The Download Link has been successfully sent to your Mobile Number. Please Download the App.
Continue log in with
By clicking Log In, you agree to Matrubharti "Terms of Use" and "Privacy Policy"
Verification
Download App
Get a link to download app
दिल पर चोट लगी थी गहरी राजदार बनाया एक अपने को सुबह तलक चर्चे आम हो गया अब दोष बताओं दूं किसको ।। सरोज प्रजापति ✍️ - Saroj Prajapati
धूप का वो एक कतरा बैठा कुछ जुदा सा है मालूम होता है वो जिंदगी से कुछ खफा सा है।। सरोज प्रजापति ✍️ - Saroj Prajapati
पतंग सी है जिंदगी कटना जिसका तय क्यों ना फिर कटने से पहले हसरतों की एक ऊंची उड़ान भर ली जाए ।। सरोज प्रजापति ✍️ - Saroj Prajapati
रिश्तों की सदा लहलहाती रहेगी फसल गर समय-समय पर डालते रहोगे उसमें प्रेम सम्मान और अपनत्व भरी उर्वरक।। सरोज प्रजापति ✍️ - Saroj Prajapati
ससुराल से भरी पूरी बेटियां मायके केवल स्नेह की भूख मिटाने जाती है ऐसी बेटियां भी मायके वालों को कुछ घंटे में ही अखरने लगती है तो सोचो हो अगर कोई तकदीर की मारी बहन बेटी वो कैसे मायके मे एक कतरा भी प्रेम स्नेह इज्जत का पाती होगी उसकी तो एक कौर रोटी भी उन्हें एक मण अनाज सी भारी नजर आती होगी।। सरोज प्रजापति ✍️ - Saroj Prajapati
सुनो ऐ खुशियों! क्यों घूमती रहती हो तुम बनकर खानाबदोश क्यों नहीं टिककर बैठती तुम किसी एक ठौर। चलो कुछ दिन, नहीं कुछ साल तो तुम मेरे साथ बिताओ हां मानती हूं, मैं एक अच्छी मेहमाननवाज नहीं फिर भी कोशिश रहेगी मेरी पूरी कि रहे ना तुम्हारी सेवा में कोई कोर कसर । खाने पीने और मनोरंजन के साधनों से जब तुम लगोगी उकताने और ढूंढने लगोगी मेरे घर से विदा होने के बहाने,तब मैं तुम्हें अपनी लिखी कविता और कहानियां पढ़ाऊंगी। कितनी शिद्दत से तुझे चाहा,एक एक हर्फ समझाऊंगी । यकीं है मुझको कि पढ़कर अपने बारे में मेरे जज़्बात तुम छोड़ कर मेरा साथ, फिर और कहीं ना जा पाओगी । लेकिन सुनो सखी! मैं इतनी भी खुदगर्ज नहीं जो तुम्हें बांधकर रखूं, हमेशा के लिए अपने साथ। तुझ पर तो है हक सबका, सबकी है तू जागीर भरी रहे तुझसे सबकी झोलियां,वो राजा हो चाहे फकीर। सरोज प्रजापति ✍️ - Saroj Prajapati
समय बदला,बदल रही है सोच पहले निस्वार्थ सेवा करनेवालों का सब दिल खोल करते थे गुणगान आज ऐसे सेवादारों के सिर पर लोग सजाते बेवकूफी का ताज।। सरोज प्रजापति ✍️ - Saroj Prajapati
सुबह कुहासा,रात कोहरा तन मन ठिठुरा जाए जाड़े की मुलायम कुनकुनी धूप शरीर गरमा आलस दूर भगाए ।। सरोज प्रजापति ✍️ - Saroj Prajapati
कभी बुजुर्गो से सुना था, सच्चे दिल से निभाएं रिश्ते लंबे टिकते हैं उन्हें मालूम ना था, आज ऐसे सच्चे दिलवालों को ही ये रिश्ते ठगते हैं। सरोज प्रजापति ✍️ - Saroj Prajapati
गुमशुदा नोट हो या गुमशुदा खजाना दोनों ही मिलते तब, जब बीत जाता जमाना।। सरोज प्रजापति ✍️ नोट बंदी की मारी और चीजों को ज्यादा ही संभाल कर रखने वाली प्रत्येक महिला का दर्द ।🫣😂 - Saroj Prajapati
Copyright © 2026, Matrubharti Technologies Pvt. Ltd. All Rights Reserved.
Please enable javascript on your browser