nakl ya akl-80 in Hindi Fiction Stories by Swati Grover books and stories PDF | नक़ल या अक्ल - 80

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नक़ल या अक्ल - 80

80

दिल की बात

 

गोली की आवाज़ से नंदन और नन्हें ने सिर नीचे कर लिए थे, मगर जब उन्होंने डरते हुए सिर ऊपर उठाकर देखा तो कमलेश के हाथ से पिस्तौल ज़मीन पर गिर चुकी है और उस चार पाँच बिना वर्दी के ऑफिसर बंदूक ताने खड़े है। उन ऑफिसर ने उन्हें घेर लिया, अब कांस्टेबल अंदर आये और उनके हाथ में हथकड़ी पहनाने लगें। कमलेश, हेमंत और जगदीश और उसके आदमियों के चेहरे का रंग उड़ा हुआ है। वहीं निहाल और नंदन ने राहत की सांस ली। निहाल ने एक ऑफिसर को धन्यवाद कहा तो वही नंदन ने पूछा, “सर! आप लोगों  को किसने हमारे  बारे में  बताया,” “आपके  दोस्तों ने” ऑफिसर  दिवेश  ने ज़वाब  दिया। “हमारे  दोस्त?” उनके चेहरे पर सवालियां  भाव  देखकर, दिवेश  ने दरवाजे  की तरफ़  ईशारा  किया। दोनों  ने देखा, सामने से अंकुश  और अंकुर आ रहें हैं। उनके चेहरे  पर मुस्कान है।

 

“क्यों नन्हें, दोस्ती क्या सिर्फ तुझे ही निभानी आती है।“ अब अंकुश ने निहाल को गले लगा लिया। नंदन भी भावुक होकर अंकुर से लिपट गया। दिवेश  ने निहाल से पूछा, “वो सबूत कहाँ  है?”

 

सर, वो हमारी स्कूटर  में  है। नंदन  ने तपाक  से ज़वाब  दिया।

 

तुम्हारा  स्कूटर तो इन  लोगों  ने जला दिया। अंकुर ने कहा।

 

क्या? दोनों हैरान  है ।

 

सर, आप मेरे साथ चलिए। अब सभी लोग पुलिस  की जीप  में  बैठकर  नन्हें  के बताये  रास्ते पर चलने लगे। अब उसने जीप वही रुकवा दी, जहाँ  वो जनरल  स्टोर की दुकान थी, उसने दुकान वाले भैया  को धन्यवाद कहा और उनसे पेपर  ले लिए। “मैंने कहा था न निहाल का दिमाग लोमड़ी से भी तेज़ चलता है।“ सब हँसने  लग  गए। पेपर देने से पहले निहाल ने उन ऑफिसर से पूछा, “सर आपने तो देख लिया कि पुलिस भी मिली हुई है, ऐसे में यह पेपर आपको देने सही है?” “मिस्टर निहाल, हम सीबीआई से आए है, आप निश्चित  रहें ।“ उसने वो पेपर उन्हें पकड़ाए और वो लोग वहां से चल दिए।  उनके जाते ही निहाल ने दोनों  से सवाल  किया, “तुम्हें  कैसे पता चला कि  हम यहाँ थें? “

 

“यार!! उस दिन  तुझे और नंदन को हमने पेट्रोल पंप पर तुझे देखा और तुझसे बात करने के लिए तेरा पीछा किया, इससे पहले हम तुझे रोकते वो आदमी तुम्हें  गाड़ी  के अंदर बिठाकर  ले गए, फिर हमने गाडी का पीछा  किया और कुछ  देर बाद सारा मामला समझ आ गया। पहले सोचा कि पुलिस  को बुलाए, फिर जगदीश को फ़ोन पर पुलिस वाले से बात करते सुना तो पता लगा कि यह प्लान तो बेकार  है, फिर सीबीआई  के यहाँ  गए इनको यहाँ  लाने में थोड़ा समय लग गया ।“ “ यार!! फिर भी टाइम पर आ गए,” नंदन  हँसते हुए बोला  तो सब हँसने लगे।

 

यार !! तू चाहता तो उस दिन तुझे मारने के लिए मेरी कंप्लेंट भी कर सकता था, मगर तूने दोस्ती  निभा दी। अंकुश ने भावुक होकर कहा।

 

और आज तूने निभा दी। अब चारों एक दूसरे के फिर से गले लग गए।

 

आने वाले कल के हर अख़बार और टीवी के न्यूज़ चैनल पर नन्हें और नंदन छाये रहें। पूरे देश को उन पर गर्व हो रहा था। उसके गॉंव में तो हंगामा मचा हुआ था। अंकुश और अंकुर की बहादुरी की चर्चा हर तरफ हो रही थी, प्रशासन ने नई परीक्षा प्रणाली बनाई और फिर एग्जाम करवाए। सभी दोषियों पर मुकदमा चला। नक़ल करकर कमलेश जैसे पुलिस ऑफिसर बने स्टूडेंटस के खिलाफ सख्त कारवाही की गई। उन्हें नौकरी से ससपेंड कर दिया गया। पेपर देने के बाद, एसएससी का जो परीक्षा परिणाम आया उसमें निहाल ने सबसे ज्यादा अंक प्राप्त किये। अंकुश नंदन और अंकुर भी पास हो गए। सरकार ने नन्हें  और उसके दोस्तों को उनकी सूझबूझ और बहादुरी के लिए पुरस्कृत किया। लक्ष्मण प्रसाद को अपने बेटे पर गर्व हो रहा है। मुरली की भी चुनाव में भारी जीत हुई और वह विधायक बन गया। निहाल और नंदन ने उनकी मदद करने के लिए उसका भी धन्यवाद किया तो उसने उन दोनों को गले लगा लिया।

 

निहाल के साथ नंदन, अंकुश और अंकुर भी एक साल की पुलिस की ट्रेनिंग लेने अलग अलग राज्यों में  चले गए। राजवीर और रघु का पेपर क्लियर नहीं हुआ। राजवीर के दिनेश को पैसे देकर पैसे खरीदने की बात सामने आते ही जमींदार गिरधारी चौधरी  की इज़्ज़त  मिट्टी  में  मिल गई। उन्होंने राजवीर को बहुत मारा  और उसे बिरजू के पास शहर भेज दिया। रघु ने तो शहर में कपड़ो की दुकान खोल ली तो वही बिरजू के कहने पर राजवीर ने हार्डवेयर का कोर्स करना शुरू  कर दिया। सोनाली का भी पेपर क्लियर नहीं हुआ तो उसने फैशन डिजाइनिंग का कोर्स  पूरा करने का ही मन  बना लिया। 

 

आज पूरे एक साल की टैनिंग के बाद, निहाल अपने गॉंव वापिस आ रहा है। उसकी पोस्टिंग ग़ाज़ियाबाद  में  हुई  है । उसने मन की ख़ुशी  चेहरे पर भी नज़र  आ रही है। आज वह अपनी मरी हुई माँ  की तस्वीर के सामने गर्व से खड़ा होगा और उस सरला को भी गोद में उठाएगा जिसने राधा की कोख से जन्म लिया है और राधा ने ही उसका नाम सरला रखा  है।

 

जब वह गॉंव में घुसा तो उसने देखा कि जमींदार  के घर के बाहर  हंगामा  मचा हुआ है। उसकी बहू  मधु दहाड़े  मारकर  रो रही है और उसका  पति सुधीर उसे संभाल  रहा है, पूछने पर  पता चला कि ज़मीदार के सात महीने के पोते को हरीश उठाकर ले गया है। निहाल ने सुना तो सकते में आ गया। उसने पूरी  मुस्तैदी  से हरीश को पकड़कर बच्चा जमींदार की गोद में डाल दिया। गिरधारी चौधरी  ने खुश होकर उसे उसकी ज़मीन वापिस कर दी और पैसे भी नहीं लिए और अपनी गॉंव में अपनी खोई  हुई  इज़्ज़त पाने  के लिए उसने सभी कर्जदार किसानों की ज़मीन वापिस करना ही ठीक समझा। जिसने उसको, जितने पैसे दिए, उसने रख लिए और सबकी ज़मीन लौटा दीं। अब निहाल सुनील के पीछे पड़ गया, उसने उसकी अवैध शराब की दुकानों का पता लगा लिया, मजबूर होकर उसे निर्मला को तलाक देना पड़ा और मुआवजे के तौर पर दस लाख भी दिए। निहाल ने उसकी शराब की दुकाने भी बंद करवाई और निर्मला को आजाद भी करवाया। बिरजू के बहुत कहने पर जमींदार ने दोनों की शादी को मंजूरी दे दी और वे दोनों शहर आ गए।  

 

 

उसने अब बिरजू की मदद से नशा बेचने वालों के गिरोह को  भी पकड़  और मुरली ने हर गॉंव  में  नशा मुक्ति केंद्र भी खोल लिया। अब निहाल ने अवैध तरीके से बेचते किडनी रैकेट के गिरोह को पकड़कर मेडिकल प्रोफेशन में चल रही धांधली का भी पर्दाफाश किया। अब उसकी पोस्टिंग मध्यप्रदेश में हो गई है, वह स्टेशन पर बैठा ट्रैन का इंतज़ार कर रहा है। निर्मला ने गॉंव में अपने घर आई सोनाली से कहा कि  “निहाल से  बात करकर गिले शिकवे दूर कर लें, यह न हो कि बहुत देर हो जाये।“ वह भागती हुई  स्टेशन पर गई तो देखा कि निहाल ट्रैन में चढ़ रहा है, उसने आवाज लगाई, मगर स्टेशन पर शोर  के कारण वह सुन न सका और ट्रेन के अंदर घुस गया और तभी ट्रैन पटरी पर दौड़ने लगी। वह “निहाल निहाल !!!” चिल्ला रही है मगर ट्रैन उसकी आँखों सामने आगे जाती जा रही है और पीछा रह गया सिर्फ  सिर्फ एक नाम, “निहाल!! निहाल!!!“