आज थाने में बड़ा शोर था।
एक मासूम सी,, लगभग 23 साल की एक औरत थी। "औरत तो क्या बोले वो उम्र से " एक लडकी ही थी। बदन पर पुरानी सी साड़ी और रंग साफ़,,,, मगर हाथ एक मजदूर के जैसे होने के स्थान पर बिल्कुल किसी राजकुमारी की तरह थे।
मगर कोमल की जगह शख्त हाथ थे।,,, उसे जैसे ही धक्का देके जेल में डाला गया। तो उस जेल में पहले से बंद औरतों के चेहरे पर एक चिंता की लकीर झलक आई।
भले ही वह लड़की गुनहगार थी। लेकिन फिर वह सभी चिंता में पड़ गई।
वो मन ही मन सोचने लगीं "देखने में कितनी मासूम और भोली भाली है आखिर इसने क्या जुर्म किया होगा"
आंखों में आंसु उसकी,, बेकसूर होने की गवाही दे रहे थे।
मगर उसकी चुप्पी टूट नहीं रही थी । ना ही वह किसी से यह कह रही थी कि,,,में बेकसूर हूं मुझे यहां क्यों लाया गया है।
ना उसके साथ कोई पीछे बोलने वाला। आखिर चल क्या रहा था कुछ समझ नहीं आ रहा था।
उसे जिस प्रकार धक्का देकर जेल में डाला था। जाहिर है गुनाह कोई बहुत बड़ा ही किया होगा।
मगर उस लडकी के चहरे पर बिल्कुल अफसोस नहीं था। मगर फिर आंसू क्यों ?
तभी एक औरत की नजर उसपर पड़ती है जो पहले से उस जेल में बंद थी। वो बड़ी ही गंभीरता ओर आश्चर्य के साथ कहती है की
"अरे गीता तू यहां कैसे"
तभी सभी औरतों का ध्यान पहले से बंद उस औरत की तरफ जाता है।
वो सभी उससे पूछती है की क्या ,,,, तुम जानती हो इस लड़की को?
वो औरत कहती है_
हां ये हमारे चॉल में ही तो रहती है। मेरी ही तरह ये भी सबके घर काम करने जाती है मगर में सच में बहुत संशय में हूं,,, आखिर ये यहां कैसे?
मन ही मन वह औरत सोचती है।
(क्या पता,,, लगता है इसे भी किसी ने झूठे आरोप में जेल में पकड़वा दिया है।
जैसे मुझ से गलती से महंगी क्रॉकरी टूट गईं थी। तो मुझे ये बोल कर कि ,,,,,""जितने की ये क्रॉकरी थी उतनी तो तेरी साल भर की कमाई भी नही है। )
ओर सजा के नाम पर जेल में बंद करवा दिया।
लगता है ये भी किसी अमीरजादी का शिकार हो गईं है।
मगर इसे छुड़वाने नहीं आया कोई। आखिर हुआ क्या है।
पता नहीं इसके पति को पता भी होगा या नहीं और चिंकी का क्या हो रहा होगा बिना मां के।
तभी वहां खड़े पुलिस वाले उसे ऐसे देखने लग जाते हैं। जैसे ये ना जाने कितना बड़ा गुनाह करके आई हो।
ये सच में गुनाह करके आई हैं या किसी ने झूठे जुर्म में गरीबी का। फायदा उठा कर फसा दिया है।
वो औरत गीता से चिल्ला चिल्ला कर पूछती है।
आखिर बताएगी हुआ क्या है?
मगर गीता बस आंखों में आंसु लिए निशब्द खड़ी थी।
तभी एक पुलिस वाली लेडी कॉन्स्टेबल बोलती है।
की अरे इसको तो नर्क में भी जगह मिलेगी मिलेग।
आखिर केसा दर्दनाक ओर संगीन अपराध किया है इस कमीनी ने।
मगर जेल में बंद वो औरत मानने को तयार न थी। की आखिर गीता ने कुछ किया भी होगा.......
To be continued.........
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