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जो थी वहीं हूं मसला तो सारा होने का ही है,,, - Ruchi Dixit
व्यवहारिक दृश्य का वास्तविक सत्य से निराकरण तभी हो सकता है जब आत्मबोध हो । - Ruchi Dixit
पहली बार का भरोसा और झूठ स्थाई हो जाता है सच के लिए हम कुछ दूर चल तो पड़ते हैं ट्रेन के डिब्बे की तरह मगर पूर्ण संतुष्टि न होने पर इंजन बार - बार रुकता है और अनुकूलता पटरी तोड़ने काम करती है ,,, - Ruchi Dixit
अन्तर ने सदैव त्याग ही चुना दावेदारी की अधिकता में. - Ruchi Dixit
अलक्ष्या ❤️ अभेद्या ❤️अक्लेद्या ❤️ तु ही कर रही है , तु ही हो रही है , तुझमें हो रहा है,,, तेरे सिवा कौन है माँ.....,,,,
एक बात जो समझाया समय ने मुझे, किसी का पूरा होने के लिए खुद का पूरा होना जरूरी है,,,- Ruchi Dixit
जिसने जैसा कहा खुद को वैसा मान लिया इससे बड़ा कसूर शायद मेरा नहीं था , खुद से उत्तर उत्तर मिला कहां बाहर सब ही विपरीत रहा - Ruchi Dixit
चींटी भोजन को पहली बार देखकर अत्यंत उत्साहित हो जाती है मगर भोजन पर टूटती नहीं बल्कि वह अपने अन्य साथियों को बुलाकर ले आती है और साथ में मिलकर भोजन इकट्ठा करती है,,, - Ruchi Dixit
उस शब्द उस भावना उस अभिव्यक्ति का उसी प्रकार कोई मोल नहीं रह जाता जैसे बारिश के पानी का हर जगह एक समान बरसने पर....- Ruchi Dixit
किसी के पास विकल्प है किसी को विकल्प की तलाश है किसी को केवल चलते रहना है..... - Ruchi Dixit
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