"अकीरा! "तुम एसा कैसे कर सकती हो, तुम्हारी सारी कामयाबी और आज जो कुछ भी तुम्हारे पास है, वो सब मेरी वजह से है। मैंने तुम्हे ताकतवर बनाया। लेकिन मुझे कभी उम्मीद नहीं थी कि तुम मुझे धोखा दोगी!"
एक बड़े और शानदार हॉल में, बैंगनी पोशाक पहने एक जवान लड़का, थोड़ी दूर खड़ी एक बेहद खूबसूरत लड़की को देखकर अफसोस बोल रहा था। उसकी आवाज में बेबसी और दुख था।
उस लड़की का चैहरा बेहद सुंदर और नाजुक था। लेकिन इस वक्त उसके चेहरे पर सिर्फ तिरस्कार था, और उसने अपनी नाराजगी जरा भी नहीं छुपाई।
"आरभ, हाँ, तुमने मुझे बचाया और मेरी देखभाल की। "तो क्या? "क्या मुझे इसके लिए हमेशा तुम्हारा एहसान मानना पड़ेगा, हमेशा शुक्रगुजार रहना पड़ेगा?"
"कितनी बेवकूफी भरी बात है, आरभ, तुम सच में एक काबिल हकीम हो, लेकिन बस इतना ही। तुम सिर्फ एक 'हकीम' हो। तुममें साधना करने की कोई काबिलियत नहीं है और इस जिंदगी में तुम कभी भी एक ताकतवर योद्धा नहीं बन सकते। आखिरकार तुम एक निकम्मे और बेकार इंसान हो। काबिल हकीम और ताकतवर योद्धा में बहुत बड़ा फर्क होता है। तुम्हारी किस्मत मेरे पैरों तले कुचले जाने की है। अब तुम्हारी मेरे लिए कोई कीमत नहीं, इसलिए तुम्हारी सारी दौलत और दवा के नुस्खे अब मेरे होंगे। और तुम्हें अब मर जाना चाहिए।"
जैसे ही अकीरा ने हाथ हिलाया, हॉल में तेज रोशनी भर गई और आरभ बेबस होकर अपनी किस्मत स्वीकार करने पर मजबूर हो गया। दिल में नफरत लिए वो मर गया।
और इस तरह, एक पीढ़ी में आने वाला काबिल हकीम आरभ, दुनिया से चला गया।
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उत्तरी पहाड़ी इलाका, दूर-दराज का एक परिवार — राजबंशी परिवार।
एक पुराने कमरे में दो जबान औरतों के रोने की आवाज आ रही थी। एक थोड़ी बड़ी लड़की एक जबान लड़के को गोद में लिए हुए थी। लड़के का चैहरा पीला पड़ चूका था, उसकी आँखों से आँसू बह रहे थे और उसका दुखी चेहरा देखकर किसी का भी दिल टूट जाता।
लड़की चिल्लाई,
"मेरे भाई आरभ को बर्मा परिवार के उन दो कमीनो ने आत्महत्या करने पर मजबूर किया, मे रिभा, उन्हें कभी माफ नहीं करूँगी,
गुस्से और नफरत में चिल्लाते हुए उसे पता नहीं चला कि उसके मरे हुए भाई की उँगलियाँ हल्के से हिली।
"कहाँ... कहाँ हूँ मैं?" आरभ के दिमाग में हजारों यादें उभरने लगीं।
क्या मे मर नहीं चुका था? जैसे ही आरभ अपने खयालो मे खोया हुआ था, उसके सर मे दर्द उठने लगा।
इस शरीर के असली मालिक की ढेर सारी यादें एकदम से उसके दिमाग में भर गईं।
"जिसने आत्महत्या की वो भी आरभ नाम का था? मेरा नाम भी उसी जैसा है?" आरभ ने जल्दी से इस शरीर के असली मालिक की यादें अपने में समा लीं।
अब वो उत्तरी पहाड़ी इलाके की एक दूर-दराज इलाके में था।
अपनी पिछली जिंदगी में वो कभी ऐसे बेकार इलाके में नहीं आता।
इस शरीर का असली मालिक, आरभ, पिछली जिंदगी में हकीम था। लेकिन उसकी काबिलियत बेहद कमजोर था और स्वभाव भी आलसी था, आगे बढ़ने की कोई इच्छा नहीं थी। जुए में हारकर उसने अपनी बड़ी बहन की आधी से ज्यादा दौलत गँवा दी और शर्मिंदगी में फाँसी लगा ली।
खास बात ये थी कि जब वो मरा तब सिर्फ तेरह साल का था।
"इस आरभ पर अफसोस है। उसने साधना जैसी कमाल की काबिलियत होते हुए भी उसे बेकार कर दिया। लेकिन शायद मेरा यहाँ जन्म लेना किस्मत का खेल है।"
वो कुछ और सोचना चाहता था, लेकिन अचानक साँस लेने में तकलीफ हुई। उसने हल्के से आँखें खोली तो देखा कि उसकी बहन रिभा, उसे जकड़े हुए रो रही थी।
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इस वक्त रिभा गुस्से में चिल्लाई,
"बर्मा परिवार, मैं अपने भाई की जान का बदला लूँगी।
"छोटी मालकिन, छोटी मालकिन, जल्दबाजी मत करना। राजबंशी परिवार के मुखिया भी बर्मा परिवार से नहीं उलझते। आप अकेले क्या कर लेंगी, नौकरानी ने घबराकर रोकने की कोशिश की।
रिभा ने दाँत पीसते हुए कहाँ,
"मेरा सिर्फ एक ही भाई था, और उसे उन दो जानवरों ने मार डाला! मैं उसकी बड़ी बहन हूँ, अगर मैं बदला नहीं लूँगी तो कौन लेगा?"
आरभ, जो रिभा की गोद में था, डर गया कि उसकी बहन जल्दबाजी मे कुछ गलाती न कर दे। उसने दम घुटने जैसी आवाज निकाली।
अगर वो नहीं चिल्लाता तो रिभा उसे दबाकर मार डालती, हालाँकि वो बिल्कुल ठीक था।
रिभा अभी गुस्से में थी, लेकिन उसे उम्मीद नहीं थी कि उसका मरा हुआ भाई अचानक हिलने लगेगा।
"आरभ, तू ठीक है न? बहन को डरा मत," रिभा की आँखों में खुशी झलक उठी।
रिभा का चिंतित चेहरा देखकर आरभ ने मन ही मन आह भरते हुए बोला,
"दीदी, मैं ठीक हूँ"
"छोटे मास्टर, आप सच में ठीक हैं?" नौकरानी खुशी से उछल पड़ी।
रिभा ने आरभ का हाथ जोर से पकड़ा और डाँटा,
"आरभ, फिर कभी एसा करने की सोचना भी मत। अगर तू ऐसा करेगा तो मैं अभी बर्मा परिवार से लड़ने जाती हूँ।"
"नहीं दीदी, मत जाना!" आरभ सच में डर गया।
उसने गहराई से रिभा को देखा और पुराने आरभ की यदो को याद करने लगी।
उसके सामने खड़ी लड़की का नाम था रिभा। अठारह साल की, आरभ से पाँच साल बड़ी। वो अराजक जंगल के सौ कबीलों में मशहूर थी, नई पीढ़ी की तीन सबसे खूबसूरत लड़कियों में से एक। लेकिन उसकी खूबसूरती से ज्यादा मशहूर था उसका गुस्सा।
रिभा बेहद तेज और आक्रामक स्वभाव की थी। एक बार मन बना लेती तो बेहद जिद्दी हो जाती। कुछ लोग उसे बेवकूफ समझते, लेकिन वो दरअसल बहुत समझदार थी, जबरदस्त काबिलियत वाली, राजबंशी परिवार की लड़कियों में नंबर वन जीनियस।
लेकिन उसकी समझदारी उसे सीधे बोलने से नहीं रोकती थी, मन में जो आया बोल देती थी।
इसीलिए कोई उसे छेड़ने की हिम्मत नहीं करता था।
सबसे जरूरी बात, रिभा अपने छोटे भाई आरभ की बेहद परवाह करती थी।
कहा जाता है कि जब आरभ तीन साल का था तो एक परिवार के पाले हुए जादुई जानवर ने उसे काट लिया था। आठ साल की रिभा चाकू लेकर उस परिवार में घुस गई और जानवर को मारने की धमकी देने लगी। उस वक्त राजबंशी परिवार के बड़ों ने उसे रोककर घर वापस लाया था।
लेकिन रिभा ने बदला नहीं छोड़ा। कुछ साल बाद जब मौका मिला तो उसने उस जानवर को मार डाला। और लाश पर नोट लिखा: "जो मेरे भाई को सताएगा वो मरेगा — गुनहगार रिभा।"
उस वक्त रिभा की लिखाई अच्छी नहीं थी और "जानवर" की जगह उसने "आदमी" लिख दिया। ऊपर से खुद को "गुनहगार" लिखने पर उस परिवार के लोग बहुत गुस्सा हुए और राजबंशी परिवार को लगातार परेशान करते रहे।
ये सब याद करके आरभ समझ गया कि उसकी बहन रिभा वाकई उसके लिए जान तक दे सकती है, चाहे बर्मा परिवार कितना भी ताकतवर क्यों न हो। बर्मा परिवार सौ कबीलों में दस सबसे ताकतवर कबीलों में से एक था, कोई उनसे टकराने की हिम्मत नहीं करता था। लेकिन रिभा की जिद के आगे सब बेकार था।
ये सोचकर आरभ ने आह भरी।
"दीदी, तुम दोनों पहले बाहर जाओ। मैं थोड़ी देर अकेला रहना चाहता हूँ।"
"छोटे, कभी फिर से हार मानने की सोचना भी मत। अगर तूने ऐसा किया तो हम दोनों कैसे रहेंगे?" रिभा टूटे दिल से बोली।
आरभ हँसा।
"दीदी, चिंता मत करो। मे अब कभी ऐसा नहीं करूँगा। कम से कम तुम्हें इतना दुखी देखना मुझसे बर्दाश्त नहीं होता।"
आरभ की आँखों में आत्महत्या का कोई इरादा न देखकर रिभा थोड़ा शांत होते हुए बोली,
"ठीक है मे जाती हूँ। रितिका बाहर इंतजार करेगी, जरूरत पड़े तो बुला लेना।"
रितिका, रिभा की नौकरानी थी और आगे चलकर आरभ की सेविका बनने वाली थी। वो दोनों की बेहद आज्ञाकारी थी। सिर्फ पंद्रह साल की उम्र में वो बेहद खूबसूरत थी।
खूबसूरत होने की वजह से राजबंशी परिवार में कई लोग उसके पीछे पड़े थे। लेकिन वो वफादार थी और सच में आरभ की सेविका बनने को तैयार थी।
रिभा की बात सुनकर रितिका बोली,
"छोटे मास्टर, मैं बाहर आपका इंतजार करूँगी। जरूरत पड़े तो बुला लीजिएगा।"
"ठीक है आरभ ने सिर हिलाकर हामी भरी।
जल्दी ही रिभा और रितिका बाहर चली गईं।
आखिरकार आरभ ने गहरी साँस ली, सारी यादें याद कीं और अपने नए शरीर को परखा।
"मुझे उम्मीद नहीं थी कि भगवान मुझे अकेला नहीं छोड़ेगा। इस आरभ ने अपनी शानदार साधना की काबिलियत को बेकार कर दिया, कभी साधना ही नहीं की। कितने अफसोस की बात है। मे हमेशा एक ताकतवर योद्धा बनना चाहता था, लेकिन कभी एसा नही कर पया।
"पुराने आरभ की साधना की प्रतिभा सबसे अच्छी नहीं, लेकिन बुरी भी नही थी। पिछली जिंदगी में मैं साधना नहीं कर सका, लेकिन जीनियसों को तैयार करने में सबसे माहिर था। अब मेरे पास ये शरीर है और साथ में पिछली जिंदगी का सारा तजुर्बा भी। आरभ की प्रतिभा सबसे अच्छी भले न हो, लेकिन काफी है।"
पुराना आरभ, राजबंशी परिवार का एक नौजवान था जो साधना में बिल्कुल निकम्मा माना जाता था। लेकिन सच में उसके पास अच्छी साधना करने की क्षमता थी, बस उसने कभी उसे इस्तेमाल ही नहीं किया।
आरभ ने आँखें बंद कीं।
"अकीरा, मैंने तुम्हें अपनी पीढ़ी का सबसे ताकतवर जीनियस बनाया था। जैसे मैंने तुम्हें तैयार किया, वैसे ही मैं खुद को भी तैयार कर सकता हूँ।"
उसने पिछली जिंदगी में अकीरा को पूरी मेहनत से तैयार किया था, लेकिन जानबूझकर एक कमी छोड़ दी थी। उसी कमी की वजह से वो ज्यादा ताकतवर नहीं बन सकी।
अब आरभ के दिल में नई उम्मीद जाग गई।
"मैं दवाइयाँ बनाने में एक जीनियस था। मैंने बहुत सारे बेहतरीन नुस्खे और गोलिया बनाइ, लेकिन हमेशा एक कमी रही — साधना की। मैं कितना भी बड़ा हकीम क्यों न था, फिर भी एक साधारण इंसान था जिसे कोई भी मार सकता था।"
"लेकिन अब सब बदल गया है, इस नए शरीर में, मे साधना कर सकता हूँ। अब मैं न सिर्फ एक महान हकीम बनूँगा, बल्कि साधना में भी सबसे ऊँचे स्तर तक पहुँचूँगा!"
पिछली जिंदगी में आरभ साधना नही कर पाया था, लेकिन उसे जीनियस लोगों को तैयार करना पसंद था। इसलिए लोग उसे "पारखी गुरु" भी कहते थे।
ये उसकी साधना के प्रति लगाब को दर्शाता था।
अब जब उसे खुद साधना करने का मौका मिला था, तो ये उसके अंधेरे जीवन में रोशनी की तरह था।
आरभ ने अपने विचार ठीक किए और भविष्य की योजना बना ली। वो जानता था कि उसे जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए, क्योंकि अभी सबकी नजर में वह वही निकम्मा आरभ था जिसने हाल ही में आत्महत्या की थी।
ये सोचकर वह उठा, कपड़े ठीक किए, दरवाजा खोला और बोला,
"रितिका, मेरे साथ बाहर चलोगी? मेरा दिमाग थोड़ा शांत करना है।"
"छोटे मास्टर, आप… दिमाग शांत करना चाहते हैं?" रितिका हैरान रह गई। उसे थोड़ा दुख भी हुआ। उसका छोटे मास्टर हमेशा आलसी रहता था, अब अचानक घूमने जा रहा है?
"हाँ चलो आरभ आगे बढ़ गया।
उसे इस इलाके और राजबंशी परिवार के बारे में और जानना था।
रितिका चुपचाप उसके पीछे चल दी। उसकी साफ आँखें बार-बार आरभ को देख रही थीं। वह जानती थी कि उसका भविष्य आरभ की सेविका बनना है, और वह इसके लिए तैयार थी। उसे एक निकम्मे मालिक की सेवा करने में भी कोई शर्म नहीं थी।
उसकी बस एक इच्छा थी — कि वह आरभ को बदल सके और उसे आलसी जिंदगी से बाहर निकाल सके।
लेकिन उसे नहीं पता था कि वह ऐसा कर पाएगी या नहीं।
आरभ लोगों के चेहरे पढ़ सकता था। रितिका की उदासी उसने तुरंत समझ ली और मन ही मन मुस्कुराया।
तभी सामने कुछ लोग आ गए।
"आरभ, सुना तू जुए में हार गया और फाँसी लगा ली! मैं तो बस देखने आया था कि तुझ जैसे निकम्मे में आत्महत्या की हिम्मत कैसे आई। लेकिन तू तो फाँसी भी ठीक से नहीं लगा सका!
आवाज सुनकर आरभ ने उस लड़के को देखा और पहचान लिया।
वह उसकी ही उम्र का था, लगभग बारह-तेरह साल का।
वो महेंगे कपड़े पहने हुए था। साफ था कि वो राजबंशी परिवार का ही एक लड़का है। उसका नाम लबारो था उसका पिता एक बुजुर्ग था, और उसका बड़ा भाई परिबार मे सबसे ज़्यादा ताकतवर था। और लबारो साधना और दवा बनाने दोनों में अच्छा था और नई पीढ़ी में काबिल माना जाता था।
उस लड़के के बारे मे याद आते ही आरभ को सब समझ आ गया। लबारो पहले भी उसे परेशान करता था, लेकिन असली वजह रितिका थी।
लबारो रितिका की खूबसूरती पर फिदा था। वह उसे बार-बार परेशान करता, लेकिन रितिका हमेशा मना कर देती। इसी वजह से वह आरभ को नीचा दिखाता था। आरभ की आत्महत्या में भी उसका बड़ा हाथ था।
ये जानकर आरभ की आँखें थोड़ी सिकुड़ गईं।
एक ही परिवार का होकर भी वह सिर्फ एक नौकरानी के लिए ऐसा कर रहा था — ये बात आरभ को बिल्कुल पसंद नहीं आई।
फिर भी वह अभी झगड़ा नहीं करना चाहता था। उसने शांति से कहा,
"रितिका, चलो।"
"जी, छोटे मास्टर!" रितिका ने तुरंत जवाब दिया।
रितिका को इतना आज्ञाकारी देखकर लबारो और गुस्सा हो गया।
"रितिका, तुम कितनी बेवकूफ हो! इस आरभ के साथ रहकर तुम्हारा क्या भविष्य है? ये पूरी तरह निकम्मा है। इसके साथ रहोगी तो सिर्फ दुख मिलेगा। मेरे साथ आ जाओ। मैं अपनी मेहनत से बड़ा नाम कमाऊँगा। सोच लो!"
ये सुनकर आरभ रुक गया और रितिका की तरफ देखा।
उसे भी जानना था कि रितिका क्या जवाब देगी।
लेकिन रितिका ने बिना डरे कहा,
"लबारो, मैं सिर्फ अपने छोटे मास्टर आरभ को मानती हूँ। मैंने तुम्हें पहले भी मना किया है। चाहे मुझे उनके साथ दुख ही क्यों न सहना पड़े, मैं तैयार हूँ। अब मुझे परेशान मत करो!"
ये सुनकर आरभ थोड़ा हैरान हुआ।
लबारो गुस्से में चिल्लाया,
"अच्छा तो तुम समझ नहीं रही हो?"
"तुम क्या करने वाले हो?" आरभ ने रितिका को अपने पीछे कर लिया।
रितिका चौंक गई। उसे समझ नहीं आया कि उसके छोटे मास्टर में इतना साहस कब आ गया।
लबारो हँसा,
"क्या बात है, आरभ! अब तुझमें हिम्मत आ गई? साधना में तू मुझसे दस बार भी लड़े तो नहीं जीत सकता। तू सिर्फ एक हकीम है — और उसमें भी बेकार!"
"तूने बर्मा परिवार के साथ मुकाबले में पूरी भट्टी खराब कर दी थी और एक भी दवा नहीं बना पाया था। बता, तू किस काम का है?"
आरभ ने ठोड़ी पर हाथ रखा और मुस्कुराकर बोला,
"अगर तू कहता है कि मैं बेकार हूँ, तो मुझे तेरी काबिलियत देखने की इच्छा हो रही है।"
"छोटे मास्टर, चलिए… लड़ाई मत कीजिए," रितिका डर गई।
लबारो बोला,
"अगर हिम्मत है तो मुकाबला कर! नहीं तो रास्ते से हट जा!"
उसके नौकर हँसने लगे।
आरभ शांत रहा और बोला,
"अगर तू तैयार है, तो मैं भी तैयार हूँ।"
दवाइयाँ नौ स्तर की होती थीं — पहले से नौवें तक। हर स्तर में चार भाग होते थे — निचला, मध्यम, ऊँचा और परफेक्ट। लबारो इस समय रैंक एक के मध्यम स्तर का हकीम था, जो उसकी उम्र के हिसाब से अच्छा था।
लेकिन आरभ की नजर में यह कुछ भी नहीं था।
लबारो हँसकर बोला,
"पक्का? हारने के बाद रोना मत!"
रितिका फिर बोली,
"छोटे मास्टर, चलिए…"
लेकिन आरभ ने हाथ उठाकर कहा,
"सिर्फ मुकाबले से क्या फायदा? अगर मुकाबला करना है तो कुछ दाँव पर लगाते हैं। और अगर दाँव लगाना है, तो बड़ा लगाते हैं!"
लबारो हँस पड़ा,
"दाँव? पिछली बार तूने अपनी बहन की आधी दौलत गंवा दी थी! अब क्या बाकी भी हारना चाहता है?"
आरभ गुस्से में बोला,
"मैं बस पूछ रहा हूँ — हिम्मत है या नहीं?"
लबारो बोला,
"ठीक है, कितना दाँव?"
"300 स्पिरिट स्टोन!" आरभ ने तुरंत कहा।
यह सुनकर रितिका का चेहरा सफेद पड़ गया।
क्योंकि पिछली बार भी आरभ ने 300 स्पिरिट स्टोन हार दिए थे।
अगर इस बार भी हारा, तो रिभा की बची हुई दौलत भी खत्म हो जाएगी।
लबारो भी चौंक गया, क्योंकि 300 स्पिरिट स्टोन बहुत बड़ी रकम थी।
स्पिरिट स्टोन इस दुनिया की सबसे जरूरी मुद्रा थी, जिसका इस्तेमाल साधना और बाकी कामों में होता था।
लेकिन जब लबारो ने आरभ की दवा बनाने की कमजोर काबिलियत के बारे में सोचा तो उसके चेहरे पर क्रूर मुस्कान आ गई।
"डरने की क्या बात है? 300 स्पिरिट स्टोन। मैं तो बस नहीं चाहता कि तेरी दीदी की सारी दौलत खत्म हो जाए। बाद में जो तुझे इतना मानती है वो भी तुझे छोड़ देगी।"
हाँ, 300 स्पिरिट स्टोन बड़ी रकम थी। लेकिन वो आरभ से कैसे हार सकता था?
"मेरे मामलों में तुझे दखल देने की जरूरत नहीं। दाँव लगाना है तो जल्दी से तय करो," आरभ ने हल्की मुस्कान के साथ कहा।
लबारो को क्या पता कि यह आरभ अब पहले वाला नहीं रहा।
आरभ को जिस बात का डर था वो यह नहीं था कि लबारो दाँव लगाएगा, बल्कि यह था कि वो दाँव न लगाए।
300 स्पिरिट स्टोन।
अब वक्त आ गया था कि वो वो रकम वापस जीत ले जो पिछले आरभ ने फाँसी लगाने से पहले गँवाई थी।
आरभ के आत्मविश्वास की सबसे बड़ी वजह दवा बनाने की काबिलियत थी। पिछली जिंदगी में वो इस पेशे का नंबर वन जीनियस था, उसकी हकीमी की प्रतिभा पूरे इलाके में मशहूर थी। सिर्फ कुछ बूढ़े अमर हकीम ही उससे तुलना कर सकते थे।
उसके लिए रैंक एक के मध्यम स्तर के हकीम से मुकाबला करना किसी नवजात बच्चे को सताने जैसा था।
बेशक, वो लबारो को सता रहा था, लेकिन लबारो यही सोच रहा था कि आरभ खुद मुसीबत मोल ले रहा है।
"मुकाबले का तरीका सामान्य हकीमी मुकाबले जैसा ही रहेगा," लबारो ने लापरवाही से कहा, फिर बोला, "तरफन, तू समझा।"
तरफन जोर से चिल्लाया,
"हकीमी मुकाबले में फैसला दवाओं की क्वालिटी, तादाद और लुक से होता है।"
"सुना?" लबारो ने कहा, "चूँकि दाँव लगा रहे हैं तो ठीक से करेंगे। मैं तुझे सताऊँगा नहीं। पहले दर्जे की सबसे आसान दवा 'रिवर्टिंग बोन पिल' है। फैसला दवाओं की तादाद, क्वालिटी और लुक से होगा।"
"कोई दिक्कत नहीं," आरभ ने फौरन हामी भरी।
रिवर्टिंग बोन पिल पहले दर्जे की सबसे आसान दवा थी। एक गोली शक्ति साधक योद्धा को तरोताजा कर देती थी और दिमाग शांत कर देती थी। आमतौर पर योद्धा लड़ाई से पहले यह गोली खाते थे ताकि ध्यान बेहतर रहे।
शक्ति साधक, साधना की बुनियाद थी, नौ स्तरों में बँटी हुई, हर स्तर में बहुत फर्क होता था।
आरभ अभी पहले स्तर का भी नहीं था।
दूसरी तरफ लबारो छोटी उम्र में दूसरे स्तर पर था, यानी बड़े होने से पहले के लड़कों में टॉप जीनियस।
आरभ को रिवर्टिंग बोन पिल बनाने का पूरा भरोसा था। उसने रितिका की तरफ देखकर पूछा,
"रितिका, मेरी कढ़ाई कहाँ है?"
"यंग मास्टर, आपकी पुरखों की 'पर्पल एलिगेंस कढ़ाई' तो बर्मा परिवार के पास चली गई थी। भूल गए?" रितिका का चेहरा शर्मिंदगी से लाल हो गया।
यह सुनकर चारों तरफ हँसी छा गई।
आरभ ने भौंहें उठाईं और थोड़ा सोचा। हाँ, सच था।
फिर बोला,
"तो सबसे साधारण कढ़ाई इस्तेमाल कर लेंगे।"
रितिका नहीं चाहती थी कि आरभ मुकाबला करे, लेकिन मजबूरी थी। उसने स्टोरेज रिंग से एक बेहद साधारण कढ़ाई निकाली।
"अरे आरभ, पर्पल एलिगेंस कढ़ाई हार गया, और अब इस साधारण भट्टी से मुझसे मुकाबला करेगा? ठीक है, चूँकि तू साधारण भट्टी इस्तेमाल कर रहा है, मैं भी साधारण ही इस्तेमाल करूँगा, फेयर मुकाबला हो जाए," लबारो ने व्यंग्य से कहा।
बेशक, उसने यह दया से नहीं, बल्कि इसलिए कहा क्योंकि उसे यकीन था कि साधारण कढ़ाई से भी आरभ की कोई चांस नहीं है।
आरभ ने लापरवाही से कहा,
"जैसी तेरी मर्जी।"
यह कहते ही उसने हल्के से कढ़ाई पकड़ी और हथेली पर रख ली।
एक औसत हकीम आमतौर पर छोटी, हथेली जितनी भट्टी इस्तेमाल करता था। नए हकीम भी सिर्फ छोटी भट्टी ही संभाल पाते थे।
"एक सेट रिवर्टिंग बोन पिल की सामग्री, और आखिर में दवाओं की तादाद, क्वालिटी और लुक से फैसला होगा। मुकाबला शुरू!" लबारो के नौकर ने जोर से चिल्लाया।
आरभ गरीब था, लेकिन हकीम होने के नाते उसके पास रिवर्टिंग बोन पिल बनाने की जड़ी-बूटियाँ थीं।
उसने सबसे निचले दर्जे की स्टोरेज रिंग में हाथ डाला, एक सेट जड़ी-बूटियाँ निकालीं और जल्दी से भट्टी में डाल दीं।
"आग जलाई भी नहीं और सामग्री डाल दी। साफ है, बिल्कुल नया है," लबारो के नौकरों ने मजाक उड़ाया।
आरभ ने उनकी परवाह नहीं की, जड़ी-बूटियाँ डालकर 'फायर कंट्रोल वुड' से आग जलाई।
"पिछली जिंदगी में मेरे पास अपनी खुद की आग थी और उसी से दवा बनाने की आदत थी, लेकिन अब इस फायर कंट्रोल वुड से एडजस्ट करना थोड़ा मुश्किल है," आरभ ने मन में सोचा और आग का तापमान कंट्रोल करने लगा।
आग कंट्रोल करना हकीमी का बहुत जरूरी कदम था, सीधे शब्दों में तापमान कंट्रोल करना।
दवा की आखिरी तादाद और क्वालिटी तापमान पर ही निर्भर करती थी।
तापमान के साथ-साथ जड़ी-बूटी का अनुपात भी एडजस्ट करना पड़ता था। अगर यह ठीक से न हो तो दवा की क्वालिटी और ताकत बेहद कम हो जाती। यह काम बहुत बारीकी से करना होता था।
इसीलिए हकीम बनना प्रतिभा और समझ पर बहुत निर्भर था।
लेकिन आरभ के लिए यह सब पहले से ही दिमाग में बसा हुआ था।
उसका तापमान कंट्रोल और हर कदम बिलकुल परफेक्ट था।
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