WAIT FOR WET - 3 in Hindi Love Stories by Ren Remag books and stories PDF | WAIT FOR WET - 3

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WAIT FOR WET - 3


आरी कोरबीन के दोनों कामों के लिए मान तो गया था, हालांकि वह ऐसा बिल्कुल नहीं था जो अपने स्वार्थ के लिए दूसरों को मुसीबत में डाल दे। लेकिन जब बात गरिमा पर आती, तो उसकी सोच थोड़ी-बहुत डगमगाने लगती थी। वह अभी भी अपने दिमाग को समझाने में लगा था कि वह जो भी कर रहा है, वो एनी और सुभश्री मैम की भलाई के लिए ही कर रहा है।
अगले दिन, दोपहर के ठीक तीन बज रहे थे। वैड अपने कमरे में लेटे हुए फ़ोन पर किसी से बात करने में मग्न था।
“बेबी तुम्हे पता भी है मै कितना प्यार करता हु तुमसे, मतलब मै क्या करू तू बता.... जान दे दूं तेरे लिए, बोल दे दूं जान।"
“नहीं नहीं... मुझे तूम्हारी जान नहीं चाहिए, मुझे बस तुम्हारी लॉयल्टी चाहिए। जो तुम मुझे दे रहे हो, दो साल हो चुके है हमे दूर हुए, लेकिन फिर भी तुम मुझे भूले नहीं।"
“और कभी भूलूंगा भी नहीं मेरी जान, मै तुमसे बहोत प्यार करता हु... और हा वैसे कल जो तुमने अपनी फोटोज भेजी थी ना वो थोड़ी ब्लूरी है, ठीके से दिख नहीं रही... क्या तुम फिर से भेजोगी..."
वैड ने अपनी मीठी बातों का जाल बुना। अभी सामने वाली लड़की जवाब देती, इतने में ही वैड के फ़ोन पर एक और कॉल आने लगा। स्क्रीन पर देखा तो वह नंबर आरी का था।
“बेबी एक मिनट मिनट के लिए होल्ड पे रखता हु हा, वो दोस्त का कॉल आरहा है... इम्पोर्टेन्ट है।"
इतना कहकर वैड ने जल्दबाज़ी में स्क्रीन पर एक ऑप्शन टैप किया और आरी का कॉल उठाते हुए बोला—
“हा बोल आरी, क्या तूने उन्हें मना लिया।"
“हा सुभश्री मैम मान चुकी है, वो आजसे चार बजे आएँगी तुझे ट्यूशन देने।"
आरी की यह बात सुनते ही वैड की खुशी का ठिकाना न रहा। वह उछल पड़ा—
“क्या बात कही तूने मेरे भाई, थैंक्स मतलब मै मुझे समझ नहीं आरहा मै तेरा कैसे सुक्रिया अदा करू.... लेकिन आज जो तूने किया हैना, उससे शुभश्री मैम की जिंदगी जरूर सुधर जाएगी। अगर उन्होंने मुझे आज ही अपना लिया तो मै आज ही उनसे शादी कर लूंगा, मै उनको और तकलीफ मे नहीं देख सकता।"
यहाँ आरी ने महज 'ठीक है' कहकर फ़ोन काट दिया। वैड का मुँह खुला का खुला रह गया और उसकी आँखें ऊपर दीवारों पर टिक गईं; न जाने यह अपनी खुशी बयां करने का कौन सा अनोखा तरीका था।
मगर तभी अचानक फ़ोन के स्पीकर से उसी लड़की की तीखी आवाज़ गूंजी—
“तूने फ़ोन होल्ड पे नहीं कांफ्रेंस कॉल पे रखा था चूतये... आज के बाद मुझे कभी फ़ोन मत करना, और मेरी सारी फोटोज जो तेरे पास है वो डिलीट होजानी चाहिए। वरना मै तुझे जेल भिजवा के रहूंगी, धोकेबाज भोस्डिका।"
इतना कहते ही कॉल कट हो गया। दरअसल, वैड ने अनजाने में होल्ड की जगह कॉन्फ़्रेंस कॉल का बटन दबा दिया था, जिससे उस लड़की ने उसकी सारी बातें सुन ली थीं। वैड जब तक कुछ समझ पाता, तब तक खेल खत्म हो चुका था। उसने दोबारा कॉल करने की कोशिश भी नहीं की क्योंकि उसके सिर पर अब सुभश्री मैम के आने का भूत सवार था, जिसमें महज एक घंटा बाकी था। वैड को बस अब उस एक घंटे के बीतने का इंतज़ार था।
तभी अचानक उसके कमरे की डोरबेल बज उठी। वह चौंक गया—
“ये क्या? सुभश्री मैम तो चार बजे आने वाली थी, तो ये अभी कौन आगया?"nu
मन ही मन यह सवाल करते हुए उसने जैसे ही दरवाज़ा खोला, सामने कोरबीन खड़ा था। उसके चेहरे पर हमेशा की तरह वही अजीब और शातिर हँसी थी। कोरबीन तुरंत अंदर दाखिल हुआ और वैड के बेड पर सीधे लेटकर ऊपर दीवारों को ताकने लगा। यह देख वैड ने चिढ़कर थोड़े गुस्से में कहा—
“तू यहा क्या कर रहा है चूतये? देख अभी एक घंटे मे मैम आरही है, तो तुझे यहा से निकलना होगा.... चल निकल।"
“ओय झाटू.... ये सब मेरी वज़ह सेही हो रहा है, वरना तेरे बस का तो कभी कुछ था ही नहीं। लेकिन खैर.... ये सब छोड़ आज आख़िरकार एनी मेरी होंगी।"
कोरबीन ने अहंकार से कहा और फिर से सीलिंग की तरफ देखने लगा। वैड उसके पास आया, बेड पर बैठा और थोड़े गंभीर स्वर में पूछने लगा—
“क्या तूने सचमे किसी डॉक्टर से बात की है? एनी के बारे मे।"
वैड के मुँह से यह भोला सवाल सुनते ही कोरबीन ठहाका मारकर हँसने लगा—
“क्या.... साले तू भी क्या आरी की तरह बात कर रहा है? तुझे सचमे लगा की मै उसका इलाज कराने लेजाऊंगा, नहीं.... बिल्कुल नहीं। आज मै उसके साथ वही करूँगा जो आज तू यहा करेगा।"
“लेकिन तू तो उससे प्यार करता हैना? तो तू जबरदस्ती...."
इसके आगे वैड कुछ बोल पाता, कोरबीन ने बीच में ही उसकी बात काट दी—
“क्या बकवास है ये सब प्यार व्यार रोना धोना.... हालांकि मुझे उससे प्यार है लेकिन अब बस बहोत हो गया... मुझे जल्द से जल्द अपना ड्रीम पूरा करना है, तुझे पता है मेरा ड्रीम क्या है..... एनी के साथ सोना।"
कोरबीन की ये घटिया बातें सुनकर वैड के चेहरे पर एक हल्की सी बेचैनी तैर गई। उसके भीतर से एक आवाज़ आई कि वह कोरबीन को रोक ले, मगर वह कुछ बोल नहीं पाया। उसके ज़हन में इस वक्त दो विचारों की जंग चल रही थी; एक पक्ष कह रहा था कि इस हैवानियत को अभी रोक दे, और दूसरा पक्ष याद दिला रहा था कि तू खुद कौन सा दूध का धुला है।
वैड अभी इसी उधेड़बुन में डूबा हुआ था कि तभी कोरबीन का फ़ोन बज उठा।
“हा भाई बोलो।"
कोरबीन ने कॉल अटेंड करते हुए कहा।
“कहा है तू अभी?"
दूसरी तरफ से भारी आवाज़ आई।
“अभी तो मै वैड के घर हु... लेकिन बात क्या है? तुमने फ़ोन क्यू किया?"
कोरबीन ने उत्सुकता से पूछा। अगले ही पल फ़ोन से खौफनाक चेतावनी मिली—
“सुनने मे आया है की, शहरो मे कोई सनकी आदमी घूम रहा है। हाथ मे कुल्हाडी लिए, जो उसके सामने आता ही वो उसे काट देता है.... अगर कोई ऐसा आदमी दिखे तो बस भाग जाना.... समझा बस भाग जाना."
“हा भाई मै समझ गया।"
कोरबीन ने जवाब दिया और कॉल डिस्कनेक्ट कर दिया। वैड को यह जानने की उत्सुकता हुई कि आखिर यह रहस्यमयी कॉल किसका था। उसने पूछा—
“तूने भाई कहा ना... तो क्या ये लियम था?"
“नहीं वो, ये तो लियम नहीं था... मतलब, साले मै तुझे नहीं नहीं बता सकता तुझे पता हैना , मेरा भाई और ब्लैक ऑफ़ वेट्स इन दो चीजों को छोडके तू मुझसे कुछ भी पूछा सकता है।"
कोरबीन ने चिढ़कर जवाब दिया। फिर थोड़ा रुककर वह आगे बोला—
“भाई ने बताया की शहर मे कोई सनकी घूम रहा है कुल्हाड़ी लेकर, इससे हमे पन्गा नहीं लेना है।"
यह कहकर कोरबीन फिर से दीवारों को घूरने लगा। तभी अचानक मुख्य दरवाज़े से किसी लड़की की आवाज़ आई—
“वैड सुभश्री मैम आयी है।"
यह सुनते ही वैड ने झटके से कोरबीन का हाथ पकड़कर उसे उठाया और हड़बड़ाहट में जाकर दरवाज़ा खोल दिया। बाहर वैड के ही उम्र की एक लड़की खड़ी थी और उसके बगल में लाल साड़ी पहने सुभश्री मैम खड़ी थीं।
“मैम आप तो चार बजे आने वाली थी ना, लेकिन कोई बात नहीं जल्द आये दुरुस्त आये.... आप अंदर आइये ना, और लियाना तू खड़ी क्या है जा मैम को लिए कुछ पिने को लिया।"
वैड ने अति-उत्साह में कहा। अभी लियाना कुछ बोलती, उससे पहले ही पीछे से कोरबीन बोल पड़ा—
“अरे तू लियाना को क्यू बोल रहा है? मै हु ना, मै अभी मैम के लिए मिल्क शेक लेकर आता हु।"
“अरे नहीं उसकी कोई जरूरत नहीं है। मुझे कुछ नहीं पीना, और वो मै थोड़ी जल्दी आगयी क्युकी शाम को जल्दी घर जाना हैना इसलिये।"
मैम ने विनम्रता से मना किया, मगर कोरबीन कहाँ मानने वाला था। वह ज़िद पर अड़ गया—
“अरे ऐसे कैसे कुछ नहीं लेंगी.... लेना तो पड़ेगा। आप पहली बार यहा आयी है, मिल्क शेक तो पीना ही होगा... मै अभी लेकर आता हु।"
मैम लगातार मना करती रहीं, मगर कोरबीन बिना उनकी सुने बाहर निकल गया और उसके पीछे-पीछे लियाना भी चली गई।
“आईये।"
वैड ने रास्ता दिया। सुभश्री मैम अंदर आईं और वैड ने उनके बैठने का इंतज़ाम किया। बैठते ही मैम ने प्रोफेशनल अंदाज़ में कहा—
“तो बताओ कहा से शुरू करे, पहले मुझे इतना बताओ के तुम्हे क्या क्या आता है... उसकी बाद मे डीसाइड करुँगी की तुम्हे किन किन चीजों पे ज्यादा फोकस करना चाहिए।"
“वो मैम... सच कहु तो मुझे कुछ नहीं आता।"
वैड की यह बेबाक बात सुनकर मैम की आँखें फटी की फटी रह गईं। उनके चेहरे पर एक हल्की सी, अविश्वास भरी मुस्कान आ गई।
“मुझे बताओगे तुम क्लास मे करते क्या हो?"
“मैम मै तो ध्यान देने की कोशिस करता हु... खास करके आपपे, सोरी... मतलब आपके लेक्चर मे लेकिन ये जो केमिस्ट्री हैना मेरे दिमाग़ के ऊपर से चली जाती है... आप ही बताइये मै क्या करू?"
वैड ने लाचारी का नाटक किया। मैम को भी अब थोड़ा-सा सिरदर्द महसूस होने लगा था क्योंकि वैड का बेस इतना कमज़ोर था कि उन्हें सब कुछ बिल्कुल शुरुआत से सिखाना पड़ना था।
“कोई बात नहीं... मै अपनी पूरी कोशिस करुँगी, लेकिन तुम्हे भी मेहनत करनी होंगी... सिर्फ मेरा सीखना काफी नहीं है, तुम्हे तभी ही सब समझ आएगा... जब तुम्हारे मन मे सचमे कुछ सिखने की चाह होंगी..."
मैम ने उसे समझाते हुए कहा और वैड को केमिस्ट्री की बुक लाने का इशारा किया। वैड जैसे ही बुक लेकर आया, मैम ने कुछ पन्ने पलटे। वह अभी कुछ समझाने ही वाली थीं कि तभी कोरबीन दोनों हाथों में मिल्क शेक के ग्लास लिए कमरे में दाखिल हुआ।
आते ही उसने एक ग्लास मैम की तरफ बढ़ा दिया। वह अब भी मना कर रही थीं, मगर कोरबीन ने जबरदस्ती ग्लास उनके हाथ में थमा दिया। दूसरा ग्लास उसने वैड को दिया और आहिस्ता से उसके कान में फुसफुसाया—
“मजे कर मेरे भाई...।"
इतना कहकर कोरबीन एक शैतानी मुस्कान के साथ कमरे से बाहर चला गया। वैड ने मैम को उकसाया—
“मैम.. अब वो लाया है तो पिहि लीजिये, वो होता है नाकि खाने पिने की चीजे वेस्ट नहीं करनी चाहिए।"
मैम ने भी बेमन से 'हाँ' कहा और घूंट भरने लगीं। मिल्क शेक खत्म होते ही उन्होंने दोबारा केमिस्ट्री की बुक पर ध्यान केंद्रित किया।
“तो वैड तुमने कहा की तुम्हे कुछ नहीं आता, वैसे इस हिसाब से तो तुम्हे कोई और कोर्स लेना चाहिए था... लेकिन अब, कोई बात नहीं चलो कोशिस करते है.... बेसिक से स्टार्ट करें तो..."
मैम ने पढ़ाना शुरू किया, लेकिन वैड का ध्यान पढ़ाई पर रत्ती भर भी नहीं था। वह मदहोश होकर मैम के खूबसूरत चेहरे को निहारने में खोया हुआ था। वह इस कदर खोया था कि अपनी पलकें तक नहीं झपका रहा था।
तभी अचानक उसने गौर किया कि मैम का सिर हल्के से डगमगा रहा है। उनकी आँखें बार-बार बंद होने लगी थीं। यह देख वैड घबराकर बोला—
“मैम,... सुभश्री मैम... आप ठीक हैना।"
“हा... वो हा मै ठीक हु, या सायद नहीं।"
बेहद मुश्किल से इतने शब्द कहकर मैम सामने की ओर गिरने लगीं, मगर ऐन वक्त पर वैड ने आगे बढ़कर उन्हें संभाल लिया। वैड इस बात से पूरी तरह अनजान था कि आखिर मैम को अचानक क्या हो गया है। उसने घबराकर पुकारा—
“मैम... मैम..."
जिसका सुभश्री मैम ने कोई जवाब नहीं दिया; वो जवाब देतीं भी कैसे, वो तो बेहोश हो चुकी थीं। तभी वैड की नज़र वहाँ रखे खाली मिल्क शेक के ग्लास पर पड़ी, जिसे कुछ देर पहले मैम ने खाली किया था। वैड का माथा ठनका—
“ये तूने क्यू किया कोरबीन?"
वैड मन ही मन खौफ से कांप उठा।