The Download Link has been successfully sent to your Mobile Number. Please Download the App.
Continue log in with
By clicking Log In, you agree to Matrubharti "Terms of Use" and "Privacy Policy"
Verification
Download App
Get a link to download app
On the day of judgment Supreme Charted Accountant will see the accounts ledger of every individual. He is least conserned as to how many trips one has made to kedarnath, Badrinath or Jagannath. They are all centres of get together and social interaction. He is not bothered about how many laddoos, sweets and jhulaas one have served him. He turns blind eyes to these petty things. He takes seriously the quantity and quality of cheating, embazelment of money among friends and relatives one has done. He is more concerned about the standard of honesty, transperancy and charity to the poor. And finally the transperancy purity of thought. (निर्मल मन) Therefore, strive and strive hard to keep the accounts ledger as neat and tidy as possible. Hare Krishna
शब्दों को अधरों पर रख कर दिल के भेद न खोलो मैं आंखों से सुन लेता हूं तुम आंखों से बोलो।।
कौन आएगा? केशव ऑपरेशन थिएटर के मुख्य द्वार पर खड़ा हुआ था, जहां पर आंखों का ऑपरेशन हो रहा था। जिस जिसका ऑपरेशन समाप्त हो रहा था उस मरीज को पैरामेडिकल स्टाफ बाहर लेकर आ जाते। वे भी मरीज को केवल दरवाजे तक छोड़कर चले जाते। यह समझकर कि उनका कोई भाई बंधु यहां से आराम कक्ष तक ले जाएगा। परंतु कभी-कभी किसी का कोई भी भाई बंधु लेने नहीं आता था। अचानक मेरी नजर एक बुजुर्ग पर पड़ी जिसको पैरामेडिकल स्टाफ दरवाजे तक छोड़कर चला गया। बुजुर्ग ने 1, 2 मिनट के लिए इधर-उधर देखा है कि शायद कोई उसका रिश्तेदार उसे पकड़ कर लेने आएगा और आराम कक्ष में छोड़ देगा। परंतु ऐसा हुआ नहीं। इससे पहले कि मैं उसकी सहायता करने जाउं बुजुर्ग अपने आप ही 50 कदम दूर आराम कक्ष तक चला गया। कौन आता? सुर नर सब की यह रीति स्वारथ लाग करें सब प्रीति प्रीति। सवाल पैदा होता है कौन किसका है। समाज तो टूट गया और अब परिवार भी टूट गया। बाल बच्चे दूर-दूर रहने लगे और माता पिता उसी घर में अकेले रहेंने लगे। हम भी उसी में से थे जो ऑपरेशन के लिए अकेले गए थे। यह सोचकर की शायद कोई आएगा मिलने या देखने के लिए आयेगा, शायद झूटा इंतजार कर रहे थे। संध्या हो गई, ओपरेशन भी समाप्त हो गया, कोई नहीं आया! जैसे ही हमारी पत्नी ऑपरेशन थिएटर से आई हम उन्हें लेने पहुंच गए और आराम कक्षा तक ले आए। 10 15 मिनट आराम करने के पश्चात, अपना एक थैला और एक बोतल पानी तथा पत्नी का हाथ पकड़ा और कार में रात्रि होने से पहले घर आ गए। यह समझकर की कौन आएगा? परंतु सभी मरीज इतने खुश नसीब नहीं थे। कुछ अकेले भी गए । समय आ गया है कि अस्पताल अकेले जाओ और अकेले आओ क्योंकि अब कोई आपको देखने नहीं आएगा। परिवार ऐसा टूटा है कि कोई सीमेंट अब इसको जोड़ नहीं सकती। अपने आप में प्रसन्न रहने का प्रयास करो। LM
अपने सभी भाव, विचार, धन सम्पदा और जीवन के न बताने वाले गुप्त रहस्य किसी को न बताएं; चाहे वह आप का पति/पत्नी क्यों न हो। कोई भी क्लेश हो सकता है।।। चाणक्य
मित्र ही सबसे बड़ा दुश्मन है। सतर्क रहिए::: चाणक्य
पुरानी अप्रिय घटनाओं को दोहराने से याद करने से केवल दुख रूपी जहरीले आंसू निकलते हैं मन में क्लेश होता है मत दोहराओ। प्रसन्न रहोगे।
*कोई सुलह करा दे अब* *ज़िंदगी की उलझनों से* *बड़ी तलब लगी है* *आज मुस्कुराने की*
किसी की थोड़ी बहुत, किसी भी प्रकार की मदद हो जाए , तो अवश्य करनी चाहिए यह एक प्रकार का परोपकार है। करो कुछ अलौकिक कमाई कर लो।।
लिखोगे ग़र वसीयत अपनी। तो यह हकीकत जान पाओगे तुम्हारी अपनी ही मिलकियत में तुम्हारा हिस्सा कहीं नहीं है।।
*सारे फरिश्ते मुझे ही* *मिले हैं ज़िंदगी मे....* *कोई गलती करता ही नहीं* *मेरे सिवा......*
Copyright © 2026, Matrubharti Technologies Pvt. Ltd. All Rights Reserved | Powered by Custom Web Development Company India.
Copyright © 2026, Matrubharti Technologies Pvt. Ltd. All Rights Reserved.
Please enable javascript on your browser