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Anant Dhish Aman

Anant Dhish Aman Matrubharti Verified

@anantdhishamangmailc
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आजाद रह सके,
इसके लिए सदैव संघर्ष करना पड़ता है।
सीमा सुरक्षित रह सके,
इसके लिए सदैव जवानों को डटे रहना पड़ता है।
जिसे हम कहते हैं आज़ादी,
उसके लिए बलिदान होना पड़ता है।
स्वतंत्रता दिवस की बहुत-बहुत बधाई एवं हार्दिक शुभकामनाएँ।
जय हिंद!
वंदे मातरम्!
- Anant Dhish Aman

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गान करो आज़ादी का
अभिमान करो खादी का
याद रखों बलिदानी को
सींचा है जिसने आज़ादी को।
यह धरती है अमर कहानी का
संत ॠषी महापुरुषों और बलिदानियों का
जीवन जय का हीं राग है
गृहस्थ में भी यहाँ अद्भुत वैराग्य है।

उठो और स्वाभिमान का हुंकार करो
अपने जीवन का तुम जय जयकार करो
पावन धरा भारत भू के हम संतान है
त्याग धर्म सत्य की जहाँ जय जयकार है।
अमृत काल में त्यागे विष अपना हम
समभाव सदभाव का अनुष्ठान करे हम,
एकता अखंडता का परिचायक बन हम
अखिल विश्व के सारथी बने हम।
- Anant Dhish Aman

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।। युवा हूँ, युवा मैं ।।

दिल और दिमाग
का नया रंग हूँ,
झूमता फिरता
मैं मस्तमलंग हूँ।
गिरता हूँ, संभलता हूँ,
अनंत क्षितिज को
पार करता हूँ।
अनंत चाह, अनंत राह का
एकतारा हूँ।
माटी का कण हूँ,
पूर्वजों का मन हूँ,
माता-पिता का
आशीष-वचन हूँ।
समाज का मान हूँ,
त्याग का प्राण हूँ,
राष्ट्र और विश्व के
नव-उत्थान की पहचान हूँ।
- Anant Dhish Aman

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।। युवा हूँ, युवा मैं ।।

दिल और दिमाग
का नया रंग हूँ,
झूमता फिरता
मैं मस्तमलंग हूँ।
गिरता हूँ, संभलता हूँ,
अनंत क्षितिज को
पार करता हूँ।
अनंत चाह, अनंत राह का
एकतारा हूँ।
माटी का कण हूँ,
पूर्वजों का मन हूँ,
माता-पिता का
आशीष-वचन हूँ।
समाज का मान हूँ,
त्याग का प्राण हूँ,
राष्ट्र और विश्व के
नव-उत्थान की पहचान हूँ।।
- Anant Dhish Aman

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धुएँ से बादल, कंकर से पहाड़,
बर्फ से नदियों का विस्तार—
सब तुमसे ही तो है...

- Anant Dhish Aman

जात-जात का पेंच है,
जो जात का होवे वो नेक है।
विचार मान, कर्तव्य परायण का क्या काम है,
जब जात पात में डूबे सब सेठ है।

- Anant Dhish Aman

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वो
गिरता रहा, चढ़ता रहा,
प्रेम-पथ पर बढ़ता रहा।

कबीर नहीं, ग़ालिब नहीं,
तक़दीर का वह मालिक भी नहीं।

गुज़रा हुआ कल भी नहीं,
आने वाला कोई पल भी नहीं।

वह सबका है, सब उसके हैं,
किन्तु किसी के मुताबिक़ नहीं।

वह अस्त नहीं, वह व्यस्त नहीं,
जो हृदयस्थ है, वही सही।

- Anant Dhish Aman

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दाँव और दान के महाभारत में
"दानवीर कर्ण" सदैव विजयी है,
कौरव और कौंत्य के महाभारत में
सूतपूत्र कर्ण सदैव विजयी है।

भाई और भाई के महाभारत में
मित्रता का अद्भुत रंग "राधेय कर्ण" सदैव विजयी है,
न्याय और श्राप के महाभारत में
वचनवद्ध कर्ण सदैव सदैव विजयी है।

विजय धनुष की डंकार में
कुरुक्षेत्र के रण हुंकार में
परशुराम शिष्य की जय जयकार में
"मृत्युंजय कर्ण" सदैव विजयी है।


- Anant Dhish Aman

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धृतराष्ट्र की सभा में
जब सभी मौन धारण कर लें,
तब महाभारत का आरंभ सुनिश्चित हो जाता है।

ज्ञान और धर्म,
तप और शौर्य,
क्षमा और दान,
नीति और व्यवहार,
पुरुषार्थ के समस्त प्रयास—
सब व्यर्थ हो जाते हैं।

जब सत्य की रक्षा में
कोई स्वर नहीं उठता,
तब महाभारत का रण
स्वयं सुसज्जित हो जाता है।


- Anant Dhish Aman

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चाँदनी रात में
बैठे थे हम छत पे,
और एक तारा टूट गया…

हाय! क्या ग़ज़ब हो गया।
वो अपनों से रूठ गया,
और गैरों की मुराद मुकम्मल कर गया…
हाय! क्या अदब कर गया।

— अनंत धीश अमन

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