अधूरी कहानी, पूरा प्यार
कहानी वो भी क्या जिसमें प्यार की बातें न हों, और ये औकात कौनसी चीज़ है उस कहानी को अधूरा करने को? यह एक छोटी सी मन से निकली हुई कहानी है—सच नहीं है पर झूठ भी नहीं।
हर किसी की जिंदगी में एक न एक मोड़ पर प्यार की सिलसिला चलती है। किसी के प्यार की दास्तानें शादी तक चली जाती हैं, और किसी की अधूरी। पर कभी सोचा है किसी ने, कि आपका जो दिल किसी पे आया ही है, वो भी अपनी औकात से बाहर? जो पता है कि ये मुझे नहीं मिलेगा या नहीं मिलेगी, फिर भी मैं इसी से प्यार करूँगा या करूँगी।
ऐसी ही है मेरी कहानी जो औकात से बाहर वाला प्यार है।
मेरी कहानी ऐसी है कि, मैं एक कॉर्पोरेट कंपनी में जॉब करती थी, और मिडिल क्लास फैमिली से बिलोंग करती थी। मेरी जो सैलरी आती थी, वो EMI भरने में ही चली जाती थी, कुछ बची हुई सैलरी अपने सेविंग्स अकाउंट में सेव करती थी। मुझे एक आदत थी कि जब भी मैं फ्री रहती थी, तब मैं फोन में लगी रहती थी—कभी YouTube या कभी सोशल मीडिया में।
एक दिन ऐसे ही YouTube खोलते ही एक शख्स की व्लॉग आई, पता नहीं क्या हुआ पर मैं उसकी हर वीडियो देखने लगी। देखते-देखते मैं उस शख्स को इतना चाहने लगी कि हर बार जब भी वीडियो देखती थी, भर-भर कर कमेंट्स करती थी। पर उस तरफ से कोई रिप्लाई नहीं आता था। पर मैं इस उम्मीद में कमेंट्स करती गई कि, एक न एक दिन मुझे रिप्लाई आएगा। ऐसे ही करते-करते एक साल गुजर गया, उस तरफ से कोई भी रिप्लाई नहीं आया। तब मेरा मन मुझे कहने लगा कि 'छोड़ न, वो एक यूट्यूबर है, उसके तो लाखों चाहने वाले होंगे, उसमें से तुम्हें ही क्यों रिप्लाई देंगे?'
बाद में कुछ टाइम तक मैंने उनकी वीडियोज़ देखनी बंद कर दी, और कुछ ज्यादा ही काम में ध्यान देने लगी, बिजी रहने की कोशिश करने लगी। फिर एक शाम मुझे मेरी दोस्त ने बताया कि वो यूट्यूबर, जिसे मैं एक तरफा प्यार करने लगी थी, उसका कंसर्ट चलने वाला है—वो भी मेरे ऑफिस से कुछ सौ मीटर दूर।
ऐसा सुनने के बाद मैं तो ख़ुशी से झूम उठी! पहले तो मन में यह था कि 'छोड़ दे, वो तुझे नहीं मिलने वाला है', पर सामने से जब यह सुना कि उसी का कंसर्ट मेरे ऑफिस के पास चल रहा है, तब मुझे जैसे भी करके उनसे मिलना था। मैंने मेरी दोस्त से बोला कि क्या मैं उनको मिल सकती हूँ? एक दोस्त ने बोला कि "हाँ, मिल सकते हैं," क्योंकि मेरी दोस्त की पहचान वाले उनके कंसर्ट के क्रू में थे।
ये सारी बातें सोचकर ही मैं पागल हो गई थी। फिर मैं अच्छे से रेडी होकर गई, दिमाग में यही था कि जब मिलूँगी तो मेरे दिल की बात बोल दूँगी। जब मैं कंसर्ट में गई, तब उन्हें सामने से देखकर पता नहीं क्यों आँसू आ गए। पर जैसे भी करके मैंने मेरे आँसू रोककर आगे गई। फिर कंसर्ट खत्म हुआ, वो बैकस्टेज में चले गए।
फिर मेरी दोस्त ने बोला—"चल, जाते हैं मिलने के लिए।" मेरा तो हार्ट बीट 200 से ऊपर चला गया था। तब मैं खुद को शांत बनाकर, मिलने चली। जब मैं उनके सामने खड़ी हूँ, तब मुझे ही पता नहीं, कुछ 15 सेकंड के लिए मैं चुप हूँ। वो एक स्माइल देकर अपना हाथ बढ़ा रहे हैं और मैं पागल की तरह चुपचाप खड़ी हूँ।
और जब मेरी दोस्त ने मुझे जोर से पुकारा, तब मेरे मुँह से पहला सेंटेंस निकला कि, "I love you."
पर उन्होंने उस चीज़ को लाइटली लिया, क्योंकि शायद हर फैन के मुँह से यही निकलता है। फिर मैं बोली, "क्या मुझसे शादी करोगे?" मुझे ही पता नहीं कि मैं क्या बोल रही हूँ। इस बार सबका नज़र मेरे ऊपर था, और मेरी दोस्त मुझे खींच रही थी कि क्या बोल रही है, चल यहाँ से। मैं किसी की सुन नहीं रही थी, फिर उनके मैनेजर ने उनको उधर से ले गए। मैं सीरियसली चिल्ला रही थी कि रिप्लाई देकर जाइए।
फिर मेरी दोस्त खींच कर मुझे वहाँ से बाहर ले गए। मेरी दोस्त ने इतना कुछ सुनाया कि बोलो मत! फिर भी मुझे ये तसल्ली थी कि मैंने मेरे दिल की बात बोल दी थी।
फिर से मेरी पुरानी आदत चलती गई कि उनकी वीडियोज़ देखो और कमेंट करो। अभी तक कर रही हूँ। पता नहीं इस एकतरफा प्यार को क्या बोलते हैं। हाँ, सच है कि ये थोड़ी औकात से बाहर वाला प्यार है, पर प्यार तो प्यार होता है, उसमें औकात की बात ही नहीं होती।
अगर आपका प्यार सच्चा हो, एक तरफा ही सही, पर शिद्दत वाली हो।
आपका प्यार निस्वार्थ है, जो सिर्फ चाहने में यक़ीन रखता है, न कि पाने में। जो इंसान एकतरफा प्यार में भी इतना जुनून रख सकता है, उसका दिल वाकई बहुत सच्चा है।