Aunt's wedding in Hindi Drama by Nandini Agarwal Apne Kalam Sein books and stories PDF | बुआ की शादी

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बुआ की शादी

बुआ की शादीकुंती -मां सुबह जल्दी उठा देना कॉलेज जाना है। बच्चों की किलकारी कभी सोती बुआ को मुट्ठी बना बाल को नोचना कभी नन्हे नन्हे हाथों से थपथपाना मीठी मुस्कान के साथ हुआ उठ जाती है।शीला:रात को जल्दी उठा देना वह कहकर सोई थी। फिर देर कर दी उठने में बस निकल जाएगी जल्दी कॉलेज को तैयार हो जाबेटी क्लास मे: अरे देख इस लड़क को सर की तरफ कम तेरी तरफ ज्यादा देख रहा है। देखने दे आते जाते जाने कितने मिलते हैं। भेजी तो रहा है कहने की हिम्मत करेगा तो ऐसा पटा लूंगी देखने की क्या क्लास में आने की हिम्मत नहीं करेगा। बस स्टैंड के लिए रिक्शा पकड़ते हैं।कितनी अच्छी हवा चल रही है सुहाना मौसम हो रहा है दुपट्टा हवा से लहरा रहा है। मन को ऐसा लग रहा है कैद कर लूं मौसम‌ अरे अरे मैंने कल से डांस क्लास ज्वाइन कर ली है सहेली बोलती है।कुंती: मुझे नहीं सीखना पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान देना है।सहेली: रात सीरियल में क्या हुआ था मेरा छूट गया।कुंती:होना क्या था कभी हीरो को मार देते हैं नाटक आगे बढ़ाने के लिए तो कभी जिंदा दिखा देते हैं। मुझे नहीं पसंद कहीं का ईट कहीं का रोड़ा जिसका ताल-मेल ही नहीं कहानी बना देते हैं बकवास घर आ गया बाय फिर मिलते हैं। हंसते मुस्कुराते! हुए-बुआ की शादी होगी -बुआ की शादी होगी अरे मेरे प्यारे प्यारे गुड्डे गुड़िया किस से हो रही है बुआ की शादीकुंती-नहीं मुझे शादी नहीं करनी है मां।शीला (कुंती की मां): क्यों नहीं करनी शादी कई रिश्ते हैं तेरे लिए जो पसंद हो सो बताकुंती: शादी में झंझट है मुझे नहीं पड़ना मुझे आप लोगों से दूर नहीं होना इसी बचपन में रहना है।शीला (कुंती की मां): हम भी तो बिहा कर शादी आए तुमको भी जाना हैकुंती:सास करती है मेरी सांस में परेशान करा मैं अपनी बहू को परेशान करूंगी मां सहना सिखाती है सांस सहनशक्ति की सीमा तोड़ती है।दोनों ने वही किया जो अपने साथ हुआ किसी ने अपने खिलाफ आवाज उठाना किसी ने नहीं सिखाया जो बहुत आवाज उठाती है उसे ससुराल वाले मार देते हैं जो बहुत चुप रहती है वह खुद मर जाती है।जरूरी नहीं किसी हथियार से मारा जाए वही अत्याचार है बहुत बहुओं को ताने सुना कर हर पल मारा जाता है  तो किसी को ससुराल से मायके तक नहीं भेजा जाता है तो किसी को मायके भेज दिया जाता है तो सालों तक ससुराल बुलाया नहीं जाता है जीते हुए भी पल पल मरती है बहू जरूरी नही कोट कचहरी में ही आवाज़ उठाने पर ही अत्याचार गिना जाए।अन गिनती के अत्याचार को घर में ही दबा दिया जाता है।समाज क्या कहेगा समाज रिवाज,खानदान इज्जत की दुहाई के बीच पिसकर रह जाती है। रिश्ते कहां गए कि वह किसी की बेटी भी है।शीला: (कुंती की मां) ज्यादा वकील मत बन LLB का लास्ट साल है हमें जज- वकील नहीं बनाना है पढ़ाई पूरी हो जाएगी अपना फर्ज पूरा करना है अभी तो हम हैं कल ध्यान  कौन करेगा तुम्हाराकुंती: मेरे कॉलेज में बहुत लड़कियां शादीशुदा पढ़ती हैं। तलाकशुदा कोई दुर्घटना का शिकार है। तो कोई घरेलू हिंसा से परेशान है। जितना कहूं उतना कम है मां। भाई के बच्चे हैं भाई भाभी है यह मेरा ही परिवार है अलग थोड़ी हूं आप ही तो कहती हो बड़ा भाई बाप समान और भाभी मां जैसी होती है।शीला:(कुंती की मां) यह तो सही है। कुंवारी लड़की को गंदी नजर से देखा जाता है। समाज मेंकुंती:समाज तो तलाकशुदा ससुराल की बेसहारा मायके में पड़ी लड़की को भी गंदी नजर से देखता है घूम फिर के औरत को अपनी हवस का शिकार बनाया जाता है।शीला: (कुंती की मां) लड़का घर परिवार अच्छा है तू हां कह दे तो बात आगे बढ़ाएंकुंती: मुझे पति दोस्त जैसा चाहिएसमाज की नजर से आप तो अंगरक्षक देख रहे हैं।शीला: (कुंती की मां) तेरे पापा से कह देती हूं कुंती ने हां कर दी है।कुंती: मैं पापा से खुद बात कर लूंगी मैं बुआ की शादी बुआ की शादी नहीं बच्चों अपनी मेरी शादी नहीं है। पहले तुम्हारे बाबा के सामने शर्ते रखती हूं जब शादी होगी तुम्हारी बुआ की शादी चलो खेलते हैं। कॉलेज जाना है बस पकड़नी है।सहेली:यार कुंती क्या हुआ सबको हंसाने वाली दबंग कुंती का चेहरा क्यों लटका हुआ है।कुंती: मेरी शादी की चर्चा चल रही है।सहेली: हां कर देकुंती:हंसते हुए पहले तुम सब सहेलियों की शादी हो जाए जब करूंगी।सहेली: देखते हैं कब तक हां नहीं करती हम सब ने तो घर में हा कर दी है जब चाहे जहां चाहे शादी कर लो देंकुंती: मुझे आगे पढ़ना है सच को उजागर करना हैसहेली: क्या करना पढ़कर वही करना है जो और करते आए हैं। चूल्हा फूंकना बच्चे पैदा करनाकुंती: (गुस्से से) अपने हुनर को दबाना पति की पैर की जूती सास-ससुर की सती सावित्री सब गुण संपन्न कठपुतली बनना मुझे पसंद नहीं।सहेली: दुनिया है याद क्यों ध्यान देती है। अकेले तेरे आवाज उठाने से कुछ नहीं होगा। घर आ गया-बाय बायकुंती-बहुत तेज भूख लगी है क्या बना है खाने में बुआ आज तो आपकी पसंद का खाना बना है लगता है रिश्ते को हां करानी है।शैलेश: बेटा कुंती इन रिश्तो में से जिसे तू कहेगी उसी से बात आगे बढ़ाऊंगाकुंती: में पापा शादी को मुझे करनी है पर कुछ शर्ते हैं। पहली शर्त-मुझे पढ़ना है आत्मनिर्भर बनना है। दूसरीशर्त-लड़का मुझे पति नहीं दोस्त चाहिए। सच का साथ देने वाला चाहिए।शैलेश: आत्मनिर्भर बनना तो अच्छी बात है-LM करने के बाद उम्र काफी बढ़ जाएगीकुंती:जो लड़की पैसे नहीं कमाती है नौकरी नहीं करती है घर से बाहर उसे जाने नहीं दिया जाता है पैसे कमाने के बहुत रास्ते घर में ही ट्यूशन सिलाई बाकी बहुत हुनर जो घर में बैठकर पैसा कमाया जा सकता है ससुराल में उस पर भी पाबंदी लगाते हैं। ऐसी महिला को और दबा कर रखा जाता है जाएगी कहां गई थी तो यही जैसा ढालेंगे ढल जाएगीशैलेश: मैं तेरी बात से सहमत हूं तेरी सभी शर्तें मंजूर है।धीरे-धीरे कुंती की सारी सहेलियां की शादी हो जाती है बस कुंती की पढ़ाई जारी रहती है।घिन-घिन घंटी बोलती है फोन की कुंती मैं तेरी सहेली अर्चना कहां है तू मैं यहीं घर आजा बातें करेंगे काफी दिन हो गए मिले हुए सहेलियां गले मिलती है और सुना  क्या चल रहा है ससुराल मेंअर्चना-सब सही है थोड़ी बहुत परेशानी तो सबके जीवन में चलती है।कुंती-सच बतानाअर्चना-जब मेरे पति बीमारी में साथ देते हैं बच्चों को दूध की बोतल भर देते हैं। मेरी सास ताना मारती है। की बीवी का गुलाम बन गया यूं ही बढ़ाना कर दिया 4 दिन की आई के साथ पल्लू से बंध गयाकुंती-जितने साल का बेटा करा इतने साल की बेटी भी तो पल भर कर घर जाती है यह क्यों भूल जाते हैं। अरे बता बाकी सहेलियां मिली और सब कैसे हैं। मैं जब बाजार गई थी पूनम मिली थी उसका भी यही हाल है उसकी सांस कहती है बहू टोटका करा लाई है मेरी नहीं सुनता बेटा मैंने कुछ नहीं किया वही तंत्र मंत्र जपती रहती है।कुंती: घरेलू हिंसा ने कितनों का अंधविश्वास का धंधा दिया है टोटका कराना है। तंत्र मंत्र जपना है। आपसी सहयोग मसला आपस में मट मेल दूर कर ले तोसमाज में अंधविश्वास को जो फैलाया है खत्म हो जाएगा एक बार शबनम को फेसबुक पर देखा था मिल गई मैंने कहा मैं कुंती हां हां पहचान गई कैसी है तू शबनम बढ़िया तेरी शादी हुई या नहीं अभी नहीं हुई तेरा क्या चल रहा है।शबनम-मेरा तलाक हो गया है।कुंती: क्यों दोनों को प्यार नहीं था क्याशबनम: प्यार तो बहुत करते थे आपस में झगड़े होते थेकुंती: अधिकतर पति-पत्नी की लड़ाई की वजह अपने ही बीच में आकर ही कराते हैं।पवित्र रिश्ता आत्मा-से आत्मा का मिलन का रिश्ता है।उसे तोड़ने वाले कहीं ना कहीं हमारे अपने होते हैं जिन्हें रिश्तो को लाज रख कर उजागर नहीं किया जाता पर्दा डाला जाता है।अर्चना-अच्छा मैं घर जाती हूं नहीं थोड़ी देर और रुक जा तू शादी कब करेगी करूंगी तुम सब को बुलाऊंगीकुंती-और तेरे आसपास की लड़कियां कैसी है।अर्चना-सब की कहानी एक जैसी है कोई कैसे परेशान है तो कोई कैसे एक की परिवार तो ऐसा है। खाने को भी तरसाया जाता है।क्या सिखाया मां बाप ने बड़ों का सम्मान करना नहीं सिखाया बहू सम्मान करना तो सिखाया पेट में जो भूख लगती है। उसको लात मारना नहीं सिखायाकुंती: अरे करो शादी कहा था पहले आत्मनिर्भर बन जाओ।अर्चना: एक की ससुराल तो ऐसी मिली है गृहस्ती बहुत बड़ी बहुओं को खर्चा नहीं दिया जाता अलग होने को कहा जाता है। कह दिया जाता है जा कुछ नहीं मिलेगा जो बाप मां का बुढ़ापे का सहारा बनेगा उसे मिलेगा कितने स्वार्थी होते हैं बड़े लोग अपना जीवन सुखमय बीते दुनिया रंगीली है। घाघरे दो तो सब के दुख एक जैसे हैं।कुंती: ना मैं तुम्हारी ससुराल वालों को समझाती हूंअर्चना: नाना जैसे गाड़ी चल रही है चलने दे कुछ मत कहें और बता तेरी शादी कब है 15 दिन बाद मेरी शादी है।अरे वाह! कौन है वह खुशनसीबकुंती-मेरे कोर्ट में ही बैठता है। जज हैमैं भी जज बन गई हूं सामने से ऑफर आया था दोनों का अच्छा तालमेल बैठ रहा है घर में सब तैयार है अर्चना मैं तो पहले ही कहती थी बेटी को आत्मनिर्भर बनाओ घरेलू अत्याचार बंद कराओ।                          ******************************************  Follow              Like          Share