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Saroj Prajapati

Saroj Prajapati Matrubharti Verified

@saroj6130
(1.2m)

रिजल्ट तो बनता रहेगा
काम धंधा सब चलता रहेगा
चलो कुछ वक्त खूबसूरत फूलों संग बिताए
थोड़ी इनकी सुने कुछ अपनी इन्हें सुनाएं
संघर्ष में हंसकर जीने की कला ये हमें सिखाएं
चार दिन की है जिंदगानी, खुलकर जिएं और मुस्कुराएं
जिंदगी का है बस यही फलसफा,ये महकते फूल हमें समझाएं।।
सरोज प्रजापति ✍️






- Saroj Prajapati

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जीवन में रुपए पैसों के साथ थोड़ी दुआएं भी कमाएं
सुना है! बुरे वक्त में जहां रुपया पैसा धरा रह जाता है
वहां दुआ रूपी खजाना अपना असर जरूर दिखाता है।
सरोज प्रजापति ✍️
- Saroj Prajapati

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मुड़ कर जो देखूं पीछे
बस तेरी रहमतें ही बिखरी नजर आती है
जिंदगी के हर मोड़ पर, तू हरदम साथ निभाती है
ठोकर लगने से पहले ही तू आगे बढ़ संभाल लेती है
अब तक रहा करम तेरा, आगे भी बनाए रखना मां!
अपने बच्चों के सिर पर सदा,अपनी छांव बनाए रखना मां
।।
🌸🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌸
सरोज ✍️



- Saroj Prajapati

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बेवजह है तभी तो मोहब्बत है...
वजह तो नफरतों की होती है।।
सरोज प्रजापति ✍️


- Saroj Prajapati

चाहे धागा हो या रिश्ता
अगर एक बार गांठ पड़ जाएं तो
सुलझने पर भी पहले जैसी मजबूती नहीं रहती।
सरोज प्रजापति ✍️

- Saroj Prajapati

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मेरे चेहरे पर सजी मुस्कुराहट वो अभेद्य दरवाजा है
जो लोगों को मेरे दुख दर्द तक पहुंचने ही नहीं देती।
सरोज प्रजापति ✍️


- Saroj Prajapati

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जिंदगी तू भी है एक किताब सी
हमेशा लगती तू एक अनसुलझा सवाल सी‌।

एक पन्ने पर सुख तेरे,दूजे पे दुख लिखा है
एक पन्ना हंसाता तेरा,दूजा आंखें नम कर जाता है ।

कहीं लिखी इबारत इश्क की,कहीं गम जुदाई का
कहीं सबक दुनियादारी का,कहीं भेद अपने पराए का।

हर पल रंग बदलती तू, नित नए रूप धरती तू
कभी मां की गोद लगती तू,कभी पिता सी छाया बनती तू।

कोई भेद तेरा समझ ना पाया,अजब है जिंदगी तेरी माया
यहां उसने ही सच्चा सुख पाया,जिसको तूने हंस के गले लगाया।।
सरोज प्रजापति ✍️





- Saroj Prajapati

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जिंदगी की मसरूफियत में कुछ पल अपने लिए भी निकाल
ये जिंदगी के झमेले तो यूं ही चलते रहेंगे दिन रात।।
सरोज प्रजापति ✍️
- Saroj Prajapati

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गुल्लक
"वाह मम्मी ! इतनी बड़ी गुल्लक लेकिन इस गुल्लक को  भरने में तो सालों लग जाएंगे!"
राहुल गुल्लक की जांच पड़ताल करते हुए बोला। 
" तू फिजूलखर्ची कम करेगा तो देखना तेरी गुल्लक का पेट 1 साल में ही भर जाएगा।" मां हंसते हुए बोली।

 "वैसे मम्मी बचपन में आपकी गुल्लक भरने में कितना समय लगता था।" शरारत से मुस्कुराते हुए उसने पूछा।
" मेरी गुल्लक भरने में तो सालों लग जाते थे बेटा!!"
"यानी आप फिजूलखर्ची करती थी।"
" फिजूलखर्ची तो तब करती, जब खर्च करने को कुछ होता। तेरे नानाजी बीमारी के कारण जल्दी चल बसे। उनके  बाद तेरी नानी ने किस तरह हम चारों बहन भाइयों को पाला बता नहीं सकती। 
हां तेरी नानी ने हमारी जिंदगी की गुल्लक को शिक्षा से भरा और आज उसी की बदौलत हम सब अपने पैरों पर खड़े हैं। बस बेटा, तुम भी यह समझ लो कि अगर तुमने अपनी जिंदगी रूपी गुल्लक को शिक्षा रूपी धन से भर लिया तो बाकी गुल्लकें अपने आप भर जाएंगी । चाहे धन की हो या रिश्तेदारों की।"
अपनी मां की कही यह गहरी बात राहुल को कुछ-कुछ समझ आ गई थी इसलिए उसने मुस्कुराते हुए सहमति में 
सिर हिला दिया।
सरोज प्रजापति ✍️ 
 स्वरचित मौलिक








- Saroj Prajapati

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खुशियां इतनी महंगी भी नहीं
जितना कहते हैं लोग
फुर्सत निकाल कर देखिए
ये बिखरी आपके चारों ओर।
सरोज प्रजापति ✍️
- Saroj Prajapati

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