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Ruchi Dixit

Ruchi Dixit Matrubharti Verified

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अरसे बाद आया तो सही
मगर!!
शिकायत की पोटली खोली
न जाने कितनी रार लिए
पीड़ा की दरकार लिए
खुद को कहता सुना न कभी
कहता सुनता है हरपल ही
अपराधी तेरी एक नहीं
औरों की भी हिस्सेदारी
उसपर खुद की भी सगी नहीं
अपराधबोध की आदी हूँ
पूरी न आधी-आधी हूँ
आधे में भी टुकड़े -टुकड़े
बिखरे हैं सब एक सार नही......
ख्वाहिश का तो कुछ पता नहीं
है न है यह इन्कार नहीं, अच्छेपन
का कुछ भार नहीं...
सुख के साथी तेरे कितने
दु:ख का कारण मैं एक रही
धीरे - धीरे समझा जो अब
समझा तो था स्वीकार नही
जाने मुझमें था क्या देखा
जो था लेकिन अब रहा नहीं
मैंने तुझको ही सच माना तुझमें
ही खुद को पहचाना अन्तर ने कहा
बस वहीं किया.....;;;;
#गफलत #पहचान#अन्तर

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- Ruchi Dixit

जो थी वहीं हूं
मसला तो सारा होने का ही है,,,
- Ruchi Dixit

व्यवहारिक दृश्य का वास्तविक
सत्य से निराकरण तभी हो सकता है जब आत्मबोध हो ।
- Ruchi Dixit

पहली बार का भरोसा
और झूठ स्थाई हो जाता है
सच के लिए हम कुछ दूर
चल तो पड़ते हैं ट्रेन के
डिब्बे की तरह मगर
पूर्ण संतुष्टि न होने पर
इंजन बार - बार रुकता
है और अनुकूलता पटरी
तोड़ने काम करती है ,,,
- Ruchi Dixit

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अन्तर ने सदैव
त्याग ही
चुना दावेदारी
की अधिकता में.
- Ruchi Dixit

अलक्ष्या ❤️ अभेद्या ❤️अक्लेद्या ❤️ तु ही कर रही है , तु ही हो रही है , तुझमें हो रहा है,,,
तेरे सिवा कौन है माँ.....,,,,

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एक बात जो समझाया
समय ने मुझे, किसी का
पूरा होने के लिए खुद का पूरा
होना जरूरी है,,,- Ruchi Dixit

जिसने जैसा कहा खुद
को वैसा मान लिया
इससे बड़ा कसूर शायद
मेरा नहीं था , खुद से उत्तर
उत्तर मिला कहां बाहर
सब ही विपरीत रहा
- Ruchi Dixit

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चींटी भोजन को
पहली बार देखकर
अत्यंत उत्साहित हो जाती है
मगर भोजन पर टूटती नहीं
बल्कि वह अपने अन्य साथियों
को बुलाकर ले आती है
और साथ में मिलकर भोजन इकट्ठा करती है,,, - Ruchi Dixit

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