kaal ka Rahasya in Hindi Horror Stories by krishnansh kaushik books and stories PDF | काल का रहस्य

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काल का रहस्य

रात के करीब दो बज रहे थे. पूरा मोहल्ला गहरी नींद में सोया था और सडकों पर सन्नाटा पसरा था. लेकिन आर्यन के घर के भीतर का माहौल बिल्कुल अलग था. वहां एक अजीब सी अफरा- तफरी मची थी. आर्यन की नींद अचानक तेज पदचापों से खुली. उसने देखा कि उसके पिता, केशव, बडी हडबडी में सूटकेस में कपडे ठूंस रहे थे. उनके माथे पर पसीना था और हाथ कांप रहे थे.                

​" सुनीता, जल्दी करो! हमारे पास रुकने का एक मिनट भी समय नहीं है. अगर देर हुई तो सब खत्म हो जाएगा, केशव ने दबी हुई लेकिन सख्त आवाज में अपनी पत्नी से कहा.
​चौदह साल का आर्यन बिस्तर पर उठकर बैठ गया. वह अपनी नींद भरी आँखों से यह सब देख रहा था. उसे समझ नहीं आ रहा था कि आखिर ऐसी क्या आफत आ गई कि उन्हें चोरों की तरह आधी रात को अपना घर छोडना पड रहा है. उसकी माँ, सुनीता, जो आमतौर पर बहुत शांत रहती थीं, आज डरी हुई आँखों से अलमारी खाली कर रही थीं. उनके चेहरे पर छाई पीलाहट बता रही थी कि मामला गंभीर है.
​आर्यन ने हिम्मत जुटाकर पूछा, पापा, हम इतनी रात को कहाँ जा रहे हैं? क्या कोई मुसीबत आई है?
​सुनीता ने आर्यन की तरफ देखा तक नहीं, बस घबराई हुई आवाज में कहा, बेटा, सवाल मत करो. बस अपना छोटा वाला बैग उठाओ और जो जरूरी लगे वो रख लो. बाकी सब यहीं छोड दो. बातें करने का समय नहीं है.
​तभी केशव ने एक बडा सूटकेस जोर से बंद किया और आर्यन की आँखों में झांकते हुए कहा, आर्यन, जो कहा है वैसा करो. सवाल पूछने का वक्त निकल चुका है. बस इतना समझ लो कि इसी में हमारी भलाई है.
​आर्यन ने अपने पिता का यह रूप पहले कभी नहीं देखा था. उनके चेहरे पर एक ऐसा डर था जो उसने आज तक महसूस नहीं किया था. वह चुपचाप अपने कमरे में गया और अपना बैग भरने लगा. उसने अपने कुछ पसंदीदा खिलौने और किताबें उठाईं, लेकिन उसका मन भारी था. वह अपने स्कूल, अपने दोस्तों और उस कमरे को पीछे छोड रहा था जहाँ उसने अपना पूरा बचपन बिताया था.
​तभी माँ ने उसे आवाज दी, आर्यन, मेरा फोन टेबल पर पडा है, उसे भूलना मत. आर्यन ने फोन उठाया और अपनी जेब में डाल लिया.

​अगले बीस मिनट के भीतर सारा जरूरी सामान एक छोटे ट्रक में लाद दिया गया. आर्यन और उसके माता- पिता अपनी पुरानी कार में बैठ गए. जैसे ही कार घर से बाहर निकली, आर्यन ने पीछे मुडकर अपने घर को देखा. अंधेरे में वह घर किसी शांत कब्र की तरह लग रहा था. कार एक अनजान दिशा की ओर बढ चली.

​रास्ते में कार की खिडकी से बाहर देखते हुए आर्यन के मन में सैकडों सवाल थे. सडकों पर लगी लाइटें तेजी से पीछे छूट रही थीं. उसने एक बार फिर कोशिश की, पापा, कम से कम अब तो बता दीजिए कि हम कहाँ जा रहे हैं? हमारा अपना घर क्या सुरक्षित नहीं था? क्या किसी ने हमें धमकी दी है?
​केशव ने लंबी और गहरी सांस ली. उनकी नजरें सडक पर जमी थीं. उन्होंने धीमी आवाज में कहा, बेटा, जिंदगी में कभी- कभी ऐसे हालात बन जाते हैं जब पीछे मुडकर देखना मौत को दावत देना होता है. कुछ लोग हमारे पीछे हैं और हमें छिपकर रहना होगा. सही समय आने पर मैं तुम्हें सब समझा दूँगा. अभी बस शांत रहो.

​करीब तीन घंटे के सफर के बाद गाडी शहर की भीडभाड से काफी दूर एक बेहद सुनसान इलाके में रुकी. वहां दूर- दूर तक कोई दूसरा घर नजर नहीं आ रहा था. सामने एक विशाल लेकिन जर्जर हवेली खडी थी. वह हवेली किसी बीते हुए युग की निशानी लग रही थी. उसकी दीवारों से पेंट झड चुका था, खिडकियों के कांच टूटे थे और चारों तरफ घुटनों तक ऊंची घास उगी थी.


​इसे देखते ही आर्यन के रोंगटे खडे हो गए. उसके मुँह से निकला, माँ, यह घर तो कम से कम सौ साल पुराना लगता है. क्या हम सच में यहाँ रहेंगे? यहाँ तो बिजली भी नहीं लग रही.
​सुनीता ने दुखी मन से कहा, हाँ बेटा, फिलहाल यही हमारा सुरक्षित ठिकाना है. शहर की हलचल से दूर, यहाँ हमें कोई नहीं ढूंढेगा.
​जैसे ही उन्होंने हवेली का भारी लकडी का दरवाजा खोला, एक अजीब सी सडन भरी बदबू और बर्फीली ठंडी हवा ने उनका स्वागत किया. घर के अंदर घनघोर अंधेरा था. केशव ने अपनी जेब से मोमबत्तियां निकालीं और उन्हें जलाकर अलग- अलग कोनों में रख दिया. कमरों की हालत बहुत खराब थी, फर्श पर धूल की मोटी परत जमी थी और हर तरफ मकडी के जाले थे. थकान की वजह से केशव और सुनीता ने आंगन में ही चादर बिछाई और लेट गए.
​लेकिन आर्यन की आँखों से नींद गायब थी. वह मोमबत्ती की मद्धम रोशनी में उस घर के कोने- कोने को देख रहा था. उसे महसूस हो रहा था जैसे दीवारें उसे देख रही हों.

​तभी उसकी नजर सीढियों के नीचे रखे एक पुराने संदूक और उसके पास खडी एक लकडी की अलमारी पर पडी. न जाने क्यों, आर्यन को ऐसा लगा जैसे उस अंधेरी अलमारी के भीतर से कोई उसे फुसफुसाकर बुला रहा है. उसके कदम अपने आप उस तरफ बढने लगे. उसका दिल जोर- जोर से धडक रहा था. उसने कांपते हाथों से अलमारी का भारी दरवाजा खोला.
​अंदर सिवाय धूल और पुराने फटे कपडों के कुछ नहीं था. लेकिन जैसे ही उसने नीचे देखा, उसकी नजर एक स्मार्टफोन पर पडी. वह फोन उस पुरानी जगह पर बिल्कुल नया जैसा चमक रहा था. आर्यन ने जैसे ही उसे हाथ लगाया तभी...
आर्यन के हाथ कांपने लगाते है, उसका गला सूख जाता है , वह चिल्लाता hai ........