shopping in Hindi Comedy stories by Arun Singla books and stories PDF | शॉपिंग का ज्ञान

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शॉपिंग का ज्ञान

“भाई एक फडकती हुई खबर तुझे देनी है, खुश हो जा“ फ़ोन पर मेरा दोस्त तरुण चहचहा रहा था

“क्यों, तेरे घर दीपिका आ रही है”

“हाय, ऐसी किस्मत कहाँ, दीपिका तो नही आ रही, उसने ठंडी आह भरी, पर अपना पुराना यार निखिल जरुर आ रहा है, और इसलिए आज सभी दोस्तों ने शाम को एक ड्रिंक पार्टी रखी है, जल्दी ही आ जाना“ तरुण सुर में बोला

ड्रिंक पार्टी, यानी रंगा रंग प्रोग्राम, सुन कर मुझ पर शरूर छाना शुरू हो गया, शरीर में मस्ती की लहर दोड़ने लगी, परन्तु तभी मुझे आज सुबह ही श्रीमती जी से किया हुआ प्रॉमिस याद आ गया, साला ये प्रॉमिस भी आज ही करना था, लहर ठंडी हो कर ठहर गई, हे भगवान् बच्चे से क्या खेल, खेल रहा है.

हुआ यह था, कि बीवी दो महीने से शौपिंग-शोपिंग कर रही थी व् शोहर काम है-काम है, कर रहा था. आज सुबह बीवी  के मोबाइल पर मेसेज आया की आप के अकाउंट में 500 रूपए जमा कर दिए गये हैं, जो की 5000 के शौपिंग पर रीडीम किये जा सकते हैं, और इसकी वैलिडिटी केवल आज तक है. बीवी ने मेसेज ऐसे हमे दिखाया जेसे उसने कठोर परिश्रम करके ये डिस्काउंट कमाया हो, या लाखों में उसकी ही लाटरी निकली है, खुदाया, ये मेसेज तो सभी को आया होगा. परन्तु बीबी के ब्रेकफास्ट लगाने के धमाकेदार ढंग, और आर पार वाले तेवर देख कर हम ने खुद ही शौपिंग का शान्ति प्रस्ताव पेश कर दिया था.

“अरे यार, पार्टी टाइम थोड़ा लेट रखना, शाम को वाइफ को शौपिंग भी करानी है” मेने फ़रियाद की

“वाइफ को शौपिंग, फिर तो गई भेंस पानी में, अबे शौपिंग किसी और दिन करा देना”

“अबे साले, और दिन की गोली देते-देते हुए दो महीने हो गए है, आज नही गया तो शाम को पार्टी व् सुबह मेरा पैकअप पक्का है”

सर मुंडाते ही ओले पड़े, शाम की पार्टी की मस्ती और जलवे, मुझे उकसाए जा रहे थे, क्या करूँ-क्या करूँ, तभी  मेरे शराबी दिमाग ने एक तरकीब की खोज कर डाली.

“बेबी, शाम को जल्दी तेयार हो जाना, शौपिंग के लिए जल्द निकलेंगे” मेने मेडम को मोबाइल लगाया,

बुआ जाऊं-जाऊं कर रही थी, और फूफा लेने आ गया, बीवी ने अपने स्वभाव के विरुद्ध बिना कोई सवाल किये, तुरंत हामी भरी.

अब शाम को जल्दी ऑफिस छोड़ने के लिए, हमने सुबह से ही बॉस के सामने तबियत खराब होने का ड्रामा शुरू कर दिया था, बॉस ने बुलाया तो इस तरह चलता हुआ, केबिन के अंदर गया, जेसे आठ महीने की प्रेग्नेंट महिला चलती है, और चेहरा बिलकुल देवदास बना लिया, की आखरी श्वास बस गई के गई. बॉस ने चश्मे के अंदर से इस तरह मेरी तरफ देखा जेसे वैज्ञानिक दूरबीन से कीड़े को देखता है, पर प्रवचन नही किया.

शाम को समय से पहले ही ऑफिस छोड़ कर, बीवी को ले कर समय से पहले में, शौपिंग माल पहुंचा.

मैने सुबह ही बोल दिया था, जो लेना है, उसकी लिस्ट पहले से बना कर रखे, और बीवी ने उसे ठीक उसी  गंभीरता से लिया, जेसे सारा विश्व पकिस्तान के शान्ति प्रस्ताव को लेता है.  माल के एंट्रेंस पर ही वीकेंड और छुट्टियों होने के कारण भीड़ लगी थी, हे भगवान्, ऐसा लगता था की सरकार ने आर्डिनेंस जारी कर दिया हो, कि हर किसी को मॉल जाना है, वरना भारी जुर्माना अदा करना पडेगा.

अगर शौपिंग माल की खोज करने वाला विक्टर ग्रुएन, मुझे मिल जाए तो उसकी गर्दन मरोड़ दूँ, जिसने माल जेसी वाहियात चीज की खोज की थी. परन्तु उसे भी क्या कहें, उसने 1956 में माल की खोज की पर 1968 आते-आते वह खुद ही अपनी इस खोज के खिलाप हो गया था, उसे अपनी गलती का एहसास हो गया था, और उसने इस सार्वजानिक रूप से इसे स्वीकार भी किया था. शायद बीवी को शौपिंग करानी पडी होगी, मैने अनुमान लगाया. और उसने खुद से कहा होगा- “ बना कर तुझे, में खुद परेशान हूँ, क्या मैने बनाया था, ये क्या बन गया”.

श्रीमती जी ने मॉल में प्रवेश करते ही एक-एक आइटम को इस तरह देखना शुरू किया, जेसे पहली बार चाँद से पृथ्वी पर आई हो, उसपर भीड़ भरे माहोल ने खरीदारी को और भी मुश्किल बना दिया था, घड़ी ने रफ़्तार पकड़नी शुरू कर दी थी.

“अरे कहीं नये व् बढिया आइटम्स ख़त्म ना हो जाए, पहले वो खरीद लो, जो खरीदना है”, हमने होशयारी दिखाई, तीर निशाने पर लगा, बात बिक गई थी.

“मुझे तो केवल एक जरुरत का सूट खरीदना है”, मुझे तो यही बताया गया था.

तो वो एक सूट खरीदने व् पसंद करने का दोर शुरू हो गया, पूरा एक घंटा लगा कर उन्होंने पांच सूट पसंद किये, मुझे पार्टी नजदीक दिखाई लगने लगी, पर ट्रायल रूम के बाहर लम्बी लाइन लगी थी.

“यार कहाँ है” निखिल के फ़ोन ने मेरी धड़कन तेज की.

उधर श्रीमतीजी का भी नंबर आया, और उन्होंने हर एक सूट पहन कर मुझे दिखाया.

“केसी लग रही हूँ”

“बेबी कमाल लग रही हो, सोचो मत तुरंत ले लो” वे खुश तो हुई, पर बिना बकाया चार ड्रेसेस का पक्ष सुने उन्होंने फेसला सुनाना मुनासिब ना समझा.

दूसरा, तीसरा, पहन कर दिखाया

“ये केसा है”

“सुपर्ब”

चोथे का साइज़ गलत आ गया था, में दोड़ कर सही साइज़ लाया, घड़ी ने रफ़्तार पकड़ ली थी.

“ये साइज़ तो ठीक है, इसमें कुछ मोटी लग रही हूँ” ट्रायल रूम के बाहर से आवाज आई

“मोटी, अरे नहीं, सूट का डिजाईन ही पैरलल लाइन वाला है” पार्टी में जाना था, नाराज करने का कोई भी  ख़तरा मोल नही लिया जा सकता था.

“कोन सा लूँ”

“सारे ही लै लो” पर जल्दी करो, हम मन ही मन में बुदबुदाए.

“बजट देख कर चलना पड़ता है, तुम्हारे किये तो घर चल लिया”, उन्होंने ज्ञान वर्षा की. अगर बजट का ही  ख्याल है, तो घर ही रहती, आवाज हम ने मन से बाहर न आने दी.

आखिर एक सूट फाइनल कर लिया गया, परन्तु उसकी कीमत 5000 रूपए से कम थी. “क्या एक और ले ले”, 500 रूपए के जैकपोट यानी डिस्काउंट का सवाल था. मैने तुरंत हामी भरी, अब मेरा मोबाइल लगातार बज रहा था, घड़ी ओवरस्पीड  हो चुकी थी, मॉल में आये दो घंट से ज्यादा हो चुके थे. एक और सूट ले लिया गया.

पेमेंट काउंटर पर लम्बी लाइन लगी थी, जेसे तेसे करके नंबर आया तो काउंटर क्लर्क ने श्रीमती के ज्ञान चक्षु खोंले, आप का 5500 रूपए का बिल तो हो ही गया है, अगर आप 2500 रूपए की आइटम और ले ले, तो 8000 रूपए की बिलिंग पर 10 महीने तक 300 रूपए प्रति माह कैशबेक आयेगा, श्रीमती मेरी तरफ घूमी, प्यार भरी नजरों से देखा, मेरी श्वास रुकी, गर्दन हाँ में हिलाई.

 

अब वे वापिस लोट कर अपनी सह्लियों को जतायेगी, कि आज वो कितनी समझदारी वाली शौपिंग कर के आयी है, इतना कैशबेक, इतना डिस्काउंट ले के आई है, और ये केवल आज के लिए था, उनको जलायेगी, तभी शौपिंग के कठिन व्रत का फल उन्हें प्राप्त होगा.

अब 2500 रूपए की खरीददारी के लिए लाइन छोडनी पडी, और अगले एक घंटे में जुराब, बनियान, रुमाल वेगारा लिए गये, और हम उन सारी जरुरी वस्तुओं को भूल चुके थे, जो खरीदना चाहते थे, क्योंकि डिस्काउंट केवल सिलेक्टेड आइटम्स पर था. उसपर तुर्रा ये की मेडम बजट देख कर केवल जरुरी आइटम्स की शौपिंग करने आई थी.

मेरा मोबाइल बज-बज कर थक गया था, घड़ी की ओवरस्पीड के कारण जलने की बू आ रही थी, तीन घंटे से ज्यादा हो चुके थे.

“भाई अब मत आना, हम घर वापिस जा ही रहें है”

“यार, बस पांच मिनट रुको, अभी पहुंचा ही समझो” मैने फांसी की सजा मिले निरीह प्राणी की आख़री इच्छा बताई.

पेमेंट के लिए दोबारा लम्बी लाइन में लगे, नंबर आने पर काउंटर क्लर्क ने फिर ज्ञान की गंगा बहाई, और भुगतान पर मिलने वाले डिस्काउंट के बारे बताया, अगर पेटीऍम से पेमेंट करेंगें तो इतना डिस्काउंट और अगर फलाना बैंक के क्रेडिट कार्ड से करेंगें तो इतना डिस्काउंट, बस बिलिंग 10000 रूपये से ज्यादा की हो.

“भाई हम वापिसी के लिए निकल चुके है, निखिल तुझ से नाराज है, साले घर जा कर मिल्क की ड्रिंक बना, जोरू का गुलाम, मजा खराब कर दिया” तरुण को चढ़ गई थी.

सालों ने पार्टी भी की और मजा भी उन्ही का खराब हुआ, भाड़ में जाओ, और जोरू का गुलाम भी में ही, हाँ ये तो ठीक ही है, मेने सोचा. घड़ी ओवर स्पीड हो कर जल भुन कर बंद हो गई थी, अब आराम था, कोई जल्दी ना थी, में बुद्ध अवस्था को प्राप्त हो गया था.

10000 रूपए की बिलिंग के लिए, और आइटम्स खरीदी गई 3000 रूपए की जगह कब 10000 रूपए से ज्यादा की शौपिंग हो गई, क्रडिट कार्ड ने पता ही नहीं चलने दिया.

अगर आप को “भैंस गई पानी मे” का क्या मतलब होता है, नहीं पता तो बीवी को शौपिंग के लिए माल में ले जाएँ, क्या कहा आप ले जा चुके है?