Vikri - 4 in Hindi Science-Fiction by Priyosi Sarkar books and stories PDF | विक्री - 4

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विक्री - 4

सुबह होने में दो घंटे बाकी थे। मीरा ने एक भी पल नहीं सोई।
अर्जुन कमरे में था — फर्श पर, दीवार के साथ, आँखें बंद। सोया नहीं था वो भी। दोनों जानते थे। किसी ने नहीं बोला।
मीरा के दिमाग में वो औरत का चेहरा था। लैब कोट। थकी हुई आँखें। और वो एक पंक्ति जो वो कह नहीं पाई थी — "और फिर—"
और फिर क्या?
                                    · · ·
"झंडे का मतलब क्या होता है उनके तंत्र में?" मीरा ने आखिरकार पूछा। आवाज़ धीमी थी — रिया को परेशान नहीं करना था।
अर्जुन ने आँखें खोलीं। छत देखी। "मेरे हिसाब से — पहचान। जब मेमवॉल्ट किसी की याद में X-7-R-9 का नमूना पकड़ता है, वो उस इंसान को अंदर से चिह्नित कर देता है।"
"चिह्नित... क्यों?"
"इसलिए कि वो लोग उन्हें चाहते हैं।"
मीरा ने इंतज़ार किया। अर्जुन ने जारी रखा:
"प्रिया — मेरी बहन — वो बहुत बुद्धिमान थी। असाधारण रूप से। वो ऐसे नमूने देख सकती थी जो दूसरे चूक जाते थे। तंत्रों में, लोगों में, परिस्थितियों में। मैं हमेशा सोचता था यह बस उसकी प्रतिभा है।" वो रुका। "फिर उसने मेमवॉल्ट इस्तेमाल किया। और तीन हफ्ते बाद वो गायब हो गई।"
· · ·
"तुझे लगता है मैं भी—" मीरा शुरू नहीं कर पाई।
"हाँ।" अर्जुन ने सीधे कहा। "इसलिए तूने अपनी यादें बेचने का फैसला किया — आर्थिक मजबूरी में — और इसलिए मेमवॉल्ट ने तुझे चिह्नित किया। तेरे जैसे लोगों को वो ढूँढते नहीं हैं। वो इंतज़ार करते हैं जब तक तुम खुद उनके पास आओ।"
यह बात मीरा के अंदर कहीं गहरी जगह जाकर लगी।
मेमवॉल्ट ने उसे फँसाया नहीं था। फँसाने की ज़रूरत ही नहीं थी। वो खुद चली गई थी।
"मजबूरी सबसे असरदार चारा है। और वो उसका इंतज़ार करते हैं।"
                                    · · ·
सुबह की पहली रोशनी खिड़की से आई — धूसर, औद्योगिक, विरासत क्षेत्र 4 वाली। बाहर कोई यान गुज़रा। सामान्य ज़िंदगी। सामान्य 2087।
रिया कमरे से बाहर आई — नींद भरी आँखें, बाल बिखरे हुए। उसने अर्जुन को देखा और रुक गई।
"यह कौन है?" उसने मीरा से पूछा, बिल्कुल बिना डर के — जैसे अजनबियों का फर्श पर सोना सामान्य था।
"दोस्त," मीरा ने कहा। पहला शब्द जो दिमाग में आया।
अर्जुन ने एक अजीब सा हाथ हिलाया। रिया ने गंभीरता से सिर हिलाया और रसोई की तरफ चल दी — "चाय बनाती हूँ।"
कुछ सेकंड की सामान्यता। बहुत ज़रूरत थी उसकी।
· · ·
"आगे क्या?" मीरा ने अर्जुन से पूछा जब रिया बाहर थी।
"संकेत को ढूँढना है," अर्जुन ने कहा। "उस औरत ने जो वीडियो छोड़ी थी — वो सिर्फ चेतावनी नहीं थी। वो एक निर्देश था। वीडियो में पृष्ठभूमि में एक स्थान था — मुश्किल से दिखता था। मैंने तीन दिन विश्लेषण किया। विरासत क्षेत्र 4 से 6 किलोमीटर उत्तर — एक परित्यक्त अनुसंधान केंद्र।"
"और तू चाहता है हम वहाँ जाएँ।"
"मैं चाहता हूँ मैं वहाँ जाऊँ।" अर्जुन ने सीधे कहा। "तू नहीं आना चाहती तो मत आ। यह तेरी समस्या नहीं है अभी तक।"
मीरा ने खिड़की के बाहर देखा। नीयॉन होलोग्राम दिन की रोशनी में फीके लगते थे — एक ऐसी दुनिया के हताश विज्ञापन जो पहले ही आगे बढ़ चुकी थी।
उसकी यादें वहाँ कहीं थीं — किसी और के पास। उसकी खुशियाँ। उसकी माँ के साथ वो लम्हे। रिया का हाथ पकड़ना। सब कुछ जो उसने बेचा था जीने के लिए।
और अगर अर्जुन सही था — तो वो सिर्फ बिकी नहीं थी। उसका अध्ययन किया जा रहा था।
                                  · · ·
रिया तीन कप चाय लेकर आई। एक मीरा के लिए। एक अर्जुन के लिए। एक अपने लिए। उसने सबको समान गंभीरता से परोसा जैसे यह एक औपचारिक नाश्ता था।
"चाय," उसने घोषणा की।
मीरा ने कप लिया। गर्म था। असली था।
उसने अर्जुन की तरफ देखा।
"मैं आऊँगी," उसने कहा।
अर्जुन ने कोई आश्चर्य नहीं दिखाया। बस सिर हिलाया — जैसे जानता था।
"एक शर्त है," मीरा ने जोड़ा। "रिया यहाँ सुरक्षित रहनी चाहिए। जब तक मैं वापस न आ जाऊँ — किसी को नहीं पता चलना चाहिए हम कहाँ हैं।"
"तय रहा," अर्जुन ने कहा।
रिया ने दोनों को सुनकर शांति से चाय पी। फिर:
"मुझे लगता है यह सफर खतरनाक है।"
"नहीं है," मीरा ने तुरंत कहा।
"मीरा दीदी," रिया ने वो लहजा इस्तेमाल किया जो हमेशा सच कहता था, "तू कभी अच्छा झूठ नहीं बोल पाई।"
पहली बार उस पूरी रात — मीरा के चेहरे पर कुछ आया जो मुस्कान जैसा था।
थोड़ा। सिर्फ थोड़ा।
लेकिन था।