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Maan Singh Suthar

Maan Singh Suthar

@m.s.suthar


जौहर…..!

​जब जौहर सजे उस दिन अग्नि ने भी
नतमस्तक हो झर-झर आँसू बहाए होंगे,
जब जौहर के अंगारे वीरांगनाओं ने
सज सोलह श्रृंगार के जैसे सजाए होंगे...!

​उस दिन अंबर भी काँपा होगा
धरा भी कहाँ मौन रही, थरथराई होगी,
जब सज-धज ले कटार केसरिया बाने में
वीरांगनाओं ने जौहर के गीत गाए होंगे...!

​वो क्षत्राणियाँ कायर कैसे भला,
जिन्होंने सांगा, प्रताप जैसे हज़ारों वीर जने!
कैसा धीर रहा होगा जब इन क्षत्राणियों ने
खुद अपने शीश काट थाल सजाए होंगे...!

​इस मरुधरा की बेटियाँ आन हैं,
कोई वहशी गिद्धों की खुराक नहीं,
डरी नहीं वो, झुकी नहीं, वो वीर थीं,
छूने को मुगलों ने लाख जतन लगाए होंगे...!

​छू न पाए वो वहशी दरिंदे
मृत्यु के बाद उन पवित्र देहों को,
जब-जब जौहर सजे तब-तब
अग्नि ने भी जयकारे लगाए होंगे...!

​कोई कुल-कलंकिनी,
कुल-द्रोही, धर्म-द्रोही क्या जाने,
उसके कुल और वंश भी
इसी जौहर ने कभी बचाए होंगे...!

​जो स्वयं का मोल न समझे,
जो धर्म का मर्म न जान सके,
वो अब क्या जाने, क्या पहचाने
जब जौहर ने तीनों लोक हिलाए होंगे...!

​एम.एस. ✍️

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प्रेम खोने का नाम है, दोनों हाथों से लुटाया हमने,
खुशी से अपने ख़्वाबों का आशियाना ख़ुद जलाया हमने...!
उसके दिल का चिराग रोशन रहे सदा,
उम्र भर बाती बन, ख़ुद को जलाया हमने...!
एम.एस.

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युद्ध और बुद्ध....!

युद्ध हुए तो बुद्ध हुए
तीर तलवार सब बंद हुए...!
देख लाशों के ढेरों को
जब अशोक महान क्षुब्ध हुए...!
एक लहर उठी फिर शांति की
बुद्धम शरणम् के उद्घोष हुए...!
ना युद्ध न तीर तलवार रही
वीरों ने तब हथियार त्याग दिए...!
टिक न सकी ये शांति
बाहरी आक्रमणों के जब आघात हुए...!
वीर विहिन धरा भारत की
धीरे धीरे फिर सब गुलाम हुए...!
वीरों को फिर भान हुआ
युद्ध बिन शांति कहाँ
लेकर फिर से हथियार तैयार हुए....!
दुष्टों को मार भगाया भारत भूमि से
चंद्रगुप्त मौर्य जैसे राजा महान हुए...!
शांति स्थिरता तभी कायम रहती है
जब जब ताकत से स्वाभिमान कायम हुए...!
बुद्ध भी जरूरी युद्ध भी जरूरी
बिन ज्ञान बिन शौर्य के मिट्टी बहुत अभिमान हुए...!

मानसिंह सुथार ©️®️

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