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अगर दुनिया को खुश करने की सोचोगे तो एक उम्र कम पड़ जाएगी और आखिर में बुराइयों की एक लंबी फेहरिस्त हिस्से में आएगी तो क्यों ज्यादा दुनियादारी के चक्कर में पड़ना मिली है एक जिंदगी तो थोड़ा सा बन स्वार्थी सबसे पहले अपनी अपनी खुशियों को चुनना।। सरोज प्रजापति ✍🏻 - Saroj Prajapati
खुशियों की तलाश में ताउम्र भटकते रहे दर ब दर बस झांककर ना देखा अपने घर और मन के भीतर। सरोज प्रजापति - Saroj Prajapati
रिजल्ट तो बनता रहेगा काम धंधा सब चलता रहेगा चलो कुछ वक्त खूबसूरत फूलों संग बिताए थोड़ी इनकी सुने कुछ अपनी इन्हें सुनाएं संघर्ष में हंसकर जीने की कला ये हमें सिखाएं चार दिन की है जिंदगानी, खुलकर जिएं और मुस्कुराएं जिंदगी का है बस यही फलसफा,ये महकते फूल हमें समझाएं।। सरोज प्रजापति ✍️ - Saroj Prajapati
जीवन में रुपए पैसों के साथ थोड़ी दुआएं भी कमाएं सुना है! बुरे वक्त में जहां रुपया पैसा धरा रह जाता है वहां दुआ रूपी खजाना अपना असर जरूर दिखाता है। सरोज प्रजापति ✍️ - Saroj Prajapati
मुड़ कर जो देखूं पीछे बस तेरी रहमतें ही बिखरी नजर आती है जिंदगी के हर मोड़ पर, तू हरदम साथ निभाती है ठोकर लगने से पहले ही तू आगे बढ़ संभाल लेती है अब तक रहा करम तेरा, आगे भी बनाए रखना मां! अपने बच्चों के सिर पर सदा,अपनी छांव बनाए रखना मां ।। 🌸🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌸 सरोज ✍️ - Saroj Prajapati
बेवजह है तभी तो मोहब्बत है... वजह तो नफरतों की होती है।। सरोज प्रजापति ✍️ - Saroj Prajapati
चाहे धागा हो या रिश्ता अगर एक बार गांठ पड़ जाएं तो सुलझने पर भी पहले जैसी मजबूती नहीं रहती। सरोज प्रजापति ✍️ - Saroj Prajapati
मेरे चेहरे पर सजी मुस्कुराहट वो अभेद्य दरवाजा है जो लोगों को मेरे दुख दर्द तक पहुंचने ही नहीं देती। सरोज प्रजापति ✍️ - Saroj Prajapati
जिंदगी तू भी है एक किताब सी हमेशा लगती तू एक अनसुलझा सवाल सी। एक पन्ने पर सुख तेरे,दूजे पे दुख लिखा है एक पन्ना हंसाता तेरा,दूजा आंखें नम कर जाता है । कहीं लिखी इबारत इश्क की,कहीं गम जुदाई का कहीं सबक दुनियादारी का,कहीं भेद अपने पराए का। हर पल रंग बदलती तू, नित नए रूप धरती तू कभी मां की गोद लगती तू,कभी पिता सी छाया बनती तू। कोई भेद तेरा समझ ना पाया,अजब है जिंदगी तेरी माया यहां उसने ही सच्चा सुख पाया,जिसको तूने हंस के गले लगाया।। सरोज प्रजापति ✍️ - Saroj Prajapati
जिंदगी की मसरूफियत में कुछ पल अपने लिए भी निकाल ये जिंदगी के झमेले तो यूं ही चलते रहेंगे दिन रात।। सरोज प्रजापति ✍️ - Saroj Prajapati
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