पंद्रह दिन के हनीमून से वापिस घर लौटते हुए अधीर ने बीस दिन पहले सात फेरे लेने वाली पत्नी अवनी से बेड पर लेटे हुए गले में बाहें डालते हुए कहा- "अब तो शादी भी हो गई, हनीमून भी हो गया लगता है जिंदगी का सारा एक्साइटमेंट हनीमून में ही है।अब तो रोज एक ही ढर्रे वाली जिंदगी जी कर बोर होना पडेगा।"
अवनी ने अधीर से गले से बाहें हटाते हुए कहा-
"जब अब जीने के लिए रोटी की जुगाड तो करनी पडेगी ना,आखिर अब हम दोनों एक ही गाडी के दो पहिए जो हैं।अब मुझे बहुत काम है।कल सुबह तुम्हें ऑफिस भी जाना है।"
अधीर रंजन जो शहर की एक बहुत बडी कंपनी में एक छोटी सी पोस्ट क्लर्क के पद पर काम करता था और अभी कुछ दिनों पहले अवनी से शादी हुई थी।
सुबह जल्दी उठकर अवनी ने अभीर के लिए खाना कपडे सारी तैयारियां पूरी कर के अभीर को जगाते हुए कहा-
अजी उठो जनाब! सूरज सर से ऊपर निकल चुका है और तुम्हें लम्बी दूरी भी तो तय करनी है।
अधीर ने अवनी को अपनी तरफ हाथ पकड कर खींचते हुए रोमांटिक अंदाज में कहा!
हाय ये नौकरी! तुमसे दूर कर के ही मानेंगी।मेरा बस चले तो सारी जिंदगी बस यूं ही तुम्हारी बांहों में सिमटा रहूं।
अवनी ने किस करते हुए कहा-
अरे जनाब! मैं कहां जाने वाली हूं।अब तो मैं मिसेज रंजन हूं।कदम कदम पर तुम्हारे साथ चलने वाली।
चलों उठो भी अब!
अभीर उठता हुआ बाथरूम की तरफ जाता है और अवनी की तरफ रोमांटिक अंदाज में देखते हुए चला जाता है.
अभीर बाथरूम से आवाज लगाते हुए-
अजी सुनती हो तौलिया तो दे दो!
अभी आई! अवनी तौलिया देते हुए नम आंखों से अभीर की तरफ देखने लगी और मन ही मन सोच रही कि शायद यह पल यही रूक जाता।
तभी पीछे से अधीर ने अवनी को कस कर पकड लिया अवनी मन ही मन समझाते हुए अधीर से
अजी छोडो भी! लेट हो जाओगे।
काश!तुम कह देती मत जाओ तो मैं हमेशा तुम्हारी बांहों में ऐसे ही रहता।
अवनी अपने चेहरे पर मासूमियत लिए हंसती हुई किचिन में चली जाती है।
अवनी किचिन से आवाज देते हुए बोली-
तैयारी हो गई हो जनाब त बाहर आ जाईए।
अधीर कमरे से बाहर आता है और बैग उठाते हुए कहता है-
मैं बहुत जल्दी तुम्हें अपने साथ ले जाने आऊंगा, आखिर गाडी एक पहिए के बिना कैसे चल सकेगी!
अभीर दरवाजे पर जाने से पहले अवनी को गले लगाते हुए माथा चूमते हुए कहता है! मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं,अपना ख्याल रखना।
अवनी आंखों से आंसू पोंछते हुए और प्यार भरी नजरों से देखते हुए कहती हैं-
तुम भी अपना ख्याल रखना।
अभीर के जाने के बाद मानों घर में सन्नाटा पसरा हुआ है, अवनी कुछ देर सोफे पर बैठ कर अभीर की बातें सोचकर खिलखिला कर हंसने लगती है तो कभी घर का सूनापन महसूस करते हुए रोने लगती है। कुछ देर सिलसिला यूं ही जारी रहता है।कुछ देर बाद खुद को सम्हाल कर अभीर की यादों से वापिस आ कर गाना गाते हुए घर के काम काज में लग जाती है.
यह कहानी यहीं खत्म होती हैं ,अब आगे क्या हुआ जानने के लिए अगला भाग पढ़ें।