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GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

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जीवन में आता नहीं, बीत गया जो काल। वाषस होता ज्यों नहीं, झरना जल विकराल।।
दोहा--556
(नैश के दोहे से उद्धृत)
-----गणेश तिवारी 'नैश'

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यदि आपका आशय “महत्त्व के अनुसार १०८ उपनिषदों की सूची” से है, तो एक बात स्पष्ट है—मुक्तिकोपनिषद् की १०८ उपनिषदों की सूची महत्त्व/श्रेष्ठता के क्रम में नहीं है, बल्कि परंपरागत सूची है।
फिर भी अध्ययन की सुविधा के लिए दार्शनिक महत्त्व, प्राचीनता, वेदान्त पर प्रभाव और प्रचलन के आधार पर १०८ उपनिषदों को इस प्रकार प्राथमिकता-क्रम में रखा जा सकता है। यह एक अध्ययन-क्रम है, शास्त्रीय “श्रेष्ठ से कनिष्ठ” निर्णय नहीं।
प्रथम स्तर — प्रमुख/मूल वेदान्त उपनिषद्
ईशावास्य उपनिषद्
केन उपनिषद्
कठ उपनिषद्
प्रश्न उपनिषद्
मुण्डक उपनिषद्
माण्डूक्य उपनिषद्
तैत्तिरीय उपनिषद्
ऐतरेय उपनिषद्
छान्दोग्य उपनिषद्
बृहदारण्यक उपनिषद्
श्वेताश्वतर उपनिषद्
कौषीतकि उपनिषद्
मैत्रायणी उपनिषद्
द्वितीय स्तर — योग, संन्यास और आत्मविद्या के महत्त्वपूर्ण उपनिषद्
कैवल्य
अमृतबिन्दु
अमृतनाद
आत्मबोध
अध्यात्म
हंस
परमहंस
जाबाल
नारदपरिव्राजक
भिक्षुक
तुरीयातीत
अवधूत
कुण्डिका
अरुणेय
मैत्रेय
संन्यास
ब्रह्म
ब्रह्मबिन्दु
ब्रह्मविद्या
योगतत्त्व
योगशिखा
योगकुण्डलिनी
ध्यानबिन्दु
तेजोबिन्दु
नादबिन्दु
अद्वयतारक
मण्डलब्राह्मण
तृतीय स्तर — शैव, वैष्णव, शक्ति एवं उपासना-प्रधान उपनिषद्
अथर्वशिरस्
अथर्वशिखा
कालाग्निरुद्र
दक्षिणामूर्ति
रुद्रहृदय
रुद्राक्षजाबाल
भस्मजाबाल
शरभ
गणपति
महावाक्य
नारायण
वासुदेव
गोपालतापिनी
कृष्ण
हयग्रीव
दत्तात्रेय
रामरहस्य
रामतापिनी
सीता
त्रिपुरा
सौभाग्यलक्ष्मी
देवी
बह्वृच
सरस्वतीरहस्य
भावना
त्रिपुरातापिनी
लक्ष्मी
सीता
चतुर्थ स्तर — अन्य योग, वेदान्त और साधना-प्रधान उपनिषद्
सर्वसार
शारीरक
वराह
योगराज
योगचूडामणि
शाण्डिल्य
पाशुपत
महा-नारायण
तारसार
पैंगल
मंडल-ब्राह्मण
शिखा
शिर
गर्भ
प्राणाग्निहोत्र
चूलिका
आत्म
अवधूत
पञ्चब्रह्म
ब्रह्मजाबाल
रुद्र
एकाक्षर
अक्षि
सूर्य
कुषिका
महत्
सावित्री
जाबालदर्शन
अव्यक्त
मुद्गल
अक्ष-मालिका
नृसिंहतापिनी
नृसिंह
तार
रामपूर्वतापिनी
रामोत्तरतापिनी
मुक्तिका
अद्वैत
परब्रह्म
परमहंसपरिव्राजक
नोट: १०८ की पारंपरिक सूचियों में विभिन्न पाठों/संस्करणों के कारण नाम और क्रम में अंतर मिलता है। इसलिए यदि आपका उद्देश्य “मुक्तिकोपनिषद् में दिए १०८ उपनिषदों को ही लेकर, उनमें से सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण 20/50/108 का क्रम” बनाना है, तो उसे अलग से प्रमाण सहित तैयार करना अधिक उचित होगा।

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संत वचन टलता नहीं, जिस पर करते टेक। ज्यों हाथी के दाँत पर, बना हुआ आरेख।।
दोहा--555
(नैश के दोहे से उद्धृत)
---गणेश तिवारी 'नैश'

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सदाचार में प्रेम का. होता बहुत महत्व। श्रद्धा अरु सम्मान सेे, आता इसमे सत्व।।
दोैहा--554
(नैश के दोहे से उद्धृत)
----गणेश तिवारी 'नैश'

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जो स्वभाव से हैं भले, उन्हें न आता दर्प। ज्यों चन्दन में विष नहीं, लिपटे रहते सर्प।।
दोहा--553
(नैश के दोहे से उद्धृत)
----गणेश तिवारी 'नैश'

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हंस कभी पीता नहीं, अन्य सरोवर नीर। यह तो पीता है सदा, मानसरोवर क्षीर।।
दोहा--552
(नैश के दोहे से उद्धृत)
-----गणेश तिवारी 'नैश'

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सदाचारवाला मनुज, चले सदा सद् मार्ग। आते रहते कष्ट पर, चलता नहीं कुमार्ग।।
दोहा--551
(नैश के दोहे सेे उद्धृत)
---गणेश तिवारी 'नैश'

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आते हर नर पर अदिन, यह जग दुख का लोक। हँसकर काटे एक नर, अन्य मनाए शोक।।
दोहा--550
(नैश के दोहे से उद्धृत)
----गणेश तिवारी 'नैश'

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एक आलसी के लिए, दिल्ली कोसों दूर। किन्तु उद्यमी के लिए, दिल्ली पग की धूर्।।
दोहा--549
(नैश के दोहे से उद्धृत)
----गणेश तिवारी 'नैश'

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रावण सँँग क्या ले गया, छोड़ गया अपकीर्ति। स्वर्णदान से कर्ण ने, फैलायी थी कीर्ति।।
दोहा--548
(नैश के दोहे से उद्धृत)
--गणेश तिवारी 'नैश'

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