Quotes by Sneha Gupta in Bitesapp read free

Sneha Gupta

Sneha Gupta

@dineshgupta823378


[श्री राम Version - 1]

श्री राम है वंदन तुमको,
दशरथ जी के नंदन तुमको।

हृदय में राम के आने के भाव ऐसे जगे,
खुशी के आँसू झर-झर बहे।
जैसे सुदामा को कृष्ण मिल गए,
ऐसा ही संबंध भक्त और भगवान का हर युग में है।

श्री राम है वंदन तुमको,
दशरथ जी के नंदन तुमको॥

वर्षों बाद आशाओं के दीपक फिर जल उठे हैं,
इस बार आशाएं ऐसी जागी कि पूरा भारत ही अयोध्या बन गया है।
जैसे शरीर को प्राण मिल गया है॥
संगठन की शक्ति अब दिखाएंगे,
घर-घर भगवा लहराएंगे॥

भारत ऐसा पावन धाम हो,
जिसके नायक श्री राम हों।
श्री राम है वंदन तुमको,
दशरथ जी के नंदन तुमको॥

अनुपम छवि देखी राम की,
मन मुग्ध है सब नर-नारी।
सतयुग के नारायण हो या,
त्रेतायुग के राम हो,
द्वापरयुग के कृष्ण हो,
या कलयुग के कल्कि भगवान हो।

दयाकर अपने चरणों की ऐसी कृपा हमारे नाम हों,
श्री राम है वंदन तुमको,
दशरथ जी के नंदन तुमको॥
Written by: Sneha Gupta

Read More

एक शिक्षक का रूप – एक सच्चा स्वरूप,
हर व्यक्ति का आधार, जीवन का स्तंभ, और मृत्यु का शंख।
कभी आँसुओं की बाढ़, कभी गर्व का मंज़र,
हर नायाब खेल का स्तंभ है।
वक्त है – इसे रेत का नाम।
गिरी से रौड़ा या कंकड़ से धराधर,
हर ओर इसका वर्चस्व है।
जीवन का पतन या उत्थान,
पल-पल गिरता, झर-झर बहता,
हर रंग जीवन के आलिंगन करता।
महारथी सा अद्भुत है, सबको नाचना चाहता है।
समय है – इसे सम्राट का नाम।

Written by: Sneha Gupta

Read More

“शब्दबाण"

जोश-जोश की बात थी,
बात में आग पर जली राख थी।
अंजाम की फ़िक्र से अनजान,
वह बात तो अमित घाव थी।
एहसास के होने तक,
काम हो गया,
दिल का दर्द बयान हो गया,
शब्दों का माया जाल हो गया,
शस्त्र से ज़्यादा आघात हो गया।
था जो धनुष से निकल गया,
एक तीर ही था,
पर लक्ष्य अनेक छेद गया।

Written by: Sneha Gupta
you all can check here too 🤗
https://www.yourquote.in/sneha-gupta-d3c2s/quotes/sbse-chottii-ciddiyaa-ghonsle-kii-bgiyaa-vo-merii-ngrii-maan-cygqtm

Read More

✨जीवन के सच्चे शिक्षक✨

बरसाती बूंदों ने अनुशासन सिखाया,
बहती नदियों ने व्यवहार और शीतलता।
समय ने अपनी कीमत समझाई,
और कठिनाइयों ने दी हमें हिम्मत की ताकत।

written by Sneha Gupta

Read More

🐦सबसे छोटी चिड़िया🐦

घोंसले की बगिया वो मेरी नगरी,
माँ का प्यार, बड़ों का दुलार,
घर की मैं सबसे छोटी चिड़िया।
बारिश की रुकावट मगर,
बड़े पेड़ों की छाया,
अपनों के साथ संसार जगमगाया।
जन्नत के पल या दुख का मेला,
मगर टहनियों ने हर समय घेरा,
घर की मैं सबसे छोटी चिड़िया।

Created by: Sneha Gupta
Grade: 10th

Read More

🙏🏻“अटूट सहारा”🙏🏻

हमें मुश्किलों से डर नहीं लगता,
क्योंकि साथ माता-पिता का है।
अगर कभी गिर भी जाएँ हम,
तो यकीन है सहारा माता-पिता का है।
क्या लिखें आपकी खिदमत में,
शब्द ही कम पड़ जाते हैं,
जब भी कुछ लिखना चाहें,
तो बस सोचते ही रह जाते हैं।

Created by: Sneha Gupta
Grade : 10th

Read More

“प्रकृति की पुकार” 🌿

मैं प्रकृति हूँ, मुझमें पर टिकी है दुनिया सारी।
मेरे ही बच्चे मुझे देते कष्ट भारी,
विधाता से यही है आस,
कभी तो करवाए मेरे बच्चों को
उनकी गलती का एहसास।

मैं विनाश की ओर चली,
मानवता की बलि चढ़ी।
मानव सोच रहा—यह क्या हुआ?
मेरे ही हाथों मेरा विनाश निश्चित हुआ।

भयंकर गर्मी है—ना?
क्या सोच रहे हो?
सूर्य देवता नाराज़ हैं,
उनसे क्या पूछते हो?

चारों तरफ सड़क ही सड़क है,
पेड़ों का निशान कहीं नहीं।
इमारतों पर लगे ऐसे कूलर हैं,
क्या पेड़ों का स्थान कहीं?
जंगलों को काट रहे,
अपना स्वार्थ साध रहे।
जितनी तुम्हारी तादाद है,
अब उतने पेड़ भी बचे नहीं,
जमीन बन गई बंजर।

पेड़ों को तो बचाया नहीं,
जानवरों को ही छोड़ देते।
जगह-जगह पॉलिथीन डालकर,
क्यों उन्हें मार देते?

सोचो, क्या यह पॉलिथीन इतना ज़रूरी है?

मानव ने क्या खेल रचाया,
प्रदूषण हर ओर फैलाया।
नदियों में अब जहरीला पानी है,
फैक्ट्री की गैस प्राण-वायु पर भी भारी है।
बहते पानी को जैसे रोक दिया,
इतना कचरा उसमें झोंक दिया।
खुद भी नहाए, जानवरों को भी नहलाया,
अपने कपड़े भी धुलवाया।
जल की ऐसी हालत देखकर
जलचर भी घबराए, जलचर भी घबराए।

मोबाइल ने जन-जन को घेरा है,
और टावर से निकली तरंगों ने
पक्षियों को घेरा है।
जिंदा पक्षियों को लाश बना दिया,
इंसानों का तो दिमाग भी घुमा दिया।
मानव डरा हुआ है, सहमा है,
सोच रहा—मेरा क्या होना है l
अभी देर नहीं हुई है,
जागो प्यारे, जागो।
अब जल्दी तुम पेड़ लगाने भागो,
अब जल्दी तुम पेड़ लगाने भागो।
Created by: Sneha Gupta
Grade : 10th

Read More