hindi Best Moral Stories Books Free And Download PDF

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Moral Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cult...Read More


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  • गवाक्ष - 14

    गवाक्ष 14 निधी के चेहरे पर प्रश्न पसरे हुए थे, ह्रदय की धड़कन तीव्र होती जा रही थ...

  • कुछ गाँव गाँव कुछ शहर शहर - 5

    कुछ गाँव गाँव कुछ शहर शहर 5 सामने ही निशा का घर दिखाई दे रहा था। एक सर्द हवा के...

  • राम रचि राखा - 2 - 2

    राम रचि राखा गोपाल (2) “गोपाल अब पढ़ाई करने लगा है।“ ऐसा चन्दू लोगों से कहते थे।...

गवाक्ष - 14 By Pranava Bharti

गवाक्ष 14 निधी के चेहरे पर प्रश्न पसरे हुए थे, ह्रदय की धड़कन तीव्र होती जा रही थी। कुछेक पलों पूर्व वह अपनी साधना में लीन थी और अब---एक उफ़नती सी लहर उसे भीतर से असहज कर रही थी । पर...

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आधा आदमी - 29 By Rajesh Malik

आधा आदमी अध्‍याय-29 यह सब देख कर मैं अपना आपा खो बैठी, ‘‘भौसड़ी के खिलवा टाक के गुरू के गिरिये पर मुँह मारेगी.‘‘ कहकर मैं इसराइल की तरफ़ मुख़ातिब हुई, ‘‘भड़वे, तुमसे हमरा पेट नाय भरत ह...

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होने से न होने तक - 50 By Sumati Saxena Lal

होने से न होने तक 50. न जाने कितनी संस्थाओं से जुड़े हैं यह अध्यक्षा और प्रबंधक । एक की चॉद पर दूसरे का रजिस्टर भरता है। इस विद्यालय की अध्यक्षता भी तो इनके समाज सेवा के खाते में ही...

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हार गया फौजी बेटा - 2 By Pradeep Shrivastava

हार गया फौजी बेटा - प्रदीप श्रीवास्तव भाग 2 उस रात मैं बड़ी गहरी नींद सोया था। इसलिए नहीं कि मुझे सुकून का कोई कतरा मिल गया था। सोया तो इसलिए था क्योंकि नर्स ने मुझे गलती से नींद की...

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जय हिन्द की सेना - 1 By Mahendra Bhishma

जय हिन्द की सेना महेन्द्र भीष्म एक सुबह मुँह अंधेरे अटल दा ने मुझे झकझोर कर जगा दिया। घर के सभी लोग अस्त—व्यस्त से कहीं जाने की तैयारी में लगे थे। कल देर रात तक हम सभी रहमान चाचा क...

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कुछ गाँव गाँव कुछ शहर शहर - 5 By Neena Paul

कुछ गाँव गाँव कुछ शहर शहर 5 सामने ही निशा का घर दिखाई दे रहा था। एक सर्द हवा के झोंके के साथ जब बादलों ने गरज कर जोर से ओले बरसाने शुरू किए तो सब पेड़ों के नीचे पनाह लेने के लिए भा...

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सुरक्षा By Asha Pandey Author

सुरक्षा प्लेटफार्म नंबर एक के यात्रियों के लिये बनी बेंच पर वह बैठी है | उम्र कोई पच्चीस से अट्ठाईस के आस पास | आखें बड़ी और भाव प्रवण | नाक लम्बी, होठ पतले, रंग मटमैला किन्तु पूरे...

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राम रचि राखा - 2 - 2 By Pratap Narayan Singh

राम रचि राखा गोपाल (2) “गोपाल अब पढ़ाई करने लगा है।“ ऐसा चन्दू लोगों से कहते थे। वास्तव में गोपाल को अभी भी शब्द ज्ञान नहीं हो पाया था। हाँ तीन-चार सप्ताह में इतना अवश्य हुआ था कि क...

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समंदर और सफेद गुलाब - 3 - 2 By Ajay Sharma

समंदर और सफेद गुलाब 2 इस बीच राहुल ने मेरा पासपोर्ट बनवाकर मुझे अमेरिका भेज दिया। कुछ दिन लगे थे आपरेशन होने को। आपरेशन कामयाब हुआ था। जिस दिन मुझे डाक्टर ने आईना देखने के लिए तो म...

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केसरिया बालम - 17 By Hansa Deep

केसरिया बालम डॉ. हंसा दीप 17 एक किनारे की नदी बाली का किसी से फोन पर झगड़ा हो रहा था और तैश में आकर वह मारपीट की धमकी दे रहा था। जाहिर था कि यह पैसों के अलावा तो कोई बात हो ही नहीं...

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आधी दुनिया का पूरा सच - 24 By Dr kavita Tyagi

आधी दुनिया का पूरा सच (उपन्यास) 24. प्रात:काल स्त्री का चिर-परिचित मृदु-मधुर स्वर सुनकर रानी की नींद टूटी, तो वह आश्चर्य से चौंक कर उठ बैठी - "आंटी, आप ! इतनी सुबह !" "फिर अंटी कहा...

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चाँद के पार एक चाबी - 3 By Avadhesh Preet

चांद के पार एक कहानी अवधेश प्रीत 3 वह हाई स्कूल, जहां से पिन्टू कुमार ने मैट्रिक किया था और अब वह उत्क्रमित होकर इंटर हो गया था, इसी नेशनल हाईवे पर था, जिसके चारों ओर बाउंड्री बन ग...

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गुलाबी बिंदु By Priyadarshan Parag

गुलाबी बिंदु प्रियदर्शन गाजियाबाद को दिल्ली से जोड़ने वाली और एनएच-24 से जुड़ने वाली वह सड़क सन्नाटे में डूबी थी। परितोष ऐसी ख़ाली सड़क देखता है तो गाड़ी की रफ़्तार सौ के क़रीब तक...

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पूर्ण-विराम से पहले....!!! - 7 By Pragati Gupta

पूर्ण-विराम से पहले....!!! 7. खैर प्रखर ने जैसे ही अपनी बातें बताना शुरू की.....शिखा प्रखर की बातों को सुनने लगी.. “तुम दोनों को प्रीति के बारे में बताऊँगा तो मुझे भी बहुत अच्छा लग...

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उर्वशी - 16 By Jyotsana Kapil

उर्वशी ज्योत्स्ना ‘ कपिल ‘ 16 दिल्ली एयरपोर्ट से कार में बैठकर वह लोग आगरा चल दिये। अब बस थोड़ी देर का साथ बाकी था। शिखर बहुत व्याकुल थे, पर कुछ कर नहीं सकते थे। उनके वश में होता तो...

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जननम - 13 By S Bhagyam Sharma

जननम अध्याय 13 शोक्कलिंगम को 'सेरीब्रेल हेमरेज' हो गया उसने निश्चय किया। इसके अलावा भी उनको अनेकों बीमारियां हैं। इससे वे छूट जाए ये बहुत मुश्किल की बात नजर आती है। नियंत्र...

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आब-दाना By Deepak sharma

आब-दाना “सरकार, चाय?” दरवाजे पर दस्तक के साथ आवाज आई| उषा ने मोबाइल की घड़ी पर नजर दौड़ाई| सुबह के पाँच बजे थे| “चाय, सरकार?” दरवाजे पर दोबारा दस्तक हुई| बिस्तर से उषा ने चिल्लाना चा...

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महामाया - 34 - अंतिम भाग By Sunil Chaturvedi

महामाया सुनील चतुर्वेदी अध्याय – चौंतीस रात लगभग साढ़े ग्यारह बजे का समय था। आश्रम में सन्नाटा था। कमरे में बाबाजी अपने आसन में बैठे थे और अनुराधा उनके सामने सिर झुकाये बैठी थी। ‘‘ब...

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नीली धारियों वाला लिफाफा By Hansa Deep

कहानी नीली धारियों वाला लिफाफा डॉ. हंसा दीप जब-जब आदमी ने किसी प्रश्न का उत्तर नहीं पाया, तब-तब उसे रात नींद नहीं आई। गहराती रात और बढ़ती उलझनों का सम्बंध भी उतना ही गहरा है जि...

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ग्रेजुएट बहू By Poonam Singh

"ग्रेजुएट बहू" हर रोज बहू अपने ससुर को घंटों बागवानी करते देखती तो उसे मन ही मन झुंझलाहट होती । 'इन बूढों को भी कोई काम नहीं होता ना जाने पूरा दिन इन पेड़ पौधों के बीच रहना...

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डेजा वू By suraj sharma

क्या है डेजा वू या हम इसे पुर्वनुभास भी कह सकते है पर ये जो भी है क्या है ये ? अगर आपने मेरी समानांतर ब्रह्माण्ड की कहानी पड़ी होगी तो उसमे मैंने एक बात कही थी, कभी कभी हमें किसी ज...

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मेरा स्वर्णिम बंगाल - 1 By Mallika Mukherjee

मेरा स्वर्णिम बंगाल संस्मरण (अतीत और इतिहास की अंतर्यात्रा) मल्लिका मुखर्जी(1) सादर समर्पित परम पूज्य माता-पिता श्रीमती रेखा भौमिक, श्री क्षितिशचंद्र भौमिक, नानी माँ आभारानी धर तथा...

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समानांतर By Antara Karvade

समानांतर “देखो शालू, ये मेरे कल के कार्यक्रम में खींचे थे।“ सुषमा ने खूब हुलास से बेटे के सामने अपना मोबाईल स्क्रीन रखा। अपेक्षा थी कि वो उछलकर मोबाईल हथिया लेगा, रेकॉर्डिंग सुनने...

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चार्ली के टिली हमसब By Amit Singh

#चार्ली_के_टिली_हमसब#क्योंकि_हम_सुपरमैन_नहीं_हो_सकते****************************कवि केदारनाथ सिंह ने कहा है कि “जाना” हिंदी की सबसे खतरनाक क्रिया है | लेकिन लोग जा रहे हैं | लोग ठी...

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सन्देशा - 1 By Vikash Dhyani

सन्देशा अरे सुनती हो कितना समय हो गया है उठ भी जाओ अब धूप सर पे चढने को है और महारानी अभी तक सो रही है। बगल के घर से - अम्मा आप ही ने चढ़ा रखा है सर पे वरना हम भी तो है घर का सारा क...

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सेंधा नमक - 4 By Sudha Trivedi

सेंधा नमक सुधा त्रिवेदी (4) माताजी के वापस चले जाने के दो-तीन दिन बाद की बात है। सुबह-ही-सुबह माताजी ने फोन करके साहिल को खूब चाभी घुमाई और वह सुबह से ही मुंह फुलाए बैठा रहा। घर का...

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नई सुबह. By Vandana Gupta

नई सुबह माधव का नाम साहित्य जगत का एक जाना -पहचाना नाम था.उसकी कलम से निकला हर शब्द पढने वाले को सोचने पर मजबूर कर देता था --------क्या श्रृंगार,क्या वियोग,क्या मानवता और क्या व्यं...

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धूप का गुलाब By Asha Pandey Author

धूप का गुलाब ‘शकुन बेटा ! दो कप चाय बना लाओ’ ड्राइंगरूम तथा लाबी को पार करती हुई सहाय साहब की आवाज किचन में काम कर रही उनकी इकलौती बहू शकुन के कानों में पड़ी | शकुन शाम के भोजन की त...

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मैं, मैसेज और तज़ीन - 6 - अंतिम भाग By Pradeep Shrivastava

मैं, मैसेज और तज़ीन - प्रदीप श्रीवास्तव भाग -6 मैंने पूछा ‘आप पहुंच गए ?’ तो वह बड़ा खुश होकर बोला ‘हां।’ उसे खुशी इस बात की भी थी कि वह एक और कदम मेरे करीब आ गया। मेरा नंबर अब उसके...

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उठते क्यों नहीं कासिम भाई? By Priyadarshan Parag

उठते क्यों नहीं कासिम भाई? प्रियदर्शन मुर्गे की तेज़ बांग से अकचका कर उठे कासिम भाई। कमबख़्त इस महानगर में कब से बोलने लगा मुर्गा। आदतन घड़ी पर नज़र पड़ी- अरे, वह भी सुबह के साढ़े...

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गवाक्ष - 14 By Pranava Bharti

गवाक्ष 14 निधी के चेहरे पर प्रश्न पसरे हुए थे, ह्रदय की धड़कन तीव्र होती जा रही थी। कुछेक पलों पूर्व वह अपनी साधना में लीन थी और अब---एक उफ़नती सी लहर उसे भीतर से असहज कर रही थी । पर...

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आधा आदमी - 29 By Rajesh Malik

आधा आदमी अध्‍याय-29 यह सब देख कर मैं अपना आपा खो बैठी, ‘‘भौसड़ी के खिलवा टाक के गुरू के गिरिये पर मुँह मारेगी.‘‘ कहकर मैं इसराइल की तरफ़ मुख़ातिब हुई, ‘‘भड़वे, तुमसे हमरा पेट नाय भरत ह...

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होने से न होने तक - 50 By Sumati Saxena Lal

होने से न होने तक 50. न जाने कितनी संस्थाओं से जुड़े हैं यह अध्यक्षा और प्रबंधक । एक की चॉद पर दूसरे का रजिस्टर भरता है। इस विद्यालय की अध्यक्षता भी तो इनके समाज सेवा के खाते में ही...

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हार गया फौजी बेटा - 2 By Pradeep Shrivastava

हार गया फौजी बेटा - प्रदीप श्रीवास्तव भाग 2 उस रात मैं बड़ी गहरी नींद सोया था। इसलिए नहीं कि मुझे सुकून का कोई कतरा मिल गया था। सोया तो इसलिए था क्योंकि नर्स ने मुझे गलती से नींद की...

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जय हिन्द की सेना - 1 By Mahendra Bhishma

जय हिन्द की सेना महेन्द्र भीष्म एक सुबह मुँह अंधेरे अटल दा ने मुझे झकझोर कर जगा दिया। घर के सभी लोग अस्त—व्यस्त से कहीं जाने की तैयारी में लगे थे। कल देर रात तक हम सभी रहमान चाचा क...

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कुछ गाँव गाँव कुछ शहर शहर - 5 By Neena Paul

कुछ गाँव गाँव कुछ शहर शहर 5 सामने ही निशा का घर दिखाई दे रहा था। एक सर्द हवा के झोंके के साथ जब बादलों ने गरज कर जोर से ओले बरसाने शुरू किए तो सब पेड़ों के नीचे पनाह लेने के लिए भा...

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सुरक्षा By Asha Pandey Author

सुरक्षा प्लेटफार्म नंबर एक के यात्रियों के लिये बनी बेंच पर वह बैठी है | उम्र कोई पच्चीस से अट्ठाईस के आस पास | आखें बड़ी और भाव प्रवण | नाक लम्बी, होठ पतले, रंग मटमैला किन्तु पूरे...

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राम रचि राखा - 2 - 2 By Pratap Narayan Singh

राम रचि राखा गोपाल (2) “गोपाल अब पढ़ाई करने लगा है।“ ऐसा चन्दू लोगों से कहते थे। वास्तव में गोपाल को अभी भी शब्द ज्ञान नहीं हो पाया था। हाँ तीन-चार सप्ताह में इतना अवश्य हुआ था कि क...

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समंदर और सफेद गुलाब - 3 - 2 By Ajay Sharma

समंदर और सफेद गुलाब 2 इस बीच राहुल ने मेरा पासपोर्ट बनवाकर मुझे अमेरिका भेज दिया। कुछ दिन लगे थे आपरेशन होने को। आपरेशन कामयाब हुआ था। जिस दिन मुझे डाक्टर ने आईना देखने के लिए तो म...

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केसरिया बालम - 17 By Hansa Deep

केसरिया बालम डॉ. हंसा दीप 17 एक किनारे की नदी बाली का किसी से फोन पर झगड़ा हो रहा था और तैश में आकर वह मारपीट की धमकी दे रहा था। जाहिर था कि यह पैसों के अलावा तो कोई बात हो ही नहीं...

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आधी दुनिया का पूरा सच - 24 By Dr kavita Tyagi

आधी दुनिया का पूरा सच (उपन्यास) 24. प्रात:काल स्त्री का चिर-परिचित मृदु-मधुर स्वर सुनकर रानी की नींद टूटी, तो वह आश्चर्य से चौंक कर उठ बैठी - "आंटी, आप ! इतनी सुबह !" "फिर अंटी कहा...

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चाँद के पार एक चाबी - 3 By Avadhesh Preet

चांद के पार एक कहानी अवधेश प्रीत 3 वह हाई स्कूल, जहां से पिन्टू कुमार ने मैट्रिक किया था और अब वह उत्क्रमित होकर इंटर हो गया था, इसी नेशनल हाईवे पर था, जिसके चारों ओर बाउंड्री बन ग...

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गुलाबी बिंदु By Priyadarshan Parag

गुलाबी बिंदु प्रियदर्शन गाजियाबाद को दिल्ली से जोड़ने वाली और एनएच-24 से जुड़ने वाली वह सड़क सन्नाटे में डूबी थी। परितोष ऐसी ख़ाली सड़क देखता है तो गाड़ी की रफ़्तार सौ के क़रीब तक...

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पूर्ण-विराम से पहले....!!! - 7 By Pragati Gupta

पूर्ण-विराम से पहले....!!! 7. खैर प्रखर ने जैसे ही अपनी बातें बताना शुरू की.....शिखा प्रखर की बातों को सुनने लगी.. “तुम दोनों को प्रीति के बारे में बताऊँगा तो मुझे भी बहुत अच्छा लग...

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उर्वशी - 16 By Jyotsana Kapil

उर्वशी ज्योत्स्ना ‘ कपिल ‘ 16 दिल्ली एयरपोर्ट से कार में बैठकर वह लोग आगरा चल दिये। अब बस थोड़ी देर का साथ बाकी था। शिखर बहुत व्याकुल थे, पर कुछ कर नहीं सकते थे। उनके वश में होता तो...

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जननम - 13 By S Bhagyam Sharma

जननम अध्याय 13 शोक्कलिंगम को 'सेरीब्रेल हेमरेज' हो गया उसने निश्चय किया। इसके अलावा भी उनको अनेकों बीमारियां हैं। इससे वे छूट जाए ये बहुत मुश्किल की बात नजर आती है। नियंत्र...

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आब-दाना By Deepak sharma

आब-दाना “सरकार, चाय?” दरवाजे पर दस्तक के साथ आवाज आई| उषा ने मोबाइल की घड़ी पर नजर दौड़ाई| सुबह के पाँच बजे थे| “चाय, सरकार?” दरवाजे पर दोबारा दस्तक हुई| बिस्तर से उषा ने चिल्लाना चा...

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महामाया - 34 - अंतिम भाग By Sunil Chaturvedi

महामाया सुनील चतुर्वेदी अध्याय – चौंतीस रात लगभग साढ़े ग्यारह बजे का समय था। आश्रम में सन्नाटा था। कमरे में बाबाजी अपने आसन में बैठे थे और अनुराधा उनके सामने सिर झुकाये बैठी थी। ‘‘ब...

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नीली धारियों वाला लिफाफा By Hansa Deep

कहानी नीली धारियों वाला लिफाफा डॉ. हंसा दीप जब-जब आदमी ने किसी प्रश्न का उत्तर नहीं पाया, तब-तब उसे रात नींद नहीं आई। गहराती रात और बढ़ती उलझनों का सम्बंध भी उतना ही गहरा है जि...

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ग्रेजुएट बहू By Poonam Singh

"ग्रेजुएट बहू" हर रोज बहू अपने ससुर को घंटों बागवानी करते देखती तो उसे मन ही मन झुंझलाहट होती । 'इन बूढों को भी कोई काम नहीं होता ना जाने पूरा दिन इन पेड़ पौधों के बीच रहना...

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डेजा वू By suraj sharma

क्या है डेजा वू या हम इसे पुर्वनुभास भी कह सकते है पर ये जो भी है क्या है ये ? अगर आपने मेरी समानांतर ब्रह्माण्ड की कहानी पड़ी होगी तो उसमे मैंने एक बात कही थी, कभी कभी हमें किसी ज...

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मेरा स्वर्णिम बंगाल - 1 By Mallika Mukherjee

मेरा स्वर्णिम बंगाल संस्मरण (अतीत और इतिहास की अंतर्यात्रा) मल्लिका मुखर्जी(1) सादर समर्पित परम पूज्य माता-पिता श्रीमती रेखा भौमिक, श्री क्षितिशचंद्र भौमिक, नानी माँ आभारानी धर तथा...

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समानांतर By Antara Karvade

समानांतर “देखो शालू, ये मेरे कल के कार्यक्रम में खींचे थे।“ सुषमा ने खूब हुलास से बेटे के सामने अपना मोबाईल स्क्रीन रखा। अपेक्षा थी कि वो उछलकर मोबाईल हथिया लेगा, रेकॉर्डिंग सुनने...

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चार्ली के टिली हमसब By Amit Singh

#चार्ली_के_टिली_हमसब#क्योंकि_हम_सुपरमैन_नहीं_हो_सकते****************************कवि केदारनाथ सिंह ने कहा है कि “जाना” हिंदी की सबसे खतरनाक क्रिया है | लेकिन लोग जा रहे हैं | लोग ठी...

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सन्देशा - 1 By Vikash Dhyani

सन्देशा अरे सुनती हो कितना समय हो गया है उठ भी जाओ अब धूप सर पे चढने को है और महारानी अभी तक सो रही है। बगल के घर से - अम्मा आप ही ने चढ़ा रखा है सर पे वरना हम भी तो है घर का सारा क...

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सेंधा नमक - 4 By Sudha Trivedi

सेंधा नमक सुधा त्रिवेदी (4) माताजी के वापस चले जाने के दो-तीन दिन बाद की बात है। सुबह-ही-सुबह माताजी ने फोन करके साहिल को खूब चाभी घुमाई और वह सुबह से ही मुंह फुलाए बैठा रहा। घर का...

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नई सुबह. By Vandana Gupta

नई सुबह माधव का नाम साहित्य जगत का एक जाना -पहचाना नाम था.उसकी कलम से निकला हर शब्द पढने वाले को सोचने पर मजबूर कर देता था --------क्या श्रृंगार,क्या वियोग,क्या मानवता और क्या व्यं...

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धूप का गुलाब By Asha Pandey Author

धूप का गुलाब ‘शकुन बेटा ! दो कप चाय बना लाओ’ ड्राइंगरूम तथा लाबी को पार करती हुई सहाय साहब की आवाज किचन में काम कर रही उनकी इकलौती बहू शकुन के कानों में पड़ी | शकुन शाम के भोजन की त...

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मैं, मैसेज और तज़ीन - 6 - अंतिम भाग By Pradeep Shrivastava

मैं, मैसेज और तज़ीन - प्रदीप श्रीवास्तव भाग -6 मैंने पूछा ‘आप पहुंच गए ?’ तो वह बड़ा खुश होकर बोला ‘हां।’ उसे खुशी इस बात की भी थी कि वह एक और कदम मेरे करीब आ गया। मेरा नंबर अब उसके...

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उठते क्यों नहीं कासिम भाई? By Priyadarshan Parag

उठते क्यों नहीं कासिम भाई? प्रियदर्शन मुर्गे की तेज़ बांग से अकचका कर उठे कासिम भाई। कमबख़्त इस महानगर में कब से बोलने लगा मुर्गा। आदतन घड़ी पर नज़र पड़ी- अरे, वह भी सुबह के साढ़े...

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