purana kabristan in Hindi Horror Stories by mahendr Kachariya books and stories PDF | पुराना कब्रिस्तान

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पुराना कब्रिस्तान

यह कोई काल्पनिक कहानी या फिल्म की कहानी नहीं है बल्कि आँखों देखा सच है! मैं कंपनी की ओर से पिकनिक पर गया हुआ था! पिकनिक शहर के बाहर एक रेसोर्ट में थी! पहले कंपनी के लोगों ने क्रिकेट और अन्य खेल खेले, उसके बाद रेसोर्ट में ही बने वाटर पार्क में चले गए ! वहां केवल कुछ लोगों को ही तैरना आता था, वो सब गहरे पानी मैं तैर रहे थे, बाकी सब कम गहरे पानी में तैर रहे थे !  

हम दोस्तों में एक शर्त लगी, पानी मे एक सिक्का फैका जायेगा और जो सब से कम समय में सिक्का ढून्ढ के लायेगा वह जीत जाएगा! सब ने बारी बारी से गोता लगाया मगर किसी को सिक्का मिला तक नहीं ! अगली बारी मेरी थी ! मैं भी कूद गया, लेकिन पानी में जाते ही दृश्य बदल गया !  

मैंने पाया कि जमीन 20 या 25 फीट दूर थी ! नीचे एक कब्रिस्तान दिखाई दे रहा था! वहाँ एक औरत खड़ी थी जो चेहरे और पोशाक से भारतीय नहीं लग रही थी ! उसके हाथ मे वही सिक्का था! वह अपना हाथ ऊपर की ओर करके खड़ी थी !ऐसा लग रहा था मानो की वो मुझे ही सिक्का देने के लिए खड़ी हो! 
मै जैसे उसके सम्मोहन में आगे बढता चला जा रहा था ! कुछ ही क्षणों में मै उसके करीब था और मैंने उसके हाथ से सिक्का ले लिया! जैसे ही मै वापस आने लगा, उसने मेरा हाथ पकड़ कर खींच लिया अब उसका और मेरा चेहरा आमने सामने था ! एक ही पल में उसका चेहरा बदल गया और एक भयानक रूप ले लिया ! उसकी आँखों से खून निकल रहा था और उसके चेहरे पर एक भयानक सी मुस्कान थी!
मेरे डर की कोई सीमा नहीं थी! मै डर के मारे कांप गया ! मैंने झटके से अपना हाथ छुड़ाया ! हाथ छुड़ाते ही कब्रिस्तान और महिला दोनों गायब हो गए और मैंने अपने आप को पूल में पाया!मुझे लगा जैसे कि मैं किसी सपने से जागा हूँ! मैं जल्दी से पानी से बाहर आ गया और दूर जाकर बैठ गया! मेरी साँस फूल रही थी ओर मै खांस रहा था! मेरे दोस्तों मेरी मदद करने लगे ! थोड़ी देर में मै सामान्य था!

हर कोई पूछ रहा था कि क्या हुआ ! मैने बस सर हिलाते हुए कुछ नहीं मे जवाब दिया! मैंने मुट्ठी खोल कर देखी तो सिक्का मेरे हाथ मे था ! ये देख मेरे दोस्त ख़ुशी से उछलने लगे और मुझे बधाई देने लगे! दोस्तों ने फिर से शर्त लगाई मगर मै फिर से पानी मे नहीं गया !  

शाम हो गयी थी ,हमारी बस जाने वाली थी, हम कुछ लोग सिगरेट पीने बाहर चले गए! मेरे दोस्त मजाक कर रहे थे ओर जोर जोर से हंस रहे थे !सामने खडे एक अंकल हमारी बातें गौर से सुन रहे थे और बीच बीच मे तड़का भी मार रहे थे !  

मै चुपचाप खड़ा था! मेरे एक दोस्त ने मजाक मे पूछा कि मै तब से चुप क्यों हूँ , क्या अन्दर कोई भूत देख लिया ? ये सुनकर अंकल ने मजाकिया लिहाज मे कहा कि अंग्रेजों के ज़माने मे यहाँ कब्रिस्तान हुआ करता था ,ज़रूर किसी गोरे का भूत देख लिया होगा ! ये सुनकर सब हसने लगे मगर मुझको यकीन हो गया था कि जो मैंने देखा वह मेरा वहम नहीं था !