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"खुद मे जवाब " "पहले न कोई जानता था , न ही कोई पहचानता था , जैसे इस पूरी दुनिया मे मेरा कोई नाम ही नही था । फिर मैने खुद को ढूंढा, और खुद से ही पूछा- क्या मुझे बनना पडेगा दुनिया का परछावा , ताकि मै कर पाऊँ अपने हुनर का दिखावा ?" फिर मेरे अंदर से एक आवाज आई कि दुनिया नही पंसद करती परछाई, अगर तुम्हे करना है कुछ लाजवाब तो तुम्हारे अंदर ही है हर मुश्किल के जवाब । written by Neeti
एक अकेला तारा रात मे चमक रहा , एक अकेला तारा दमक रहा । सबसे दूर, मगर अलग है उसका नूर फिर भी है उसमे अनोखा गरूर । ना आस करे ,ना किसी को साथ लाने का प्रयास करे, चाँद की छाया मे भी वो मुस्कराए, अपनी रोशनी से खुद को सज़ाए । "है एक नन्हा सितारा,फिर भी नही चाहता कोई पुकारे इसे बेचारा " दिन- रात हूं मै सोचती यारा, क्यो है वो इतना अकेला तारा ? क्या उसको भी है कुछ बडा पाने कि आस ? इसलिए नही रखता वो किसी को अपने आस- पास ? खोज रहा है अपने अंदर की आग , और बना रहा है नए माग॔ ? या बस हमे राह दिखाने आया चुपचाप अपना फर्ज निभाया । हम भी बने वैसे सितारे जो लगाए आत्मविश्वास के नारे । जग मे रोशनी और हिम्मत बाॅटे चलो बन जाए हम "एक अकेला तारा " जो देगा सबको सहारा । written by. Neeti
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