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Kavi Kumar

Kavi Kumar

@archanawaghmode933736


शीर्षक: पुरानी नींव, नई उड़ान

मिट्टी की वो सोंधी खुशबू, अब यादों का हिस्सा है,
मगर कलम की रफ़्तार में, छिपा वही एक किस्सा है।
कभी दीयों की रोशनी में, बुनते थे हम दास्ताँ,

अब स्क्रीन की इस चमक में, नया हमारा आसमाँ।
वेद वही हैं, बोध वही है, बस अंदाज़ पुराना बदला है,
हाथों में अब फोन है लेकिन, दिल का साज़ न बदला है।
पत्थर की उन नक्काशी का, आज डिजिटल अक्स (Reflection) है,
ज्ञान की इस बहती गंगा में, हर इंसान अब शख़्स है।
तरक्की के इस दौर में हम, अपनी जड़ें न भूलेंगे,

आसमान को छूकर भी हम, ज़मीन को ही पूजेंगे।
तकनीक की इस दुनिया में, 'वेद' का साथ ज़रूरी है,
संस्कार और विज्ञान मिले तो, हर कोशिश फिर पूरी है।

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पहली रचना: एक नई शुरुआत
शब्दों की इस दुनिया में, मैंने आज कदम रखा है,
हृदय के कुछ भावों को, कागज़ पर ला रखा है।
नया हूँ इस महफ़िल में, पर लिखने का जुनून है,
कलम की इस खिदमत में, मिलता बड़ा सुकून है।
सीख रहा हूँ अभी मैं, शब्दों को पिरोना,
भावनाओं के धागों में, यादों को संजोना।
बस आप सबका थोड़ा सा, तआवुन (सहयोग) चाहिए,
बढ़ सकूँ मैं आगे, वो हौसला चाहिए।
मेरी छोटी सी कोशिश को, अपनी दुआएँ देना,
पसंद आए गर मेरी बातें, तो थोड़ा साथ देना।
'वेद' की इस यात्रा का, आप सब ही आधार हैं,
आपके प्यार और समर्थन का, मुझे इंतज़ार है।
- Kavi Lekh

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