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Ruchi Dixit

Ruchi Dixit Matrubharti Verified

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यदि मेरी ऐसी स्थिति बने कि मेरे पास
एक रूपया न हो
सर छिपाने के यदि छत भी न बचे
उस अवस्था में भी गरीब शब्द मेरे
लिए गाली के समान है इसलिए
नहीं कि यह मेरा अहंकार है
बल्कि इसलिए कि मेरे लिए धन
के मायने कुछ और है...
- Ruchi Dixit

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मातृभारती कई दिनों से लाग आऊट नहीं हो रहा आपके साथ भी क्या यही समस्या आ रही है??

तय किया है दूर तक देखना
अब कम करना है...
- Ruchi Dixit

जिसे खोना होता है वह
खोने के लिए ही आता है जो
हिस्से का है वह
आपमें रह जाता है ।
किसी का सामर्थ्य नहीं कोई
किसी से किसी का छीन ले
जो नहीं मिला वह आपका
नहीं था ।
- Ruchi Dixit

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सैंकड़ों प्रभावशाली नंबर
किन्तु कार्य हर बार सामान्य साधारण
अपरिचित व्यक्ति द्वारा हो
फिर भी फोन में कचरे की
तरह नंबर पड़े हो और
आप उसे साफ न कर पा रहे हों
इसे ही आस कहते हैं ।
- Ruchi Dixit

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अपने विश्वास पर उसे विश्वास न रहा
अपने चुनाव पर सवाल रहा
अपनी पसंद का मलाल रहा
उत्तर रहा न सवाल रहा ।
- Ruchi Dixit

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स्त्री संपूर्ण अस्तित्व है
शान्त मुद्रा में पुरुष है
यही सृष्टि संचालन है
यही जीवन जीवन का पालन है
उद्गम और अन्त है ।
- Ruchi Dixit

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एक लाख पुरुषों के बीच
खड़ी होकर भी बिना तप
साधन साधना के भावना प्रधान
स्त्री केवल देह से नहीं मन
और आत्मा से भी शुद्ध होती है
वहीं एक पुरूष नित्य
घंटों तप साधना ,
भोजन साधना और नाना
प्रकार के साधन के पश्चात
स्त्री से भयभीत रहा है
भाड़- मास से चिपकी चमड़ी
के अन्तर से
उसकी वृत्ति नहीं हटती,,,
- Ruchi Dixit

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“अभिनय”
चिन्ताये हैं मैं चिंतित हूँ !
हाँ अभिनय मैं करती हूँ
लड़खड़ाती जबान है मिट्टी का मकान है
हाँ शायद मैं डरती हूँ
पाने की अभिलाषा सी
खोने की निराशा‌ सी
हाँ मैं पल -पल मरती हूँ
हाँ अभिनय करती हूँ ।,,,,,
- Ruchi Dixit

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है वो मुझमें
मुझ से मैं तक ...
- Ruchi Dixit