The Download Link has been successfully sent to your Mobile Number. Please Download the App.
Continue log in with
By clicking Log In, you agree to Matrubharti "Terms of Use" and "Privacy Policy"
Verification
Download App
Get a link to download app
मेरी बीझड़ी मोहब्बत से एक ही सवाल करती हूं - " क्या कोई हैं जो मुझे चुन पाएगा🥲" क्योंकि तुझसे बेहतर मुझे कौन जान पाएगा - rakhi
लंबे दर्द से ज्यादा , कुछ पल की झूठी परवाह ज्यादा पीड़ा देती है - rakhi
कुछ डोर दूर से बांधी होती है आज भी पारा उतरता देख उसकी तबियत की फिक्र होती है । - rakhi
किस्से अजीब है इस मोहब्बत की रुसवाई के, जो आते है समझ केवल अपनी जुदाई में - rakhi
जिंदगी में बहुत से लोग आएंगे अच्छे बुरे और कई ऐसे जो जिंदगी का हिस्सा होंगे....कुछ भी कर लेना लेकिन अपनी खुशी का कारण किसी इंसान का मत बनने देना क्योंकि जहां से अपने किसी इंसान में वो जिम्मेदारी समझली आगे कई दुखों का कारण वही इंसान बनेगा । क्योंकि कोई कितना भी कर ले किसी और को हमेशा खुश नहीं रख सकता । इसलिए अपनी खुशी खुद में खुद के काम में ...या भलाई में ढूंढिए इंसान में नहीं
kabhi kabhi जिंदगी ruk सी जाती है बार बार पिछली यादों में ले जाती है और वक्त इतना गहरा होता है कि उसका पार दिखाई नहीं देता.....तब बस एक ही सहारा बचता है.....वो है हम खुद....क्योंकि शायद हमारा कुछ हिस्सा अब तक उस वक्त में ही है ...जरूरत है उसे सिखाने की ...उस हिस्से को उलझा कर रखने की ...किसी हुनर में ...किसी खोज में या फिर किसी अपने की बातों में ...मुस्कुराने की वजह शायद न मिलेगी पर.... काम के साथ बिताया हुआ वक्त याद दिलाएगा k tum अकेले अधूरे नहीं हो
जिंदगी इस बार कुछ खास लिखना पूरी कहानी का सबाब लिखना थोड़ी खुदगर्जी मेरे हक में बचा के रखना मेरे नाम के आगे कुछ नाम रखना बदलना ना उसे ना मुझे बदलने देना इंतजार कितना ही लंबा क्यों ना हो उसे सिर्फ एक बार लिखना जो मैं कमजोर लगूं तो थोड़ा वक्त की दौड़ लिखना
एक आसरा ढंग रही हूं दिल का ठिकाना ढूंढ रही हूं यूं तो काफ़ी हु खुद में पर खुद का हिस्सा ढूंढ रही हूं.... जो ना जी पाया अब तक जो ना कह पाई अब तक जो ना देख पाई अब तक वो वक्त,कहानी वो नजारा ढूंढ रही हूं ना हु तन्हा फिर भी एक साथ ढूंढ रही हु जो समझा लिया है दिल को जो बता दिया है दिल को वो अधूरा ख्वाब का ख्याल ढूंढ रही हु ना हूं काबिल फिर भी दिल का सितारा ढूंढ रही हूं ना हूं निराश ना खुश ना चाह ना दबिश की मौत मर रही हु ना कारण है जीने का ना अंत का तकाजा कर रही हु हूं सफर में फिर भी सफर ढूंढ रही हूं हु रास्ते पर फिर भी मोड खोज रही हूं
Ishq होने k liye majid jaruri h dil हारना... vrna khiladi ham bhi kachhe na थे
ए जिंदगी अपना लिया तुझे जैसी तू है थोड़ी तीखी थोड़ी खाली थोड़ी नमकीन जो है..... मैं हार गई तेरी बाहों में तू जहां ले चल.. अब ना लडूंगी कि कुछ खास कर तू जैसी जितनी है उतनी ही सही मिला ना मन का लेकिन जो मिला क्या वो बेहतर नहीं तू जो वजह देगी मुस्कुरा दूंगी तू जो रुला देगी तो भीगी आंखों से तेरी बाहों में सो जाऊंगी अगर नाराज रही तो मैं भी हंस के गुजर जाऊंगी तुझे मना कर ही दम लूंगी ए जिंदगी अपना लिया तुझे जैसी तू है ना एक लफ्ज़ कहूंगी तेरी बदगुमानी में ना तुझसे शिकायत करूंगी तेरी मनमानी में ना हिसाब करूंगी कम ज्यादा का बस गले लगा लूंगी भले हो दिल आधा सा ना साथ छोडूंगी तेरा ना तुझे छोड़ने दूंगी ए जिंदगी अपना लिया तुझे जैसी तू है जो कभी आई कभी तुझसे उदासी तो देख लूंगी तरसती आंखे अपनो के लिए तो देख लूंगी सूखे चेहरे किसी प्यार के लिए तो देख लूंगी सिकुड़े पेट भूख की तलाश में तो देख लूंगी नंगे पैर अपनों की राहत में घूमते तो देख लूंगी ठंड ठिठुरन को तो देख लूंगी गर्मी की तपन को फिर देख लूंगी उस असहाय की पुकार को फिर देख लूंगी उस तड़पते बच्चे की मां जो लिए गोद में दुआएं लिए बैठी है जिंदगी से कुछ दिन मांग रही है जो हर दिन जिन रही है इंतेज़ार कर रही है उस मुस्कान का जब सब ठीक हो जाएगा उसका बच्चा भी स्वस्थ होकर खेल पाएगा ये देख के मेरा दिल भी भर आएगा ए जिदंगी अपना लिया तुझे जैसी तू है
Copyright © 2026, Matrubharti Technologies Pvt. Ltd. All Rights Reserved.
Please enable javascript on your browser