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Ruchi Dixit

Ruchi Dixit Matrubharti Verified

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बाहर से स्त्री जैसा बहुत कुछ
है मुझमें मगर! मेरा एकान्त चिन्तन ,
मनन इस भेद से परे हैं,,,,,
- Ruchi Dixit

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- Ruchi Dixit

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- Ruchi Dixit

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- Ruchi Dixit

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- Ruchi Dixit

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- Ruchi Dixit

प्रेम और औपचारिकता में फर्क
यह है कि,,,
प्रेम उस खाली जगह में
भी बार-बार उपस्थिति तलाशता है और औपचारिकता
कभी सहुलियत में याद आने पर,,,,,
प्रेम में संवाद प्रतीक्षा होती है और औपचारिकता में सहुलियत,,,,
औपचारिकता में व्यस्तता प्रबल होती है
जबकि प्रेम में कमजोर,,,
- Ruchi Dixit

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हम किसी बात पर तर्क कर
सकते हैं किन्तु तर्क पुष्ट होने पर भी
हम उस बात कि पुष्टि नहीं कर
सकते जिसे तर्कों से नहीं समझा
जा सकता,,,,,,,
- Ruchi Dixit

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नही कहुँगी कुछ अब!
आँखों के निकलते आँसुओं
अन्तर उठती पीर से केवल सुनुँगी
बस सुनुगी निशब्द बिना व्यवहारिक
परिवर्तन के,,,,,,,,
- Ruchi Dixit

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मैं ही सही हूँ मैं यह नहीं मानती
मैं मानती हूँ मैं कुछ नहीं जानती
पहली सीढ़ी रास्ता नहीं बनाता
यह सोच जी में नहीं आता जब
जब पग धरे ही न उस पर....
प्रयास उस पर चढ़कर आगे बढ़ने
का है...
हाँ और भी रास्ते हैं मंजिल तक
पहुंचने के मगर जो मेरे आगे है
उस पर पहले माथ धरना है,,
- Ruchi Dixit

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