समंदर की मर्यादा खुद वही तय करता है।।आये तुफान तो भी वो अपनी सीमाये नही भुलता,
और आती है सरीताये कीतनी ही मीठा जल लेके सागर मे मीलने के लीए, तो भी सागर अपनी खारास नही छोडता, कौन जानता है सागर की बडाइ वो मीठास बादलो को बरसात के लीए देता है और खारास अपने सीने मे रखता है।। और कीतना वीसाल दील है सागर का ये तो सरीताओसे पुछो , वो अपने साथ क्या क्या बहा नही ले आती फीरभी सागर अपना बाहे समेट नही लेता, अब आप क्या समजाएगे हमे जनाब की सागर क्यो खारा है , और क्या उनकी मर्यादाये है, जो जानना हो सच सागर का तो सरीता बनके सागर मे मीलजाना पडता है, वेसे तो सागर की वीसालता देखो वो सभी का सहारा है।। कभी खुद दुसरो के लीए खुदको बदलके देखो तो जानोगे वेसे ही सागर इतना वीशाल नही कहा जाता।। वाह रे इस जहा के लोग क्या दीमाग दीया है खुदा ने उनहै, बस कमीया दुसरोमे ढुढता है, और अच्छाइया ही अपनी बताता है।।
कभी इस प्रोसेस को उलटा करके देख तेरी कमीया भर जाइगी और खामीया दुर होजाएगी।।
Raajhemant