फिल्म रिव्यु धुरंधर
गत वर्ष दिसंबर में एक हिंदी मूवी ‘ धुरंधर ‘ रिलीज हुई थी . इस फिल्म के निर्माता आदित्य धर , लोकेश धर ,और ज्योति देशपांडे हैं . फिल्म के कहानीकार और निर्देशक भी आदित्य धर हैं . आमतौर यह फिल्म दर्शकों द्वारा बहुत पसंद किया गया है और बॉक्स ऑफिस पर भी बहुत कामयाब रही है .
फिल्म की कहानी - फिल्म काफी लंबी है , 214 मिनट की और इसे आठ भागों ( chapters ) में दिखाया गया है . हर भाग एक अलग कहानी प्रस्तुत करता है पर आमतौर पर हर भाग की पृष्ठभूमि में हमारे पड़ोसी देश की भूमिका रही है . फिल्म में 1999 के कंधार में भारतीय विमान के अपहरण , भारतीय संसद पर आतंकी हमला , कारगिल युद्ध के भारतीय युद्ध बंदी एक मेजर की भीषण यातना का दृश्य और पाकिस्तान के लयारी , कराची में फलते फूलते अवैध हथियारों और भारत के 500 और 1000 रुपये के नकली नोटों के धंधे को बखूबी दिखाया गया है .
फिल्म की शुरुआत ‘ शांति की कीमत ( Price of Peace ) ‘ चैप्टर से की गयी है जो विमान अपहरण से संबंधित है . इस भाग में अपहरणकर्ताओं ने विमान में सवार यात्रियों को बंधक बनाया है . बंधकों को छुड़ाने के लिए उन्हें फिरौती दे कर और उनके तीन आतंकियों को भारतीय जेल से रिहा करना पड़ता है . उस समय ख़ुफ़िया विभाग ( IB ) के चीफ सान्याल ( आर माधवन ) के सुझाव को RAW प्रमुख भुल्लर ( अली रजा नामदार ) ठुकरा देते हैं . IB का कहना था कि पाकिस्तानी आतंकी नेटवर्क में घुसकर हमें उनका नाश करना चाहिए . पर इसके बाद दिसंबर 2001 में भारतीय संसद पर आतंकी हमले के बाद RAW प्रमुख इस गुप्त ऑपरेशन ‘ ऑपरेशन धुरंधर ‘ की इजाजत देते हैं .
‘ ऑपरेशन धुरंधर ‘ के लिए एजेंट हमज़ा अली मज़ारी ( रणवीर सिंह ) को बलूच के रूप में लयारी कराची जाता है , हमज़ा ही फिल्म का नायक है .हमज़ा वहां एक भारतीय हैंडलर और जूस विक्रेता मोहम्मद आलम ( गौरव गेरा ) के यहाँ काम करता है और वहां के राजनीतिक हलचल को गौर से अध्ययन करता है . हमजा बलूच रहमान डकैत ( अक्षय खन्ना ) के नेतृत्व वाले गैंग में शामिल होना चाहता है . प्रतिद्वंदी गैंग बाबू डकैत एक शादी समारोह के दौरान रहमान के बेटों को मारने आता है . हमज़ा रहमान के छोटे बेटे फैज़ल को बचा लेता है पर बड़ा बेटा नईम मारा जाता है . हमज़ा के कौशल को देख कर रहमान उसे अपने गैंग में शामिल करता है . चुनाव को देखते हुए पाकिस्तान अवामी पार्टी ( PAP ) का नेता जमील जमाली ( राकेश बेदी ) उन्हें बदले की कार्रवाई से रोकता है पर हमज़ा बदले के लिए उकसाता है . रहमान बेटे के हत्यारे बाबू को भारी वजन से बार बार प्रहार कर मार डालता है और बलूच नेता बनता है .
PAP की रैली में हमज़ा की मुलाक़ात जमाली की बेटी यामिला ( सारा अर्जुन ) से होती है और दोनों एक दूसरे के निकट आते हैं . वहीँ खानानी बंधुओं द्वारा रहमान का परिचय ISI के मेजर इक़बाल ( अर्जुन रामपाल ) से होता है . पाकिस्तानी एजेंट नकली भारतीय नोट छापते हैं और खानानी उन्हें भारत में भेजने का काम करता है . पाकिस्तानी एजेंट हथियारों को भी आतंकियों के लिए भारत भेजते हैं . हमजा की नजर में यह सब होता है . इसी दौरान हमजा को भारत पर किसी बड़े आतंकी हमले की योजना का पता चलता है . वह भारत में यह सूचना भेजता है . . पर हमज़ा के प्रयास के बावजूद मुंबई में 26 /11 का हमला होता है जिसके चलते उसे गहरा सदमा पहुँचता है . वह जूस विक्रेता आलम के साथ आतंकियों का सफाया करने का प्रण लेता है .
खानानी और रहमान के मिलन से जमाली पार्टी में हाशिये पर आ जाता है .पुलिस SP चौधरी असलम ( संजय दत्त ) और जमाली रहमान को मारने की योजना बनाता है जिसके लिए एक ‘ टास्क फोर्स ‘ बनता है . वह उसे पकड़ लेता है पर हमज़ा और रहमान का कजन उज्जैर बलूच ( डेनिश पेंडोरा ) के साथ मिलकर उसे बचा लेता है
हमज़ा ज़मीला को भरोसा दिलाता है कि यामिला से शादी के बाद वह लयारी का बादशाह बनेगा . हालांकि इक़बाल बलूचों का सबसे बड़ा दुश्मन है पर वह रहमान के साथ मिलकर भारत के विरुद्ध आतंकियों तक हथियारों की सप्लाई करता है . खानानी बंधुओं के साथ रहमान के मिल जाने से वह खुश नहीं था . जमील जमाली और SP मिलकर रहमान को मारने की योजना बनाते हैं . हमजा अपनी शादी के दौरान पूर्व योजना के अनुसार रहमान को मारने की योजना को अमल में लाता है . इस दौरान रहमान एक कार दुर्घटना में बुरी तरह घायल होता है . रहमान को हमजा पर उसकी हत्या का शक होता है , दोनों में काफी मारपीट होती है . हमजा औरों की नजर में निर्दोष साबित करने के लिए खुद घायल रहमान को अस्पताल ले जाता है जहाँ वह दम तोड़ देता है .
रहमान के मारे जाने के बाद, हमज़ा लयारी में और कई पाकिस्तानी आतंकी हमलों के मास्टरमाइंड को निशाना बनाने की तैयारी करता है . दरअसल हमजा जसकिरत सिंह रंगी , मौत की सजा के इन्तजार में एक भारतीय कैदी है . जो ख़ुफ़िया चीफ सान्याल के लिए गुप्त एजेंट हमज़ा का काम कर रहा था .
धुरंधर फिल्म में कुछ पुराने गानों और बैकग्राउंड म्यूजिक को आधुनिक बीट्स के साथ पेश किया गया है जो सराहनीय है , खास तौर पर 'न तो कारवां की तलाश है' . हीरो-हीरोइन का रोमांटिक गाना 'गहरा हुआ' भी ठीक ठाक है . स्पाई थ्रिलर पर बनी यह गैंगवार शैली की एक फिल्म है . यातना और खून-खराबे वाले कई दृश्य विचलित कर देते हैं .
अभिनय की दृष्टि से रणवीर सिंह पूरी फिल्म में छाये रहते हैं और उनका अभिनय सराहनीय है . इसके अलावा अक्षय खन्ना की भूमिका भी अहम रही है और काबिल ए तारीफ़ है . अन्य प्रमुख कलाकारों में राकेश बेदी और संजय दत्त का अभिनय भी अच्छा रहा है . फिल्म में सारा अर्जुन या अन्य फीमेल एक्टर की कोई ख़ास भूमिका के लिए जगह ही नहीं है .
धुरंधर फिल्म को निर्देशन, पटकथा, छायांकन और अभिनय में बेहतरीन तकनीक के साथ पेश किया गया है . धुरंधर सच्ची घटनाओं से प्रेरित एक काल्पनिक कहानी है जिसे निर्देशक ने फिल्म के पहले ही सीन से पेश करना शुरू किया है . कई भागों और शीर्षकों में बंटी यह फिल्म प्रत्येक किरदार की विविधताओं को पेश करती है . डायरेक्टर ने कराची गैंगवार और पाकिस्तान के अंदरूनी हिस्से के माहौल को बखूबी प्रस्तुत किया है . साढ़े तीन घंटों से भी लम्बी इस फिल्म को आठ भागों में दिखा कर निर्देशक ने दर्शकों को इंगेज्ड रखा है . धुरंधर में निर्देशक .देशभक्ति और स्पाई-एक्शन का धमाकेदार मिश्रण प्रस्तुत किया है . पहले भी निर्देशक आदित्य धर 'उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक' में देशभक्ति पर आधारित सिनेमा में अपना कौशल साबित कर चुके हैं . कुल मिलाकर ‘ धुरंधर ‘ एक अच्छी फिल्म है जिसे नए अंदाज़ में पेश किया गया है . बॉक्स ऑफिस पर भी इसे भरपूर सफलता मिली है .
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