कल मुझे गुडगाँव से एक मीटिंग के लिये दिल्ली प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया में एक आयोजान में जाना था. उसके लिये मैंने उबेर से एक टैक्सी मंगाई. मेरे मोबाइल पर ड्राईवर का नाम आया था असलम और ठीक समय पर एक टैक्सी आई . मैं उसमें में बैठ कर चल दिया. मोबाइल से चेक किया दूरी 32 किमी तथा समय डेढ़ घंटा दिखा रहा था. ड्राईवर कोई तीस बत्तीस के असलम थे. मैंने ऐसे ही समय काटने के लिये बात शुरू कर उससे पूछ लिया -
“असलम मियां तुमने असलम शेर खान हॉकी खिलाडी का नाम सुना है?”
वह इन बड़े खिलाडी को नहीं जानता था. थोडी देर में उसने अपने आप अपने बारे में बताया कि वह सिर्फ असलम खान है. सोहना और नूह के बीच उनका गाँव गाँधी ग्राम घसेरा है घर में खेती बाड़ी है वे छह भाई हैं सभी काम करते हैं और उनके अब्बा ही खेती संभाल रहे हैं. मैंने अपना ज्ञान झाड़ते हुए उसे जब यह बताया कि भई,’ तुम तो पुराने सूर्यवंशी राजपूत हो जिन्होंने इस्लाम कबूल कर लिया था, तुम्हारे यहाँ तो घसेरा का मशहूर किला हुआ करता था. यह मैंने उसे खुश करने और बात करने के किये चारा डाला था जो कामयाब हो गया लगता था .
मेरी बात सुन कर कुछ आश्चर्य के साथ बड़ा खुश ही नहीं हुआ बल्कि वह फूला नहीं समां रहा था कि मैं उसके गाँव और उनकी कौम और लोगों बारे में काफी कुछ अच्छा जानता हूँ. यह भी कि उनके पूर्वज बहादुर राजपूत थे. दर असल में मैं काफी पहले उस इलाके के पास मानेसर में स्थित नेशनल सिक्यूरिटी गार्ड्स ( एन.एस.जी.) में 1984 से 1988 में तीन वर्ष तक ट्रेनिंग इंस्ट्रक्टर कार्य कर चुका था. सो इलाके से वहां के लोगों के बारे काफी परिचित था. वहां कई बार आउट डोर एक्सरसाइज के लिये मै नए प्रशिक्षणार्थियों को ले जाया करते थे. कई बार नाईट एक्सरसाइज मैं उधर ही सोहना तथा तावडू के गेस्ट हाउस में ठहरना भी पड़ता था. उसका गाँव गुरुग्राम के नज़दीक मेवात जिले की नूह तहसील में था जो आजकल साइबर क्राइम का बड़ा गढ़ है, जहाँ यह बिमारी लगभग एक लोकप्रिय कॉटेज इंडस्ट्री का रूप ले चुकी है. पुलिस भी उनके गढ़ में वहां इन्क्वारी करने के लिये जाने से घबराती तथा कतराती है. खैर मैं उस से नेगेटिव चर्चा नहीं करना चाहता था वर्ना शायद वह अपनी बात अपने किस्से बताने से बचता.
मैंने सोचा अभी प्रेस क्लब पहुँचने में काफी टाइम है, रास्ते में ट्रैफिक के कारण हम धीरे चल रहे हैं क्यों ना अपनी नौकरी में सीखे जासूसी के कुछ पुराने नुस्खों को इस बन्दे पर आजमा लिया जाए और इसकी और इसके इलाके की असलियत निकाली जाए और रास्ता भी कट जाएगा. बंदा तेज तर्रार था तथा एक दम ताड़ गया और भांप कर पूछा “क्या आप पुलिस में थे?”
मैंने पता नहीं क्या सोच कर हाँ भर दी, यह दिमाग में आया, मुझे पुलिस का जान कर अब यह कुछ ख़ास नहीं बताएगा. पर हुआ उसका उल्टा असर. वह तो बेहद खुश हो कर बोला, “साहेब आप तो मेरे काम के निकले, आपके चलने और बात चीत के तरीके से मुझे थोडा लगा था कि आपमेरे काम के हों, मेरा अंदाज़ा सही निकला, जनाब, मुझे पुलिस का कुछ काम दिलवा दो, मैं बड़ा बढ़िया काम का अंजाम दूंगा.”
मैंने बचने के लिये कहा “भई, जनाब असलम मियां, मैं तो रिटायर्ड हूँ, मेरे सफ़ेद बाल देखो, फिर भी बतलाओ पुलिस का ऐसा क्या काम है जो तुम जानते हो जो करना चाहते हो?” मेरा कौतुहल अब बढ़ता जा रहा था.
उसने बताया, “मेरे पास बहुत से खबरी हैं, मैं सेल्स टैक्स के लिये बहुत साल से बढ़िया काम कर रहा हूँ. पुलिस का भी अच्छा काम ख़ुशी-ख़ुशी करूंगा. पुलिस के लिये भी उनके मतलब की खबरे ढूंढ कर बेहतरीन ख़ुफ़िया जानकारी देना मेरा बाएं हाथ का खेल है. आपको पता ही होगा हमारे इलाके में क्या चल रहा है.”
उस के बारे में मेरी जिज्ञासा निरंतर बढती जा रही थी, मैंने भी उसे चारा डालने के लिये पूछा, “पहले मुझे पूरा समझाओ और कैसे कितना काम सेल्स टैक्स महकमे तथा किसी और महकमे का करते हो? और इस काम में कितना पैसा बना लेते हो?”
मैं समझ नहीं पा रहा था कि अगर सच बता रहा है तो यह पुरानी सी टैक्सी किसलिये चला रहा है क्या टैक्सी चलाना सिर्फ दिखावा या बस ‘कवर जॉब, या यह इतना होशियार है कि किसी को शक नहीं होने देना चाहता है अपने गुप्त धंधे के लिये? मैंने उस से पहले ही पूछ लिया था गरी उसीकी थी वही उसका मालिक था.
वह अब तक वह भी पूरे मूड में आ चुका था, वह मुझे अपने काम के लिये इस्तेमाल करना चाहता रहा होगा. उसे यह भी पता था कि उसके पास सिर्फ उतना समय है जितनी समय मैं उसकी टैक्सी में हूँ. इस लिये वह ज़ल्दी में था कि मैं उस के काम के लिये तैयार कराया जा सकूं. उसने जो अपनी ‘मोडस ओपेरंडी अर्थात कार्य प्रणाली मुझे बताई वह इस प्रकार थी-
इस काम के लिये वह कई कंपनी के ड्राईवरों तथा अन्य प्राइवेट ट्रक ड्राइवरों का उपयोग करता है, जो गुडगाँव और दिल्ली से होकर गुजरते हैं. उसके ये खबरी ड्राईवर या एजेंट या सोर्स जो बी कहें कई जगह हैं और पैसे के लिये उसके लिये काम करते हैं, बंबई से लगा कर सूरत, बड़ोदरा, रतलाम, कोटा,जयपुर, तथा दूसरी तरफ अमृतसर, लुधियाना, जम्मू तक उसके लोग है, मान लो ड्राईवर मुंबई या जयपुर से स्टोर या प्रोडक्ट के साथ आवश्यक पेपर्स लेकर ट्रक से लाने वाला है, और भेजने पार्टी ने उसमें धांधली की होती है, जैसे अंडर इनवोइसिंग कर 5 टन भरा और कागजों में दिखाया 3 टन, या फिर सामान दिखाया कुछ है ,पीछे छुपा कर कुछ और भी भरा है, या क्राकरी के बड़े कार्टनों से भरे ट्रक में आगे की साइड में नीचे कॉपर वायर के बंडल या कोई अन्य सामान नीचे छुपा देते हैं, जिसकी चोरी कर रहे होते हैं और ऊपर चारों और असली कार्टन आदि से कवर कर देते हैं.
उनके खबरी या इस काम में बने सौर्स ड्राईवर को तो पता रहता ही है. सो वे अपने ट्रक का नंबर तथा अपनी लोकेशन टैक्सी ड्राईवर जनाब असलम खान ‘हैंडलर’ को भेज देते है, असलम गाड़ी नंबर और आने का अंदाज़न टाइम सेल्स टैक्स ऑफिसर को पास-ऑन कर देता है. फोन पर बता भी देता है कि शिकार आ रहा है, उचित स्थान पर असलम अपनी टैक्सी में टारगेट ट्रक का इंतजार करता है और आने पर पीछे से टारगेट ट्रक को फोलो करता रहता है. अपनी लोकेशन सेल्स टैक्स के अधिकारी को पहले से भेज देता है. सेल्स टैक्स की टीम लोकेशन के अनुसार रोड की रॉंग साइड से आकर चेक पॉइंट लगा कर केवल उसी ट्रक को चेक के लिये रोक लेते है. इसके साथ असलम का काम ख़त्म और स्लेस टैक्स विभाग के कर्मचारियों का शुरू हो जाता है.
चेक होने पर गलती पकड़ी ली जाती है, जिसने सामान भेजा है उसी के मालिक या कंपनी के नुमाईन्दो को बुलाया जाता है उसके सामने सारी कारवाही की जाती है. डराया धमकाया जाता है. जो अक्सर ले देकर पीछा छुडाना चाहते हैं. अतः पैसे ले कर कम जुर्माना या पेनल्टी या थोडा बहुत सामान जब्त करने का दिखावा करते हैं. सेल्स टैक्स वाले सरकार से इनाम भी पाते हैं और कम्पनी के नुमाईंदे या मालिक से अलग से कमाते हैं, उसका हिस्सा उसे भी मिलता है और उसी से खबरी ड्राईवर को पेमेंट करता है. बाकी सारा काम सेल्स टैक्स वाले करते हैं, ट्रक को कस्टडी में लेकर वे जिस कंपनी का ट्रक है उसे बुलाना उस से पैसा झाड़ना. बाद में थोडा बहुत जुर्माना कर या मौके के अनुसार ज्यादा कम कारवाही कर ट्रक का पीछा छोड़ना. उसे और खबरी का काम तो उन्हें पकडवाना है. वे मुझे पैसे के अलावा खूब इज्जत देते हैं और कहते रहते हैं, भाई, असलम काम दिलवाओ.
थोडी देर चुप रहा कर,फिर शिकायत के तौर पर यह भी बताता है कि जितना सेल्स टैक्स वाले कमाते है उसके हिसाब से उसे तो कम ही मिल पाता है. उस के हिसाब से कंपनी वाले भी और सेल्स टैक्स वाले भी दोनों ही हराम की कमाई कर रहें हैं. घर भर रहें हैं. सब का फायदा ही फायदा हो रहा है. सरकार को छोड कर, फिर कुछ कोफ़्त में आकर बोला,
“ये सब हराम की कमाई कर रहे हैं, अल्लाह पाक रसूल उन्हें कभी मुआफ नहीं करेगा”. ऐसा सुन मेरे मुंह से बरबस निकल गया, “क्या तुम्हारी यह नेक कमाई है? क्या यह भी हराम की नहीं है उन्ही की तरह?”
मेरी बात सुन असलम एक दम अपनी सफाई पर उतर आया, कि यह तो उसकी मेहनत और हिकमत की कमाई है. बड़ी मेहनत से उसने अपना नेटवर्क तैयार किया है और बेईमान लोगों की पहिचान कर उनके पकडवा कर सरकार का काम कर रहें है. फिर आगे बताया कि वह इस कमाई का दस फीसदी वह सच्चे मुसलमान की तरह वह जकात में मस्जिद या गरीबों को देता है. वह तो क़ानून की मदद ही कर रहा है. हर अपराधी भी अपने आप को यूहीं तो उचित बताते हैं. बचपन में पढ़ा था कि सुल्ताना डाकू ने भी बयान दिया था कि वह डाका नहीं मारता वह तो बेईमान लोगों से धन छीन कर गरीबों में बांटता है. बात पूरी गलत नहीं थी वह गरीबों की मदद करता थ तभी तो कोई उस का भेद पुलिस को बिलकुल भी नहीं देते थे. उसने गरीबों की कन्याओं की शादियाँ भी कराई थी ज़ालिम ज़मींदारों को खून चूसने वाले सूदखोरों को मार कर गरीबों को बचाया भी था पर उसके लिये हत्या करना अपराध के मदद करना कैसे उचित हो सकता है?
मैंने कुछ सवाल पूछे उसने उनका अच्छा निराकरण कर दिया. बताया कि वह सरकार की मदद ही करता है आर अपनी हिकमत से अपनी अच्छी कमाई भी कर रहा है. उसके अनुसार तो असली मोटी कमाई कर रहे हैं सरकारी मुलाजिम. उसकी हिकमत और मेहनत से सरकारी अधिकारी लोग. अंधाधुंध कमा रहे हैं उनके मुकाबले उसे तो मेहनत का उनके मुकाबले बहुत कम पैसा मिल पाता है.टैक्सी चला कर तो बस वह मुश्किल से बच्चों क्का पेट पाल सकता है, अच्छी तरह से जीने के लिये वह अपनी हिकमत से ऊपर की कमाई कर रहा है.
उसने फिर दोहराया कि वह पुलिस के लिये भी ख़ुफ़िया काम कर सकता है मैं उसकी मदद करूं. मुझे इतना ही करना है कि किसी बड़े हाकिम पर उसकी सिफारिस कर दूं बस मिलवा दूं.
मैं बारह साल इंटेलीजेंस ड्यूटी भी कर चुका था अतः इस तरह गुप्तचरी गति विधियों को काफी समझ सकता था. मैंने उसे चारा डाला कि वह ‘मुझे सच सच बता दे कि पैसे का किस तरह लेन देन चलता है? तब मैं तुम्हारी मदद कर दूंगा तुम्हे साइबर सेल वालों से मिलवाने की कोशिश कर सकता हूँ और सरकारी तौर से तुम्हें कैश इनाम भी देंगें.जो गैर कानूनी आमदनी होगी.
वह चुप रहा कि शायद सोच रहा हो कि पहले उसे बताना चाहिए या नहीं इस पर विचार किया होगा इसलिये कुछ देर चुप रह कर उसने बताया की उसे सोर्स रनिंग का पूरा ज्ञान है वही कर रहा है. अभी प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया आने में 15 मिनट बचे होंगे, उसने पत्ते खोल दिए बताया सेल्स टैक्स वाले एक बार में बहुत पैसे बनाते है, जब्त ट्रक के माल वाले आकर उन से सौदा करते हैं, अगर पैसे लेकर छोड़ सकते हैं तो छोड़ देते वर्ना लेते पूरा पैसा जो ज्यादा सा ज्यादा जुर्माना ठोक सकते है, पर्ची काटते हैं कम पैसों की उसे भी ठीक ठीक आमदनी हो जाती है. लिये हुए पैसे से हर पकड वाये ट्रक टैंकर से डेढ़ से दो लाख उसे मिलता है जिसमें से 50 हज़ार तक वह ट्रक ड्राईवर खबरी को देता हूँ. इसमें कितना हर महीने कमा लेते हो उसका जबाब था पक्का तो नहीं महीने तीन से पांच लाख मिल जाते हैं. मैंने कहा यह तो बड़ी अच्छी आमदनी है, उसने कहा उसका तो बिलकुल वाजिब और कम है ये सेल्स टैक्स वाले तो बीस पच्चीस लाख उसके द्वारा कमाते है. मैंने दोबारा पूछा कि उसे नहीं लगता कि यह बईमानी की कमाई है, जो इस्लाम में गुनाह है.
उसने अपनी बात दोहराते दोबारा कहा “ नहीं बिलकुल नहीं साहेब मेरे काम में किसी को नुक्सान कहाँ हो रहा है, कोई सताया नहीं जा रहा, ड्राईवर को ड्राइविंग से ज्यादा मैं खबर के लिये देता हूँ, सेल्स टैक्स वालों की सरकारी ड्यूटी में मदद करता हूँ, वे तो रोज़ रोज़ मुझे पूछते रहते हैं ‘असलम भाई खबर दो, खबर दो.’
मैंने कहा ट्रक से सामान भेजने वाले तो नुक्सान उठा रहें हैं. उसका जबाब था,”किसने कहा वे तो सबसे बड़े चोर है करोड़ों की हेरा फेरी करते हैं बीस पच्चीस लाख उनके लिये कुछ नहीं. ‘बिलेक’ का पैसा उनके पास भरा पड़ा हैं. टैक्स की भरपूर चोरी करते हैं, हाँ बस सरकार को ज़रूर थोडा नुक्सान हो रहा है
बाद में उसने जोड़ा ”मैं सोचता हूँ सेल्स टैक्स से ज्यादा आराम की मोटी आमदनी वाला दुनिया का कोई महकमा नहीं हैं. इसमें काम करने वाले बड़ी नौकरी करने वाले आला अफसरों से ज्यादा कमा रहे हैं, गुडगाँव में ही उनके कई कई मकान हैं.”
पर पुलिस का काम क्यों करना चाहते हो? उसका ज़बाब था, “मेरे मेवात जिले में जो अब अलग से नूह जिला है और खास कर नूह के आस पास के गाँवों में फर्जी तरीके से फ़ोन पर बहका कर नकली अफसर बन कर साइबर फ्रॉड से पैसे कमाने, तथा ई–अरेस्ट से लूट का धंधा खूब चल रहा है, बाहर का कोई भी कितना ही होशियार पुलिस वाला क्यों न हो वहां कामयाब नहीं हो सकता है, तुरंत पहिचान लिया जाता है. थाना पुलिस भी वहां ज्यादा कुछ नहीं कर सकती. मैं तो वहीँ का हूँ बस कान और आँख खोल कर रखने से उतनी खबर दे सकता हूँ जो बाहर से आने वाला कभी भी नहीं. मैं तो सरकार की मदद कर अपराधियों को पकड़ वाता हूँ, और नेक कमाई करता हूँ फ्रॉड वालों कि तरह हराम की बिलकुल नहीं. अपने बच्चो की परवरिश तो मैं टैक्सी की कमाई से करता हूँ.ये जो चार पांच लाख मिलते है इससे ज़कात देता हूँ, मस्जिद और मदरसों को देता हूँ और कुछ अपने बच्चों के लिये जमा रखता हूँ. वह दूसरी तीसरी बार सफाई रहा था कि वह जो कुछ कर रहा है वह गलत नहीं है, उसका उस का हिकमत से कमाया पैसा नेक है, वह इस पैसे को ज़कात के ज़रिये अच्छे कामों में लगा रहा है.वह बार बार अपनी बात को बड़ा कर रहा था कि जो वह कर रहा वह अनुचित नहीं है. उसे लग रहा था कि मैं उसकी बात से सहमत नहीं हूँ सो मुझे सफाई पर सफाई दे रहा था.
यह सब इस चक्कर में बता गया था कि मैं उस को साइबर सेल का सोर्स बनवा दूंगा, पर मैंने जब उसे समझाया कि मै ऐसे पचड़े में नहीं पड़ पाऊंगा वैसे भी बहुत दिन हो गए हैं रिटायर हुए. अगर वह खुद जाकर वहां बात करेगा ज्यादा अच्छा रहेगा. सुन कर उसे अच्छा नहीं लगा. मैंने उसे बताया कि गुडगाँव के सेक्टर 47 में एक विजिलेंस विभाग का सरकारी ऑफिस हैं वहां कौन सरकारी हुक्मरान या महकमे गड़बड़ कर रहे उनकी बेईमानी की पक्की सूचना देने पर सूचना देने वाले का नाम गुप्त भी रखते हैं और इनाम भी देते हैं. उसे वह बात बिलकुल पसंद नहीं आई.
प्रेस क्लब आ गया था, मेरे से भारी निराश अपने किराए के पैसे लेकर और मुझे ‘खुदा हाफ़िज़’ कह कर चला गया. मैं सोच रहा था कि यह बंदा अढाई तीन लाख रुपये महिना हिकमत से कमाई कर रहा जितना खूब मेहनत कर आईआईटी से पढ़ कर भी कोई भला विद्यार्थी नहीं प्राप्त करता. फिर इसके इलाके में तो इस से भी हिकमती बन्दे साइबर ठगी से बड़े बड़े लोगों को मूर्ख बना कर उनके बैंकों से उम्र भर की बचत सफा कर रहें हैं. सच ही है अपराधी पुलिस और कानून से कई कदम आगे चलते आये हैं, चल रहे हैं और चलते रहेंगे.
मेवात इलाके में साइबर क्राइम इस कदर है कि 12–13 साल के बच्चे भी ये धंधा करने लगे हैं. उनके शिकार बड़ी उम्र के बच्चे भी बड़े बड़े उम्र के लोगों की उम्र भर की कमाई के बैंक अकाउंट साफ़ कर रहे हैं, उनके नकली और गैर कानूनी कॉल सेंटर गुरुग्राम के फ्लैट्स से चलाये जा रहे हैं, उनकी ठगी अब हजारों करोड़ों में हो रही है. झारखण्ड का जमतारा जिला जो पहले साइबर क्राइम की ‘फिशिंग कैपिटल’ कहलाता था शायद अब असलम के नूह से पीछे रहा गया हो.
सोचने की बात है देश में बेईमानी और भ्रष्टाचार केवल बढ़ ही नहीं रहा है, गाँव देहात में भी इस कदर फल फूल रहा है, सीधे सादे ग्रामीण, कम पढ़े लिखे लोग भी नए नए हथकंडे सीखते जा रहे हैं. भगवान जाने और क्या क्या होने वाला है इस कलयुग में. असलम ने तो मेरी आँख ही खोल दी.
पुरानी कहावत थी ‘पढोगे लिखोगे, बनोगे नबाब, खेलोगे कूदों गे होगें ख़राब. अब पढ़ कर नवाब बने न बनें पर असलम और दूसरे नूह वाले तो नए धंधों में ‘लाज़बाब’ हैं, पढ़े लिखों की दिन दहाड़े जेब भी काट रहे हैं, उनके बैंक अकाउंट की पूरी की पूरी जेब साफ़ कर रहें हैं. असलम ने यह भी बताया था कि उसके इलाके में बेरोजगारी इस कदर है कि अगर ये काम नहीं करेंगें तो भूखे ही मर जायेंगें. ऐसा नहीं लगता कि यह सिर्फ
आपराधिक समस्या नहीं है बल्कि सामाजिक व आर्थिक जटिल समस्या है.वर्ना कितने नूह और बनेगें कितने और असलम बनेंगें?