Abhimanyu in Hindi Short Stories by Narayan Menariya books and stories PDF | अभिमन्यु

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अभिमन्यु

धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र। युद्ध का मैदान तैयार था। तलवारें चमक रही थीं, बाण संधान हो चुके थे, और रणभूमि की धरती पर घोड़ों की हिनहिनाहट गूंज रही थी। महाभारत का यह युद्ध था, जिसमें पांडव और कौरव अपनी-अपनी किस्मत आजमाने वाले थे। इसी महायुद्ध में एक ऐसा वीर योद्धा भी था, जिसने अपने अद्वितीय साहस और शौर्य से सभी को चकित कर दिया था। उसका नाम था - अभिमन्यु।

अर्जुन और सुभद्रा के पुत्र, अभिमन्यु की वीरता की कहानी किसी अद्भुत कथा से कम नहीं है। महाभारत के इस अद्वितीय योद्धा का जन्म तब हुआ जब उनके माता-पिता अपने धर्म और कर्तव्य के प्रति पूर्णत: समर्पित थे। गर्भ में ही उसने अपने पिता अर्जुन से युद्ध की विद्या सीखनी शुरू कर दी थी। अर्जुन अपनी वीर पत्नी सुभद्रा को चक्रव्यूह भेदने की कला सिखा रहे थे। अभिमन्यु ने गर्भ में ही अर्जुन की बातें सुनकर चक्रव्यूह को भेदने की कला सीख ली थी, लेकिन दुर्भाग्यवश पूरी बात सुनने से पहले ही सुभद्रा सो गईं, और अभिमन्यु को बाहर निकलने का तरीका नहीं पता चल सका।

अभिमन्यु का बचपन वीरता और साहस के वातावरण में बीता। वह अपने पिता अर्जुन और चाचा श्रीकृष्ण से युद्ध की विद्या सीखता रहा। उसकी माता सुभद्रा ने उसे धर्म और कर्तव्य की महत्ता सिखाई। अभिमन्यु की वीरता और बुद्धिमानी का परिचय तब मिला जब उसने छोटी उम्र में ही कई युद्धों में भाग लिया और विजय प्राप्त की।

कुरुक्षेत्र का युद्ध जब शुरू हुआ, तब अभिमन्यु केवल सोलह वर्ष का था, लेकिन उसका साहस और वीरता किसी बड़े योद्धा से कम नहीं थी। एक दिन, युद्ध के दौरान कौरवों ने चक्रव्यूह का निर्माण किया, जो पांडवों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया। अर्जुन उस समय युद्ध के किसी अन्य मोर्चे पर व्यस्त थे, और कोई भी योद्धा चक्रव्यूह को भेदने में सक्षम नहीं था। तभी, अभिमन्यु ने आगे बढ़कर कहा, "मैं इसे भेदूँगा।"

सुभद्रा का दिल गर्व और चिंता से भर गया। द्रौपदी ने अभिमन्यु को आशीर्वाद देते हुए कहा, "जाओ, मेरे वीर। धर्म की रक्षा करो।" अभिमन्यु ने अपने घोड़े को चक्रव्यूह के भीतर दौड़ाया। उसके पीछे-पीछे पांडवों की सेना थी, लेकिन कौरवों ने उनकी सेना को अलग कर दिया। अभिमन्यु अकेले ही चक्रव्यूह के भीतर लड़ने लगे। उनकी तलवार की चमक और धनुष की टंकार से कौरवों के योद्धाओं के दिल कांप उठे।

जब अभिमन्यु चक्रव्यूह के भीतर प्रवेश कर गया, तो उसकी वीरता ने दुश्मनों को चकित कर दिया। उसने एक-एक करके कई योद्धाओं को पराजित किया। दुर्योधन, द्रोणाचार्य, और कर्ण सभी ने मिलकर अभिमन्यु पर आक्रमण किया, लेकिन वे हिम्मत नहीं हारे। उनकी हर वार में उनका अदम्य साहस झलक रहा था। कौरवों की सेना में एक अजीब सी खौफ की लहर दौड़ रही थी।

अभिमन्यु की वीरता ने कौरवों के मन में भय पैदा कर दिया था। वे समझ गए थे कि इस वीर को पराजित करना आसान नहीं होगा। इसलिए उन्होंने अभिमन्यु को चक्रव्यूह के भीतर घेर लिया और उस पर एक साथ हमला किया। अभिमन्यु ने हर ओर से आ रहे वारों का सामना किया। उसकी तलवार निरंतर चल रही थी, लेकिन वह अकेला था और कौरवों की सेना अपार।

जब अभिमन्यु को घेरकर मार दिया गया, तो उसकी वीरता और बलिदान ने पांडवों के दिलों में एक नई आग भड़का दी। उन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर पांडवों को युद्ध में एक नई दिशा दी। अभिमन्यु की कहानी हमें यह सिखाती है कि सत्य और धर्म के मार्ग पर चलते हुए हमें किसी भी प्रकार की कठिनाइयों से नहीं डरना चाहिए। महाभारत के इस वीर योद्धा की कहानी सदैव हमारे दिलों में जीवित रहेगी और हमें प्रेरित करती रहेगी।

अभिमन्यु का बलिदान केवल एक योद्धा का नहीं था, बल्कि यह धर्म और अधर्म की लड़ाई में न्याय की विजय का प्रतीक था। उसकी वीरता ने पांडवों को यह सिखाया कि अपने सिद्धांतों और धर्म के लिए लड़ाई कैसे लड़ी जाती है। उसके अद्वितीय साहस और निष्ठा ने महाभारत की कथा में एक नया मोड़ ला दिया।

कुरुक्षेत्र के मैदान में, अभिमन्यु की वीरता की गाथा कभी नहीं भुलाई जा सकेगी। उसका नाम इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में लिखा गया है। उसके जीवन और बलिदान की कहानी हमें यह सिखाती है कि हमें हमेशा धर्म और न्याय के लिए लड़ना चाहिए, चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी कठिन क्यों न हों। उसकी वीरता और बलिदान हमारे लिए एक प्रेरणा स्रोत हैं, जो हमें यह सिखाते हैं कि धर्म और सत्य के मार्ग पर चलते हुए हमें हमेशा निडर और साहसी रहना चाहिए।

महाभारत के इस महान योद्धा की कथा सदैव हमारे दिलों में जीवित रहेगी और हमें प्रेरित करती रहेगी। अभिमन्यु की वीरता और बलिदान की कहानी हमें यह सिखाती है कि सत्य और धर्म के मार्ग पर चलते हुए हमें किसी भी प्रकार की कठिनाइयों से नहीं डरना चाहिए।

कुरुक्षेत्र की रणभूमि में, अभिमन्यु ने एक ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया जो युगों-युगों तक याद रखा जाएगा। उसकी वीरता और बलिदान की गाथा इतिहास के पन्नों में सदैव अमर रहेगी। अभिमन्यु का नाम इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा गया है और उसकी कथा सदैव प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।