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Nisha ankahi

Nisha ankahi

@na015855
(478)

मांग लूँ प्यार… इतनी भी फकीरी नहीं,
और छोड़ दूँ खुद को… इतनी भी लाचारी नहीं,
जो मेरा है वो खुद चलकर आएगा,
मुझे किसी के पीछे भागने की बीमारी नहीं…
- Nisha ankahi

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खुद्दारी रखकर ही इश्क़ किया करो,
वरना मोहब्बत अक्सर भीख बन जाती है…
जो बिना कहे तुम्हें समझ न पाए,
उसके सामने हर बात चीख बन जाती है…
- Nisha ankahi

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महादेव…
नाम नहीं, एक शांति का विस्तार हैं,
जिनके मौन में ही सृष्टि का सार है।
- Nisha ankahi

ना आडंबर, ना कोई अभिमान,
राख में छिपा उनका सारा सम्मान।
जो सिर झुका दे सच्चे भाव से,
महादेव उसके हर दुःख के निदान।
- Nisha ankahi

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मैंने सीखा है
हर रोज़ थोड़ी सी
ख़ुशी बचा लेना,
बुरे दिनों के लिए।
- Nisha ankahi

कुछ लोग शोर छोड़ते हैं,
कुछ लोग शो छोड़ते हैं,
और कुछ…
पूरे देश को चुप करा कर चले जाते हैं।
समय किसी से ताली नहीं माँगता,
बस पर्दा गिरा देता है
बिना एनकोर, बिना सवाल।
- Nisha ankahi

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नुक़सान सिर्फ़ चीज़ों का नहीं होता,
कुछ हादसे आत्मा से भी कुछ छीन ले जाते हैं।
- Nisha ankahi

पानी बहता जाए, घबराए नहीं,
नदी के पार भी उम्मीदें सही।
- Nisha ankahi

इतने सलीक़े से उसे अलग किया गया,
कि कहा जा सके वो कभी
उसका हिस्सा थी ही नहीं।
- Nisha ankahi

लगाव (औरत की ज़बान में)

लगाव
औरत के हिस्से
अक्सर विरासत की तरह आता है
ना माँगने की आज़ादी,
ना छोड़ने की छूट।

हमने जिसे प्रेम कहा,
वह अक्सर
समझौते की एक लम्बी परछाईं था
जहाँ चाहत
धीरे-धीरे
कर्तव्य में बदल दी गई।

लगाव ने
मुझसे मेरा समय लिया,
मेरी देह की थकान,
मेरे मौन की मेहनत
और बदले में
मुझे समझदार कहलाने का तमगा दिया।

जब मैंने सवाल किया,
कहा गया
“ज़्यादा मत सोचो,
तुम जुड़ी हुई हो।”
जुड़ाव यहाँ
एक खूबसूरत शब्द था
मेरे हक़ काटने का।

मुझे सिखाया गया
कि लगाव त्याग है,
पर किसी ने नहीं बताया
कि त्याग की क़ीमत
हमेशा औरत ही क्यों चुकाती है।

आज समझ आता है
लगाव अगर
मेरी आवाज़ दबा दे,
मेरी आकांक्षा छोटा कर दे,
मेरी पहचान को
किसी और के नाम पर टिका दे
तो वह प्रेम नहीं,
एक सलीकेदार क़ैद है।

मैं अब भी जुड़ सकती हूँ,
पर झुककर नहीं।
मैं लगाव चुनूँगी
वहाँ,
जहाँ मुझे
पूरा इंसान रहने दिया जाए।
@निशा अनकही

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