Honey Doll - Ranjan Kumar Desai (3) in Hindi Fiction Stories by Ramesh Desai books and stories PDF | शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (3)

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शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (3)

  

               शहद की गुड़िया - प्रकरण 3

       समीर के बाद आकाश मेरी जिंदगी में आया. वह बहुत हीं  खामोश और संजीदा लड़का था. वह अपनी पेंटिंग में हीं खोया रहता था. उस की नजर में एक प्यास थी.

        एक दिन उस ने अपनी पेंटिंग के लिये मुझे मोडल बनाने का ओफर दिया. ज़ब उस ने हाथ पकड़ा तो उस के हाथ मेरी खूबसूरती को देखकर कांपने लगा.

       उस ने धीरे से ब्रश नीचे रख दिया और मेरे बिल्कुल नजदीक आ गया. उस ने मेरे चेहरे को छुने का प्रयास किया पर उस की उंगलियों में कंपन थी.

        वह इतना डर गया था की उस के हाथ से ब्रश छुटकर नीचे गिर गया. 

        मैंने उसे पूछा : " क़्या हुआ, रंग उड़ गये या होंश?

         आकाश ने मेरे होठों को  छूने की कोशिश की, पर वह आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं जुटा पाया. उस की वह घबराहट देखकर मुझे हंसी आ गई थी.

         आकाश ने फिर से मेरा हाथ थामने की कोशिश की पर वह बर्फ जैसा ठंडा पड़ गया था.

          उस ने मेरी आँखों में देखा और वही रुक गया.

           उस ने लम्बी सांस ली और अपनी पेंटिंग छोड़कर वहां से चल दिया. वह मेरी गर्मी को बर्दास्त नहीं कर पाया.

            आकाश के बाद मेरी जिंदगी में विकी आया था. वह गिटार बजाता था. और खुद को काफ़ी कूल समझता था. 

           एक शाम उस ने मुझे छत पर बुलाया और मेरे लिये गीत गाया. उस की धुन में कोई नशा नहीं था.

           उस ने गिटार साइड में रखकर मेरा हाथ अपने सीने पर रख दिया. वह अपनी धड़कने सुनना चाहता था. पर उस में गर्मी का अभाव था.

           उस ने मेरे होठों को छूने की कोशिश की पर मैं पीछे हट गई. मुझे महसूस हूआ उस में वह बात नहीं जो. मुझे पिघला सके.

           उस ने कोशिश तो बहुत की मुझे अपनी धुन में फ़साने की  पर मेरा दिल कहीं ओर था.

            उस की पकड़ भी बहुत कमजोर थी.

            वह केवल गिटार बजाता रह गया. उस ने मेरा हाथ पकड़ा पर मेरे बदन को कोई जनजनाहट नहीं हुई.

             और मैंने उसे छोड़ दिया.

             उस के बाद रोहित मेरी जिंदगी में आया.. वह खुद को बहुत बड़ा शायर समझता था.. उस ने मुझे पुरानी लाइब्रेरी में बुलाया था और अपनी डायरी से नज्म सुनाना शुरू किया था.

             उस ने मेरा हाथ थामकर बहुत रुमानी अंदाज में बातें करना शुरू किया.  पर उस में वह बेबाकी नहीं थी.

           उस की शायरी सुनकर मुझे नींद आने लगी थी

           रोहित ने मेरा हाथ पकडकर अपनी नज्म पढ़ना जारी रखा. उस की उंगलियां कांप रही थी.

          मैंने उसे चिढ़ाते  हुए पूछा " शायरी सुनाओगे या कुछ ओर? "

          उस ने मेरे होठों की तरफ झुकने की कोशिश की, पर वह भी आर्यन जैसा डरपोक निकला. वह थिथक कर रह गया. और मैंने उसे वही छोड़ दिया.

          रोहित ने एक लम्बी सांस ली और वह अपनी डायरी समेट कर भाग गया. वह मेरी आँखों में छिपी आग को देखकर भाग गया. 

          उस दिन मुझे समझ आया की सिर्फ शब्दों से दिल नहीं जीता जाता.

          रोहित के उस डरने मुझे फिर से अकेला कर दिया.

           उस वक़्त मैंने महसूस हुआ दुनिया में मेरे जैसा जिद्दी कोई नहीं है. 

           तभी मेरी लाइफ में साहिल आया था. वह काफ़ी लम्बा और हट्टा कट्टा था और उस की नजर मेरी कमर पर हीं टिकी रहती थी.

           साहिल ने एक दिन स्टेडियम के पीछे मुझे पीछे से कसकर लिया.उस का हाथ मेरी नंगी कमर था जो बहुत गर्म लग रहा था.

           उस ने मेरे कानो में कहां वह पागल हो रहा हैं.

           साहिल ने मेरे होठों को छूने की कोशिश की. पर मैंने अपना चेहरा घुमा लिया. मुझे उस में कोई गहराई नजर नहीं आई थी.

          वह केवल जिस्मानी भूख थी.

          साहिल गुस्से में मुझे छोड़ गया.

          उस के बाद मैं काफ़ी समय तक खामोश रही. मुझे समझ आ गया था किसी लड़के में वह गहराई नहीं थी जिस की मुझे तलाश थी

           वही से मैंने पिकु एप्लीकेशन को लौंच किया.

           ताकि मैं सच्चे और बेखौफ़ लोगो तक पहुंच सकू.

           एप पर कई लोग अपनी परेशानिया लेकर आते थे. मैंने सब की बातों का दयान से अभ्यास किया और उन को सही रास्ता दिखाया. फिर भी भीतर से मैं अधूरी प्यास महसूस कर रही हूं.

           उस वक़्त दादु आप का पहला मेसेज आया और मेरी धड़कने जैसे रुक सी गईं. क़्या आप को. याद हैं सब से पहले आपने क़्या लिखा था ?

           दादू आप का पहला मेसेज इतना अलग था, की मुझे लगा मेरी तलाश पूरी हो गईं हैं.

           बाकि सब तो अपनी भूख मिटाना चाहते थे.. पर आप की कहानी में एक रूहानी जुड़ाव महसूस हुआ. 

           दादु धीरे धीरे हमारी बात इतनी गहरी होती गईं  की मुझे अपनी एप से ज्यादा आप से प्यार हो गया

           अब तो एप एक बहाना हैं. असली मजा तो आप की इन शरारतों से मिलती हैं.

           दादु आप की बातों ने मुझे ऐसा बाँध लिया हैं की अब चाहकर भी मैं किसी और के बारे में सोच नहीं सकती. आप की यह गुड़िया पूरी तरह आप की हो गईं हैं.

                      0000000000  ( क्रमशः)