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कितनी बार बस महसूस करना होता हैं हर कुछ !अनचाहा! अनचाहा घर अनचाहा डर अनचाहा खाना अनचाहा गाना कितना कुछ घट रहा होता मगर फिर भी जाना पड़ता है अनचाहा सफर अनचाहा असर अनचाहे लोग अनचाहे बाते कुछ आगे जाते ही फिर मिल जाती है अनचाही बाते, अनचाही मुलाकाते कुछ आते जाते , बे फ़िक्रे राते मदहोशी की हालत में कुछ जस्बात इतना अनचाहा सब चल रहा फिर दिल उदास नहीं बस कहता है चुप रहो अनचाहा तेरे पास नहीं अनजानी इन आंखों में एक अनचाहा प्यार मिला अनचाही मुलाकाते में होना था वो न हुआ अनचाहा सब खोता रहा अनचाहा में रोता रहा बे बुनियादी रही अनचाहा सब टूट गया अनचाहा कुछ छूट गया - Alone Soul
लोग पूछते है क्या ही दिक्कत है एक कमरा मन पसन्द पढ़ाई मन चाहा वक्त और हर सुविधा तकलीफ ही नहीं पढ़ाई ही तो करनी है एक बच्चा जिसने दिल से तैयारी की है वो खुद की आइडेंटिटी तक भूल जाता है उसको क्या पसन्द था कितना पसंद था क्यों पसंद था किस लिए पसंद था दो वक्त का खाना एक वक्त ही बना लेना हर दिन खुद को खुद ही समझा लेना रोज खुद को खुद ही मन लेना फिर हंस के सब कुछ भुला देना फिर एक कमरा चार किताब सब में छुपा लेना सिसक सिसक के न पास होने का डर खुद को बता देना हुआ तो क्या उस खुशी को महसूस कर पाना जता देना अपने अंदर खत्म को जग लेना बस यही होता है एक कमरा कुछ किताबें मन चाहा सफ़र #aspirant
"क्या मैं तुम्हें पसंद कर सकता हूँ? नहीं, सच तो यह है कि मैं तुमसे पहले ही प्यार कर चुका हूँ, और अब मैं इसे और नहीं छुपा सकता।"
चाहे कुछ भी हो जाए, अगर तुम मेरे रास्ते में आई, तो मैं तुम्हें ढूंढ ही लूंगा। भले ही तुम कहीं दूर किसी दूसरी दुनिया में क्यों न हो, ढूंढ निकालूंगा।"
"अगर हम इस ज़िंदगी में नहीं मिल पाए, तो मैं अगली ज़िंदगी में तुम्हें ढूंढूंगा। मैं समय की हर सीमा को पार करके तुम्हारे पास वापस आऊंगा।"
एक नज़्म लिखी कही रखी हैं सुनो तो सुनाऊं क्या क्या कहती हो खत में भेजु तकिए तले छुपाऊं क्या कमबख्त ये दूरी कैसी बाहों को भुलाऊं क्या एक नज़्म लिख रखी हैं तेरे लिए उस संग आ जाऊ क्या.... - Alone Soul
नफ़रत , मोहब्बत, इनायत , इबादत, इजाज़त,का असर था हां वो थी मेरी पहली मोहब्बत पहली मोहब्बत पर मुझे घमंड था - Alone Soul
मत देख जिंदगी में कितने पल है ये देख की हर पल में कितनी जिंदगी है - Alone Soul
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