STAR SENTINELS 5: समय का न्याय
सीन 1 – टाइम एजेंसी का सर्वोच्च कारागार
नीले प्रकाश से चमकता शून्य-कारागार।
स्टार सेंटिनल्स फिर से कैद हैं। इस बार उनकी शक्तियाँ पूरी तरह निष्क्रिय कर दी गई हैं।
एजेंसी प्रमुख (कठोर स्वर में):
"तुम लोगों ने समय की धारा को मोड़ा… परिणाम समझते हो?"
ज़ारा:
"हमने एक जीवन बचाया।"
एजेंसी प्रमुख:
"और करोड़ों संभावनाओं को मिटा दिया।"
नेक्स ज़िप सलाखों को पकड़कर हँसने की कोशिश करता है।
नेक्स:
"कम से कम इस बार कोई हमें ‘कातिल’ तो नहीं कह रहा।"
कायरो चुप है… लेकिन उसकी आँखों में चिंता है।
सीन 2 – पृथ्वी, वर्तमान समय
अर्जुन… यानी वल्चर… एक ऊँची इमारत पर खड़ा है।
शहर सामान्य है। अनाया उससे कभी नहीं मिली।
उसे नहीं पता कि कभी वह मर चुका था… या कि उसका भविष्य बदला गया।
वह आसमान में उड़ता है।
अर्जुन (अपने आप से):
"अजीब है… कभी-कभी लगता है जैसे कुछ खो दिया हो… पर याद नहीं आता क्या।"
तभी आकाश में सुनहरा द्वार खुलता है।
टाइम एजेंसी के सैनिक प्रकट होते हैं।
सैनिक:
"अर्जुन, तुम्हें हमारे साथ चलना होगा।"
अर्जुन सतर्क हो जाता है।
अर्जुन:
"कौन हो तुम लोग? नई मुसीबत?"
सीन 3 – टाइम एजेंसी मुख्यालय
विशाल कक्ष। चारों ओर तैरती हुई समय-रेखाएँ।
अर्जुन को एक पारदर्शी मंच पर खड़ा किया जाता है।
एजेंसी प्रमुख सामने आता है।
एजेंसी प्रमुख:
"तुम्हें सच्चाई जानने का अधिकार है।"
हवा में एक होलोग्राम उभरता है।
अर्जुन देखता है—
भविष्य का वह दृश्य…
अनाया की मुस्कान…
उसका धोखा…
मिरा की मौत…
उसकी खुद की मृत्यु…
अर्जुन के चेहरे का रंग उड़ जाता है।
अर्जुन (धीमे स्वर में):
"ये… मैं हूँ?"
दृश्य बदलता है।
स्टार सेंटिनल्स समय में पीछे जाते हैं।
अनाया को रोकते हैं।
भविष्य बदलता है।
एजेंसी प्रमुख:
"उन्होंने तुम्हें बचाया। लेकिन नियम तोड़े।"
अर्जुन की मुट्ठियाँ भींच जाती हैं।
अर्जुन:
"तो… मैं मर गया था?"
एजेंसी प्रमुख:
"हाँ। और तुम्हें इस सच्चाई से अनजान रखा गया।"
सीन 4 – टकराव
अर्जुन को कारागार में ले जाया जाता है जहाँ स्टार सेंटिनल्स बंद हैं।
ऊर्जा दीवारें हटती हैं।
ज़ारा उसे देखती है।
ज़ारा (हल्की मुस्कान):
"तुम जिंदा हो… बस यही काफी है।"
अर्जुन की आँखों में तूफान है।
अर्जुन:
"तुमने मुझसे मेरा सच छीन लिया।"
नेक्स आगे बढ़ता है।
नेक्स:
"अगर बताते… तो तुम मानते? पिछली बार तो हमने कोशिश की थी।"
कायरो गंभीर स्वर में बोलता है।
कायरो:
"हमने दोस्त को बचाया। चाहे कीमत जो भी हो।"
अर्जुन दीवार पर मुक्का मारता है।
अर्जुन:
"मुझे फैसला करने का अधिकार था!"
सीन 5 – समय का असंतुलन
अचानक पूरा मुख्यालय हिलने लगता है।
समय-रेखाएँ टूटने लगती हैं।
एक दरार खुलती है।
उस दरार से अंधकारमय ऊर्जा बाहर आती है।
एजेंसी प्रमुख घबरा जाता है।
एजेंसी प्रमुख:
"असंभव… टाइमलाइन स्थिर थी!"
होलोग्राम दिखाता है—
जब भविष्य बदला गया…
एक छाया उत्पन्न हुई।
एक ‘समय-विकृति’।
वह विकृति अब जीवित रूप ले चुकी है।
विशाल अंधकारमय प्राणी—
क्रोनो-व्रेक्स।
क्रोनो-व्रेक्स (गूँजती आवाज):
"जिसे मिटाया गया… उसका संतुलन मैं हूँ।"
सीन 6 – अस्थायी गठबंधन
एजेंसी प्रमुख अर्जुन की ओर देखता है।
एजेंसी प्रमुख:
"अगर ये फैल गया… तो हर टाइमलाइन नष्ट हो जाएगी।"
अर्जुन स्टार सेंटिनल्स की ओर देखता है।
कुछ पल की खामोशी।
फिर वह गहरी सांस लेता है।
अर्जुन:
"उन्हें रिहा करो।"
ज़ारा चौंक जाती है।
अर्जुन:
"गलती तुमने की… पर उसे ठीक हम सब मिलकर करेंगे।"
ऊर्जा बंधन हटते हैं।
नेक्स मुस्कुराता है।
नेक्स:
"वाह… अब आया असली हीरो वाला डायलॉग।"
सीन 7 – अंतिम संग्राम
क्रोनो-व्रेक्स समय की धाराओं को निगल रहा है।
अर्जुन अपने पंख फैलाता है।
अर्जुन (गर्जना):
"इस बार… कोई भविष्य नहीं बदलेगा। हम उसे बनाएंगे!"
ज़ारा और कायरो दोनों तरफ से वार करते हैं।
नेक्स टाइम-कोर को स्थिर करने की कोशिश करता है।
क्रोनो-व्रेक्स हमला करता है।
अर्जुन सीधा उसकी छाती में घुसता है।
ऊर्जा की लपटें चारों ओर फैलती हैं।
क्रोनो-व्रेक्स:
"तुम्हें नहीं होना चाहिए था!"
अर्जुन:
"शायद… पर मैं हूँ!"
वह अपनी पूरी शक्ति छोड़ देता है।
स्टार सेंटिनल्स भी अपनी ऊर्जा मिलाते हैं।
भयंकर विस्फोट।
कुछ पल के लिए सब सफेद हो जाता है।
सीन 8 – संतुलन
धूल छंटती है।
क्रोनो-व्रेक्स गायब है।
टाइमलाइन स्थिर हो चुकी है।
एजेंसी प्रमुख आगे आता है।
एजेंसी प्रमुख:
"तुमने संतुलन वापस लाया।"
अर्जुन शांत है।
अर्जुन:
"अब कोई मुझसे मेरा सच नहीं छिपाएगा।"
वह ज़ारा की ओर देखता है।
अर्जुन:
"दोस्ती का मतलब है भरोसा… चाहे सच्चाई कितनी भी कठोर हो।"
ज़ारा सिर हिलाती है।
ज़ारा:
"अब से कोई राज नहीं।"
नेक्स हँसता है।
नेक्स:
"तो अगली बार टाइम ट्रैवल करेंगे तो पहले वोटिंग करेंगे?"
सब हल्का मुस्कुरा देते हैं।
अंतिम दृश्य
अर्जुन पृथ्वी पर लौटता है।
उसे अब सब पता है—
उसकी मौत, धोखा, और बदला हुआ भविष्य।
लेकिन इस बार…
वह तैयार है।
आसमान में उड़ते हुए वह कहता है—
अर्जुन:
"अगर समय दुश्मन बने… तो उसे भी बचाना पड़ेगा।"
कैमरा ऊपर उठता है।
टाइमलाइन स्थिर है… पर कहीं गहराई में, एक नई दरार चमकती है।
अंधकार में एक आवाज:
"समय कभी पूरी तरह ठीक नहीं होता…"
और कहानी आगे बढ़ती है।