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अब एहसान भी एहसास पर भारी हो गए है, लोग कहते हे हम आजकल अनाड़ी हो गए है। कुछ तो बात रही होगी जो कभी बन नहीं सकी, होश तब आया जबसे हम शराबी हो गए है। रातों के ख्वाब मुक्कमल हो जरूरी नहीं अक्सर , हम भी पन्ने हरे रखने को स्याही उंडेल बैठे है। आंखों के दरिया में कश्ती डाली बिना पतवार , हम भी अब से सांस रोकना सीख चुके है। तू गर खुदा हो तेरा , तो हम भी अव्वल काफिर है, दिल में काबा और ज़हन में गीता रखे हुए है। मायूष हो या न हो अपनी ज़ुल्मियत से अपनी तुम , हम भी गिरेबान से तेरे सा शक्श मिटा चुके है। आशियाने में फिर ना बस जाए और रोशन कर दे कोई, इसलिए अब से हम हर दीवार हटाकर बैठे है।
हमने माना के तक़फ़्फ़ुल ना करोगे लेकिन खाक़ हो जाएंगे हम तुमको खबर होने तक
तड़प तड़प के गुजारो शब ए फिराक अपनी ये नाज ए हुस्न है, इसे जफ़ा ना कहो पड़ा है काम उसी खुद परस्त काफिर से जो कहता है किसी और को ख़ुदा ना कहो
નામ લખું જો તમારું , એક શેર લોહી વધી જાય આંગળી ના ટેરવે જાણે કોઈ કંકુ ચોંટાડી જાય. હતો પાલવ હજુ પણ હવા ના તોરણે ઝુલતો, જરાક હાથવેંતમાં સમયનું હલેશુ મારતો જાય. આંખ ના ખુણે કેટલાય સિંદૂર ની લાલાશ રેલાણી, એક ઈશારે તારા કેટલાય યુદ્ધો ખેલાય જાય. અટકતી અને ખટકતી પગરવ ની ડણક તમારી, પાછી વળતા કોઈક ગભરું નો માંહ્યલો ખેંચી જાય. સઘળી સોળ કળાઓ જાણે ઈશ્વરત્વ પામી હોય, કુદરત પણ હવે નવસર્જન માં થાપ ખાઈ જાય.
तुम कहते हो कि तुम मजबूर हो, हम तो शिकवा भी नहीं कर सकते । खाली पन्ना जो रह गया बाकी हमसे , उसमें आहे के सिवा कुछ लिख नहीं सकते। नाज करले आज अपने जुगनू पर सनम, हम तो खिड़की से चांद को निहार नहीं सकते । बिखर जाएंगे बनके सितारे आसमान में, जमीन पर किनारे बनकर नहीं रह सकते । आश जो हमेशा कल का भरोसा देती हैं, उस पर आज को नहीं टाल नहीं सकते ।
कल तुझको देखा ....बस सिर्फ तुझे ही देखा। हमने जमीर अपना देखा , वहां सबको देखा। कांटो से वफादारी सीख ली, हमने टूट कर तब अपनी आग़ोश में किसी को मुस्कुराते देखा । उस कदर कस के रखा है अपनी बाहों में तुझको , जिस्म का भी हमने आज किनारा देखा
रिश्तों में बंधन ही हो ऐसा जरूरी नहीं , पानी भी बहने को किनारा तोड़ देता हैं। कोई रस्सी को ही वजूद माने जरूरी नहीं, खोटा सिक्का भी गिरे तो आवाज करता है। मकाम और मकान एक हो जरूरी नहीं , खानाबदोश भी जिंदगी जी लेता है। नींद से उठो तो सपने याद रखना जरूरी नहीं, अपनो का इल्जाम वहां दस्तक दे सकता हैं। कोई गीता , कोई कुरान समझा दे जरूरी नहीं, अपना अर्जुन अपना ही श्याम हो सकता हैं। हाथ उठे तो बंदगी ही हो ज़रूरी नहीं, कोई खुदा से फ़रियाद भी कर सकता है।
ठोकर भी खाना है चलते भी जाना है वादा किया तो वो किसको निभाना है यहां सबको दाव आजमाने है सभी एक दूजे से ज्यादा सयाने हैं कितने अजीब रिश्ते है यहां पे
अब की बार बात करले बैठ कर कूद जा भंवर में,खुदी को खोकर मत डर , भरोसा कर अपनी लेखनी पर तो कहानी मोड़ दे खुद को खोलकर कितने भी किनारों पर रेत के घर बना ले समय की लहर चूर कर देगी उसे तोड़कर संभलने का आखिरी मौका दे दे खुद को टुकड़े टुकड़े होजा अहम का आइना तोड़कर कल था और कल भी होगा ,मत चुक पल को तू भी खिलेगा, बाहर आजा ज़मी फाड़कर
जो होना हे और जो करने की ठानी है आपने काल इसको समय की तराजू में तोलता है। टोकता नहीं ,रोकता नहीं वो चारागर आपको बस कहता है खुद के भगवान तो आप ही हो। कोई समझता है और कोई समझाता हे आपको बगल वाला सिर्फ चुनिंदा बनाता हैं आपको । दो होंठ,दो हाथ,दो आंख का जमाना हे दोस्त दिल तो एक ही है,यही जान ना है आपको। कोशिश मत करो उन चार लोगों को मनाने की जो आखिर में सिर्फ दफनाने आएंगे आपको।
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