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Ruchi Dixit

Ruchi Dixit Matrubharti Verified

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अपनेपन के गुच्छे
मौलिकता,
वादों के ढर्रे
यह सब
समय की
रेत पर
फिसल
जाती है
बचती है
कुछ
शिकायतें
सूनापन
इन सबके बीच एक
किवाड़ बन्द एक
कोना जहां हल्की धूप उम्मीद की फिर
भी पहुंच रही है कहीं से बचते बचाते
- Ruchi Dixit

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बेवजह बाहर थी नजर शायद..
बैठ न पाया मन रहा घूमता गुजरे
वक्त से शिकायत की मोड़कर भीतर
दृष्टि की न गई....
- Ruchi Dixit

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...

.....

कभी आँखो पर गौर किया है यदि भगवान के दर्शन का फल मिलता है तो क्या अनाचार देखने का नहीं मिलता होगा???

...
- Ruchi Dixit

जात -पात का अर्थ उसके मूल को
समझना जरुरी है
बिना समझे , दीर्घ विश्लेषण
निष्कर्ष उचित नहीं ।
इसका अर्थ यह नहीं कि मैं
जात -पात ,धर्म विभाजन
की समर्थक हूँ ।
मेरा एक अपना अलग
दृष्टिकोण है जहाँ मुझे इसकी
आवश्यकता लगती है क्योंकि
यह कोई आज की व्यवस्था
नहीं बल्कि व्यवस्था की अनुकूलता है। Ruchi_Dixit

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जात -पात को बुरा बताने वाले
लाभ लेने के लिए सर्टिफिकेट बनवाते हैं ।
विडम्बना :उनके ही मन की किया जाये तो भी हाय तौबा मचातेे हैं।
- Ruchi Dixit

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...

रहे निर्दोष खुद को बचाकर चलने वाले
जिये जोे दिल -भावना से पैरवी करने वाले
दूसरों की गलती को सर माथे ले खुद को कोसते रहे उम्र भर...
- Ruchi Dixit

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