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नही कहुँगी कुछ अब! आँखों के निकलते आँसुओं अन्तर उठती पीर से केवल सुनुँगी बस सुनुगी निशब्द बिना व्यवहारिक परिवर्तन के,,,,,,,, - Ruchi Dixit
मैं ही सही हूँ मैं यह नहीं मानती मैं मानती हूँ मैं कुछ नहीं जानती पहली सीढ़ी रास्ता नहीं बनाता यह सोच जी में नहीं आता जब जब पग धरे ही न उस पर.... प्रयास उस पर चढ़कर आगे बढ़ने का है... हाँ और भी रास्ते हैं मंजिल तक पहुंचने के मगर जो मेरे आगे है उस पर पहले माथ धरना है,, - Ruchi Dixit
सच था या सब छला गया वक्त का पहिया चला गया बदली न दशा बदली बदली लेकिन ... सूखा सूखा सब सहा गया ... भ्रम बादल का या भ्रम बदली बदली न अन्तर दशा टली अनन्त कोश में सब्र रचा है बाकी या बचा गया,,,- Ruchi Dixit
.. - Ruchi Dixit
लौटा देना उन्हें वह सबकुछ जिन्होंने खोया है , देने के अफसोस तलेें प्रेम भला कब पनपा है, लेने के बोझ से प्रेम भला जीवित कब बचा है?? - Ruchi Dixit
... - Ruchi Dixit
...... - Ruchi Dixit
परा से प्रार्थना हे ईश्वर पार ब्रह्म परमेश्वर जगजननी जगदम्बा इस संसार में कोई किसी से घृणा न करें, कोई किसी केे अधिकारों का हनन न करे , किसी में कोई आभाव न हो ,सब आनन्द से परिपूर्ण हो , सब प्रेम से परिपूर्ण हो ,सारा जगत सुगंध से भरा सबकी चेतना जागृत हो सभी आपकी भक्तिविलास से परिपूर्ण हो सब द्वैत को पोषित किन्तु चेतनता एकाग्र और जाग्रत हो - Ruchi Dixit
..... - Ruchi Dixit
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