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GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

@ganeshptewarigmail.com064906
(75)

सुनी भागवत सात दिन, छोड़ दिया यह‌ लोक। किया परिक्षित ने गमन, पहुँच गए गोलोक।।
दोहा --512
(नैश के‌ दोहे ‌से उद्धृत)
----गणेश तिवारी 'नैश'

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बची हुयी षटवांग की, आयु दो घड़ी शेप। ध्यान लगा जब ईश में, पल में हुए विशेष।।
दोहा--511
(नैश के दोहे से उद्धृत)
------गणेश तिवारी नैश'

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अंतर्सुख मिल गया तो, छूट गया यह लोक। प्रीति बढ़ाकर ईश से, पहुँचा वह गोलोक।।
दोहा --510
(नैश के‌ दोहे ‌से उद्धृत)
----गणेश तिवारी 'नैश'

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तमसुख, रजसुख-सत्यसुख, ये सुख ईश विमुक्त। अन्तर्सुख आनन्दसुख, ये सुख प्रभु से युक्त
।। दोहा--509
(नैश के दोहे से उद्धृत)
------गणेश तिवारी 'नैश'

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सुख मिलता है जगत में, इनके त्रिविधा रूप। तनसुख, रजसुख-सत्यसुख, ये हैं तीन स्वरूप।।
दोहा-508
(नैश के दोहे से उद्धृत)
------गणेश तिवारी 'नैश'

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मै ममत्व के भाव को, जिसने दिया निकाल। ईश्वर से जुड़ गया वह, छोड़ जगत जंजाल।।
दोहा --507
(नैश के दोहे ‌से उद्धृत)
----गणेश तिवारी 'नैश'

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इच्छाओं से शान्त नर, रहता सदा अडोल। जैसे नदियाँ सिन्धु में, करतीं नहीं कलोल।।
दोहा --५०६
(नैश के दोहे ‌से उद्धृत)
------गणेश तिवारी 'नैश'

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अन्दर जलती ज्योति जब, मिट जाता अँधियार। मिलता है आनन्द तब, हट जाता संसार।।
दोहा--505
(नैश के दोहे ‌से उद्धृत)
----गणेश तिवारी 'नैश'

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राग, द्वेष अरु लोभ से, सदा करो संघर्षं। निर्मल होगा हृदय जब, होगा तुमको हर्ष।।
दोहा --५०३
(नैश के‌ दोहे ‌से उद्धृत)
------गणेश तिवारी 'नैश'

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समझे खुद को रूपसी, वह थी जदपि कुरूप। दुखी मुकुर में हुयी जब, देखा अपना रूप।।
दोहा--502
(नैश के दोहे से उद्धृत)
------गणेश तिवारी 'नैश'

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