Magic Seeds in Hindi Children Stories by Elina Debbarma books and stories PDF | जादुई बीज

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जादुई बीज


एक छोटे से गाँव में आरव नाम का एक दस साल का लड़का रहता था। वह बहुत जिज्ञासु और मेहनती था। उसे पेड़-पौधों से बहुत प्यार था। हर दिन वह अपने घर के पीछे बने छोटे बगीचे में पौधों को पानी देता और उनकी देखभाल करता।

एक दिन आरव स्कूल से लौट रहा था। रास्ते में उसे एक बूढ़े बाबा मिले। बाबा बहुत थके हुए लग रहे थे। आरव ने तुरंत अपनी पानी की बोतल उन्हें दे दी। बाबा ने पानी पिया और मुस्कुराते हुए कहा, "बेटा, तुम्हारा दिल बहुत अच्छा है। मैं तुम्हें यह बीज देता हूँ। इसकी अच्छी तरह देखभाल करना।"

आरव ने देखा कि वह एक चमकदार सुनहरा बीज था। उसने बाबा को धन्यवाद दिया और घर आ गया। अगले ही दिन उसने उस बीज को अपने बगीचे में लगा दिया। वह रोज़ उसे पानी देता और उससे बातें भी करता।

कुछ दिनों बाद उस बीज से एक छोटा सा पौधा निकला। लेकिन यह कोई साधारण पौधा नहीं था। उसकी पत्तियाँ रात में हल्की नीली रोशनी बिखेरती थीं। आरव यह देखकर हैरान रह गया। उसने किसी को इसके बारे में नहीं बताया और चुपचाप उसकी देखभाल करता रहा।

धीरे-धीरे पौधा बड़ा होकर एक सुंदर पेड़ बन गया। एक रात आरव ने देखा कि पेड़ पर एक सुनहरा फल लगा है। जब फल पक गया तो वह अपने आप नीचे गिर गया। आरव ने उसे उठाया। जैसे ही उसने फल को छुआ, उसके सामने एक छोटी परी प्रकट हुई।

परी ने कहा, "मैं इस जादुई पेड़ की रक्षक हूँ। तुम्हारी दयालुता और मेहनत से यह पेड़ बड़ा हुआ है। अब यह पेड़ गाँव के लोगों की मदद करेगा।"

अगली सुबह गाँव में एक बड़ी समस्या आ गई। कई दिनों से बारिश नहीं हुई थी। खेत सूखने लगे थे और किसानों की चिंता बढ़ती जा रही थी। आरव उदास था। वह जादुई पेड़ के पास गया और बोला, "काश हमारे गाँव में बारिश हो जाए।"

तभी पेड़ की पत्तियाँ चमकने लगीं। कुछ ही देर में आसमान में बादल छा गए और हल्की बारिश शुरू हो गई। गाँव वाले खुशी से झूम उठे। खेतों को पानी मिल गया और फसल बच गई।

लेकिन आरव ने इस चमत्कार का श्रेय खुद नहीं लिया। उसने सभी से कहा कि हमें प्रकृति की रक्षा करनी चाहिए और पेड़ लगाने चाहिए। गाँव के लोग उसकी बात से प्रभावित हुए। उन्होंने मिलकर सैकड़ों नए पौधे लगाए।

समय बीतता गया। गाँव हरा-भरा और सुंदर बन गया। पक्षियों का कलरव सुनाई देने लगा और वातावरण स्वच्छ हो गया। जादुई पेड़ भी गाँव के बीचों-बीच खड़ा रहा, मानो सभी को प्रकृति से प्रेम करने का संदेश दे रहा हो।

एक दिन वही बूढ़े बाबा फिर गाँव आए। उन्होंने मुस्कुराकर कहा, "आरव, असली जादू बीज में नहीं था। असली जादू तुम्हारी दयालुता, मेहनत और प्रकृति के प्रति प्रेम में था।"

आरव उनकी बात समझ गया। उसने सीखा कि अच्छे काम हमेशा अच्छे परिणाम लाते हैं। उस दिन से वह और भी अधिक उत्साह के साथ पेड़-पौधों की देखभाल करने लगा और दूसरों को भी पर्यावरण बचाने के लिए प्रेरित करने लगा।

शिक्षा: दयालुता, मेहनत और प्रकृति से प्रेम जीवन को सुंदर बनाते हैं। छोटे-छोटे अच्छे कार्य भी बड़े बदलाव ला सकते हैं।