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Anant Dhish Aman

Anant Dhish Aman Matrubharti Verified

@anantdhishamangmailc
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मुलाक़ात कौन कमबख़्त चाहता है,
इंतज़ार मुकम्मल हो, कौन चाहता है।
एक ऐसी भी आग हो, जो निरंतर जलती रहे,
अँधेरे सफ़र को प्रेम से प्रकाशित करती रहे।

जलती रहे, निरंतर जलती रहे,
शाम-ए-शम्मा में थोड़ा-थोड़ा मुसाफ़िर पिघलता रहे।

— अनंत धीश अमन

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मेरी मोहब्बत कोई किताब नहीं,
जो हर कोई पढ़ जाए।
अंतस की ऐसी शीतलता है कि
कोई महसूस भी करना चाहे तो वह पत्थर हो जाए।

- Anant Dhish Aman

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कुछ जोकर ऐसे भी होते हैं,
जो हँसते तो दूसरों पर हैं,
पर हँसी के पात्र स्वयं बन जाते हैं।

जोकर होना भी आसान कहाँ है!
जिसमें साहस हो स्वयं पर हँसने का
और दूसरों का मन बहलाने का,
वही असली जोकर कहलाता है।

तुम जो खेल खेलते हो दूसरों पर,
उसे हम हर रोज़ स्वयं पर खेलते हैं।
फर्क बस इतना है कि
अब तक वह समय किसी के हाथ नहीं आया
जो हमारे संघर्ष को चुनौती दे सके।

माना, छोटी-छोटी ऊँचाइयों पर पहुँचकर
अहंकार आ ही जाता है,
पर याद रखना—
विशाल वृक्ष हमेशा झुका ही रहता है,
और उसी में उसकी महानता होती है।

— अनंत धीश अमन

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हम उस खंडहर के हिस्से है,
जिसका कण कण ज्ञान में रमा है
हम उस इतिहास के किस्से है
जिसकी अखंडता में सारा विश्व समाया है।

हम उस पूण्य भूमि के बच्चे है
जहाँ पूर्वजों के प्रति समर्पण का भाव समा है,
आराजकता भ्रष्टाचार का समूल नाश करने वाले
हम चाणक्य हम चन्द्रगुप्त के हिस्से है।


- Anant Dhish Aman

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मेरे रास्ते सुनसान है
तन्हाई के आलम भी आलीशान है,
मैं डिगा नहीं और मुझे कोई डिगा सका नहीं
आशाओं से परिपूर्ण मेरा आसमान है
उसी से जगमग
मेरे जीवन का एक अलग हीं पहचान है।

- Anant Dhish Aman

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कब्ड्डी...
भारत मूल का है
कब्ड्डी खेल,
आओं मिलकर साथ खेल।
चुनौतियों और संघर्षों का
शारारिक फुर्ती के दक्षता का,
यह है अद्भुत खेल
आओं मिलकर साथ खेल।
एक सांस की गाथा है,
प्रतिस्पर्धा में फिर कहाँ कोई बाधा है।
माटी से सना तन
माटी में रमा मन,
हारने वाले में माटी की खुशबू
जीतने वाले में भी माटी की हीं खुशबू।
माटी का है यह अद्भुत खेल
आओं मिलकर साथ खेल।
- Anant Dhish Aman

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रिश्ते खंडहरों से
बनाए रखना, आसान कहाँ है
ढहती हुई संवेदनाओं से
आत्मस्पंदन की उम्मीद बनाए रखना,
आसान कहाँ है।

इतिहास से भविष्य का
हिसाब ढोए रखना आसान कहाँ है
वर्तमान की स्वाभाविक स्थिति से
साक्षात्कार करना, आसान कहाँ है।

अनंत धीश अमन

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तुम शक्ति बन हीं हर वक्त आती हो,
शव को शिव बनाती हो ।

बादलों की क्या विसात,
जो रोके सूरज के प्रकाश को।

- Anant Dhish Aman

हीरा हाथ लगने के पहले,
कोयला से हाथ काला हो हीं जाता है।
- Anant Dhish Aman