Death in Hindi Mythological Stories by ishu books and stories PDF | मौत

The Author
Featured Books
Categories
Share

मौत

मौत की किताब और अतीत का पन्ना

साल 2026, रात के 9 बजे। दिल्ली की नेशनल लाइब्रेरी में सन्नाटा पसरा था। 

24 साल की डॉ. अनन्या, जो कि प्राचीन भारतीय इतिहास की एक होनहार रिसर्चर थी, एक 400 साल पुरानी पांडुलिपि (Manuscript) पढ़ रही थी। पन्नों पर धूल की महक थी और लिखावट बहुत बारीक। 

वह 'देवगढ़' रियासत के इतिहास का अनुवाद कर रही थी। अचानक उसकी उंगलियां एक पन्ने पर आकर रुक गईं। उस पन्ने पर लिखा था: 
*"राजकुमारी मृणालिनी... देवगढ़ की सबसे सुंदर लेकिन सबसे कमज़ोर राजकुमारी। अपने 18वें जन्मदिन के ठीक एक महीने बाद, अपनों के ही रचे एक षड्यंत्र में ज़हर खाने से उनकी मृत्यु हो गई।"*

अनन्या ने झल्लाहट में चश्मा उतारा और बड़बड़ाई, *"कितनी बेवकूफ थी ये राजकुमारी! किताब में साफ लिखा है कि उसकी सौतेली माँ और सेनापति रोज़ उसे मीठे दूध में थोड़ा-थोड़ा ज़हर दे रहे थे। अगर मैं उसकी जगह होती, तो ज़हर का प्याला उसी सेनापति के गले में उतार देती।"*

लाइब्रेरी बंद होने का समय हो गया था। अनन्या ने अपनी गाड़ी की चाबी उठाई और बाहर निकल गई। बाहर तेज़ बारिश हो रही थी। वह सड़क पार कर ही रही थी कि अचानक एक तेज़ रफ्तार ट्रक ने रेड लाइट तोड़ी और... सब कुछ सुन्न हो गया। 

चीखें, बारिश की आवाज़, और फिर... एक अंतहीन अंधेरा।

---

**"राजकुमारी... ओ मेरी बच्ची! आँखें खोलो!"**

अनन्या को लगा जैसे वह किसी गहरी नींद से उठी हो। उसका सिर चकरा रहा था। उसने धीरे-से अपनी आँखें खोलीं। उसे उम्मीद थी कि वह किसी अस्पताल के सफेद कमरे में होगी, जहाँ बीप-बीप करती मशीनें होंगी। 

लेकिन नहीं...

उसके सामने अस्पताल की छत नहीं, बल्कि लाल मखमली पर्दे और नक्काशीदार लकड़ी की छत थी। कमरे में लोबान और चंदन की तेज़ महक थी। रोशनी के लिए बल्ब नहीं, बल्कि दीवार पर पीतल के दीये जल रहे थे। 

"राजकुमारी! आप होश में आ गईं! वैद्य जी को बुलाओ!" एक अधेड़ उम्र की औरत, जिसने पुराने ज़माने की सूती साड़ी पहन रखी थी, अनन्या के पैरों के पास बैठकर रो रही थी। 

अनन्या का दिमाग काम नहीं कर रहा था। *राजकुमारी? वैद्य? ये औरत कौन है?*

उसने उठने की कोशिश की, लेकिन उसके शरीर में बिल्कुल भी ताकत नहीं थी। उसने अपने हाथों को देखा—ये उसके हाथ नहीं थे! उसके हाथ हमेशा कलम पकड़ने की वजह से सख्त रहते थे, लेकिन ये हाथ रुई की तरह कोमल, गोरे और भारी सोने के कंगन से लदे हुए थे। उसने जो कपड़े पहने थे, वे भारी रेशम और ज़री के थे।

*"पानी..."* अनन्या के सूखे गले से एक अजनबी, बहुत ही मीठी और कमज़ोर आवाज़ निकली। 

वह औरत दौड़कर सोने के गिलास में पानी ले आई। पानी पीते ही अनन्या की नज़र सामने रखे एक बड़े से पीतल के आईने पर पड़ी। आईने में जो चेहरा दिख रहा था, वह उसका नहीं था। वह चेहरा एकदम चांद जैसा खूबसूरत था, बड़ी-बड़ी डरी हुई आँखें और लंबा कद। 

अनन्या की सांसें अटक गईं। उसने यह चेहरा कहीं देखा था। 

*"तुम्हारा नाम क्या है?"* अनन्या ने कांपते हुए उस औरत से पूछा।

*"राजकुमारी, मैं आपकी दासी रूपा हूँ। क्या बुखार की वजह से आपकी याददाश्त चली गई?"* रूपा घबराकर रोने लगी। *"आज आपका 18वाँ जन्मदिन है और सुबह से आप तेज़ बुखार में तप रही थीं। बड़ी रानी साहिबा ने आपके लिए खास केसर वाला दूध भिजवाया था, जिसे पीते ही आप बेहोश हो गईं।"*

**18वाँ जन्मदिन... देवगढ़ रियासत... बड़ी रानी... केसर वाला दूध!**

अनन्या का दिमाग किसी सुपरकंप्यूटर की तरह दौड़ने लगा। लाइब्रेरी की वह पुरानी किताब उसकी आँखों के सामने घूमने लगी। 

*"आज तारीख क्या है?"* अनन्या ने लगभग चिल्लाते हुए पूछा। 
*"फाल्गुन महीने की पूर्णिमा, राजकुमारी,"* दासी ने डरते हुए जवाब दिया।

अनन्या गहरी सांस लेते हुए बिस्तर पर पीछे गिर गई। उसे सब समझ आ गया था। वह मर चुकी थी। और किसी अजीब चमत्कार या श्राप की वजह से, उसका पुनर्जन्म ठीक 400 साल पीछे उसी **'राजकुमारी मृणालिनी'** के शरीर में हुआ था, जिसके बारे में वह कुछ घंटे पहले पढ़ रही थी। 

इतिहास के पन्नों के अनुसार, आज से ठीक 30 दिन बाद उसे ज़हर देकर मार दिया जाएगा। आज सुबह का केसर वाला दूध उस ज़हर की पहली खुराक था!

अचानक, कमरे का भारी लकड़ी का दरवाज़ा खुला। एक बेहद सुंदर लेकिन चालाक दिखने वाली औरत अंदर आई। उसने भारी गहने पहने हुए थे। वह कोई और नहीं, मृणालिनी की सौतेली माँ, यानी बड़ी रानी थी।

*"ओह मेरी प्यारी बेटी, तुम होश में आ गईं? मैंने तुम्हारे लिए अपने हाथों से एक और प्याला दूध का बनवाया है,"* बड़ी रानी ने एक मीठी लेकिन ज़हरीली मुस्कान के साथ कहा। 

दासी रूपा पीछे हट गई, लेकिन अनन्या (जो अब मृणालिनी थी) की आँखों में अब वह पुरानी कमज़ोर राजकुमारी वाला डर नहीं था। उसकी आँखों में 2026 की एक स्मार्ट, निडर और इतिहास को उंगलियों पर नचाने वाली लड़की की चमक थी। 

मृणालिनी ने बिस्तर से उठकर बड़ी रानी की आँखों में सीधा देखा। उसके चेहरे पर एक बहुत ही रहस्यमयी और ठंडी मुस्कान थी।

*"इतिहास में लिखा था कि राजकुमारी बेवकूफ थी और मारी गई..."* मृणालिनी (अनन्या) ने मन ही मन सोचा, *"लेकिन बड़ी रानी साहिबा... आपको नहीं पता कि आपका पाला किस इंसान से पड़ा है। अब यह इतिहास मैं खुद लिखूंगी।"*