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कभी लगता है, कोई बस गले लगा ले, और मैं रो लूँ… ज़ोर-ज़ोर से, बिना कुछ कहे, बिना कुछ समझाए थक गई हूँ अपने अंदर के शोर से, हर रोज़ खुद को संभालते-संभालते, मुस्कुराते-मुस्कुराते, और अपनी ही खामोशी से लड़ते-लड़ते। कभी कोई बस इतना कह दे— “आज मत संभलो, बस रो लो…” तो शायद ये दिल थोड़ा हल्का हो जाए, और आँखों में ठहरे आँसू आख़िरकार बह जाएँ। कभी-कभी खुद को भूलकर सुकून से रो सके। ❤️sarwat fatmi❤️
ख़ामोशियों का शहर आज दिल कुछ ज़्यादा ही उदास है, आँखें बिना वजह नम हैं… कहने को बहुत कुछ है, मगर लफ़्ज़ जैसे कहीं थम गए हैं। समझ नहीं आता, किस बात से शुरू करूँ, किस दर्द को पहले कहूँ… इसलिए शायद ख़ामोशी को ही अपना हमराज़ बना लिया है। रात आँखों में गुज़र जाती है, और सुबह फिर चेहरे पर मुस्कान होती है… लोग पूछते हैं— “सब ठीक है?” और हम हमेशा की तरह कहते हैं— “हाँ… बिल्कुल ठीक हूँ।” बस दिल जानता है, उस मुस्कान के पीछे कितनी अनकही बातें छुपी हैं। ❤️sarwat fatmi❤️
मन उदास सा है😔 मन उदास सा है आज, जाने क्यों कुछ खोया-खोया सा लगता है, दिल बार-बार खुद से पूछता है— क्या मुझसे कुछ गलत तो नहीं हुआ? हर बात को फिर से याद करती हूँ, हर लफ़्ज़ को मन में दोहराती हूँ, कहीं मेरी कोई बात किसी को चुभ तो नहीं गई… बस इसी सोच में खुद को उलझाती हूँ। काश कोई इतना कह दे— “नहीं, तुमसे कोई गलती नहीं हुई, बस आज मन थोड़ा थका हुआ है।” क्योंकि कभी-कभी बिना किसी वजह के भी दिल भारी हो जाता है… और इंसान को बस थोड़ा सा अपनापन चाहिए होता है। ❤️ ❤️sarwat fatmi❤️
कभी बातों-बातों में कोई अपना सा लगने लगता है, अनजाना होकर भी दिल के करीब रहने लगता है। पता ही नहीं चलता कब समझने लगे एक-दूजे को, बस हर बात में एक सुकून सा मिलने लगता है। शायद रिश्तों की खूबसूरती यही तो होती है— बिना कहे भी कोई बहुत कुछ समझने लगता है। - SARWAT FATMI
एक ही पता, एक मीठा इत्तिफ़ाक़ एक ही पता था, रास्ते भी वही, एक लड़का था, एक लड़की थी कहीं। मुलाक़ातें कम थीं, मगर यादें हज़ार, छोटी-सी वो दुनिया, लगती थी ख़ास। इत्तिफ़ाक़ था या किस्मत की बात, एक ही पते ने जोड़ दिए जज़्बात। वक़्त गुज़र गया, रास्ते बदल गए, पर वो मीठी यादें आज भी साथ रह गए। ❤️ - SARWAT FATMI
माँ… चोट तो आज भी वही लगती है चोट लगी तो सबसे पहले तुम्हारा ही ख़याल आया, माँ। याद आया, कैसे तुम घबराकर कहती थीं, “अरे… इतनी ज़ोर से चोट लग गई?” फिर बिना कुछ कहे रसोई की ओर भाग जाती थीं। हल्दी वाला दूध बनाती थीं, गर्म पानी से सिकाई करती थीं, और अपने प्यार भरे हाथों से हर दर्द को धीरे-धीरे चुरा लेती थीं। आज भी चोट लगी है, माँ… फ़र्क बस इतना है कि हल्दी वाला दूध मैं ख़ुद बना रही हूँ, गर्म पानी की सिकाई भी ख़ुद ही कर रही हूँ। लेकिन तुम्हारे हाथों का वो स्पर्श, तुम्हारी दुआओँ की गर्माहट, तुम्हारी घबराहट में छिपा प्यार— वो कहीं नहीं मिलता। दर्द तो शायद वक़्त के साथ कम हो जाए, मगर तुम्हारी कमी… हर चोट के साथ और गहरी हो जाती है। काश, आज तुम मेरे पास होतीं, माँ। तो शायद ये चोट इतनी नहीं चुभती। अब हर ज़ख्म बस यही कहता है— दवा तो मिल जाती है, पर माँ का स्पर्श कभी नहीं मिलता। तुम्हारी याद ही अब मेरी मरहम है, माँ… और तुम्हारा एहसास ही हर दर्द में मुझे संभाल लेता है। 🥹Miss u Ammi🥹💕love u alot💕 ❤️sarwat Fatmi❤️
माँ ❤️ आज एक बात समझ आई… माँ एक शब्द नहीं, सिर्फ एक रिश्ता नहीं, वह हमारे लिए पूरी दुनिया है… बल्कि यूँ कहें, हमारी दूसरी दुनिया है। वह हमें सिर्फ जन्म नहीं देती, हर रोज खुद को मिटाकर हमें बनाती है। उसकी नींद अधूरी रहती है, पर उसकी दुआएँ कभी अधूरी नहीं होतीं। माँ हमारी पहली आवाज, पहला सहारा और आख़िरी उम्मीद होती है। जब दुनिया हम पर उंगलियाँ उठाती है, तो माँ ढाल बनकर खड़ी हो जाती है। जब हर रिश्ता साथ छोड़ देता है, तो माँ खामोशी से हमारा हाथ थाम लेती है। वह टूटती तो है, पर बिखरती नहीं, रोती भी है, पर अपने आँसू छुपा लेती है। माँ कोई शब्द नहीं… वह हमारी पूरी कायनात है। खुद अधूरी रहकर भी हमें पूरा कर देती है। ❤️ Love you Maa ❤️ 🥰 Sarwat Fatmi 🥰
रिश्ते रिस्तो में एक दूसरे की समझदारी ज्यादा जरूरी होती है किसी भी रिश्ते में ये सवाल अकसर पूछ लेना चाहिए "क्या हुआ,सब ठीक है ना, कोई परेशानी तो नहीं " ताकि कभी खुद में भी सवाल ना खड़ा हो के काश.... पूछ लेते" क्या हुआ था "??? क्यों की खामोशी अचानक नहीं आती धीरे धीरे आपके रिश्ते में पन्मति है इसलिए जो बातें हो वह पूछ लो कल का क्या है???... अक्सर कोई आपका है और वह पूछ रहा है "क्या हुआ सब ठीक है कोई दिक्कत तो नहीं " तो आप बहुत किस्मत वाले हो वरना कुछ रिश्ते में ऐसा होता नहीं और अफसोस ही रह जाता है की क्या हुआ था हमें पता ही नहीं चला 🥰Sarwat Fatmi🥰
PTM जब हम सब मायें स्कूल जाते हैं रिपोर्ट कार्ड लेने तो सिर्फ हम रिपोर्ट कार्ड नहीं लेते हम टीचर से सिर्फ पढ़ाई की बातें नहीं सुनते हम तो अपनी उम्मीदों का हाल सुनने जाते हैं कभी-कभी अपने बच्चों की तारीफ सुनकर आंखें नम हो जाती हैं तो कभी चुपचाप कुछ सोचते हुए स्कूल से लौटते है और दिल ही दिल में कहते है कोई नहीं, फिर से मैं कोशिश करूंगी इस बार हार गई अब नहीं हारूंगी फिर हम अपने बच्चों का हाथ कसकर थाम लेते हैं उसे वापस से तैयार करने के लिए और अपनी उम्मीदों का हाल सुनने के लिए हम मायें है हारना कहां सीखा है खुद को हिम्मत देकर,चेहरे पर मुस्कान रख,फिर सुबह हिम्मत के साथ खड़े हो जाते है 🥰sarwat Fatmi🥰
कुछ अनसुलझी पहेलियाँ उन्होंने कभी नहीं रोका न टोका किसी राह पर पर क्यों? एक अदृश्य डोर खिंची रही मैं खुल कर कभी चल न पाई एक चिरस्थायी भय मन के किसी कोने में दुबका रहा चीजें खरीदने की छूट थी पसंद चुनने की आज़ादी भी थी पर बाज़ार की भीड़ में मेरी उँगलियाँ जम सी जाती थीं पसंद मेरी ठहर जाती थी हर जगह मुझे आगे किया गया मेरी छोटी से छोटी बात पर पलकों का बिछौना बिछाया गया बच्चों जैसी हर ज़िद पूरी हुई फिर भी क्यों? खुशी का वह रंग दिल तक पहुँच ही नहीं पाया वे कहते थे अक्सर तुम्हारा मन जो चाहे करो तुम बढ़ो आगे मैं तुम्हारी परछाई बनकर साथ हूँ तुम्हें कभी गिरने न दूँगा बस जी लो अपनी ज़िंदगी खुलकर वे कहते रहे शब्दों के झरने बहाते रहे पर मेरी उड़ान धीमी ही रही उफ्फ ये कैसी उलझन है कितना सोचा मैंने खुद के बारे में कितनी रातें जाग कर बिताईं फिर एक धीमी सी आवाज़ आई रोकने वाला कोई नहीं था बाहर से तो कोई बंधन न था शायद इजाज़त मैंने खुद को ही कभी दी नहीं यह कैद बाहर की नहीं थी यह दीवारें मेरे भीतर थीं जहाँ मेरी मर्ज़ी मेरी ही आवाज़ से दब गई अनकही अनसुनी सी बस एक सवाल बनकर रह गई यह मौन स्वीकृति किस डर की देन थी मैं आज तक समझ न पाई। 🥰sarwat fatmi 🥰
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