फिर खोला वो पुराना पन्ना!!
जहॉं थी अनगिनत यादो
का पीटारा,
बैठते कभी वो आखरी बेंच पे वो पन्ना
खोल के,
ओर लीखते थे कलम से अपने लफ्ज़
ो के शब्द,
करके इशारे कहते थे लीखा है
तेरे लीए ,
इश्क का आगाज कहते थे लीखा है
इन पन्नो पे,
लेते हाथो पर जब भी हम उन पन्नो को खील उठता चेहरा उनका,
कह देते हम भी इशारो से हमारे दील
की बाते,
उन्ही छोटी छोटी यादो को देख आज
हमारे ऐहसास,
उन पलो को याद कर फिर से हम प्यार में
पड जाते है।
shital ⚘️