तेरी मेरी कहानी दादी की जुबानी
दादी दादी हाँ बच्चो आओं खेलो और मैंने तुम्हारे लिय आम मंगाएं है। लो खालो मेरे पास बैठकर आम का मौसम आ गया है। आज बच्चो को आम का स्वाद कराती हू । नहीं -नही दादी हमे आम नही चाहिय। क्यों? बच्चो आज हमे कुछ और चाहिय क्या? चाहिय । मुझ बुढिया के पास क्या रखा है। जो मैं दूं ।
बच्चे- दादी हमें आप का अनुभव (तर्जुवा) चाहिए।
दादी तुम ठहरे इक्शवी सदी के बालक मेरी बातो मे तुम्हे क्या मिलेगा ।
बच्चे जिद करते हैं। तभी ही हम आम खायेगे।
दादी- अच्छा मेरी आँखो के तारे अपनी उम्र का तर्जुवा बताती हूँ । एक वादा करो नाराज नही होंगे और मेरे पास ऐसे ही खेलने आना है। चाहे मै किसी धर्म , जाति राजनितिक ' सामाजिक , विज्ञानिक ' बाते कहूं वो जरूरी नही मैं सही कह रही हूँ। मैं तो बस अपना नजरिया जाहिर कर रही हूं। अरे छोडो बच्चो क्यू बुढाये मे मेरा सिर फुडवाते हो। दो चार साल का जीवन है। कट जायेगा। बच्चे - नही दादी हमे बताओ न हमे सुनना है। आपके शौक सुविधा विचारो को जानना है।
दादी- कहाँ से शुरू करू बच्चे - कही से भी दादी जहाँ से चाहे बीच -बीच मे हम बता देंगे जिस को जानने की हमारे मन मे जिज्ञासा होगी। आप शुरू तो करो। प्यारी दादी अच्छा बच्चो एक तो मुझे संगीत सुनना बहुत पसन्द है। जिस के बोल स्वर दिल को छू जाये बोल मे ताकत सच्चाई हो मधुर आवाज मे जैसे - कोई गानो का जमाना कभी जाता नहीं है। लिखने वाले के अक्षर अमर बन जाते है। प्रदीप भजन - और अन्य गाने भी लिखे होंगी मुझे जानकारी नहीं है। जमाने के हिसाब से बोल आते रहे जाते रहे ।
बच्चे - दादी कोई गाने का उदाहरण समझाये - दादी फूल तुम्हे भेजा है। खत में लिखने का जमाना था। खत मे लिखे शब्द दूर से एहसास दिला रहा था। कलम की ताकत को पहचानो ।
२ - मेरे पिया गये रंगून वहाँ से किया है टेलीफोन बातो से सुनकर एहसास दिला रहा था।
3 - तू मेरा वॉप फ्रेड में तेरा गलफ्रेड प्यार करेगी न न अंग्रेजी में कहा जाये लड़का लडकी दोस्त है । या दोस्ती से ज्यादा . को कहाँ जाता है।गलेफ्रेंड - वॉय फ्रेंड होना बुरी बात नही लड़का लड़की दोस्त हो सकते हैं । पर अंग्रेजी मे बोलने से जमाना दोस्ती से अलग नाम देते हैं। दोस्त का रिश्ता तो वो होता है। ' खून उसमें खून का रिश्ता है । जाति का न किसी रिश्ते से जुड़े। जो हम बाते दोस्त आपस में बेझिझक बाँटते है। वो रिश्ता होता है। दोस्ती का ' निस्वार्थ रहित ।
4 - मैने सइया जी से आज ब्रेकप कर लिया मतलब पहले शादी कर ली फिर रिश्ता तोड़ वापस आ गयी ।
माँ बाँप की छाती पर दाल दरने। जो कि आज हो रहा है। तीन साल हो गये 'आठ साल हो गये एक शादी हो गयी ' दूसरी भी टूट गयी पर लड़ाई खत्म नही हुई । मामला कोर्ट - कचहरी तक गया कब तक चलेगा। कोई अता -पता नहीं अरे भाई जो बात है। उसका समाधान निकालो जीवन क्यो गुस्से से बरबाद करते हो। जब समस्या है तो हल भी होगा।
अब संगीत मे स्वर -ताल कम शोर ज्यादा सुनाई देता है। बच्चे - दादी-दादी मकानो के बारे मे बताओ ना ।
आज तो तुम जिद पर अड़ गये । दादी के पीछे पड़ गये। पहले मकान नही बेटा घर होता था। चाहे वो झोपड़ी क्यू न हो एक सकून का एहसास होता था। । मकान , कोटी, बगला ये खूबसूरती दिखावट का शब्द लगता है। घर ' घर एक मन्दिर जिस मे परिवार अपनो को देखकर खुश होता है। हां कच्चे झोपड़ी मे परेशानी सर्दी गर्मी से ज्यादा बारिश में होती थी। अब तो ये भी दूर हो गई । अरे हां अब क्या कहते हो तुम लोगअंग्रेजी मे फ़्लैट जो कि दूर से देखने ये कैसे लगते है। चूहे के से बिल और उस में बन्द हो गये चूहेदान की तरह से न नीचे जा सकते हो , और न ऊपर बन्द हो जाओ दरवाजा और लगा लेते हो अपनी सेफ्टी है। फ्लैट के अन्दर गये कमरे में ए सी चला कर सोने के लिय कमरा बन्द न बहार का दिखाई देता है। और न अन्दर का डिब्बे की तरह बन्द ठन्डक आ रही है। ऐसे ही पड़े रहो, जब भी नींद नही आती है। और हम जंगल खेतो मे पेड़ के नीचे खरेरी खटिया पर भी सो जाते थे। आवाज मे आसमान मे चिड़िया उडती नजर आ रही है। पंक्षी की चहचहाट सुनाई दे रही हैं । गाय भैंस जो भी हमारे लिय ख़तरनाक नहीं है । उसको देख रहे हैं। मोर ' तोता पानी मे चलता, हंस बगुला और तुम बहानो की पी -पी के सिवा कुछ नहीं सुनते न आसमान की खूब सूरती को सूरज चाँद , सितारो, हरियाली बारिश ' की छम -छम प्रकृति की देन महसूस नही कर पाते हो। बाहन इतने हो गये हैं। सडक ' गली ' हाईवे ' भी कम पड़ रहे हैं। सड़क के ऊपर सड़क बन रही है। सब को जल्दी है। अरे अब तो तुम अड़तालीस घण्टे छत्तीस घण्टी के सफर को पंक्षी की तरह जो बना है। हवाई जहाज से उड कर तीन घन्टें मे ही सफर कर लेते हो। और जब भी तुम्हारे पास परिवार के पास बैठने का समय नहीं है। हम तो तांगा ' बग्गी नदी पार करने के लिय नाव होती थी। सोचो कितना समय लगता होगा। तब भी परिवार मे एक दूसरे के इंतजार मे बैठा रहता था। दरवाजे पर देखते रहते अब आये अब आये। रोटी अब भी खाई जाती है। और तब भी तन अब भी ढका जाता है। और तब भी सूरज . चांद आसमान पहले भी यही था और आज भी कुआ ' नदी, गंगा ' उगड़ा हुआ था। जब भी शुद्ध था। हेंड पम्प खींचा जाता था। आज हर घर मे सदर है। आरो है। पानी ढका जाता है। जब भी वो आज अशुद्ध है।
दादी दादी आप मनोरंजन कैसे करते थे। छोड़ो बच्चो तुम हो आज के बच्चे कम्पयूटर वाले नेट मोबाइल वाले नही दादी प्यारी दादी बताओ ना ।
अच्छा सुनो हमारे जमाने मे खेल -कूद भाग - दौड के खेल के साथ मिट्टी में भी खेलते थे। जैसे - तोता उड . मैना उड ' चूहा भाग बिल्ली आयी जिस ये हमे ज्ञान होता था कौन उड़ता है और कौन जमीन पर रहता है। और कौन किस का दुश्मन है। चूहे को बिल्ली खा जाती है। बिल्ली को कुत्ता ' सर्कस ' सॉप नेवला की लड़ाई' मदारी का खेल, तोते से बुलवाना और भी काफी होगा मुझे इतना ही ज्ञान है। दादी -दादी टेलिविजन नहीं था। था, न बच्चो टी.वी होता था। चैनल बस एक "दूरदर्शन और उसके बाद आये गिने चुने अन्य चैनल जिस को परिवार क्या पूरा मोहल्ला मिलकर देखता था। समाचार , रामायण महाभारत चिटहार , नाटक ' बच्चो के मिक्की माउस क्या नही था । उस चैनल पर सब था। फिल्म ' उस समय नाटक हमे कुछ मैसेज देकर जाता था। जैसी करनी वैसी भरनी देखी परिवार के साथ उस फिल्म का क्या उदेशय था। मॉ-बॉप ने दादा दादी के साथ किया ' कल तुम्हारे बहू बेटे करेंगे। मतलब बच्चा हम से देखकर सीखता है। जैसा हम करेंगे वैसा करेगा। संस्कर मुहाबरा - पेड़ बोया बबूल का तो आय कहा से होय । जैसा बोयोगे वैसा कटोगे । अब परिवार के साथ देखने को टी.वी में क्या आता है। और क्या मैसेस छोड़कर जाता है। अब तो बेटा तुम्हारे हाथो मे टी.बी है। जहाँ जाओ ले जा सकते हो । घर मे जितने सदस्य उतने हाथो ये मोबाइल जान न पहचान और गेम खेल रहे हो। उसके साथ सालो घर नही गये नही चैटिंग कर रहे हो सामने नमस्कार नही मोबाइल पर गुड मॉर्निंग
हो रही है। जानवर हो गुंगें हो गये हो मुंह से नही अगुठे से बात करते हो फोटो डाला अरे मुझे इसने लाइक नही कमेंट नहीं करा शेयर भी नही करा डिलिट करो, नम्बर ' ब्लॉक करो नाराज / हम तो खेल कूद में भी नाराज नही होते थे । कोई हारेगा तो कोई जीतेगा।
यूट्यूब ' पर विडियो डालते हो खुद जानते नही , डॉक्टर वेघ ' हकीम बन जाते हो गरम पानी पिओ मोटापा घटाओ ।
यूट्यूब आगे बढाओ आगे विडियो आयेगा गरम पानी पीने से किडनी खराब हो जाती है। अब बताओ क्या करोगे मोटापा कम करोगे , या " किडनी खराब । कम्पूपूटर ' मोबाइल को किसने बनाया हम ही जैसे इंसान ने टैक्नोलोजी ने। फिर इसका सही प्रयोग करो गलत नहीं। करोना टाइम मे बच्चो की पढ़ाई में काम आया पर उतना ही आलसी बनाया क्लास मे बच्चा अब अपनी तरफ से ये नही कहेगा। सर मुझे ये सवाल समझ नही आया दोवारा बता दो। नेट है कोशन डालो आन्सर हाजिर स्कूल खुलने पर भी मैसेज आयेगा। होमवर्क आया है। मोबाइल पर फिर बच्चो को आठ घंटे स्कूल क्यो भेज रहे । विज्ञान ने तरक्की करी गर्व की बात है। मै पुराने जमाने में नही ले जा रही । जो चीज साधन के लिय बनी है। उसको उसमे प्रयोग करो आदी मत बनो। अब देखो कही तुम जा रहे हो किसी से रास्ता पूछने की भी जरूरत नहीं है। नेट खोलो रास्ता बता देगा मेप जहाँ तुम्ही जाना है वहाँ नेट के साथ चार बार घूम फिर वही वापस आ जाते हो। चलो थक गये घूमते-घूमते किसी से पूछते है। तुम ने आवाज दी हेलो - हेलो दस बार मे सामने बाले ने कहाँ ऐ ऐ सुना बहुत देर से फिर बोला मैं नही जानता बाहर का रहने वाला हूं। उस व्यक्ति के हाथो में मोबाइल मुॅह पर मास्क कानो ये लीड (एयर फोन) आँखे देख रही है। मोबाईल की स्कीन पर देखो बच्चो कितनी तरक्की करी गांधी जी के तीन बन्दर को इंसान मे एक बन्दर ये बदल दिया । उसे पता नही रोड पर हूँ । आगे पीछे बाहन है। गुंगा भेहरा अंधा बन गया।
आज जितनी सुविधा हो गयी है। घर बजारो मे मशीनो से काम होता है। उतना ही आलसी बन गया है।
जैसे- दादी बताओ , गैस गीजर मशीन कपड़े धोने की ' गिरान्डर दाल मसालो का बाजार मे मशीन का प्रयोग होता है। व्यापार चलाने के लिय अच्छी बात है। विकास हुआ जब भी आज परिवार मे सदस्य एक दूसरे के पास नही बैठता है। बातो को नही बाँटता है। क्या नये जमाने ने घडी के घण्टो मिनट को तेज भगा दिया है। घडी का घण्टा वहीं है। समय जब भी कम पड रहा है। हर व्यक्ति चहाता है। मैं ही आगे निकलू रेस चल रही है। कहाँ जाना है। किसी को नही मालूमा ।
चाहे घण्टो बैठे मोबाइल पर निकल देंगे। बटनो से बात करते हैं , मोबाइल मे कोई ऊपर से
' - ब्रम्हा जी नही बैठे बोल रही है। जो कि गणेश जी लिख रहे हैं। और आप लोग पढ़ रहे हैं। हमारा तुम्हारा ज्ञान ही मोबाइल मे हर व्यक्ति ने सिखा है। शिक्षा दीक्षा तर्जुबा जो कि हमारे पास है।
जितनी सुविधा मिल गयी उतना ही असुरक्षित महसूस करता है। हमारे जमाने में स्कूल पैदल जाया करते थे। आज बस के बिना बच्चे स्कूल नही भेजा जाता है। दूर है मानो बस चाहिए। क्या हादसा नही होता है। बालक ने सिर बाहर निकाला या बस रुकने से पहले बस से उतर कर भागा । कोहरा आदि। लापरवाही ड्राइवर कन्डेक्टर की। जरा सी देर होगी बालक घर नही आया जगह -जगह फ़ोन हो जाता है। क्यो - सामाजिक हादसे के बजह से। बेटी है। आँखो के सामने रहो। बेटा है। कोई अपहरण न कर ले। रन्जिस बहुत है। कैसे आज के शिक्षिक नागरिक है। पढ कर भी अन्जान आज एव बेटी का बाप भी बेटी की सुरक्षा को लेकर चिंतित है।
पहले गांव में एक बेटी पूरे गाँव की बहन बेटी कहलाती थी। आज सिर्फ एक बाप भाई की बस बेटी। अब तो सरकार ने टेस्ट बन्द करा दिया भ्रण हत्या बन्द गर्भ मे पता चल जाता था। बेटी है। तीन महीने की पेट में मार दो। अब तो पैदा करनी पड़ेगी बेटी पैदा हो गयी चेहरे चिन्तित ' अब तो उम्र देखते न लिहाज छोटा बालके जवान उम्र दार कौन अपना हवस का शिकार बना ले। अगर जवानी में किसी लड़के से प्यार हो गया । घर वाले कुल्हाड़ी' चाकू से बार कर मार देते हैं। हवस का शिकार हुई तो मरी प्रेम का शिकार हुई तो मरी । शिक्षित कर विवाह करा क्या ससुराल मे सुरक्षित है। बेटी सुरक्षा कवच तो लग गया। (विवाह ससुराल का) तानो से पल-पल मरती है। मायके से ससुराल ' ससुराल से मायके विन पैदी के लौटे की तरह इधर से उधर होती है। बेटी। आज किसी की बेटी तुम्हारे घर आयी है। कल तुम्हारी बेटी किसी के घर जायेगी। आत्म निर्भर बनाया तो भी शिकार बनी अब आप ही बताये क्या करा जाये। जानवर खा-खा के जानवर बन गया इंसान मांस खाना है। जीवजन्तु का । हमारा भोजन दाल रोटी है। यूही नही लिखा गया मेरे देश की धरती सोना उगले उगले हीरे मोती मोस खाना है। तो ऐसा करो अपने बच्चे पैदा करो और पका कर खा जाओ। मांस तो है न । पहले जमाने मे आता था डबल रोटी चाय के साथ खाने वाला ब्रेड जो कि बन गया है। पांव ' वर्गर , पिज्जा ' वनस्वीट डोराकेक ' कच्ची मैंदा से बने पास्ता मोमोज ' चाऊमीन और जाने क्या मैं नही जानती इस को खा-खा कर डबल ही बन गये हो। दूध छाछ मक्खन दही के नाम को तो मौत आती है। फल नही खाओगे , बाजार का पैक जूस कोल्ड ड्रिक पीयेंगे यशोदा की तरह माँ बालक के पीछे भागती है कान्हा कान्हा करके खाना खा ले।
खेतो मे काम करे तो मालूम हो रोटी की कीमत
बच्चे - दादी दादी अपनी पढाई शिक्षा के बारे मे बताओ न। दादी- क्या करोगे जान कर अपना मजाक बनबाऊ /
नही नही दादी हमे जानना है। तुम ठहरे इंग्लिश मिडियम के बच्चे फर्राटे दार अंग्रेजी बोलने वाले मेरी शिक्षा तुम्हारे आगे क्या है। हिन्दी मिडियम सरकारी स्कूल की शिक्षा हिन्दी संस्कृत और विषय भी नाम अलग - अलग लिखे हिन्दी में जाते थे। बच्चे - अंग्रेजी नही होती थी दादी - होती थी न बच्चो अंग्रेजी की किताब भी होती थी।
आज शिक्षा के नाम पर बाप को कमाने मे पहले गद्या घोडा बनाया मशीन नखाने का होश न पीने का भाग रहा है। दिन रात
बच्चे - दादी क्या सरकारी स्कूल मे फीस नही जाती थी। जाती थी। दस पन्द्रह बीस रुपया अब रुपया से ये लाख बन गया है। व्यक्ति को पढाई प्राइवेट स्कूल चाहिए स्वास्थ के लिय प्राइवेट हॉस्पीटल नौकरी के लिय सरकारी नौकरी राज्य गद्दी मिल गयी । बल्ले बल्ले हमे एक कच्ची पेन्सिल की कीमत मालूम है। डिब्बी मे घुली बुदका की कीमत मालूम है। नीली- नीली स्याही की कीमत मालूम है। दिये मे जलता दीपक की रोशनी की कीमत मालूम है। आज तुम्हे अलवारी भर कॉपी किताब मिलती है। डॉट पेन्सिल थैला कर मिलते है। पढ ले बेटा पढ ले बस तू पढ़ ले कमरे मे एक लाइट क्यो खोल रखी है। चार - चार जला मेरा राज कुमार पढ़ रहा है।
आँखे कमजोर हो जायेगी कम रोशनी मे पढ़ेगा तो । जब भी बच्चा बाद मे पैदा होता है । चश्मा पहले लग जाता है। पहले के महापुरुष जो किताबो मे छपे हैं। उन के लिय सुविधा के नाम पर तेल से जलता दिया था। जब भी बुढापे तक चश्मा नही लगा। सूरज छिप जायेगा जल्दी जल्दी काम कर लो अब रात मे क्या दिन में भी लाइट के बिना रोशनी नही होती है। तुम अंग्रेजी मे स्टेज पर स्पीच देते हो। वाह वाह ताली बजती है। क्या फर्राटे दार इंग्लिश बोली है चाहे समझ न आया हो हम लोग हिन्दी मे बोलते थे मुहावरो के साथ बोलने मे चार चांद लग जाते थे। कहावत मुहावरा दोहा कहने वाले ने बात कह दी सुनने वाले ने सुनली और कोई बुरा की न माना ऊपर से हां हा हंसी और आ जाती है। अब तुम्हारा मुंह घर के सदस्यो के साथ ही फूल जाता है । दिन महीने निकल जाते है। बिना बोले तुम्हारी विल्डिंग से पृथ्वी तो छोटी हो गयी है। आसमान भी छोटा हो गया है। विल्डिग की ऊचाई इतनी सूरज की रोशनी तुम्हारे घर दफ्तर तक पहुंच ही नही जाती है।
दादी - दादी और बताओ न सुनने मे अच्छा लग रहा है । क्यो बोल रहे हो। मन रखने को दादी का । नही दादी बताओ न अच्छा क्या बताऊं ।
बच्चे - जो महापुरषो की तस्वीर हम देखते है किताबो में ' थानों में ' स्कूलो में ' आश्रमो में ' सरकारी दफ्तरो मे आदि। केमरा होता था। हां-हां क्यू नही दादी हंसते हुए।
एक एक तस्वीर की कीमत होती थी। उसे सम्भाल कर रखने की अपनी एक पूंज धरोहर की तरह सरकार क्या परिवार भी अपने पुरखो, पूर्वजो ' की तस्वीर उठा कर संभाल कर रखता था। हर तस्वीर कुछ कहती थी। उसके चेहरे की चमक कपडे पहनने का तरीका म्यूजियम की तरह घर की दीवारो पर पीढ़ी दर पीढ़ी तस्वीर लगाते थे। आज तस्वीर क्या - सांस सुसर को ही जीते जी - आश्रम भेज देते हैं। ये है हमारी भारतीय सभ्यता संस्कृति अब बस वो कागज के टुकड़े सम्भाल कर रखे जाते है। जमीन जायदाद ' बेनामा जाने किसी ने मुकदमा डाला। या करा पीढी दर पीढी मुकदमा चलेगा जाने कितने साल जन्म लेगेंगे / सबूत के तौर पर रख लो। आज के मॉडल फोटो क्यूनही लगते जो तुम जिसे सेल्फी कहते हो और बट्न दबाया फोटो हाथ मे बटन दबाया पहुंच गया लोगो पर अब देखो कितने लाइक कमेंट आते हैं। जितना ज्यादा लाइक कमेंट आया मोबाइल मे सेफ जिस दर नहीं आया डिलिट मारो। दादी - अच्छा बच्चो तुम्हारी ड्रेस के फोटो क्यू नहीं लगते घुट्नो से ऊँची ' कन्धो से नीची उसे देखने में तो लोगो को ज्यादा मजा आना चाहिए। ' क्यो कि . ये हमारी सम्भता में नहीं आता है। इस का मतलब मैं तुमसे पांच मीटर की धोती लपेट्नो को नही कह रही हूँ । न ही दो गज का घूघंट काड ने को मैं तो बस भारतीय सभ्यता की बात कर रही हूं । कपड़ा पहनो सलीके से। हमारे नेता संसद भवन मे धोती कुर्ता ' साड़ी में ही दिखाई पड़ते है। क्योंकि वो हमारा पहनावा है। पहचान है।
बच्चे - दादी-दादी धर्म-जाति के बारे मे बताओ
दादी - क्यो मेरा सिर फुड़वाने पर तुले हो जाओ तुम्हारी माँ " राह देख रही होगी । जिद पर अड़ गये बच्चे जाति धर्म ऊपर से नही आये हम ने ही इस को कहीं न कही बनाया है। ये मुझे याद नही किसने और सन क्योंकि पढ़ाई छोड़े काफी साल हो गये । इसने साड़ी पहनी है। हिन्दू है। धोती कुर्ता पहना है किसान है। सलवार सूट पहना है। पंजाबीन है । बुरखा पहना है । मुस्लमान है। पंगडी पहनी है सिख गोल टोपी मुस्लमान ' नाव टोपी हिन्दू , सूट - बूट मे मॉडल कपडो वाली कोई पढालिखा । अंग्रेजी बाबू हो गयी उसकी पहचान । रगो में खून हे और आदि समानता इंसान नहीं है। पहनावा पहचान मै हिन्दुस्तानी ये किसी ने नही कहां ।
जाति -धर्म निभाने के नाम को मन्दिर का घण्टा नही बजना चाहिय मज्जित मे अजान की आवाज नही आनी चाहिय । निकल गये दंगो को सड़को पर सत्ता हिला कर रख दी। धर्म गृन्थो मे तो ये भी लिखा है । तुम मुझे जहाँ बैठकर याद करोगे ईश्वर तक प्राथर्ना पहुंच जाती है। बस दिल से याद करो दंगो से नही ।गृन्थो में तो ये भी लिखा है। नारी का सम्मान करो । फिर क्यो चीर हान करते हो जाति धर्म के नाम पर गृन्थ खोल दिखाते हो नारी सम्मान क्यो नही निभाते
इसे कहते है। अपना उल्लू सीधा करना। अपनी चिट अपनी पट लो कर लो बात जाओ बच्चो तुम्हारी माँ इंतजार कर रही होगी। वैसे ही तुम अपनी मां बाप की एकलौती औलाद हो। किसी के एक लड़का तो किसी के एक लड़की तो किसी के दो बच्चो उसमें भाई या बहन या 'दो भाई या 'दो बहन , आगे आने वाली पीढ़ी को तुम किसे अपना परिवार खानदान कुनवा बताओगे रिश्ते खत्म न बुआ , है। तो मौसी नही चाचा है तो मामा नही मेरे कहने का मतलब समझ गये होंगे । समाज तुम से कुछ कहेगा किसे अपने साथ पंचायत में लेंके जाओगे ' ' फिर गृन्थ खोल देना उपदेश देना अकेले आये है अकेले जायेंगे। मेरा बुढापा तो कट गया बच्चो तुम्हारे जैसे बच्चो मिले बाते करने को । ( तुम अपने कल की सोचो तुम्हारे बुढ़ापे में क्या होगा ? आती हुई जवानी कलंक बना दिया तुम्हारी नजरो ने। बुढापा बनाया अभिशाप प्रकृति को एहसास करना भूल गये हो। झरने की आवाज ' पेड पौधे भी बोलते है । रंग बिरंगे फूलो को देखो , जो भी प्रकृति ने हमे दिया है।
पढेलिखे हो समझ गये होंगे।
दादी - जिद पकड़ कर बैठ गये कुछ सीखा।
बच्चे - हां दादी जब जागो जब ही सवेरा अब भी सभल जाओ अपनी प्रकृति धरोहर को बचाओ , भारतीय पहचान संस्कृति को मत खोने दो इन्ही शब्दो मे बहुत कुछ है। खुद ही समझ जाओ । प्रकृति धरोहर बचाओ आने वाली सांसे बचाओ
आज मास्क लगाया है। कल ऑक्सीजन सलैंडर लगाने की नोवत न आ जाये।
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