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मेरे अंदर बसा तेरा आशिक़ मुझे जीने नहीं दे रहा.. और मेरे अंदर बैठा मेरी माँ का बेटा मुझे मरने नहीं दे रहा...!
नज़र मिले तो नज़र मिलाने की सोचना.. इस दिल की प्यास बुझाने की सोचना.. मेरे दिल के ज़ख्म पहले देख लेना तुम.. फिर चाहो तो मुझे सताने की सोचना.. बिखरे फूल दिखें तो समेट लेना उनको.. अगर तन्हा पेड़ दिखे तो गले लगाने की सोचना.. मोहब्बत करो अब किसी से भी अगर.. तो ता-उम्र उसका साथ निभाने की सोचना.. अपने दिल का ख़्याल पहले कर लेना तुम.. फिर इस बेदर्द ज़माने की सोचना.. मैं तेरी राह तकता हूँ हर घड़ी मेरी जान.. तुम्हें फुर्सत मिले तो लौट आने की सोचना..!
मैं कुछ ज्यादा ना कहूंगा तुम समझ लेना मैं खत आधा ही लिखूंगा तुम समझ लेना की बाद तेरे मैं कैसा हूँ तुम अगर पूछो मैं हाल अच्छा ही कहूंगा तुम समझ लेना है प्यार का दिन और तुझे गुलाब मिलेंगे ये देख कर जब मैं जलूँगा तुम समझ लेना सब यार उस महफ़िल में रहेंगे 'तू' वाले और मैं जब तुमको 'तुम' कहूंगा तुम समझ लेना की नज़्म मेरी पढ़ने में जो होती है मुश्किल ये सादगी से मैं लिखूंगा तुम समझ लेना एक पीर ने दुआ दी की हर दुआ कुबूल हो अब क्या दुआ मैं करूँगा तुम समझ लेना की दिल मेरा मुझे धीमे से ये कहता है मैं देख कर जिससे थमूँगा तुम समझ लेना की तंग करते हैं कैसे कैसे ख़याल तेरे अब इससे ज्यादा न कहूंगा तुम समझ लेना बात अधूरी ही मुझको क्यों पूरी लगती है मैं इश्क़ अधूरा जो करूँगा तुम समझ लेना...
Shayad main move on isliye nahi kar paa raha hoon, kyunki main sach mein attached tha. Mere liye woh bas ek shakhs nahi thi, meri aadat ban gayi thi. Mere din ki shuruaat bhi usi se hoti thi aur raat ka aakhri khayal bhi wahi hoti thi. Maine sirf pyaar nahi kiya tha, maine use apni zindagi ka hissa bana liya tha. Isliye aaj uske jaane ke baad bhi aisa lagta hai jaise mera kuch andar se toot gaya ho. Kuch log kehte hain, "Bhool ja, aage badh ja." Par shayad woh yeh nahi samajhte ki kuch log sirf dil mein nahi rehte, woh hamari poori zindagi mein bas jaate hain. Main koshish to karta hoon normal rehne ki, hansne ki, khud ko busy rakhne ki Lekin sach kahun to, har cheez ke beech uski hi kami mehsoos hoti hai. Shayad isi ko saccha attachment kehte hain. Insaan chala jaata hai, lekin uski maujoodgi bahut samay tak dil se nahi paati...
" मैं राहों के पत्थरों से टकराकर आया हूँ.. ठोकरे लिखी थी किस्मत में सो खाकर आया हूँ मेरी बरदास की हद का तुम क्या लगाओगे अंदाज़ा.. मैं सामने भी खड़ा हूँ और खुद को जलाकर भी आया हूँ..!
तुमने मुझे खामोश ही कर दिया, जबकि मुझे तो तुमसे ढेर सारी बातें करने की आदत थी। मैं हर छोटी-सी बात भी संभाल कर रखता था कि तुम्हें सुनाऊँगा। तुमसे बात करना मेरी रोज़ की सबसे ज़रूरी चीज़ हुआ करती थी जैसे सुबह की चाय या रात की नींद। हर छोटी-सी बात, हर अजीब-सी सोच, सबसे पहले तुम्हारे साथ बाँटने का मन करता था, क्योंकि मुझे लगता था कि तुम सिर्फ सुनोगी नहीं, समझोगी भी। फिर धीरे-धीरे सब कुछ बदल गया - न वक्त बदला, न दिन। आज भी मेरे पास बातें उतनी ही होती हैं, लेकिन उन्हें कहने के लिए तुम नहीं होती। मैं अक्सर फोन उठाकर तुम्हारा नाम देखने की अपनी आदत से लड़ता हूँ, फिर खुद को याद दिलाता हूँ कि अब तुम्हारे पास मेरे लिए समय नहीं है। सबसे ज़्यादा तकलीफ़ इस बात की नहीं होती कि तुम चले गए, बल्कि इस बात की होती है कि तुम्हारी जगह कोई और कभी ले ही नहीं पाया। लोग कहते हैं कि वक्त सब ठीक कर देता है, लेकिन कुछ लोग वक्त के साथ ठीक नहीं होते - वे बस चुप हो जाते हैं। मैं भी अब वैसा ही हो गया हूँ। बातें आज भी दिल में उतना ही शोर करती हैं, बस उन्हें सुनने वाला अब कोई नहीं है।
पता है... मैं तुमसे आखिर चाहता क्या था? बस इतना ही-कि रोज़ कुछ वक्त हम थोड़ी सी बात कर लें... कुछ तुम अपनी सुनाती, कुछ मैं अपनी सुनाता । थोड़ा तुम मज़ाक करती, थोड़ा मैं मज़ाक करता। बस इतना ही चाहता था। मैंने तुम्हें अपना सबसे अच्छा साथी माना था... और शायद मैं तुमसे जुड़कर थोड़ा ज़्यादा ही आगे तक सपने देख बैठा था। पर किस्मत को शायद ये मंजूर नहीं था... एक बात जो मुझे आज भी बहुत परेशान करती है- जब मैं जा रहा था... तो तुमने एक बार भी मुझे नहीं रोका।
मैं तुम्हें अलविदा तो नहीं कह पाऊँगा, क्योंकि कुछ रिश्ते खत्म होकर भी दिल में ज़िंदा रहते हैं। पर जाते-जाते बस इतना कहना चाहता हूँ - शुक्रिया... उन हर लम्हों के लिए, जहाँ तुम्हारी हँसी ने मेरी उदास दुनिया में रोशनी भर दी। तुम्हारी बातें, तुम्हारी मासूम मुस्कान, आज भी मेरे दिल के किसी कोने में साँस लेती हैं। प्यार क्या होता है, ये मैंने तुमसे सीखा, और किसी अपने को खोने का डर भी तुमसे ही जाना। मैं शायद तुम्हारे लायक कभी पूरी तरह नहीं बन पाया, पर मेरी मोहब्बत में कभी कमी नहीं थी। मैने मेरी बातों ने तुम्हें बहुत रुलाया है, मेरी गलतियों ने तुम्हारा बहुत दिल दुखाया है. उसके लिए दिल से माफ़ी चाहता हूँ यकीन मानो, तुम्हें तकलीफ़ देना कभी मेरी चाहत नहीं थी। तुम्हें रोकने की हजार कोशिशें दिल ने कीं, पर मोहब्बत ज़बरदस्ती नहीं होती। अगर तुम्हारी खुशी कहीं और है, तो दुआ है कि तुम्हें वो हर खुशी मिले जिसकी तुम हकदार हो। बस एक बात हमेशा याद रखना -मैं तुमसे नफ़रत कभी नहीं कर पाऊँगा। क्योंकि तुम मेरी ज़िंदगी का वो खूबसूरत एहसास हो, जिसे किस्मत ने भले अधूरा छोड़ दिया, पर दिल आज भी पूरी शिद्दत से महसूस करता है। "मेरी गुड़िया"
मेरी प्रिय, मेरे सब्र की पराकाष्ठा अब पूर्ण हुई। अब तुम निश्चिन्त हो- तुम्हारी स्मृतियाँ जो पवित्र अवशेष की तरह मेरे हृदय में थी, जो मौन और पीड़ा में साथ दे रहीं थी, मैंने अंततः बड़े संयम और संताप के साथ उन्हें अपने भीतर से प्रवाहित कर दिया है। "जैसे कोई नदी अपना अंतिम अर्ध्य समुद्र को सौंप देती है"।
“मेरे बाद अगर तुम्हें किसी से प्रेम हो जाए, तो बेझिझक उस प्रेम को अपना लेना... उसके साथ हर खुशी बाँटना, हर दर्द में उसका सहारा बन जाना... मेरी यादों को दिल में कहीं सजा कर रखना, पर उन्हें अपनी राह की बेड़ियाँ मत बनने देना... जब कभी मेरा ख़्याल आए, तो बस एक हल्की सी मुस्कान के साथ मुझे याद कर लेना और फिर उसी मुस्कान के साथ, अपनी ज़िंदगी को खुलकर जीते रहना...
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