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Saroj Prajapati

Saroj Prajapati Matrubharti Verified

@saroj6130
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दिल पर चोट लगी थी गहरी
राजदार बनाया एक अपने को
सुबह तलक चर्चे आम हो गया
अब दोष बताओं दूं किसको ।।
सरोज प्रजापति ✍️


- Saroj Prajapati

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धूप का वो एक कतरा बैठा कुछ जुदा सा है
मालूम होता है वो जिंदगी से कुछ खफा सा है।।
सरोज प्रजापति ✍️
- Saroj Prajapati

पतंग सी है जिंदगी
कटना जिसका तय
क्यों ना फिर कटने से पहले
हसरतों की एक ऊंची उड़ान भर ली जाए ।।
सरोज प्रजापति ✍️


- Saroj Prajapati

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रिश्तों की सदा लहलहाती रहेगी फसल
गर समय-समय पर डालते रहोगे उसमें
प्रेम सम्मान और अपनत्व भरी उर्वरक।।
सरोज प्रजापति ✍️


- Saroj Prajapati

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ससुराल से भरी पूरी बेटियां
मायके केवल स्नेह की भूख मिटाने जाती है
ऐसी बेटियां भी मायके वालों को कुछ घंटे में ही
अखरने लगती है तो सोचो हो अगर कोई
तकदीर की मारी बहन बेटी वो कैसे मायके मे
एक कतरा भी प्रेम स्नेह इज्जत का पाती होगी
उसकी तो एक कौर रोटी भी उन्हें एक मण अनाज सी भारी नजर आती होगी।।
सरोज प्रजापति ✍️
- Saroj Prajapati

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सुनो ऐ खुशियों!
क्यों घूमती रहती हो तुम बनकर खानाबदोश
क्यों नहीं टिककर बैठती तुम किसी एक ठौर।
चलो कुछ दिन, नहीं कुछ साल तो तुम मेरे साथ बिताओ
हां मानती हूं, मैं एक अच्छी मेहमाननवाज नहीं
फिर भी कोशिश रहेगी मेरी पूरी
कि रहे ना तुम्हारी सेवा में कोई कोर कसर ।
खाने पीने और मनोरंजन के साधनों से
जब तुम लगोगी उकताने और ढूंढने लगोगी
मेरे घर से विदा होने के बहाने,तब मैं तुम्हें
अपनी लिखी कविता और कहानियां पढ़ाऊंगी।
कितनी शिद्दत से तुझे चाहा,एक एक हर्फ समझाऊंगी ।
यकीं है मुझको कि पढ़कर अपने बारे में मेरे जज़्बात
तुम छोड़ कर मेरा साथ, फिर और कहीं ना जा पाओगी ।
लेकिन सुनो सखी! मैं इतनी भी खुदगर्ज नहीं
जो तुम्हें बांधकर रखूं, हमेशा के लिए अपने साथ।
तुझ पर तो है हक सबका, सबकी है तू जागीर
भरी रहे तुझसे सबकी झोलियां,वो राजा हो चाहे फकीर।
सरोज प्रजापति ✍️

- Saroj Prajapati

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समय बदला,बदल रही है सोच
पहले निस्वार्थ सेवा करनेवालों का
सब दिल खोल करते थे गुणगान
आज ऐसे सेवादारों के सिर पर
लोग सजाते बेवकूफी का ताज।।
सरोज प्रजापति ✍️


- Saroj Prajapati

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सुबह कुहासा,रात कोहरा
तन मन  ठिठुरा जाए
जाड़े की मुलायम कुनकुनी धूप
शरीर गरमा आलस दूर भगाए ।।
सरोज प्रजापति ✍️


- Saroj Prajapati

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कभी बुजुर्गो से सुना था, सच्चे दिल से निभाएं रिश्ते लंबे टिकते हैं
उन्हें मालूम ना था, आज ऐसे सच्चे दिलवालों को ही ये रिश्ते ठगते हैं।
सरोज प्रजापति ✍️




- Saroj Prajapati

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गुमशुदा नोट हो या गुमशुदा खजाना
दोनों ही मिलते तब, जब बीत जाता जमाना।।
सरोज प्रजापति ✍️

नोट बंदी की मारी और चीजों को ज्यादा ही संभाल कर रखने वाली प्रत्येक महिला का दर्द ।🫣😂
- Saroj Prajapati

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