसी
मैं बेहते झरनेसा
बनकर समंदर तुम एक बार
मुझको समा लोगे क्या?
मैं नहीं तेरी दीद के काबिल
तुम सपने मेंही जगह दे देना..
कब से खडा हुं मैं तुमसे मिलने की आस मे
सिर्फ एक बार सनम मुझसे मिलोगे क्या??
नहीं... नहीं... नहीं....
नहीं समझनी मुझे जमाने की बंदिशे
मुझे फिरसे मोहब्बत करोगे क्या
झूठा झूठाही सही हमदम
मुझको अपना कहोगे क्या?
मुझको अपना कहोगे क्या?