Quotes by rakhi in Bitesapp read free

rakhi

rakhi

@rakhijain.772050
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kash kisi din nind khule or sab achha ho jaye....
ya fir ek rat esi aye ki fir subha hi na ho
*kash google map bta pata zindagi se hare log kaha jate hain..*

आज भी इश्वर साथ होते है
अगर कोई है गले लगने को
अगर कोई सब कुछ कहने को
अगर कोई है बेबाकी से आंसू बहने को
तो समझो इश्वर साथ है
अगर कोई है मनाने को
अगर कोई साथ जाने को
अगर कोई है दिल बहलाने को
अगर कोई हस कर आस बढाने को
तो समझो ईश्वर साथ है
अगर दिल गहरा हो
डर का पहरा हो
दर्द का पहाड़ हो
फिर भी एक हाथ हो थामने को
तो समझो ईश्वर साथ है

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मेरी बीझड़ी मोहब्बत से एक ही सवाल करती हूं - " क्या कोई हैं जो मुझे चुन पाएगा🥲"
क्योंकि तुझसे बेहतर मुझे कौन जान पाएगा
- rakhi

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लंबे दर्द से ज्यादा , कुछ पल की झूठी परवाह ज्यादा पीड़ा देती है
- rakhi

कुछ डोर दूर से बांधी होती है
आज भी पारा उतरता देख
उसकी तबियत की फिक्र होती है ।
- rakhi

किस्से अजीब है इस मोहब्बत की रुसवाई के,
जो आते है समझ केवल अपनी जुदाई में
- rakhi

जिंदगी में बहुत से लोग आएंगे अच्छे बुरे और कई ऐसे जो जिंदगी का हिस्सा होंगे....कुछ भी कर लेना लेकिन अपनी खुशी का कारण किसी इंसान का मत बनने देना क्योंकि जहां से अपने किसी इंसान में वो जिम्मेदारी समझली आगे कई दुखों का कारण वही इंसान बनेगा । क्योंकि कोई कितना भी कर ले किसी और को हमेशा खुश नहीं रख सकता । इसलिए अपनी खुशी खुद में खुद के काम में ...या भलाई में ढूंढिए इंसान में नहीं

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kabhi kabhi जिंदगी ruk सी जाती है बार बार पिछली यादों में ले जाती है और वक्त इतना गहरा होता है कि उसका पार दिखाई नहीं देता.....तब बस एक ही सहारा बचता है.....वो है हम खुद....क्योंकि शायद हमारा कुछ हिस्सा अब तक उस वक्त में ही है ...जरूरत है उसे सिखाने की ...उस हिस्से को उलझा कर रखने की ...किसी हुनर में ...किसी खोज में या फिर किसी अपने की बातों में ...मुस्कुराने की वजह शायद न मिलेगी पर.... काम के साथ बिताया हुआ वक्त याद दिलाएगा k tum अकेले अधूरे नहीं हो

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जिंदगी इस बार कुछ खास लिखना
पूरी कहानी का सबाब लिखना
थोड़ी खुदगर्जी मेरे हक में बचा के रखना
मेरे नाम के आगे कुछ नाम रखना
बदलना ना उसे ना मुझे बदलने देना
इंतजार कितना ही लंबा क्यों ना हो
उसे सिर्फ एक बार लिखना
जो मैं कमजोर लगूं तो
थोड़ा वक्त की दौड़ लिखना

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एक आसरा ढंग रही हूं
दिल का ठिकाना ढूंढ रही हूं
यूं तो काफ़ी हु खुद में
पर खुद का हिस्सा ढूंढ रही हूं....

जो ना जी पाया अब तक
जो ना कह पाई अब तक
जो ना देख पाई अब तक
वो वक्त,कहानी वो नजारा
ढूंढ रही हूं
ना हु तन्हा फिर भी एक साथ ढूंढ रही हु

जो समझा लिया है दिल को
जो बता दिया है दिल को
वो अधूरा ख्वाब का
ख्याल ढूंढ रही हु
ना हूं काबिल फिर भी दिल का सितारा ढूंढ रही हूं

ना हूं निराश ना खुश
ना चाह ना दबिश की मौत मर रही हु
ना कारण है जीने का
ना अंत का तकाजा कर रही हु
हूं सफर में फिर भी सफर ढूंढ रही हूं
हु रास्ते पर फिर भी मोड खोज रही हूं

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