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जिंदगी तू भी है एक किताब सी हमेशा लगती तू एक अनसुलझा सवाल सी। एक पन्ने पर सुख तेरे,दूजे पे दुख लिखा है एक पन्ना हंसाता तेरा,दूजा आंखें नम कर जाता है । कहीं लिखी इबारत इश्क की,कहीं गम जुदाई का कहीं सबक दुनियादारी का,कहीं भेद अपने पराए का। हर पल रंग बदलती तू, नित नए रूप धरती तू कभी मां की गोद लगती तू,कभी पिता सी छाया बनती तू। कोई भेद तेरा समझ ना पाया,अजब है जिंदगी तेरी माया यहां उसने ही सच्चा सुख पाया,जिसको तूने हंस के गले लगाया।। सरोज प्रजापति ✍️ - Saroj Prajapati
जिंदगी की मसरूफियत में कुछ पल अपने लिए भी निकाल ये जिंदगी के झमेले तो यूं ही चलते रहेंगे दिन रात।। सरोज प्रजापति ✍️ - Saroj Prajapati
गुल्लक "वाह मम्मी ! इतनी बड़ी गुल्लक लेकिन इस गुल्लक को भरने में तो सालों लग जाएंगे!" राहुल गुल्लक की जांच पड़ताल करते हुए बोला। " तू फिजूलखर्ची कम करेगा तो देखना तेरी गुल्लक का पेट 1 साल में ही भर जाएगा।" मां हंसते हुए बोली। "वैसे मम्मी बचपन में आपकी गुल्लक भरने में कितना समय लगता था।" शरारत से मुस्कुराते हुए उसने पूछा। " मेरी गुल्लक भरने में तो सालों लग जाते थे बेटा!!" "यानी आप फिजूलखर्ची करती थी।" " फिजूलखर्ची तो तब करती, जब खर्च करने को कुछ होता। तेरे नानाजी बीमारी के कारण जल्दी चल बसे। उनके बाद तेरी नानी ने किस तरह हम चारों बहन भाइयों को पाला बता नहीं सकती। हां तेरी नानी ने हमारी जिंदगी की गुल्लक को शिक्षा से भरा और आज उसी की बदौलत हम सब अपने पैरों पर खड़े हैं। बस बेटा, तुम भी यह समझ लो कि अगर तुमने अपनी जिंदगी रूपी गुल्लक को शिक्षा रूपी धन से भर लिया तो बाकी गुल्लकें अपने आप भर जाएंगी । चाहे धन की हो या रिश्तेदारों की।" अपनी मां की कही यह गहरी बात राहुल को कुछ-कुछ समझ आ गई थी इसलिए उसने मुस्कुराते हुए सहमति में सिर हिला दिया। सरोज प्रजापति ✍️ स्वरचित मौलिक - Saroj Prajapati
खुशियां इतनी महंगी भी नहीं जितना कहते हैं लोग फुर्सत निकाल कर देखिए ये बिखरी आपके चारों ओर। सरोज प्रजापति ✍️ - Saroj Prajapati
ह्रदय में ममता का सागर आंखों में अंगार मैं ही कष्टनिवारणी मैं ही काली का अवतार ।। @sarojप्रजापति 🌸..महिला दिवस विशेष ..🌸 - Saroj Prajapati
यूं अपनी जिंदगी की किताब खोलकर सबको दिखाया नहीं करते राज दिल के सबको बताया नहीं करते किताबों को पढ़ने की अब यहां फुर्सत किसे समझे जज्बातों को अब ऐसे दिल कहां मिले। सरोज प्रजापति ✍️ - Saroj Prajapati
खूब गुलाल अबीर उड़ाओ सारी फिज़ा को रंगीन बनाओ भूलकर सारे गिले-शिकवे सब होली के रंगों में रंग जाओ साल भर आया फाल्गुन का त्योहार मिलकर सब खूब हुडदंग मचाओ। सरोज प्रजापति ✍️🟡🟠🔴🟢🔵 - Saroj Prajapati
तू और कितने रंग दिखाएगी ऐ जिंदगी! क्या होली के रंगों को भी फीका करवाएगी ऐ जिंदगी! सरोज प्रजापति ✍️ - Saroj Prajapati
सामान हो या रिश्तें जब दोनों का बोझ असहनीय हो जाए तो उन्हें सिर व जिंदगी से उतार देना ही समझदारी है। सरोज प्रजापति ✍️ - Saroj Prajapati
आत्मसम्मान पर भारी पड़ने लगे जब सुख तो उसे त्यागने में क्यों इतना दुख माना सुख सुविधाओं बिना जीवन नहीं आसान किन्तु आत्मसम्मान विहीन इंसान भी तो होता पशु समान। - Saroj Prajapati
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