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GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

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केश सिंह मणि नाग की, और कृपण का द्रव्य। इनके जीवनकाल में, पूर्ण अलभ्य।।
दोहा--546
(नैश के दोहे से उद्धृत)
---गणेश तिवारी 'नैश'

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असत् मार्ग पर मत चलें, खो जाता सम्मान। चलने से सत्मार्ग पर, मिलता खोया मान।।
दोहा--545
(नैश के दोहे से उद्धृत)
---गणेश तिवारी 'नैश'

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दुनिया में है मनुज का, शील प्रमुख श्रँगार। सोना हीरा व्यर्थ में, सब है तन पर भार।।
दोहा--544
(नैश के दोहे से उद्धृत)
----गणेश तिवारी 'नैश'

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जो ईश्वर की राह में. कार्य करे दिन रैन। मिलता है बस उसी को, अमन शान्ति अरु चैन।।
दोहा--543
(नैश के दोहे से उद्धृत)
-----गणेश तिवारी 'नैश'

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करे अहित जो अन्य का. उस पर पड़ता फर्क। मिले श्वान की योनि अरु, होता बेड़ा गर्क।।
दोहा--541
(नैश के दोहे से उद्धृत)
---गणेश तिवारी 'नैश'

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जैसा खाता अन्न है, वैसा मन को जान। अन्न ग्रहण के पूर्व ही, संत करें पहचान ।।
दोहा--541
(नैश के दोहे से उद्धृत)
----गणेश तिवारी 'नेश'

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कण-कण मे भगवान
की, छवि दिखती दिन रैन।
दिव्य शान्ति आनन्द अरु, मिलता मुझको चैन।।
दोहा--540
(नैश के दोहे से उद्धृत)
----गणेश तिवारी "नैश"

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जीवन में पाखण्ड का, मत फैलाना जाल। नहीं भक्ति के क्षेत्र में, गलती इसकी दाल।।
दोहा--539
(नेश के दोहे से उद्ध्त)
---गणेश तिवारी "नेश"

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सद्गुण से अध्यात्म का, होता है उत्थान। मधुर भाव के उदय से, होता जन कल्याण।।
दोहा--538
(नैश के दोहे से उद्धृत)
------गणेश तिवारी "नैश"

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दया, धर्म-संतोष का, जब बढ़ जाता तेज। काम, क्रोध, मद लोभ तब. हो जाते निस्तेज।।
दोहा--537
(नैश के दोहे से उद्धृत)
----गणेश तिवारी 'नैश'

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