प्रिया ने जब पहली बार उस छोटे से कॉफी शॉप में कदम रखा था, तो उसे नहीं पता था कि उसकी ज़िंदगी की सबसे खूबसूरत कहानी यहीं से शुरू होने वाली है। मुंबई की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में वह एक साधारण सी लड़की थी, जो एक विज्ञापन कंपनी में ग्राफिक डिज़ाइनर के रूप में काम करती थी। उसकी ज़िंदगी में कोई खास उतार-चढ़ाव नहीं था, बस सुबह उठना, ऑफिस जाना, और शाम को थकी-हारी घर लौटना।
वह सुबह का वक्त था। बारिश की बूंदें धीरे-धीरे गिर रही थीं और सड़कों पर मिट्टी की वह खुशबू फैली हुई थी जो प्रिया को हमेशा से पसंद थी। उसने अपनी पुरानी स्कूटी एक तरफ खड़ी की और "चाय का चश्का" नाम के उस छोटे से कैफे में घुस गई। यह कैफे उसके ऑफिस के रास्ते में पड़ता था, लेकिन आज तक वह कभी अंदर नहीं गई थी।
अंदर का माहौल बेहद सुकून भरा था। लकड़ी की पुरानी मेज़ें, दीवारों पर लगी पुरानी तस्वीरें, और कोने में बजता हल्का संगीत। काउंटर के पीछे एक लड़का खड़ा था, जो किसी रजिस्टर में कुछ लिख रहा था। जब उसने सिर उठाया तो प्रिया की नज़र उससे मिली। उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी, जैसे वह हमेशा मुस्कुराता रहता हो।
"क्या लेंगी आप?" उसने पूछा। उसकी आवाज़ में एक अजीब सी मिठास थी।
"एक कप चाय, कम चीनी के साथ," प्रिया ने कहा।
"बस? कुछ खाने को नहीं?" उसने मुस्कुराते हुए पूछा।
प्रिया ने थोड़ा सोचा और फिर कहा, "ठीक है, एक समोसा दे दीजिए।"
"आपका नाम?"
"प्रिया।"
"बहुत खूबसूरत नाम है। मेरा नाम आर्यन है," उसने कहा और अपनी रजिस्टर में कुछ लिखने लगा।
प्रिया एक खिड़की के पास वाली मेज़ पर बैठ गई। बाहर बारिश तेज़ हो गई थी और लोग छतरियाँ लेकर भागे जा रहे थे। कुछ ही देर में आर्यन एक ट्रे लेकर आया। उसने प्याला और समोसा मेज़ पर रखा।
"आपको बारिश पसंद है?" आर्यन ने अचानक पूछा।
प्रिया चौंकी। "हाँ, बहुत। आपको कैसे पता?"
"आपकी आँखें बता रही थीं। जिस तरह से आप बाहर देख रही थीं, उससे लग रहा था," आर्यन ने कहा और वापस काउंटर की ओर चला गया।
प्रिया ने चाय की चुस्की ली। चाय लाजवाब थी। उसे ऐसा लगा जैसे यह चाय किसी ने बेहद मोहब्बत से बनाई हो। समोसा भी ताज़ा और कुरकुरा था। उसने अपना फोन निकाला और कुछ मैसेज चेक किए, लेकिन उसका ध्यान बार-बार काउंटर की ओर जा रहा था जहाँ आर्यन अपने काम में व्यस्त था।
उस दिन के बाद से प्रिया रोज़ उस कैफे में जाने लगी। कभी सुबह, तो कभी शाम को ऑफिस से लौटते वक्त। हर बार आर्यन उसे देखकर मुस्कुरा देता और पूछता, "आज क्या लेंगी?" हालाँकि उसे पता था कि प्रिया हमेशा वही कम चीनी वाली चाय लेती है।
धीरे-धीरे उनके बीच बातचीत बढ़ने लगी। प्रिया को पता चला कि आर्यन ने यह कैफे अपने दादा जी की याद में खोला था। उसके दादा जी को चाय बनाने का बहुत शौक था और वे कहते थे कि चाय सिर्फ एक पेय नहीं, बल्कि एहसासों का मिश्रण है।
"मैं भी कुछ ऐसा ही मानता हूँ," आर्यन ने एक दिन कहा। "जब मैं चाय बनाता हूँ तो मुझे लगता है कि मैं सिर्फ चाय नहीं, बल्कि अपने एहसास किसी को दे रहा हूँ।"
प्रिया को उसकी बातें अजीब लेकिन दिलचस्प लगती थीं। वह खुद भी एक कलाकार थी, और उसे समझ आता था कि जब आप किसी काम में अपना दिल लगाते हैं तो वह काम कला बन जाता है।
एक शाम प्रिया अपने लैपटॉप के साथ कैफे पहुँची। उसे एक प्रोजेक्ट पर काम करना था और घर में बहुत शोर था। आर्यन ने उसे देखा और मुस्कुराया।
"आज ऑफिस का काम?" उसने पूछा।
"हाँ, एक बड़ा प्रोजेक्ट है। सोचा यहाँ आकर शांति में कर लूँ," प्रिया ने कहा।
"बिल्कुल सही जगह आई हो। मैं आपको डिस्टर्ब नहीं करूँगा," आर्यन ने कहा और चाय लेकर आ गया।
प्रिया काम में लग गई, लेकिन कुछ देर बाद वह अटक गई। उसे एक विज्ञापन के लिए एक नया आइडिया चाहिए था, लेकिन कुछ सूझ नहीं रहा था। उसने निराशा में अपना सिर पकड़ लिया।
"क्या हुआ? सब ठीक है?" आर्यन ने पास आकर पूछा।
"बस, काम में थोड़ा अटक गई हूँ। एक नए आइडिए की ज़रूरत है, लेकिन दिमाग काम नहीं कर रहा," प्रिया ने कहा।
"तो फिर थोड़ी देर के लिए काम से ब्रेक लो। कभी-कभी जब हम चीज़ों को ज़बरदस्ती पकड़ने की कोशिश करते हैं, तो वे हमसे दूर भागती हैं। लेकिन जब हम छोड़ देते हैं, तो वे खुद वापस आ जाती हैं," आर्यन ने कहा।
प्रिया ने उसकी बात मानी और लैपटॉप बंद कर दिया। आर्यन उसके सामने बैठ गया।
"तुम्हें पेंटिंग पसंद है?" आर्यन ने अचानक पूछा।
"हाँ, बचपन में बहुत बनाती थी। लेकिन अब समय नहीं मिलता," प्रिया ने कहा।
"यह तो बहुत बुरी बात है। जो चीज़ें हमें खुशी देती हैं, उनके लिए हमें समय निकालना चाहिए," आर्यन ने कहा।
उस शाम प्रिया और आर्यन घंटों बातें करते रहे। उन्होंने अपने सपनों, अपनी पसंद-नापसंद, और अपनी ज़िंदगी के बारे में बात की। प्रिया को ऐसा लगा जैसे वह आर्यन को सालों से जानती हो।
उस रात जब प्रिया घर पहुँची तो उसके दिल में एक अजीब सी खुशी थी। उसने अपनी डायरी खोली और लिखा, "आज मैंने किसी को पाया है जो मुझे समझता है। आर्यन सिर्फ एक कैफे का मालिक नहीं है, वह एक कलाकार है, एक सपने देखने वाला है, और शायद वह कुछ और भी है।"
अगले कुछ हफ्तों में प्रिया और आर्यन की दोस्ती और गहरी हो गई। आर्यन ने प्रिया को अपनी डायरी दिखाई जिसमें उसने कई कविताएँ लिखी थीं। प्रिया हैरान रह गई। उसे नहीं पता था कि आर्यन कविताएँ भी लिखता है।
"ये सब कब लिखी तुमने?" प्रिया ने पूछा।
"रात को, जब कैफे बंद हो जाता है। उस वक्त सन्नाटा होता है और मन को सुकून मिलता है," आर्यन ने कहा।
प्रिया ने एक कविता पढ़ी। वह किसी के इंतज़ार के बारे में थी, किसी ऐसे शख्स के बारे में जो शायद कभी आए या न आए।
"यह किसके लिए लिखी है?" प्रिया ने पूछा।
आर्यन ने मुस्कुराकर कहा, "किसी ऐसे के लिए जिसे मैं अभी तक नहीं मिला था।"
उस दिन के बाद से प्रिया को महसूस होने लगा कि वह आर्यन के लिए कुछ महसूस कर रही है। लेकिन वह डरती थी यह कहने से, यह सोचने से कि अगर आर्यन ने वैसा नहीं सोचा तो क्या होगा।
एक दिन प्रिया की कंपनी में एक बड़ा प्रेजेंटेशन था। वह बहुत नर्वस थी। सुबह जब वह कैफे पहुँची तो आर्यन ने उसे देखते ही पहचान लिया कि कुछ गड़बड़ है।
"क्या हुआ? तुम परेशान लग रही हो," आर्यन ने पूछा।
"आज एक बहुत बड़ा प्रेजेंटेशन है। मैं बहुत घबरा रही हूँ," प्रिया ने कहा।
आर्यन ने उसका हाथ पकड़ा और कहा, "देखो प्रिया, तुम बहुत टैलेंटेड हो। मैंने तुम्हारे काम देखे हैं। तुम्हें बस अपने आप पर विश्वास करने की ज़रूरत है। और याद रखना, जो भी हो, मैं यहाँ हूँ।"
उस दिन प्रिया का प्रेजेंटेशन शानदार रहा। उसके बॉस ने उसकी तारीफ की और उसे एक नई प्रोजेक्ट की ज़िम्मेदारी दी। शाम को जब वह कैफे पहुँची तो सबसे पहले उसने आर्यन को यह खबर सुनाई।
"मुझे पता था कि तुम कर लोगी," आर्यन ने मुस्कुराते हुए कहा।
"तुम्हारे बिना शायद मैं नहीं कर पाती," प्रिया ने कहा।
उस रात आर्यन ने कैफे में एक छोटी सी पार्टी रखी। उसने प्रिया के लिए उसकी पसंदीदा चाय बनाई और कुछ स्वादिष्ट स्नैक्स बनाए। दोनों ने साथ में बैठकर खाना खाया और बातें कीं।
"प्रिया, मुझे तुमसे कुछ कहना है," आर्यन ने अचानक कहा।
प्रिया का दिल तेज़ी से धड़कने लगा। "हाँ, बोलो।"
"तुम जानती हो, जब से तुम इस कैफे में आई हो, मेरी ज़िंदगी बदल गई है। पहले यह कैफे सिर्फ एक बिज़नेस था, लेकिन अब यह वह जगह है जहाँ मैं तुम्हारा इंतज़ार करता हूँ। हर सुबह मैं सोचता हूँ कि आज तुम आओगी या नहीं। और जब तुम आती हो, तो मेरा दिन बन जाता है," आर्यन ने कहा।
प्रिया की आँखों में आँसू आ गए। "आर्यन, मैं भी..."
"रुको, मुझे पूरा कहने दो। प्रिया, मुझे तुमसे प्यार हो गया है। मुझे नहीं पता कि तुम मेरे बारे में क्या सोचती हो, लेकिन मैं अपने दिल की बात तुम्हें बताना चाहता था," आर्यन ने कहा।
प्रिया ने उसका हाथ पकड़ा और कहा, "मुझे भी तुमसे प्यार हो गया है, आर्यन। मैं बस यह कहने से डर रही थी।"
उस रात दोनों ने एक-दूसरे को अपनी भावनाएँ बताईं और अपनी ज़िंदगी की सबसे खूबसूरत शुरुआत की।
अगले कुछ महीने प्रिया और आर्यन के लिए सपने जैसे थे। वे साथ में बहुत वक्त बिताते, कभी कैफे में तो कभी बाहर कहीं घूमने जाते। आर्यन ने प्रिया को शहर के कई ऐसे कोने दिखाए जो उसने कभी नहीं देखे थे। प्रिया ने आर्यन को पेंटिंग सिखाई और वे साथ में कैनवास पर अपनी भावनाओं को उतारते।
लेकिन ज़िंदगी हमेशा आसान नहीं होती। एक दिन प्रिया के घर से एक फोन आया। उसके पिता जी की तबीयत खराब हो गई थी और उसे तुरंत अपने गाँव जाना पड़ा। गाँव लखनऊ के पास था, मुंबई से काफी दूर।
"मुझे कुछ दिनों के लिए जाना होगा," प्रिया ने आर्यन से कहा।
"कोई बात नहीं, परिवार ज़रूरी है। तुम जाओ, मैं यहाँ हूँ," आर्यन ने कहा।
प्रिया गाँव चली गई। वहाँ पहुँचकर उसे पता चला कि उसके पिता जी को दिल का दौरा पड़ा था। डॉक्टर ने कहा कि वे अब ठीक हैं, लेकिन उन्हें आराम की ज़रूरत है। प्रिया ने सोचा कि वह कुछ दिनों में वापस चली जाएगी, लेकिन घर की स्थिति ऐसी थी कि वह नहीं जा सकी।
उसकी माँ अकेली थीं और घर का सारा काम उन्हीं पर था। प्रिया ने अपनी कंपनी से छुट्टी ले ली और वहीं रुक गई। वह रोज़ आर्यन से फोन पर बात करती, लेकिन धीरे-धीरे उसे महसूस होने लगा कि शायद उसे यहीं रहना पड़ेगा।
एक दिन उसके पिता जी ने उससे कहा, "बेटा, अब तुम्हारी शादी का वक्त आ गया है। हमने तुम्हारे लिए एक लड़का देखा है। वह भी यहीं गाँव का है और अच्छी नौकरी करता है।"
प्रिया को झटका लगा। "लेकिन पापा, मैं अभी शादी नहीं करना चाहती।"
"क्यों नहीं? तुम्हारी उम्र हो गई है। और हमें भी तुम्हें अपनी ज़िंदगी में सेटल देखना है," उसके पिता जी ने कहा।
प्रिया ने आर्यन को यह बात बताई। आर्यन चुप रहा। फिर उसने कहा, "प्रिया, मैं तुम्हें अपने परिवार से अलग नहीं करना चाहता। अगर तुम्हें लगता है कि तुम्हें वहीं रहना चाहिए, तो मैं समझता हूँ।"
"लेकिन आर्यन, मैं तुम्हें प्यार करती हूँ। मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकती," प्रिया ने रोते हुए कहा।
"और मैं भी तुम्हें प्यार करता हूँ। लेकिन प्यार सिर्फ एक-दूसरे को पाने के बारे में नहीं है। यह एक-दूसरे की खुशी के बारे में भी है। अगर तुम्हारे परिवार को तुम्हारी ज़रूरत है, तो तुम्हें वहाँ होना चाहिए," आर्यन ने कहा।
प्रिया ने अपने माता-पिता से बात की और उन्हें आर्यन के बारे में बताया। शुरुआत में उन्होंने मना कर दिया। उन्हें लगा कि एक कैफे का मालिक प्रिया के लिए सही नहीं है। लेकिन प्रिया ने उन्हें समझाया कि आर्यन एक अच्छा इंसान है और वह उसे खुश रख सकता है।
"बेटा, हम तुम्हारी खुशी चाहते हैं। लेकिन यह भी देखना होगा कि वह तुम्हारी देखभाल कर सके," उसकी माँ ने कहा।
"माँ, प्यार सिर्फ पैसों के बारे में नहीं है। आर्यन के पास एक सुंदर दिल है और वही सबसे ज़रूरी है," प्रिया ने कहा।
आखिरकार, प्रिया के माता-पिता मान गए। लेकिन उन्होंने कहा कि वे पहले आर्यन से मिलना चाहते हैं।
प्रिया ने आर्यन को बुलाया। आर्यन ने अपना कैफे एक दिन के लिए बंद किया और लखनऊ आ गया। जब वह प्रिया के घर पहुँचा तो उसके हाथों में एक डिब्बा था। उसने प्रिया के माता-पिता को वह डिब्बा दिया।
"यह क्या है?" प्रिया के पिता जी ने पूछा।
"यह मेरे दादा जी की चाय की रेसिपी है। उन्होंने मुझे सिखाया था कि चाय बनाना सिर्फ एक काम नहीं, बल्कि एक कला है। और मैंने यह भी सीखा है कि रिश्ते भी ऐसे ही होते हैं। उन्हें मोहब्बत और इज़्ज़त से संभालना पड़ता है," आर्यन ने कहा।
प्रिया के पिता जी ने उसकी बात सुनी। फिर उन्होंने कहा, "बेटा, तुम्हारी बातों में सच्चाई है। लेकिन मुझे यह जानना है कि क्या तुम मेरी बेटी को खुश रख सकते हो?"
"मैं अपनी पूरी कोशिश करूँगा। और मैं वादा करता हूँ कि मैं हमेशा उसका साथ दूँगा, हर खुशी और हर गम में," आर्यन ने कहा।
उस दिन के बाद चीज़ें बदलने लगीं। प्रिया के माता-पिता ने आर्यन को स्वीकार कर लिया। उन्होंने देखा कि आर्यन एक ईमानदार और मेहनती लड़का है जो प्रिया को सच में प्यार करता है।
कुछ महीनों बाद प्रिया और आर्यन की शादी हो गई। यह एक साधारण लेकिन खूबसूरत शादी थी। कैफे को फूलों से सजाया गया और वहीं पर उनकी शादी हुई। दोनों परिवारों के लोग आए और सबने उनका आशीर्वाद दिया।
शादी के बाद प्रिया मुंबई लौट आई, लेकिन इस बार वह अकेली नहीं थी। आर्यन उसके साथ था और वे दोनों ने मिलकर अपनी नई ज़िंदगी शुरू की।
आर्यन ने अपने कैफे में एक छोटा सा कोना बनाया जहाँ प्रिया अपनी पेंटिंग्स रख सकती थी। धीरे-धीरे लोगों ने उसकी पेंटिंग्स को पसंद करना शुरू किया और कुछ लोगों ने तो उन्हें खरीदा भी।
"देखा, मैंने कहा था ना कि तुम्हें अपनी कला को समय देना चाहिए," आर्यन ने एक दिन कहा।
"हाँ, और यह सब तुम्हारी वजह से हुआ। तुमने मुझे अपने सपनों पर विश्वास करना सिखाया," प्रिया ने कहा।
एक दिन प्रिया को एक बड़े आर्ट गैलरी से फोन आया। उन्होंने उसे अपनी पेंटिंग्स की एक प्रदर्शनी करने का मौका दिया। प्रिया बहुत खुश हुई, लेकिन साथ ही घबराई भी।
"क्या होगा अगर लोगों को मेरी पेंटिंग्स पसंद नहीं आईं?" उसने आर्यन से पूछा।
"तो क्या हुआ? तुम अपने लिए पेंट करती हो, लोगों के लिए नहीं। और जो लोग सच्ची कला को पहचानते हैं, वे ज़रूर तुम्हारी पेंटिंग्स को पसंद करेंगे," आर्यन ने कहा।
प्रदर्शनी का दिन आया। गैलरी में बहुत सारे लोग आए। प्रिया की पेंटिंग्स को लोगों ने बहुत पसंद किया। कई लोगों ने उनकी तारीफ की और कुछ ने तो उन्हें खरीदने की इच्छा भी जताई।
उस रात जब वे घर लौटे तो प्रिया ने आर्यन को गले लगाया और कहा, "आज मैंने अपना सपना पूरा होते देखा। और यह सब तुम्हारी वजह से हुआ।"
"नहीं प्रिया, यह सब तुम्हारी मेहनत और तुम्हारी प्रतिभा की वजह से हुआ। मैंने तो बस तुम्हें सपोर्ट किया," आर्यन ने कहा।
समय बीतता गया। प्रिया और आर्यन की ज़िंदगी में कई उतार-चढ़ाव आए, लेकिन उन्होंने हमेशा एक-दूसरे का साथ दिया। कैफे का बिज़नेस बढ़ा और प्रिया की पेंटिंग्स भी मशहूर होने लगीं।
एक दिन प्रिया ने आर्यन से कहा, "तुम्हें पता है, जब मैं पहली बार उस कैफे में आई थी तो मुझे नहीं पता था कि मैं अपनी ज़िंदगी की सबसे खूबसूरत चीज़ को ढूँढ रही हूँ।"
"और वह क्या थी?" आर्यन ने पूछा।
"तुम," प्रिया ने मुस्कुराते हुए कहा।
आर्यन ने उसे गले लगाया और कहा, "मुझे भी नहीं पता था कि एक साधारण सी चाय किसी की ज़िंदगी में इतना बड़ा बदलाव ला सकती है।"
उस रात दोनों ने अपने कैफे की छत पर बैठकर सितारे देखे। शहर की रोशनियाँ चमक रही थीं और हवा में ठंडक थी। प्रिया ने आर्यन का हाथ पकड़ा और कहा, "मुझे तुमसे एक बात कहनी है।"
"क्या?" आर्यन ने पूछा।
"हम जल्द ही माँ-बाप बनने वाले हैं," प्रिया ने मुस्कुराते हुए कहा।
आर्यन के चेहरे पर खुशी छा गई। उसने प्रिया को उठाया और घुमाया। "सच में? यह तो सबसे अच्छी खबर है!"
"हाँ, और मैं चाहती हूँ कि हमारा बच्चा भी तुम्हारी तरह प्यार और कला को समझे," प्रिया ने कहा।
"वह ज़रूर समझेगा, क्योंकि उसके माँ-बाप दोनों कलाकार हैं," आर्यन ने कहा।
नौ महीने बाद उनके घर में एक छोटी सी परी आई। उन्होंने उसका नाम आरा रखा। आरा बड़ी होने लगी और उसे भी अपने माता-पिता की तरह कला से प्यार था। वह अपने पापा के साथ कैफे में बैठती और अपनी माँ के साथ पेंटिंग करती।
एक दिन जब आरा पाँच साल की थी, उसने अपने पापा से पूछा, "पापा, आप और मम्मा की पहली मुलाकात कैसे हुई थी?"
आर्यन ने मुस्कुराते हुए कहा, "एक बारिश के दिन, इसी कैफे में। तुम्हारी मम्मा यहाँ चाय पीने आई थीं और उस दिन से मेरी ज़िंदगी बदल गई।"
"और फिर?" आरा ने उत्सुकता से पूछा।
"और फिर हमने एक-दूसरे को प्यार किया, शादी की, और तुम हमारी ज़िंदगी में आई। तुम हमारी सबसे बड़ी खुशी हो," आर्यन ने कहा।
आरा खुश हो गई और अपने पापा को गले लगा लिया।
उस शाम जब प्रिया कैफे में आई तो उसने देखा कि आर्यन और आरा साथ में एक नई डिश बना रहे थे। वह दोनों को देखकर मुस्कुरा दी।
"क्या बना रहे हो तुम दोनों?" प्रिया ने पूछा।
"एक सरप्राइज़," आरा ने कहा।
कुछ ही देर में उन्होंने एक स्वादिष्ट केक तैयार किया। केक पर लिखा था, "तेरे नाम की खुशबू।"
प्रिया की आँखों में आँसू आ गए। "यह क्या है?"
"यह हमारी कहानी का नाम है। वह कहानी जो एक बारिश के दिन शुरू हुई थी और अब भी जारी है। एक कहानी जो चाय की खुशबू से शुरू हुई और प्यार में बदल गई," आर्यन ने कहा।
उस रात तीनों ने साथ में केक काटा और अपनी खुशियों का जश्न मनाया। प्रिया ने सोचा कि कभी-कभी ज़िंदगी आपको सबसे अनचाही जगहों पर सबसे खूबसूरत तोहफे देती है। उसके लिए वह तोहफा आर्यन था, और अब आरा भी।
बरसों बाद, जब आरा बड़ी हो गई, उसने भी अपने माता-पिता की तरह कला को अपनाया। वह एक मशहूर लेखिका बन गई और उसने अपने माता-पिता की कहानी पर एक किताब लिखी।
किताब का नाम था, "तेरे नाम की खुशबू।"
उस किताब में उसने लिखा, "मेरे माता-पिता ने मुझे सिखाया कि प्यार सिर्फ एक एहसास नहीं है, बल्कि एक यात्रा है। एक यात्रा जो दो अनजान लोगों को एक साथ लाती है और उन्हें एक-दूसरे का हिस्सा बना देती है। उनकी कहानी एक चाय की दुकान से शुरू हुई, लेकिन आज वह एक परिवार बन चुकी है। और यह सब संभव हुआ क्योंकि उन्होंने एक-दूसरे को खोजा, एक-दूसरे पर विश्वास किया, और सबसे ज़रूरी, एक-दूसरे से प्यार किया।"
जब किताब छपी तो प्रिया और आर्यन ने उसे पढ़ा। दोनों की आँखों में खुशी के आँसू थे।
"हमारी बेटी ने हमारी कहानी को अमर कर दिया," प्रिया ने कहा।
"हाँ, और यह कहानी हमेशा याद दिलाएगी कि सच्चा प्यार वह होता है जो सब कुछ सह लेता है, सब कुछ समझता है, और हमेशा एक-दूसरे के साथ खड़ा रहता है," आर्यन ने कहा।
उस शाम वे फिर से अपने कैफे की छत पर बैठे। बारिश हो रही थी, बिल्कुल वैसी ही जैसी उस दिन हो रही थी जब वे पहली बार मिले थे। प्रिया ने आर्यन का हाथ पकड़ा और कहा, "तुम्हें पता है, आज भी जब मैं तुम्हें देखती हूँ तो मुझे वही एहसास होता है जो पहली बार हुआ था।"
"कौन सा एहसास?" आर्यन ने पूछा।
"कि मैंने अपना घर पा लिया है। तुम मेरे घर हो, आर्यन," प्रिया ने कहा।
आर्यन ने उसे गले लगाया और कहा, "और तुम मेरी ज़िंदगी की खुशबू हो, प्रिया। तेरे नाम की खुशबू।"
दोनों ने एक-दूसरे को देखा और मुस्कुरा दिए। उनकी कहानी एक साधारण कैफे से शुरू हुई थी, लेकिन आज वह एक खूबसूरत परिवार बन चुकी थी। और यह सब संभव हुआ था क्योंकि उन्होंने एक-दूसरे को खोजा था, एक-दूसरे को समझा था, और सबसे ज़रूरी, एक-दूसरे से प्यार किया था।
बारिश तेज़ हो गई थी। लेकिन उन दोनों को कोई फर्क नहीं पड़ता था। क्योंकि वे जानते थे कि चाहे बाहर कितनी भी बारिश हो, उनके दिलों में हमेशा धूप रहेगी। एक-दूसरे के प्यार की धूप।
और इस तरह उनकी कहानी चलती रही, एक खूबसूरत यात्रा की तरह, जिसका कोई अंत नहीं था। क्योंकि सच्चा प्यार कभी खत्म नहीं होता, वह बस नए रूपों में जीता रहता है, पीढ़ी दर पीढ़ी, दिल से दिल तक।
तेरे नाम की खुशबू - एक प्यार की कहानी जो एक चाय के प्याले से शुरू हुई और एक परिवार में बदल गई।
***समाप्त***