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आशिकोकी महफिल्मे हमने अकेले पन को चुनाहे सूरज की रोशनिमे हमने अंधेरेकों चुना हे गुजर जाएंगी संसारकीये घड़ी जिंदगी और मौत के बीच हमने दोस्तोको चुनने - Kartik Kule
आशिकोकी बाते सुनेमेही अच्छी लगती हे लोगोंकी यादें फिल्मोमेही अच्छी लगती हे चांद को लानेकी बाते तो हर कोई करता हे सुकून के पल जिनके लिए दोस्तोकी मेंफिलेही अच्छी लगती है - Kartik Kule
लपवता दुःख चेहऱ्याच्या मागे सहजच असे लपत नाही मांडताना कविता जोडुनी अक्षर सहजच शब्द असे जुळून येत नाही मनातल्या भावना मात्र शब्दात लपउनी सारे दुःख कवितेत उतरले तरीही डोळ्यांना ते जगाला दाखउसे वाटले काहींनी समजून घेतलं काहीना समजून न घेऊ स वाटल आयुष्याचा पुस्तकाच आयुष तिथे हरपल शोधता माणसे आपुलीच हरवलो मी नात्यांच्या गर्दीत वेळ पडता माणसांची आपलेच लपले गर्दीत - Kartik Kule - Kartik Kule
की संवर जाये वो जिंदगी जो तेरे बिना अधुरी ही वक्त वक्त पे जो मिले ना वो यादे भी अधुरी है की ख्वाईशे भी तेरी यादोमे मुजसे समजोता कारण चाहती हे और तुम कहती हो की मेरे बिना तुम्हारी यादे भी पुरी हे - Kartik Kule
सावलो में आपसे हम जबाब क्या मांगेंगे जख्म एसा दिया ही जो दिखा भी ना पायेंगे आपके लफजोकी वो शिहादते हमे एसा घाव दे गई अगर चहेभी दिल हमार आपको फिरभी नजरे अपनेअप फेर लेंगी - Kartik Kule
की समाज न पाए उन पालकों जो वक्त के सात गुजर गए हाथो की लकीरों के सात आग में जलकर बिखर गए ढूंढने गए थे खुशियोका बहाना पर सात न दिया उन गलियोंने आजमाएंगे उन लोगोंको जो जानाजेके पास आकर रोएंगे - Kartik Kule
की तुम हवा बनके आना में सफर में आजमाऊंगा तुम्हे दर्द भरी महफ़िलोमे महसूस कर लूंगा तुम्हे की मुझे जिंदा रखने के कम तो आवोगी जरूरत पड़ने पर याद रखूंगा तुम्हे कमसे कम जलनेके काम तो आओगी तुम - Kartik Kule
की जनाजे तो बोहोत बिछेंगे पार वतन का कोई कर्ज न होगा🔥सुरू किया तेरे नामसे जो सफर यादोमे गुंजते तेरा ही नाम होगा की करते तेरी हिफाजत की तयारी दोस्तोकी मेहफीले तो बानाही लूंगा खुदके पेरोपर वापस ना सही तो तिरंगेमे लिपटकर दोस्तोके कंधेपर में आउंगा जरूर - Kartik Kule
लिहिताना कविता मी फक्त पान भरत होतो थोड्या वेळाने समजल की मी भावना लपवत होतो अडकलेल्या शब्दांचे मी अर्थ समजत होतो लिहिलेल्या कवितेत मी माझी आठवण शोधत होतो - Kartik Kule
की एक तस्वीर को मैने इस तरा पढ़ना चाहा हे लोगोंको दिखाए बिना आखो मे छुपाना चाहा हे हातोमें तो हर वक्त लेकर घूमता था पर लोगोंको में पागल लगताथा क्या करे जनाब हमने उस तस्वीर को तो उसी कागज से चुराया था - Kartik Kule
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