मनचला सा दिल है मेरा, हवाओं से बात करता...
मनचला सा मन है मेरा, हर ख़्वाब में रात करता...
मनचली सी क़िस्मत मेरी, कभी नज़्म कभी शोर...
मनचली सी हैसियत मेरी, आज कहीं कल कहीं और....
मनचला सा मुसाफ़िर हूँ... नक़्शों से बे-ख़बर....
मनचला सा राहगीर हूँ....हर मोड़ पे बे-सफ़र....
मनचली है दुनिया मेरी, रंग बदलती हर घड़ी.....
मनचली सी आदत मेरी, टूटना फिर से जुड़ पड़ी.....
मनचला सा हाल है मेरा, सवालों में गुमशुदा.....
मनचला सा दिल है मेरा, ख़ुद से ही हमक़दा....
मन चले तो क्या गिला हो, ये तो दिल की सरकशी है....
मन न चले तो समझो अब, नई दुनिया की बुनियाद रखी है...
-संकेत गावंडे