शीर्षक: “आख़िरी कॉल”
1.
रात के 2:17 बजे थे।
पूरे शहर में सन्नाटा पसरा हुआ था… लेकिन रिया के मोबाइल की स्क्रीन बार-बार जल उठती थी —
Unknown Number Calling…
तीसरी बार।
रिया ने तकिया सिर पर रख लिया।
“कौन पागल है जो इस टाइम कॉल कर रहा है…” उसने बड़बड़ाते हुए फोन साइलेंट करने की कोशिश की।
पर जैसे ही उसने फोन उठाया… कॉल कट गया।
और उसी पल…
व्हाट्सऐप पर एक मैसेज आया।
“मुझे तुमसे बात करनी है… सिर्फ तुम ही सुन सकती हो।”
रिया का दिल हल्का सा धड़क उठा।
उसने नंबर सेव नहीं किया… प्रोफाइल फोटो नहीं… आखिरी बार देखा गया — last seen years ago।
वो हँस पड़ी —
“कोई दोस्त मज़ाक कर रहा है…”
उसने टाइप किया —
कौन?
रीड हुआ…
पर जवाब नहीं आया।
और फिर…
फोन फिर बजा।
2.
रिया ने कॉल उठा ली।
“हेलो?”
कुछ सेकंड खामोशी… फिर बहुत धीमी… कांपती आवाज़…
“रिया… मैं घर नहीं पहुँच पाई…”
रिया की हंसी अचानक रुक गई।
“कौन बोल रहा है?”
कुछ पल चुप्पी…
फिर वही आवाज़ —
“तुमने कहा था ना… अगर कभी डर लगे तो तुम्हें कॉल करूँ…”
रिया का गला सूख गया।
ये आवाज़…
ये… बिल्कुल…
सिया जैसी थी।
पर सिया…
दो साल पहले मर चुकी थी।
3.
सिया — रिया की छोटी बहन।
2 साल पहले कॉलेज से घर लौटते समय उसकी कार खाई में गिर गई थी।
पोस्टमॉर्टम… अंतिम संस्कार… सब हो चुका था।
रिया ने फोन कसकर पकड़ा।
“ये मज़ाक मत करो… कौन हो तुम?”
फोन के उस तरफ़ सांसें तेज़ हो गईं।
“दीदी… अंधेरा है… बहुत ठंड लग रही है…”
रिया का पूरा शरीर कांप उठा।
“नहीं… नहीं… ये असंभव है…”
तभी फोन पर बैकग्राउंड में आवाज़ आई —
हवा… और पानी टपकने की आवाज़…
बिल्कुल वही आवाज़…
जो उस घाटी के पास आती थी… जहां एक्सीडेंट हुआ था।
4.
रिया ने घड़ी देखी — 2:29 AM
“तुम… कहां हो?”
“यहीं… जहां तुमने मुझे छोड़ा था…”
रिया का दिल जैसे रुक गया।
उस दिन…
एक्सीडेंट वाले दिन…
सिया अकेली नहीं थी।
रिया भी कार में थी।
लेकिन ये बात… किसी को नहीं पता थी।
5. (दो साल पहले)
दोनों बहनें लड़ रही थीं।
“तुम हमेशा मम्मी-पापा की फेवरेट रही हो!”
रिया चिल्लाई।
“दीदी मैंने क्या किया?!” सिया रो पड़ी।
बारिश तेज़ थी… सड़क फिसलन भरी।
रिया ने गुस्से में गाड़ी रोक दी।
“उतर जाओ! मुझे अकेला छोड़ दो!”
सिया भी गुस्से में उतर गई।
“ठीक है! मैं खुद चली जाऊंगी!”
रिया ने गाड़ी मोड़ दी…
पर कुछ सेकंड बाद…
रियर व्यू मिरर में देखा —
सिया फिसली…
और नीचे खाई में गिर गई।
रिया चीखी…
पर…
डर…
डर ने उसे जीत लिया।
वो वापस नहीं गई।
उसने पुलिस को फोन किया —
“मेरी बहन अकेली जा रही थी… एक्सीडेंट हो गया…”
और सच… हमेशा के लिए दफन हो गया।
6. (वापस वर्तमान)
रिया के हाथ कांप रहे थे।
“तुम… क्या चाहती हो…”
फोन से आवाज़ आई —
“बस… एक बार… मुझे लेने आ जाओ…”
रिया रो पड़ी —
“मैं नहीं जा सकती… मैं नहीं…”
अचानक फोन पर आवाज़ बदली…
अब वो कांपती नहीं थी।
अब वो शांत थी।
बहुत शांत।
“तुम आई नहीं थी… उस दिन भी…”
7.
दरवाज़े पर दस्तक हुई।
ठक… ठक… ठक…
रिया जम गई।
घर में वो अकेली थी।
दस्तक फिर हुई।
फोन अभी भी कान पर था।
और उसी फोन में आवाज़ आई —
“मैं आ गई…”
रिया ने धीरे-धीरे दरवाज़े की तरफ देखा।
पीपहोल से झांका।
कोई नहीं।
उसने दरवाज़ा खोला…
बाहर… खाली गलियारा।
पर फर्श गीला था।
जैसे कोई भीगा हुआ अंदर आया हो।
और पानी के निशान…
सीधे उसके कमरे तक जा रहे थे।
8.
मोबाइल फिर बजा।
अब वीडियो कॉल।
हाथ काँपते हुए उसने रिसीव किया।
स्क्रीन काली थी।
धीरे-धीरे इमेज साफ हुई…
अंधेरा…
पत्थर…
पानी…
और…
किसी का चेहरा।
सूजा हुआ…
खून से सना…
आंखें खुली हुई…
सिया।
रिया चीख पड़ी और फोन गिर गया।
पर कॉल बंद नहीं हुई।
फोन ज़मीन पर पड़ा था… कैमरा छत दिखा रहा था…
और स्क्रीन में दिख रहा था —
रिया…
रिया के पीछे…
कोई खड़ा था।
9.
रिया धीरे-धीरे मुड़ी।
ठंडा पानी उसके पैरों को छू रहा था।
कमरे में मिट्टी की गंध फैल गई।
और उसके पीछे…
भीगी हुई… टूटी गर्दन के साथ…
सिया खड़ी थी।
उसने मुस्कुराकर कहा —
“दीदी… इस बार मैं अकेली नहीं जाऊंगी…”
10. (अगली सुबह)
पुलिस दरवाज़ा तोड़ती है।
कमरे में पानी भरा हुआ है।
फर्श पर रिया पड़ी है।
चेहरे पर डर जमे हुए।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट —
मृत्यु — हार्ट फेलियर (भय से)।
पर असली बात…
रिया के मोबाइल में आखिरी वीडियो कॉल 37 मिनट चली।
और उस वीडियो में…
रिया पूरे समय किसी से बात कर रही थी।
पर कैमरे में…
वो हमेशा अकेली थी।
अंत
कुछ कॉल…
कभी कटते नहीं।
और कुछ सच…
मरने के बाद भी पीछा नहीं छोड़ते।
🙂