Hindi Quote in Poem by कुमार संदीप

Poem quotes are very popular on BitesApp with millions of authors writing small inspirational quotes in Hindi daily and inspiring the readers, you can start writing today and fulfill your life of becoming the quotes writer or poem writer.

बूढ़ा हो गया हूँ

चक्कर खा 
कभी-कभी गिर जाता हूँ 
रखता हूँ बेखबर 
इस खबर से तुमको 
मेरे लाल कि…
न हो तू परेशान
अब मैं बूढ़ा हो गया हूँ

फटे कपड़ों पर रफू करवा 
काम चलाता हूँ 
न रखता हूँ ख्वाहिशें
नयी कपड़ों की
मेरे लाल अब मैं बूढ़ा है गया हूँ

मेरे लाल तुम्हें अब भी 
उतना ही चाहता हूँ 
बस …
काम करने के लायक नहीं 
इसलिए तुम्हें खलता हूँ 
अब मैं बूढ़ा हो गया हूँ

नित नए बहाने बना 
खुश रह लेता हूँ 
जानता हूँ दुःख की पीड़ा को 
फिर भी …
मुस्कान लिए चलता हूँ
अब मैं बूढ़ा हो गया हूँ

पोते-पोतियों से 
मिलन करने को यह आँख 
नम कर लेता हूँ
मन ही मन मिल लेता हूँ
अब मैं बूढ़ा हो गया हूँ

चश्मे भी अब 
देखने में  साथ नहीं देते 
फिर …
तुमसे क्या सहारे की उम्मीद करूँ
अब मैं बूढ़ा हो गया हूँ

लड़खड़ाते कदमों को 
किसी सहारे थाम लेता हूँ
अब शरीर भी साथ नहीं देता 
क्योंकि…
अब मैं बूढ़ा हो गया हूँ

सपने संजोया था कि …
मेरा लाल बनेगा 
बुढ़ापे में मेरे सहारे की छड़ी 
काश! यह संभव हो पाता 
अब मैं बूढ़ा हो गया  हूँ

मेरे लाल !
आज मैं जिस दशा में हूँ 
कल तुम भी होगे 
मत भूलना इस बात को
कि…
अब मैं बूढ़ा हो गया हूँ

©कुमार संदीप

स्वरचित


ग्राम-सिमरा

पोस्ट-श्री कान्त

पिनकोड नंबर-843115

जिला-मुजफ्फरपुर

राज्य-बिहार

Hindi Poem by कुमार संदीप : 111334920
New bites

The best sellers write on Matrubharti, do you?

Start Writing Now