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GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

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करे अहैतुक कृपा प्रभु, वह हो भक्त अभक्त। धन ज्यों बरसे हर जगह, उर्वर हो या सख्त।।
दोहा०--568
(नैश के दोहे से उद्धृत)
-----गणेश तिवारी 'नैश'

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बिना ईश की कृपा केे, जग में मिले न प्रेय। कृपा मिले जब ईश की, तभी मिलेगा श्रेय।।
दोहा०--667
(नैश के दोहे सै उद्धृत)
----गणेश तिवारी 'नैश'

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प्रभु की लीला शक्ति पर, सदा रखो विश्वास। अग्नि, वरुण अरु पवन से, हिली नहीं थी घास।।
दोहा--566
(नैश के दोहे से उद्धृत)
---गणेश तिवारी 'नैश'

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जाना है तुम जान लो, होगे नहीं अशान्त। जीवन भर सुख से रहो, झगड़े होंगे शान्त।।
दोहा--565
(नैश के दोहेे से उद्धृत)
---गणेश तिवारी 'नैश''

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अपमानित वह हुआ पर, नहीं हुआ वह भ्रान्त। वैर भाव ओझल हुआ, मन नहिं हुआ अशान्त। दोहा--564
(नैश के दोहे से उद्थृत)
----गणेश तिवारी 'नैश'

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अपमानित वह हुआ जब, वह हो गया अशान्त। मन मैला होता गया, हुआ नहीं वह शान्त।।
दोहा--563
(नैश के दोहे से उद्थृत)
----गणेश तिवारी 'नैश'

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मन मैला कर बोलता, उसको मिलता शोक। उसका बिगड़ेगा सदा, लोक और परलोक।।
दोहा--562
(नैश के दोहे से उद्धृत)
-----गणेश तिवारी 'नैश'

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निर्मल मन कर बोलता, उसको मिलता चैन। जैसे छाया मनुज की, रहे साथ दिन-रैन।।
दोहा--561
(नैश के दोहे से उद्धृत)
---गणेशं तिवारी 'नैश'

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साधक उद्यम को नहीं, कभी कर सके त्याग। पर संतोषी वह बने, नहीं रखे अनुराग।।
दोहा--560
(नैश के दोहे से उद्धृत)
----गणेश तिवारी 'नैश'

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प्रभु के सुमिरन के लिए, कहीं न जाओ और। घर से यदि बाहर गए, नहीं मिलेगा ठौर।।
दोहा--559
(नैश के दोहे से उद्धृत)
---गणेश तिवारी 'नैश'

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