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Jay Vora

Jay Vora

@jayvora9963


अब की बार बात करले बैठ कर
कूद जा भंवर में,खुदी को खोकर

मत डर , भरोसा कर अपनी लेखनी पर
तो कहानी मोड़ दे खुद को खोलकर

कितने भी किनारों पर रेत के घर बना ले
समय की लहर चूर कर देगी उसे तोड़कर

संभलने का आखिरी मौका दे दे खुद को
टुकड़े टुकड़े होजा अहम का आइना तोड़कर

कल था और कल भी होगा ,मत चुक पल को
तू भी खिलेगा, बाहर आजा ज़मी फाड़कर

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जो होना हे और जो करने की ठानी है आपने
काल इसको समय की तराजू में तोलता है।

टोकता नहीं ,रोकता नहीं वो चारागर आपको
बस कहता है खुद के भगवान तो आप ही हो।

कोई समझता है और कोई समझाता हे आपको
बगल वाला सिर्फ चुनिंदा बनाता हैं आपको ।

दो होंठ,दो हाथ,दो आंख का जमाना हे दोस्त
दिल तो एक ही है,यही जान ना है आपको।

कोशिश मत करो उन चार लोगों को मनाने की
जो आखिर में सिर्फ दफनाने आएंगे आपको।

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તું ફરીયાદ કર તો જરૂર હું સાંભળીશ તને..
ફરક એટલો કે ફક્ત સાંભળીશ જ હવે.

વાત મારી પ્રત્યુતર નહીં ઉલટજવાબ બનશે.
અનુભવ અમારો ભીતરી નાદ બનશે હવે.

તમારા ભુતકાળ નાં હલેશા કારગર બનાવજો..
સલાહકાર નહીં સાથીદાર એ બનશે હવે.

સંભારણા સુખી જીંદગી નાં તાંતણા જેવા છે..
એકલતા ના હાશકારે તુટી ગયા છે હવે.

એકલપણા કરતાં અટુલાપણુ સ્વાદે અલગ છે...
એક ઉછેર કરે ને બીજું માત્ર ખોદે રાખે છે.

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લખતાં તો લખાય ગયું કહાની નું એક પાનું..
નોતી જાણ કે અલ્પવિરામ ઓછા આવશે.

ગયેલ સમય નું પાનું ઉથલાય તો ગયું હતું...
નવાં પાને હવે જગ્યા કેમ ઓછી આવતી હશે.

સમર્પણ ને પણ હાશીયા માં ટેકાવી રાખીશ હવે..
ખબર છે ખુદનાં સમર્થન ની જરૂર પડશે હવે.

આજ નહીં તો કાલ... હૃદય ને પણ હોઠ આવશે...
ધબકારા ને બદલે પ્રત્યુતર આપી દેશે હવે.

નમણાય અમારી નબળાઈ મા ગણાય છે હવે..
ફુલ ની હારે કાંટા પણ રાખશું હાથે હવે.

પારકાં સમંદર કરતા પોતીકું ખાબોચિયું સારું..
લાશ બની કિનારે સચવાય જાશું હવે.

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भूभंकोदंकटाक्षससरसंधीनी.....
अपने तीखे नैनो से कटाक्ष रूपी बाणों का प्रहार करने वाली...
राधा जी का एक नाम====

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હું નથી પૂછતો કે સમય કે હજી,
તું ગુજારીશ દિલ પર સિતમ કેટલા.

એટલું પ્રેમથી માત્ર કહી દે મને
જોઈએ ત્યારે આખર જખમ કેટલા.

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प्यार में सोच नहीं होती , बदला नहीं होता ।
सामनेवाला तुम्हें भी प्यार दे जरूरी नहीं होता।।

टूटते हुए पत्ते भी साथियों को शोर मचाते है।
लेकिन हर पत्ता गिरे तो पेड़ हरा नहीं रहता ।।

हर पल सोचते रहेंगे कि मेरा भी वक्त आएगा ।
दरअसल कोई पल,अगले पल का मोहताज नहीं होता ।।

परिवर्तन ही कृष्णा का आखिरी संदेश है।
साहिल अकसर बदबू का जिम्मेदार नहीं होता ।।

लोगो को समय का साथ चलना पड़ता हैं।
आवारा पंछी का कोई ठिकाना नही होता ।।

लाख बदलो अपने आप को दूसरों के लिए ।
कश्तियां बदलने से समंदर मीठा नहीं होता ।।

क्यों लटकाए तलवारे अपनी ख्वाहिशों पे हम।
दिल तो धड़कने के लिए हमें नहीं पूछता ।।

छोड़कर,तोड़कर भागना लाज़िम है , मगर
उंगलियों का फैलाव , हथेली से बड़ा नहीं होता।।

जो मिले , जितना मिले , भरोसा कायम रखो ।
हर दुआ के नसीब में काबा का जहां नहीं होता।।

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થઈ‌ છે કંઈક ધુળ એઠી આજે...
રંગાયા છે કંઈક મુળ આજે.

પાલવ સાચવ્યો જેણે પ્રિતમ કાજે...
રંગાણી એવી કંઈક રાધાઓ આજે.

ચડયો કોઈ રંગ આજ, તો પડદા તુટ્યા...
હથેળી સિવાય પણ રેખાઓ સંધાય આજે.

અંગ નિચોવાણા અને હૈયા તરબતર થયા...
મનનાં કંઈ તાંતણા કંપાણા આજે.

જાણ્યું નથી કોઇ ટાણા રંગાઈ જવાના..
તોય અર્જુન કેટલાય ગીતા મા સલવાણા આજે.

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आयना अगर साफ ना हो देखना खुद को
ज़हन साफ़ अगर न हो तो कहना मुझे

गैरो मेे भी ज़बान साफ रहेगी तेरी खातिर
अपने जब मुंह फ़िराले तो कहना मुझे

यादों के साए तुझे आग़ोश में लेते रहेंगे
सपनो के गलियारे में खो जाओ तो कहना मुझे

पत्थरों से मारकर भी लोग मुस्कुराएंगे
फूल मारकर कोई रोए तो कहना मुझे

पेड़ तूफान को सह नहीं पाएंगे
अगर तिनका बिखर जाए तो कहना मुझे

जिंदगी में अभी तक थका भी नहीं
अगर तू थक जाए तो कहना मुझे

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तुम करो तो जज़्बात, हम करे तो खयालात
हम मुड़े तो राहगीर, आप खोए तो सवालात

मुस्कुराहट की कोई क़ीमत नहीं हे सुना था
आप लम्हों का भी अब रखते हो हिसाब

लकीरें भी हम मरोड़ देते गर आप थम जाते
रास्ता छोड़कर अंधेरे गलियारों में मुड़े आप

खुदा भी एक गुनाह की सजा दोहराता नहीं
अलग होते होते अब अकेले पड़ गए आप

संभाले बहुत बाग बगीचे हमने आपके लिए
लेकिन फूलों में से कांटे ही चुनते हैं आप

चलना दस्तूर हे और हम तो नसीब के मारे हैं
हाथ छुटने को रिश्तों की मौत समझते हो आप

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