The Download Link has been successfully sent to your Mobile Number. Please Download the App.
Continue log in with
By clicking Log In, you agree to Matrubharti "Terms of Use" and "Privacy Policy"
Verification
Download App
Get a link to download app
सच भी हमारी तरह ही झूठा है मगर फिर भी सच सच है और सच के संतुलन के लिए आवश्यक भी ,,, - Ruchi Dixit
पता नहीं क्यों अक्सर लगा वो कहता कुछ है । करता कुछ है और परिस्थिति कुछ और हौती है । बातें झूठी नहीं होती मगर जो होती है वह नहीं होती,,, - Ruchi Dixit
कुछ लोगों का जीवन दिल से चलता है भावना में पलता है ऐसे लोग लाभ -हानि से परे बेमेल निर्थक जीवन जीते हैं बीच में कोशिश जरूर करते हैं स्वयं के स्वभाव को परिवर्तित करने की मगर सदैव असफल रहते हैं ,,,,,,,, - Ruchi Dixit
कभी किसी को आजमाया नहीं है समझती हूँ सब मैं यह बताया नहीं है,, खामियों से वाकिफ हूँ खुद की भी इसीलिए खुद का मोल कभी जताया नहीं है,,,, - Ruchi Dixit
झूठ में जीना भी अच्छा ही है निभ जाते हैं रिश्ते वो जो आपके अधिकार की बात करते हैं जिस दिन आपने सही मान लिया और तलाश की उन रिश्तों मे अपनेअधिकार की जो यह कहते पाये गये “मेरी हर एक चीज पर मुझसे अधिक तुम्हारा अधिकार है ।” कुछ हाथ नहीं लगेगा केवल एक सच के अतिरिक्त कहीं कुछ नहीं था कहीं कुछ नहीं है,,,,,,,,, - Ruchi Dixit
एक संबन्ध में कितना भेद जो पास है वो याद नही जो दूर है उन पर लुटता स्नेह ....... - Ruchi Dixit
ऐसी भी अन्तरदशा चलती है सब झूठ लगता है इसलिए सबसे रुचि समाप्त होने लगती है न लिखने का मन होता है न पढ़ने का न बोलने का न ही सुनने का जैसे सारी बातें भ्रम फैलिने की कोशिश कर रहे हैं । जैसे स्वांस को कोई बाँध रहा है पिंजरे में बन्द छटपटाहट जब आप कुछ नहीं करना चाहते और करने को बहुत कुछ छूटा सा हो .....,, - Ruchi Dixit
तुझे भूलना सहज कैसे हो तु आसन आराध्य का मेरे है उस जगह पर उस जैसा ही तु कभी -कभी अन्तर भी दिखता नहीं,, - Ruchi Dixit
जब शब्दाभिव्यक्ति सामने हो मगर अहसासो का दर बदला सा लगे एक पराये घर में भला कौन सुकून पाता है! - Ruchi Dixit
उसे पता नहीं है शायद! वह खुद ही मुझे खुद से दूर कर रहा है..... - Ruchi Dixit
Copyright © 2026, Matrubharti Technologies Pvt. Ltd. All Rights Reserved.
Please enable javascript on your browser