यह सिर्फ़ कहानी नहीं है। यह वो घटना है जो मेरे साथ जस्ट अभी अभी घटित हुईं है।
अपनी रचना "पढ़ाई या दिखावा" लिखने के बाद मैंने सोचा कि,कल का पेपर है। थोडा पढ़ लिया जाए। वर्ना अपने पेपर में ये कहानियां तो लिख कर आऊंगा नहीं। अगर लिख भी दी तो कॉपी चेक करने वाला फैल और कर देगा।
तो मैंने पढ़ने के लिए सीरीज उठाई ही थी। इतने में हमारे परम् मित्र का फोन आ गया। अब भईया वो खुद पुरी सीरीज को रट रटा कर हम से पूछ रहा,, कि भाई कितना पढ़ लिया।
हमने कहा बस उठाई ही है,, इतने में तुम्हारा फोन आ गया। एक तो हमारा वैसे ही पढ़ने का मन नहीं करता उपर से तुम बतिया लो पहले। ये लो हमने तो रख दी वापस।
ओर फोन पर बात करते करते में घर से बाहर रोड पर आ गया। वैसे गली में मैरी कभी किसी से बात नहीं होती। ओर अंतर्मुखी स्वभाव के कारण मेरा कोई दोस्त भी नहीं है।
मगर हां मुझे जानवरों से बहुत ज्यादा प्रेम है। फिर चाहे गली में वह कुत्ता हो या गाय। दिख जाने पर सहलाए बीना में नहीं मानता। मुझे गली में एक कुत्ता जिसका नाम मैने रॉकी रखा हुआ था। एक पत्थर के पीछे अपनी नाक घुसाए ना जाने क्या सूंघ रहा था। वह पुकारने पर एक बार में आया नहीं तो में फिर अपनी सीढ़ियों पर बैठ गया।
बात करते हुए ठोड़ी ही देर हुई थी। कि मैको एक छोटा सा चिड़िया का बच्चा बिल्कुल जमीन से चिपक कर उड़कर आता हुआ दिखाईं दिया। उसके पीछे रॉकी भागते हुए आ रहा था।
""इसका मतलब उस पत्थर के पीछे यही चिड़िया का बच्चा छुप हुआ था। जिसको खाने की फिराक से रॉकी अपनी नाक गड़ाए बैठा था। ""
मगर जब वो मुझे वो बच्चा अपनी तरफ आता दिखा। रॉकी उसके पीछे पीछे था। उसने मेरे पास से गुजरते ही उस बच्चे को पकड़ लिया। इत्ते में में भी अचानक से ना आब देखा न ताव एक जोर का थप्पड़ कुत्ते के मुंह पर मारा। जिससे वह बच्चा उससे छूट गया। ओर मेने पास पड़ा एक पत्थर उठा लिया। जिसे देख वो चुप चाप कान नीचे करके बेठ गया।
जब मैंने उस बच्चे को देखा। मुझे एक बार तो लगा ये गया काम से। क्योंकि, उसके थोड़े पंख रॉकी के पकड़ने की वजह से बिखर गए थे। ओर वह बिना हिले डुले पड़ा था।
मेने उसे उठा कर अपने पीछे बैठने वाली जगह पर रख दिया। ओर उसके पंख एवम पूरा शरीर चैक किया। कहीं भी कोई घाव का निशान नहीं था। मगर फ़िर भी वह ना जाने क्यों खड़ा नहीं हो पा रहा था। ना ही पंख फैला रहा था।
शायद कुत्ते के हाथों मरने का डर उसके दिल में घर कर गया था। क्युकी अगर सेकंड भर की देर होती तो रॉकी अपना जबड़ा दबा कर उसका काम तमाम कर देता।
मुझे याद है अब भी। एक पंछी होता है कूड़ कुड़िया नाम का। में इसी तरह बाहर बैठा था। ओर वह उड़ते उड़ते यूंही मेरे पास आई थी। ओर रॉकी भी उसके पीछे था। ओर में अपनी जान से फोन पर बात करने में व्यस्त था। में जब तक सोच पाता। इतने में तो रॉकी ने उस पक्षी का काम तमाम कर दिया था। मैने उसको पत्थर मार कर हटाया भी था। मगर वो अपना दम तोड चुकी थी।
फिर मैंने उसको यूंही छोड़ दीया था। मुझे बहुत अफसोस भी हुआ था। मगर आज ये घटना वापस हुई तब में वापस से अपने अतीत वाली गलती को दोहराना नहीं चाहता था। तभी वह बच्चा हल्का सा हिलता है। पास में ही एक भाभी जी निकल कर आती है घर से। उन्होंने पूछा क्या हुआ।
तब मैने सारी घटना उनको बताई। उन्होंने सलाह दी इसको पानी पिलाओ और किसी सुरक्षित स्थान पर ले जाओ। जहां से इस पक्षी को कोई खतरा ना हो।
मैने उनकी सलाह मानी और उसकी चोंच पर थोड़ा पानी डाला। ओर छत पर ले जाकर छोड़ दिया। जहां पर उसे कोई खतरा नहीं था। जब वह छत की दीवारों को पार करना सीख लेगा वापस उड़ कर तो अपनी सुरक्षा भी आसानी से कर लेगा।
मगर इस बार मुझे अफसोस नहीं था। भले ही में अपने दोस्त के साथ थोड़ा क्रूर हो गया। मगर मैने एक नन्हे से पक्षी की जान बचा ली थी। जिसकी वजह से मुझे संतोष था।