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GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

@ganeshptewarigmail.com064906


भला स्वयं की कमी को, रखता सदा लपेट। ज्यों कछुआ निज अंग को, लेता तुरत समेट।।
दोहा--३८९
(नैश के दोहे से उद्धृत)
-----गणेश तिवारी 'नैश'

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अभिमानी कायर पुरुष, कभी न पाए लक्ष्य। जीवन भर भटका करे, खाए भक्षाभक्ष्य।।
दोहा--३८८
(नैश के दोहे से उद्धृत)
-----गणेश तिवारी 'नैश'

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छोटे छोटे खर्च पर, रखिए अपना ध्यान। छोटा छिद्र जहाज को, पहुँचाता शमशान।।
(नैश के दोहे से उद्धृत)
------गणेश तिवारी 'नैश'

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दुखदायी परिहास का, होता कटु परिणाम। देख द्रौपदी की दशा, हतप्रभ थे घनश्याम।।
दोहा--387
(नैश के दोहे से उद्धृत)
-----गणेश तिवारी 'नैश'

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भाग्य भाग्य रटता रहा, आयु गयी सब बीत। सदा अभागा ही‌ रहा, हुयी भाग्य की जीत।।
दोहा --३८६
(नैश के दोहे से उद्धृत)
-----गणेश तिवारी 'नैश'

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धन मिलता है उसी को, करता है जो यत्न। रहे लक्ष्मी वहीँ पर, होता जहाँ प्रयत्न।।
दोहा--३८५
(नैश के दोहे से उद्धृत)
-----गणेश तिवारी 'नैश'

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नर विपदा अज्ञान है, और सम्पदा ज्ञान। मिटते ही अज्ञान नर, पाता सुख की खान।। दोहा --३८४
(नैश के दोहे से उद्धृत)
-----गणेश तिवारी 'नैश'

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लोभी समझे अर्थ को, जीवन का आधार। अर्थ लाभ को सोचकर, करता वह व्यवहार।।
दोहा --383
(नैश के दोहे से उद्धृत)
----गणेश तिवारी 'नैश'

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धन की महिमा बहुत पर, धन से ज्ञान महान। धन को रखते हम मगर, हमको रखता ज्ञान।।
दोहा-- 382
(नैश के दोहे से उद्धृत)
------गणेश तिवारी 'नैश'

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षट शिकार हैं शत्रु पर, प्रबल शत्रु है राग। शान्ति मनुज को मिले जब, होगा इसका त्याग।।
दोहा--381
(नैश के दोहे से उद्धृत)
-----गणेश तिवारी 'नैश'

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