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परा से प्रार्थना हे ईश्वर पार ब्रह्म परमेश्वर जगजननी जगदम्बा इस संसार में कोई किसी से घृणा न करें, कोई किसी केे अधिकारों का हनन न करे , किसी में कोई आभाव न हो ,सब आनन्द से परिपूर्ण हो , सब प्रेम से परिपूर्ण हो ,सारा जगत सुगंध से भरा सबकी चेतना जागृत हो सभी आपकी भक्तिविलास से परिपूर्ण हो सब द्वैत को पोषित किन्तु चेतनता एकाग्र और जाग्रत हो - Ruchi Dixit
..... - Ruchi Dixit
अंधेरा रोशनी खोजता रहा उम्रभर खत्म न हुआ यह सफर,,,,, - Ruchi Dixit
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खुद की कमियों से वाकिफ थी इसीलिए खुद के द्वारा किये वादे पर एक कुण्डी लगाई थी यही मेरी प्रतिबद्धता थी वादो के प्रति । खुद में झाँक लेना एक बार तुम भी क्या सबकुछ वहीं है जो था वैसा ही रहा ,,, - Ruchi Dixit
स्वयं को हर एक जगह सही सिद्ध करने का एक सरल तरीका है परिस्थितियों का हवाला यह ठीक भी है जो स्वंय में मुक्त नहीं है मगर उनका क्या जो आत्मविश्वास, सामर्थ्य, सच्चाई का पर्याय खुद को मानकर दूसरो को भी पहचानते थे,,, - Ruchi Dixit
सच भी हमारी तरह ही झूठा है मगर फिर भी सच सच है और सच के संतुलन के लिए आवश्यक भी ,,, - Ruchi Dixit
पता नहीं क्यों अक्सर लगा वो कहता कुछ है । करता कुछ है और परिस्थिति कुछ और हौती है । बातें झूठी नहीं होती मगर जो होती है वह नहीं होती,,, - Ruchi Dixit
कुछ लोगों का जीवन दिल से चलता है भावना में पलता है ऐसे लोग लाभ -हानि से परे बेमेल निर्थक जीवन जीते हैं बीच में कोशिश जरूर करते हैं स्वयं के स्वभाव को परिवर्तित करने की मगर सदैव असफल रहते हैं ,,,,,,,, - Ruchi Dixit
कभी किसी को आजमाया नहीं है समझती हूँ सब मैं यह बताया नहीं है,, खामियों से वाकिफ हूँ खुद की भी इसीलिए खुद का मोल कभी जताया नहीं है,,,, - Ruchi Dixit
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