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जीत-हार तो चलती रहती है, अनजान राहों में इंसान अक्सर खुद को खोता रहता है। सच और अच्छाई पर जो अडिग रहे, वही असली बादशाह कहलाते हैं, वरना इस दुनिया में ज़्यादातर लोग गुलाम नज़र आते हैं। - Anant Dhish Aman
“गर सहारा हमें भी कोई मिल जाता तो हम भी संभल जाते, कि जिस साँचे में दिल कहता उसी साँचे में ढल जाते।” - Anant Dhish Aman
काल के कपाल पर भैरवी नृत्य-कला की एक संध्या अविराम हो, जहाँ लय में लिपटा सृजन और संहार का अद्भुत आयाम हो। — अनंत धीश अमन
मोहब्बत ही मेरा शहर है इशारा तेरा गर यदि मेरी ओर है, तो हाँ, मोहब्बत ही मेरा शहर है। — अनंत धीश अमन
मुसाफ़िर और शहर जब शहर की सड़कों पर मुसाफ़िर ठहरता है, तब जाकर वह असल मायने में किसी शहर से होकर गुजरता है। — अनंत धीश अमन
मुलाक़ात कौन कमबख़्त चाहता है, इंतज़ार मुकम्मल हो, कौन चाहता है। एक ऐसी भी आग हो, जो निरंतर जलती रहे, अँधेरे सफ़र को प्रेम से प्रकाशित करती रहे। जलती रहे, निरंतर जलती रहे, शाम-ए-शम्मा में थोड़ा-थोड़ा मुसाफ़िर पिघलता रहे। — अनंत धीश अमन
मेरी मोहब्बत कोई किताब नहीं, जो हर कोई पढ़ जाए। अंतस की ऐसी शीतलता है कि कोई महसूस भी करना चाहे तो वह पत्थर हो जाए। - Anant Dhish Aman
कुछ जोकर ऐसे भी होते हैं, जो हँसते तो दूसरों पर हैं, पर हँसी के पात्र स्वयं बन जाते हैं। जोकर होना भी आसान कहाँ है! जिसमें साहस हो स्वयं पर हँसने का और दूसरों का मन बहलाने का, वही असली जोकर कहलाता है। तुम जो खेल खेलते हो दूसरों पर, उसे हम हर रोज़ स्वयं पर खेलते हैं। फर्क बस इतना है कि अब तक वह समय किसी के हाथ नहीं आया जो हमारे संघर्ष को चुनौती दे सके। माना, छोटी-छोटी ऊँचाइयों पर पहुँचकर अहंकार आ ही जाता है, पर याद रखना— विशाल वृक्ष हमेशा झुका ही रहता है, और उसी में उसकी महानता होती है। — अनंत धीश अमन
हम उस खंडहर के हिस्से है, जिसका कण कण ज्ञान में रमा है हम उस इतिहास के किस्से है जिसकी अखंडता में सारा विश्व समाया है। हम उस पूण्य भूमि के बच्चे है जहाँ पूर्वजों के प्रति समर्पण का भाव समा है, आराजकता भ्रष्टाचार का समूल नाश करने वाले हम चाणक्य हम चन्द्रगुप्त के हिस्से है। - Anant Dhish Aman
मेरे रास्ते सुनसान है तन्हाई के आलम भी आलीशान है, मैं डिगा नहीं और मुझे कोई डिगा सका नहीं आशाओं से परिपूर्ण मेरा आसमान है उसी से जगमग मेरे जीवन का एक अलग हीं पहचान है। - Anant Dhish Aman
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